सोमवार, 22 फ़रवरी 2021

अपनी दौड़ने की गति कैसे बढ़ायें ?/ How to increase your running speed?



आपके दौड़ने की गति को बढ़ाने के लिए आपको नियमित प्रशिक्षण,  लक्ष्य पर फोकस देने और दृढ़ संकल्प की जरूरत होती है। अगर आप तेज गति से दौड़ना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको अपनी शुरुआती गति को जानना चाहिए, उसके बाद अपनी क्षमता को ध्यान में रखते हुए एक लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए और फिर उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपनी पूरी कोशिश करनी चाहिए। 

इस लेख में आज हम आपको कुछ तरीके बताने वाले हैं, जिसे अपनाकर आप अपनी दौड़ने की गति को बढ़ा सकते हैं। 

1 - अपनी मौजूदा गति को जानें : अपनी गति को बढ़ाने के लिए प्रयास की शुरुआत करने से पहले, यह जानना बहुत जरूरी है कि आपकी मौजूदा गति कितनी है, आप अभी कितनी तेज़ी से दौड़ सकते हैं, जिससे आप अपने दौड़ने की गति के लिए लक्ष्य निर्धारित कर सकें। आपको अपनी क्षमता पता होने से ही आप अपने अंदर होने वाले सुधारों पर सही ढंग से गौर कर पायेंगें। इसके लिए आप एक स्टॉपवॉच लें या फिर मोबाईल में ही कोई एप्स डाउन लोड कर लें और फिर उसका इस्तेमाल करके पता करें कि आपको एक मील/ किलोमीटर दौड़ने में कितना समय लगता है। एक बार जब आपको सही समय का पता चल जायेगा तो फिर आप उसे सुधारने के लिए प्रयास कर सकते हैं, जैसे मान लीजिये आप एक किलोमीटर दूरी तय करने में 8 मिनट या 16 मिनट लेते हैं तो आप उसे सुधारने की दिशा में काम कर सकते हैं। आजकल मोबाईल में बहुत से ऐसे एप्स हैं जो आपको गति ,आपके स्टेप्स और समय की गिनती करते हैं, फिर भी यदि आपके पास ऐसे एप्स नहीं हों तो आप नीचे दी गयी विधि से अपने उद्येश्य को हासिल कर सकते हैं। 
 
ऐसा करने के लिए आप ट्रैक का उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि ट्रैक का प्रत्येक 400 मीटर का लैप एक मील के एक चौथाई भाग के बराबर होता है, इसका अर्थ है 400 मीटर के चार लैप एक मील के बराबर हो जाते हैं।
आप अगर किसी ट्रैक का उपयोग नहीं कर सकते हैं, तो एक एकदम सीधी, ट्रैफिक से फ्री रोड पर पुरे एक मील की दूरी को मापें, और फिर उसका प्रयोग आपकी दौड़ने की स्पीड को नापने में करें।
आप एक मिनट में कितने लंबे कदम ले सकते हैं, ये भी पता कर लें। ऐसा करने के लिए खुद को पूरा एक मिनट देने के लिए घड़ी का इस्तेमाल कर सकते हैं, फिर जितनी बार भी आपका दाँया पैर जमीन पर लगे, उस नंबर को नोट करते जाएँ। फिर इसके रिजल्ट में आप के पास जो भी नंबर आता है, आपको अपनी दौड़ने की गति को बढ़ाकर उस नंबर से दोगुना करने की कोशिश करनी चाहिए।


2 - अभ्यास के लिए एक अच्छी लोकेशन की तलाश करें:


लगभग 1/4 मील (400 मीटर) के एक लोकल ट्रैक को या फिर एक प्लेन जगह की तलाश करें। अगर आप अपनी गति बढ़ाना चाहते हैं, तो आपके लिए ट्रैक एक आदर्श जगह है, क्योंकि सभी ट्रैक की एक स्टैंडर्ड लंबाई 400 मीटर होती है। जिससे आप आसानी से आपकी गति में आये सुधार को माप सकते हैं। 
लोकल स्कूल भी अक्सर अपने ट्रैक को पब्लिक के लिए खोल देते हैं, और अगर आप कहीं और ट्रैक का उपयोग नहीं कर सकते हैं, तो ये आपके लिए काफी सुविधाजनक हो सकता है।
आप अगर फिर भी आसानी से ट्रैक का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं, तो आप जिम में एक ट्रेडमिल पर या किसी कम से कम ट्रैफिक वाली रोड पर दौड़कर अपनी गति में सुधार कर सकते हैं। 
ऐसी रोड का इस्तेमाल कभी ना करें, जो घुमावदार या ऊँची-नीची हो, क्योंकि ये आपके दौड़ने की गति को प्रभावित कर सकते हैं। 

