आजकल के युवा अपनी जवानी को यूं ही व्यर्थ गवां रहे हैं , या कहें कि, अगर वे जो कुछ भी कह रहे हैं और संयोगवश वह सच होता है तो यह एक तरह से हास्यास्पद ही होता है। युवावस्था केवल मनुष्य के जीवन काल का एक समय सीमा ही नहीं है; बल्कि यह मन: स्थिति की एक अवस्था भी है। मैंने अपने 60 वें जन्मदिन के बाद अपनी जिंदगी के दिनों की गिनती करनी बंद कर दी है। मैं अभी भी अपने आप को युवा समझता हूं - और मैं सदैव इस तरह से अपने आपको बनाये रखने का इरादा रखता हूं।
आप बुढ़ापे में भी एक युवा दृष्टिकोण और मनोभाव रख सकते हैं, या जवानी में पुरातनपंथी विचारों को अपना सकते हैं। यह आपका चुनाव होता है।
क्या आप दिल और दिमाग से हमेशा युवा बने रहना चाहते हैं?
तो यहां पर आपकी सहायता के लिए कुछ विचार दिए जा रहे हैं, जिसे अपनाकर आप सदैव नौजवान बने रह सकते हैं :
1. केवल हंसमुख, सकारात्मक विचार वाले दोस्तों से ही संबंध रखें।
आप अपने दोस्तों को चुन सकते हैं, और मैं उन लोगों को चुनना पसंद करता हूं जो सकारात्मक हैं और जो मुझे हमेशा अच्छा करने की चुनौती देते हैं। जो मुझे अच्छा महसूस कराते हैं। जो मुझे नीचे की ओर, पीछे की ओर नहीं खींचते या दुनियां के बारे में ग़ुस्सा नहीं दिलाते। नकारात्मक लोग हर अवसर में कठिनाई देखते हैं, जबकि सकारात्मक लोग हर कठिनाई में अवसर देखते हैं।
2. सीखते रहो।
मुझे लगता है कि हेनरी फोर्ड ने इसे सबसे अच्छे ढंग से परिभाषित किया है उनका कहना है कि, "कोई भी जब सीखना बंद कर देता है तो वह बूढ़ा हो जाता है, चाहे वह 20 वर्ष का हो या 80 वर्ष का। जो कोई भी सीखता रहता है वह सदा युवा बना रहता है। जीवन में सबसे बड़ी बात, सबसे बड़ी उपलब्धि अपने दिमाग को सदा युवा बनाये रखना है।” मेरा हमेशा कहना है कि आपको पूरी जिंदगी स्कूल में रहना चाहिए - कभी भी सीखना बंद नहीं करना चाहिए।
3. साधारण और छोटी - छोटी चीजों का आनंद लें।
उन चीजों का आनंद लेने के लिए समय निकालना न भूलें जिन्हें आप करना पसंद करते हैं - टहलने के लिए जायें या पसंदीदा फिल्मों को देखें, एक अच्छी किताब पढ़ें, अपनी पसंदीदा टीवी शो देखें, अपने परिवार के साथ समय बिताएं। आपको जीवन में एक अच्छा संतुलन बनाये रखना होगा।
4. हमेशा मुस्कुराते रहें, हंसते रहें।
अपने दिन की शुरुआत एक अच्छी हंसी या कम से कम एक बड़ी मुस्कान के साथ करें, यह आपके स्वास्थ्य के लिए उतना ही फायदेमंद है जितना कि आपके मूड के लिए। वैज्ञानिक अध्ययनों ने निष्कर्ष निकाला है कि हँसी से हृदय, फेफड़े, पेट और अन्य अंगों को लाभ होता है। यह तनाव को कम करता है, दृष्टिकोण को बदलता है और शरीर के प्राकृतिक दर्द निवारक को बढ़ाता है। साथ ही इसका कोई हानिकारक दुष्प्रभाव नहीं है।
5. सुडौल बने रहें, स्वस्थ रहें।
व्यायाम आपके शरीर के साथ-साथ आपके दिमाग के लिए भी अच्छा है। अध्ययनों से पता चलता है कि स्वस्थ कर्मचारियों की काम पर उपस्थिति अच्छी रहती है , उनका प्रदर्शन बेहतर होता है और मनोबल हमेशा ऊंचा बना रहता है। मैंने हमेशा महसूस किया है कि एक स्वस्थ कर्मचारियों का समूह, हमेशा उत्पादक होता है।