3 - एक निश्चित समय सारिणी बनायें : अपनी गति को बढ़ाने के लिए बहुत ही ज्यादा अनुशासित होने और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित होने की जरूरत होती है, इसलिए जरूरी है कि आप अपनी सामर्थ्य को ध्यान में रखते हुए एक चुनौतीपूर्ण लक्ष्य निर्धारित करें और उसे हासिल करने के लिए एक निश्चित समय - सारिणी बनायें। आप इस समय सारिणी का अनुशासित तरीके से समर्पित भाव से पालन करें। यदि आपने अपने समय - सारिणी अभ्यास करने के लिए खुद को तैयार करेंगे, तो इससे आप खुद को एक दिशा में बनाये रखेंगे और प्रेरित भी रहेंगे।

4  - प्रशिक्षण के लिए नियम तैयार करें : हफ्ते में 5 दिन दौड़ें और दो दिन आराम करें। आपको हर हफ्ते में अपनी दूरी को बढ़ाते रहना चाहिए। धीरे - धीरे दूरी बढ़ाते रहने से आपकी स्टैमिना और सहनशक्ति बढ़ती है। दौड़ने के लिए आप अपनी दिनचर्या में एक उपयुक्त समय का चुनाव करें जो आपके के लिए सुविधाजनक हो। और फिर हर दिन उसी समय पर दौड़ें।
अलग-अलग  दूरी और समय को अपने प्रशिक्षण में शामिल करें। एक दिन लंबी दूरी तक दौड़ें और उसके अगले दिन कुछ कमदूरी तय करें। हफ्ते में कम से कम एक दिन जरा कम गति से दौड़ें। तेज़ गति से दौड़ने की तैयारी करने के साथ ही इस तरह से गति और दूरी में बदलाव करते रहने से आपका शरीर स्वस्थ बना रहता है और आपकी क्षमता बढ़ती है। 
हर एक दौड़ से कुछ सीखने का लक्ष्य रखें। आपकी दौड़ को मापने के लिए, आपके पास में एक फिटनेस बैंड या फिर एक रेगुलर टाइमर जरुर रखें। अब आपके द्वारा दौड़ने में इस हफ्ते लिए गये समय की तुलना पिछले हफ्ते से करें और देखें कि आपकी गति बढ़ी है या नहीं।


5 - अपने लिए एक लक्ष्य निर्धारित करें: आपकी दौड़ने की गति बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण करते समय एक लक्ष्य निर्धारित करना आवश्यक है। अगर आप एक लक्ष्य निर्धारित कर लेते हैं तो यह आपको हमेशा प्रेरित करता है, और साथ ही आप इसे हासिल करने के लिए और अधिक मेहनत करते हैं। ध्यान रखें आप जो भी लक्ष्य चुनें, वह चुनौतीपूर्ण तो हो ही साथ ही यथार्थ हो, हासिल करने योग्य हो। जैसे 8 मिनट में एक मील दौड़ने का लक्ष्य निर्धारित कर सकते हैं। आप एक मिनट में उठाये गए कदमों की संख्या, या अपने ताल में वृद्धि करने जैसे लक्ष्यों को निर्धारित कर सकते हैं। दुनिया में सबसे तेज़ दौड़ने वाले लोगों की औसत ताल लगभग 180 कदम प्रति मिनट है। आप अपने ताल को पता करने के लिए, एक मिनट में कितनी बार दाहिने दाहिने पैर को जमीन पर रखते हैं इसकी गिनती करें और फिर इसे हर दिन बढ़ाने के लिए लक्ष्य बना सकते हैं। 


6 - दौड़ने के लिए आवश्यक सामान रखें: दौड़ने का सही सामान - जूते, कपड़े आदि - हालाँकि ये आपकी दौड़ने की स्पीड को बढ़ाने के लिए जरूरी नहीं है, लेकिन इससे आप निश्चित रूप से आप कम्फर्टेबल महसूस करेंगे। मौसम के अनुसार हल्के, और आरामदायक कपड़े पहनें। आप एक हाई-टेक घड़ी भी खरीद सकते हैं, जिसका इस्तेमाल करके आप एकदम सटीक ढ़ंग से अपनी दौड़ने के समय को माप सकते हैं, और साथ ही आप उससे अपनी दूरी, स्पीड, बर्न हुई कैलोरी और हार्ट रेट (हृदय गति) को भी माप सकते हैं ।


7 - किसी साथी को चुनें :



अपने किसी साथी को शामिल करने से आपके अंदर आत्मविश्वास पैदा होगा और आपके प्रेरणा के स्तर में भी बढ़ोतरी होगी। साथी की वजह से आप आलस्य नहीं करेंगे। आपका दोस्त आप के साथ दौड़ भी सकता है या फिर आपका ट्रेनर भी हो सकता है।

8 - म्यूजिक सुनें:  एक अध्ययन के अनुसार, जो लोग एक्सरसाइज़ करते हुए म्यूजिक सुनते हैं उनकी कार्यक्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है, खासकर तब, जब वे उत्साहवर्धक संगीत सुनते हैं। आप ऐसे गानों को खोजें जो आपकी दौड़ने की गति से मेल खाते हों। यह गाने सुनते हुए, आपका शरीर स्वाभाविक रूप से संगीत के साथ ताल मिलाएगा और आपके जाने बिना आपकी गति में वृद्धि होगी। 


9 - दौड़ने का लेखा - जोखा रखें : आपके दौड़ का लेखा - जोखा रखना आपकी अपनी प्रगति का पता लगाने का एक शानदार तरीका है। इसे देखकर आप समझ पाएंगे कि कौन सी परिस्थिति आपकी दौड़ने की गति को प्रभावित करती है। इससे आपको अतिरिक्त प्रेरणा मिलेगी। आपकी दौड़ का लेखा - जोखा रखने के लिए, आपका समय, आपकी औसत गति, आपके द्वारा चुना गया रास्ता, मौसम की स्थिति, दौड़ते समय होने वाली तकलीफ आदि को लिखें। इससे आप अपने दौड़ने के कार्यक्रम में यथोचित बदलाव कर सकते हैं। 


10 - कुछ क्रॉस-ट्रेनिंग शामिल करें :



 अपनी कार्यक्षमता और सहनशीलता बढ़ाने के लिए कुछ अन्य वर्क आउट अपने कार्यक्रम में शामिल करें। जैसे - ट्रेडमिल पर दौड़ें, रस्सी कूद करें। इससे आपकी सहनशीलता में बढ़ोत्तरी हो सकती है। जो आपको दौड़ते वक्त आपकी गति को बढ़ाने में मददगार होगी। 30 मिनट तक रस्सी कूदना आपके शरीर को संतुलित करने में और पैरों की गति को बढ़ाने में मदद करेगा। कूदने से आपके शरीर को झटकों को सहने की आदत बनती है। योग करें। योग से आपके अंदर लचीलापन बढ़ता है। योग करने से आपकी मांसपेशियों में तनाव से राहत मिलती है।   


11 - अपनी मुद्राओं में सुधार करें: दौड़ते वक्त अच्छी मुद्रा के इस्तेमाल से आपके शरीर को सही ढ़ंग से काम करने की पुष्टि होगी और ये आपके दौड़ने की स्पीड को बढ़ाने में मदद करेगा, और इसके साथ-साथ ही चोटों को रोकने में मदद करते हुए, यह सुनिश्चित करेगा कि आपका शरीर जितना हो सके उतनी कुशलता से काम कर सके। दौड़ते वक्त आपको नॉर्मल और ढीलापन महसूस होना चाहिए - आपको तनाव या सख़्त महसूस नहीं होना चाहिए।
दौड़ते समय अपने सिर को सीधा रखें और सामने देखें। अपनी दृष्टि को एकदम सामने रखने से, आपको अपनी गर्दन और कमर को एक सीध में रखने में मदद होगी। साथ ही आप अगर दौड़ते वक्त आपके जूतों की बजाय सामने देखेंगे, तो आप काफी तेज़ी से दौड़ पायेंगे। आपकी बाँहों को 90-डिग्री के एंगल में घुमाएँ। मुट्ठी को ना बाँधें या कंधों को ना उठाएँ; आपकी बाँहों को एकदम शांत रखें और आपको आगे बढ़ाने के लिए हिलाएँ। आपको यदि आपके ऊपरी बदन में कुछ तनाव जैसा महसूस होता है, तो बाँहों को झटका दें।
आपके पैरों के बीच के भाग को नीचे रखें और अंगूठे को दबाएँ। आपके पैरों के बीच के भाग को जोर से नीचे रखें और आपके पैर के पंजे के बल दौड़ें । एकदम हल्के और लचीले कदमों पर ध्यान दें और हर एक कदम को सीधे बॉडी के नीचे ही रखें।
आपके घुटनों को धीरे-धीरे हिलाएँ। आपके पैरों के जमीन पर पड़ते समय आपके घुटनों को हल्का सा मोड़ें, ताकि वे खुद ही थोड़ा झुक जाएँ। आपको आपकी स्पीड को बढ़ाने के लिए, आपके घुटनों को ज्यादा टाइट नहीं करना है। 