मानव शरीर एकमात्र ऐसी मशीन है जो तेजी से खराब हो जाती है यदि इसका उपयोग सही तरीके से नहीं किया जाता है। अपने स्वास्थ्य को संवारें, बनाये रखें। यदि आप स्वस्थ हैं, तो वह करें जो आप इसे संरक्षित कर सकते हैं, सेहत को बनाये रख सकते हैं। यदि आपका स्वास्थ्य अस्थिर है, ख़राब है तो इसे सुधारें। देखें कि आप इसमें क्या सुधार कर सकते हैं, यदि यह आपके सामर्थ्य से बाहर की चीज़ है तो विशेषज्ञों की सलाह लें।
6. खुश रहो।
अपनी खुशियों के लिए आप खुद जिम्मेदार होते हैं। हम कभी-कभी खुद को समझाते हैं कि बेहतर नौकरी पाने के बाद जीवन बेहतर होगा, अधिक पैसा कमा लेने के बाद, शादी कर लेने के बाद, बच्चे पैदा होने के बाद , बच्चों की नौकरी लगने के बाद या फिर बड़ा घर खरीदने के बाद हम ख़ुशहाल हो जायेंगे। लेकिन फिर भी इनमें से किसी एक की, या सब कुछ प्राप्त कर लेने से भी हमारी जिंदगी में कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ता है। खुशी पाने के लिए कोई जादुई रहस्य नहीं है, बल्कि यह आपके मस्तिष्क में, मन में शुरू होता है।
7. अनावश्यक तनाव न लें।
आप तनाव से बच नहीं सकते, लेकिन आप अनावश्यक चिंता पैदा करने से बच सकते हैं। बस आपको एक तनाव निवारक उपाय खोजने की आवश्यकता है। मेरा मतलब है- किसी पसंदीदा खेल में भाग लेना, गोल्फ खेलना, तैराकी या टहलना।
यदि तनाव अभी दूर नहीं हुआ है, तो आपको अपने जीवन में कुछ बदलाव करने होंगे जो अल्पावधि में अधिक तनावपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन लंबे समय में स्वास्थ्यवर्धक होते हैं, लाभदायक होते हैं।
8. अपराध बोध महसूस न करें।
भूल को सही साबित करने की बजाय उसे स्वीकार करो। औचित्य सिद्ध करना बहुत सतही है क्योंकि यह अपराधबोध को नहीं हटाता। बल्कि वह आपको अपराध का और भी अधिक बोध कराता है।
अतीत की गलतियों के बारे में सोचते रहने के बजाय बस जाग जाओ और उसे स्वीकार करो। आगे बढ़ जाओ और दूसरों पर या स्वयं पर दोषारोपण में मत फंसो। दोष देना ठीक वैसे ही है जैसे कि आप कूड़ादान लेकर बैठे हो और किसी पर फेंकने को तैयार हो। आत्मज्ञान से भय, क्रोध, अपराधबोध, अवसाद जैसी सभी नकारात्मक भावनाएं गायब हो जाती हैं।
9. अपने आप को युवा और ऊर्जावान व्यक्ति के रूप में कल्पना करें, महसूस करें।
मैंने वर्षों पहले सीखा था कि दृश्यावलोकन (विज़ुअलाइज़ेशन) व्यक्तिगत लक्ष्यों को प्राप्त करने का सबसे शक्तिशाली साधन है। दूरदर्शी (विज़नरीज़) इसे प्राप्त करने के लिए एक योजना का निर्धारण करके और सकारात्मक परिणामों की अपेक्षा करके जो चाहें वह प्राप्त कर सकते हैं।
दृश्यावलोकन (विज़ुअलाइज़ेशन) नियोजन नहीं करता है, और यह बाधाओं का अनुमान नहीं लगाता है, लेकिन यह आपको एक वास्तविक विचार देता है कि क्या संभव है, यदि आप इसे बहुत बुरी तरह से चाहते हैं। दृष्टिकोण इससे अधिक कुछ नहीं है कि आप क्या सोचते हैं, आप कैसे सोचते हैं। यदि आप इसकी कल्पना कर सकते हैं, तो आप इसे कर सकते हैं।