12 - फ़ार्टलेक्स (Fartleks) इस्तेमाल करने की कोशिश करें: फ़ार्टलेक का अर्थ है अपनी दौड़ने की रफ्तार को थोड़े-थोड़े अंतरालों में बदलते रहना। फ़ार्टलेक्स में आप पहले कुछ मिनटों के लिए जॉगिंग की रफ्तार से दौड़ सकते हैं और फिर अपनी वास्तविक गति पर दौड़ना जारी रख सकते हैं। फ़ार्टलेक्स ट्रेनिंग, एक बेहद फ्लेक्सिबल तरीका है। जॉगिंग और तेज़ी से दौड़ने के बीच कितना अनुपात होना चाहिए, यह आप अपनी क्षमतानुसार खुद तय कर सकते हैं। सर्वोत्तम परिणामों के लिए, आपको फ़ार्टलेक प्रशिक्षण को 40-60 के अनुपात में रखना चाहिए। ज्यादातर धावक इस फ़ार्टलेक ट्रेनिंग को करने के लिए किसी एकदम सटीक तरीके का या समय का इस्तेमाल नहीं करते हैं। बहुत से धावक किसी निश्चित स्थान तक अपनी पूरी क्षमता के साथ तेजी से दौड़ते हैं। दौड़ने की गति और दूरी पूरी तरह से आपकी शारीरिक क्षमता पर निर्भर करता है।
एक फ़ार्टलेक वर्कआउट करने से पहले, कम से कम 5 मिनट तक एक औसत गति से दौड़ कर वार्मअप करना जरूरी है। इसके अलावा आप आपके शरीर को आराम देने के लिए कम से कम 5 मिनट तक आराम से चलें। इससे आपकी मांसपेशियों को आराम मिलता है और अगले दिन आप अपनी पूरी ऊर्जा और उत्साह के साथ दौड़ सकते हैं। 


13 - प्रभावी ढंग से सांस लेना सीखें: अपनी सांस लेने की क्षमता का अच्छे ढंग से प्रयोग करने से आपकी अपनी दौड़ने की गति तो बढ़ती ही है, साथ ही इससे आपके स्टैमिना भी बढ़ती है। गहरी सांस लेने से आपके खून में अधिक ऑक्सीजन पहुंचती है, जो मांसपेशियों को अधिक ऊर्जा देता है।
आपको अपने मुंह और नाक दोनों से सांस लेनी और छोड़नी होगी, और अपनी छाती के बजाय अपने पेट में सांस लेने का उद्देश्य रखना होगा।
पेट से सांस लेने के लिए गहरी सांस लेनी होती है, और, यदि यह सही ढंग से किया जाए, तो इसमें सांस अंदर लेने पर आपका पेट एक गुब्बारे की तरह फ़ूलना चाहिए, और सांस बाहर छोड़ते वक्त उससे सारी हवा बाहर निकल जानी चाहिए। ऐसे धावक जिन्हें ज्यादा अनुभव नहीं होता वे छाती से सांस लेने लगते हैं। दौड़ते वक्त, अपनी सांसों और कदमों के बीच तालमेल बिठाने की कोशिश करें।

14 - दौड़ने से पहले स्ट्रेचनिंग करें: 



दौड़ने से पहले और दौड़ने के बाद स्ट्रेचनिंग जरुर करें। इससे आपके शरीर में लचीलापन बना रहेगा और प्रदर्शन में सुधार होगा। दौड़ते वक्त चोटों का जोखिम कम रहता है। ट्रेडिशनल स्टेटिक स्ट्रेच (खिंचाव करना और स्थिर रहना) की तुलना में, डायनामिक स्ट्रेच (जिसमें गतिविधि शामिल होती है) धावकों के लिए अधिक फायदेमंद साबित होता है। 

15 - खूब आराम करें:



अच्छा भोजन करना, हाइड्रेटेड रहना और प्रभावी ढंग से प्रशिक्षण करने के अलावा, आपके शरीर को उपयुक्त आराम और रिकवरी के लिए समय मिलना चाहिए। आपको यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि शरीर अच्छी तरह से प्रदर्शन कर सके। ज़्यादा मेहनत करने से शरीर को थकान और चोट लग सकती है, जिससे आपकी दौड़ प्रभावित हो सकती है। इससे बचने के लिए जरुरी है कि आप सप्ताह में एक या दो दिन आराम करें, बिल्कुल भी ना दौड़ें। यदि आप चाहें, तो आराम के दिनों में योग या मेडिटेशन कर सकते हैं । आपको अच्छी नींद भी लेने की जरुरत है। 



चेतावनी


शुरुआत में अपने शरीर पर अपनी क्षमता से अधिक ज़ोर न डालें, याद रखें कि हर व्यक्ति की क्षमता अलग होती है। आपका जीवन किसी भी दौड़ से ज़्यादा महत्वपूर्ण है। दौड़ के दौरान हाइड्रेट रहने के लिए, एक साथ अधिक मात्रा में पानी न पिएं। थोड़ी - थोड़ी, छोटे - छोटे घूंट में पानी पियें। यदि आपको कोई मेडिकल प्रॉब्लम हो, तो दौड़ने से पहले  आपको अपने डॉक्टर से सलाह जरुर लेनी चाहिए।




शनिवार, 6 फ़रवरी 2021

अगर आप भी जीतना चाहतें है मैराथन की दौड़ तो अपनाएं ये युक्तियाँ। / If you also want to win the marathon, then follow these tips


अगर आप भी जीतना चाहतें है मैराथन की दौड़ तो अपनाएं ये युक्तियाँ 
नियमितरूप से अभ्यास करें : नियमित रूप से दौड़ना व्यक्ति को चुस्त, स्वस्थ और खुश रखता है। याद रहे अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही आपको तैयारी करनी चाहिए।
सही ढंग से अभ्यास करें : अगर आप रोजाना अभ्यास करते हैं तो आप किसी भी तरह के जूते पहनकर किसी भी जगह पर आसानी से दौड़ सकते हैं।  बस आपको सही तरीके से दौड़ने पर ध्यान देना है।
नकारात्मक विचारों से दूर रहें: आपको अपने मन से उन विचारों को दूर करना है जो आपको दौड़ने से रोक सकतें हैं, उदाहरण के लिए आज गर्मी बहुत है, बारिश तेज है, धूल है, घुटनों में दर्द है, या  हार जाऊंगा, मेरे बस की बात नहीं है, या फिर लोग क्या सोचेंगे।
दौड़ते समय शरीर की स्थिति: शरीर को हमेशा आगे की तरफ झुकाकर दौड़ना चाहिए जिससे कि गुरुत्वाकर्षण शक्ति आपके शरीर के विरोध में काम न करे और आप प्राकृतिक तरीके से बिना थके हुए आगे सही तरीके से दौड़ लगा पाएं।
सांस लेने पर ध्यान दें :  दौड़ते समय गहरी गहरी सांस लें। यदि आप दौड़ते समय जल्दी-जल्दी कम गहरी सांसें ले रहें हैं तो इसका अर्थ ये है कि आप न तो सही ढंग से ऑक्सीजन अंदर ले पा रहे हैं और न ही कार्बन डाईऑक्साइड को सही मात्रा में बाहर छोड़ पा रहे हैं। ऐसा करने पर आपकी दौड़ प्रभावित होगी और आप जल्दी थक जायेंगे।
जंपिंग जैक और स्‍टैंडिंग स्‍क्‍वैट्स एक्सरसाइज का नियमित अभ्यास करें : ये दोनों एक्सरसाइज आपके जांघों, घुटनों और पिंडलियों की मांसपेशियों को मजबूत बनाती हैं और साथ ही आपके शरीर का स्टेमिना को भी बढ़ाती हैं।
नियमित रुप से हेल्थ चेकअप करवायें : इससे आपके शरीर की परेशानियों के बारे में सही जानकारी प्राप्त होती है और ये भी पता चलता है कि आप मैराथन की रेस के लिए कितना तैयार हैं, कितने सक्षम हैं।
शरीर को तैयार होने के लिए पर्याप्त  समय करने दें : शरीर को ज्यादा तेज दौड़ने के लिए तैयार करने से पहले कम से कम १ से २ हफ्ते तक उचित अभ्यास करके शरीर को अभ्यस्त बनायें और तेज दौड़ने तथा कठोर मेहनत करने के लिए समय दें। जिस दिन आपके शरीर की एनर्जी लेवल कम हो उस दिन अपनी रफ्तार को धीमा रखें इससे आपकी मांसपेशियां में ज्यादा थकन नहीं महसूस होगी।


तेज दौड़ने के लिए फॉलो करें ये तरीके :

दौड़ने से पहले शरीर को लचीला बनाने के लिए अभ्यास करें: अगर आप तेज दौड़ना चाहतें हैं तो आपके शरीर को लचीला होना बहुत ही आवश्यक है। लचीली शरीर तेज दौड़ने में बहुत सहायक होती है।
अपनी  एक कार्य रुपरेखा बनायें : दौड़ की एक्सरसाइज शुरू करने से पहले आपको अपना एक कार्य योजना बनाना चाहिए और अपनी कार्य योजना के हिसाब के अनुसार ही दौड़ने का अभ्यास करें। अपनी प्रतिदिन दौड़ने के समय और दूरी को एक डायरी में लिखें और उसका नियमितरुप से अनुसरण करें।
सुबह के समय दौड़ें :   सुबह - सुबह तेज दौड़ने के लिए सबसे अच्छा समय होता है। सुबह दौड़ने हमारी रफ़्तार तो बढ़ती ही है साथ ही हमारा शरीर भी स्वस्थ रहता है। फेफड़ों को स्वच्छ हवा मिलती है।
शरीर को स्ट्रेच करें : 

स्ट्रेच करने से आपकी मांसपेशियां मजबूत होती हैं, जिससे तेज दौड़ने में आसानी होती है।
पैरों को बनाएँ मजबूत: इसके लिए आप चाहें तो रोज सीढ़ियाँ चढ़े और उतरें। ऐसा करने से आपका अपनी सांसों पर नियंत्रण रहेगा।
पर्याप्त नींद लें : 

आपको अपनी नींद को पूरा करना काफी ज़रूरी है। नींद लेने से शरीर को आराम मिलता है और मांसपेशियां की थकावट शांत होती है औरशरीर को नयी ऊर्जा मिलती है। 
पर्याप्त पानी पियें : 

ढेर सारा पानी पीने से आपके शरीर के सारे विषैले तत्व बाहर निकल जाते है।
वार्म अप रूटीन में शामिल करें ड्रिल्स: 

रनिंग ड्रिल्स करने से आपके दौड़ने की स्पीड बढ़ेगी। दौड़ लगाने से कुछ समय पहले आपको high knees, skipping, backward running करनी चाहिए इससे आपका शरीर मजबूत होगा।

पौष्टिक आहार लें : 

तेज दौड़ने के लिए बहुत ज़रूरी है कि आपका आहार पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक हो। शरीर को पूरी तरह से ऊर्जावान बनाये रखने के लिए हमें पोषक तत्वों से भरपूर भोजन करना बहुत ज़रूरी है।



गुरुवार, 4 फ़रवरी 2021

क्या आप मैराथॉन में हिस्सा लेना चाहते हैं?/ क्या आप चुस्त शरीर और सहनशीलता (स्टैमिना) बढ़ाना चाहते हैं ? तो करें ये 4 प्रकार के योगासन। / Do you want to participate in a marathon? / Do you want to increase your body and stamina? So do these 4 types of yoga

 

हम यहाँ पर उन योगासनों के बारे में चर्चा करेंगे जो मैराथॉन रनर्स के लिए अनुकूल हैं। दरअसल, मैराथॉन में भाग लेने वाले लोगों के लिए कुछ खास तरीके के योगासन फायदेमंद होते हैं। इससे, बहुत देर तक दौड़ने के दौरान चोट लगने से बचाव होता है और पेट की मांसपेशियों को मज़बूती मिलती है।

योगासनों का अभ्यास संपूर्ण स्वास्थ्य को बनाये रखने के लिए मददगार होता है। इससे ना केवल मन को शांति मिलती है। बल्कि वजन घटाने के लिए और शारीरिक क्षमता बढ़ाने के लिए भी लाभप्रद होता है। इसी तरह व्यायाम के प्रभाव को भी बढ़ाने के लिए, योगासन मदद करते हैं। मैराथॉन में हिस्सा लेने वाले लोगों के लिए कुछ खास तरीके के योगासन फायदेमंद होते हैं।


मैराथॉन में भाग लेने वाले लोगों के लिए योगासन :


नौकासन  :

इस आसन में शरीर को नाव के आकार में रखना पड़ता है। इससे, शरीर के मध्य भाग और पेट पर असर पड़ता है। इस आसन का अभ्यास करते समय मुद्रा में 8-10 सेकेंड्स तक बने रहने की कोशिश करें। फिर, इसे 5-6 बार दोहराएं। 

कैसे करें नौकासन

इसके लिए स्वच्छ स्थान पर दरी अथवा मैट बिछा लें।इसके बाद पीठ के बल लेट जाएं और अपने दोनों पैर को साथ रखे और हाथों को अपने थाई पर रखें।अब गहरी सांस लें और फिर हाथों को पैरों की तरफ ले जाएं। कुछ पल इस मुद्रा में रहें। इसके बाद पुनः अपनी पहली अवस्था में आ जाएं। इस योग को रोजाना कम से कम 10 बार जरूर करें।नौकासन से होने वाले फायदे निम्न है।

पाचन तंत्र को मजबूत करता है। 

कमर दर्द से आराम मिलता है। 

रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है। 

शरीर की अतिरिक्त चर्बी कम होती है। 


पश्चिमोत्तानासन आसन :





    पश्चिमोत्तानासन दो शब्द मिल कर बना है -‘पश्चिम’ का अर्थ होता है पीछे और ‘उत्तांन’ का अर्थ होता है तानना। इस आसन के दौरान रीढ़ की हड्डी के साथ शरीर का पिछला भाग तन जाता है जिसके कारण इसका नाम पश्चिमोत्तानासन दिया गया है। यह स्वस्थ के लिए बहुत ही ज़्यदा लाभदायक आसन है। यह विभिन्य प्रकार की बिमारियों को दूर करने में मदद करता है।

    पश्चिमोत्तानासन योग देखने में थोड़ा कठिन लगता है। लेकिन धीर धीरे प्रैक्टिस करने पर इसको आप आसानी से कर सकते हैं। यहां पर इसको सरल रूप में कैसे किया जाये उसका विवरण दिया गया है।

    तरीका


    सबसे पहले आप जमीन पर बैठ जाएं। अब आप दोनों पैरों को सामने फैलाएं। पीठ की पेशियों को ढीला छोड़ दें। सांस लेते हुए अपने हाथों को ऊपर लेकर जाएं। फिर सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुके। आप कोशिश करते हैं अपने हाथ से उँगलियों को पकड़ने का और नाक को घुटने से सटाने का। धीरे धीरे सांस लें, फिर धीरे धीरे सांस छोड़े और अपने हिसाब से इस अभ्यास को धारण करें। धीरे धीरे इस की अवधि को बढ़ाते रहे। यह एक चक्र हुआ। इस तरह से आप 3 से 5 चक्र करें।

पश्चिमोत्तानासन के लाभ – 


पश्चिमोत्तानासन योग रीढ़ की हड्डी के लिए: यह आसन मेरुदंड को लचीला बनाता है और हमें बहुत रोगों से दूर करता हैं।
पश्चिमोत्तानासन योग मोटापा कम के लिए: अगर आपको अपनी पेट की चर्बी कम करनी हो तो इस आसन का नियमित अभ्यास करें। यह पेट को कम करने के साथ साथ कमर को पतला करने में भी मदद करता है।
वीर्य सम्बंधित परेशानियों में: यह आसन वीर्य (Semen) सम्बंधित परेशानियों को दूर करता है।
पेट की मांसपेशियों के लिए: इसका नियमित अभ्यास करने से पेट की पेशियां मजबूत होती है जो पाचन से सम्बंधित परेशानियां जैसे कब्ज, अपच को दूर करने में सहायक है।
पश्चिमोत्तानासन त्वचा रोगों की लिए: इस आसन के अभ्यास से त्वचा रोगों को दूर करने में सहायता मिलती है।
साइटिका : यह आसन साइटिका से सम्बंधित रोगों को दूर करता है।
तनाव कम करने के आसन: पश्चिमोत्तानासन का नियमित अभ्यास से तनाव में बहुत हद तक कण्ट्रोल पाया जा सकता है और साथ ही साथ क्रोध को दूर करते हुए मन को शांति एवम प्रसन्न रखता है। इस आसन को करने से गुस्सा नियंत्रित होता हैं|
पथरी के लिए: पश्चिमोत्तानासन के अभ्यास से आप गुर्दे की पथरी को रोक सकते हैं।
एजिंग को धीमा करने वाला योग: इसके अभ्यास से आप उम्र की गति को धीमा कर सकते हैं।
पश्चिमोत्तानासन बवासीर के लिए: यह बवासीर में लाभकारी है।
अनिद्रा रोग में सहायक : यह आसन अनिद्रा रोग में लाभदायक है।
बौनापन दूर करें योग से: पश्चिमोत्तानासन के नियमित अभ्यास से शरीर की हाइट बड़ाई जा सकती है और बौनापन से निजात मि सकती है।
चेहरे पर तेज लाता है : इस आसन के अभ्यास से पुरे शरीर में रक्त का प्रवाह बेहतर हो जाता है जो चेहरे पर तेज लाता है, कमजोरी को दूर करता है। आपको तरोताजा रखते हुए मन को खुश रखता है।
पेट के कीड़े मारने के लिए: पेट के कीड़े मारता है।
महिलाओ के लिए लाभकारी: यह आसन महिलाओ के कई रोगों में भी लाभकारी है और महिलाओ के मासिक धर्म से सम्बन्धित सभी विकार के हल निकालने में कारगर है।

भुजंगासन:

भुजंगासन - भुजंगासन योग की विधि, लाभ और सावधानियाँ,





अंग्रेजी में इसे Cobra Pose कहा जाता है। भुजंगासन फन उठाए हुएँ साँप की भाँति प्रतीत होता है, इसलिए इस आसन का नाम भुजंगासन है। भुजंगासन सूर्यनमस्कार और पद्मसाधना का एक महत्त्वपूर्ण आसान है जो हमारे शरीर के लिए अति लाभकारी है।
यह छाती और कमर की मासपेशियो को लचीला बनाता है और कमर में आये किसी भी तनाव को दूर करता है। मेरुदंड से सम्बंधित रोगियों को अवश्य ही भुजंगासन बहुत लाभकारी साबित होगा।
स्त्रियों में यह गर्भाशय में खून के दौरे को नियंत्रित करने में सहायता करता है। गुर्दे से संबंधित रोगी हो या पेट से संभंधित कोई भी परेशानी, ये आसान सा आसन सभी समस्याओं का हल है।

भुजंगासन करनें की विधि

ज़मीन पर पेट के बल लेट जाएँ, पादांगुली और मस्तक ज़मीन पे सीधा रखें।
पैर एकदम सीधे रखें, पाँव और एड़ियों को भी एकसाथ रखें।
दोनों हाथ, दोनों कंधो के बराबर नीचें रखे तथा दोनों कोहनियों को शरीर के समीप और समानान्तर रखें।
दीर्घ श्वास लेते हुए, धीरे से मस्तक, फिर छाती और बाद में पेट को उठाएँ। नाभि को ज़मीन पे ही रखें।
अब शरीर को ऊपर उठाते हुए, दोनों हाथों का सहारा लेकर, कमर के पीछे की ओर खीचें।
गौर फरमाएँ: दोनों बाजुओं पे एक समान भार बनाए रखें।
सजगता से श्वास लेते हुए, रीड़ के जोड़ को धीरे धीरे और भी अधिक मोड़ते हुए दोनों हाथों को सीधा करें; गर्दन उठाते हुए ऊपर की ओर देखें।
गौर फरमाएँ: क्या आपके हाथ कानों से दूर हैं? अपने कंधों को शिथिल रखेंl आवश्यकता हो तो कोहनियों को मोड़ भी सकते हैं। यथा अवकाश आप अभ्यास ज़ारी रखते हुए, कोहनियों को सीधा रखकर पीठ को और ज़्यादा वक्रता देना सीख सकते हैं।
ध्यान रखें कि आप के पैर अभी तक सीधे ही हैं। हल्की मुस्कान बनाये रखें, दीर्घ श्वास लेते रहें मुस्कुराते भुजंग।
अपनी क्षमतानुसार ही शरीर को तानें, बहुत ज़्यादा मोड़ना हानि प्रद हो सकता हैं।
श्वास छोड़ते हुए प्रथमत: पेट, फिर छाती और बाद में सिर को धीरे से वापस ज़मीन ले आयें।
भुजंगासन में सावधानियाँ
सबसे महत्वपूर्ण बात भुजंगासन या फिर योग का कोई और अन्य आसन भी तो उसे अपनी क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए।
यदि इस आसन को करते वक्त आपको पेट दर्द या शरीर के किसी अन्य शरीर में अधिक दर्द हो तो इस आसन को ना करे।
जिस व्यक्ति को पेट के घाव या आंत की बीमारी है वो इस आसन को करने से पहले चिकित्सक से सलाह ले।
इस आसन का अभ्यास करते वक्त पीछे की तरफ ज्यादा ना झुकें। इससे माँस-‍पेशियों में खिंचाव आ सकता है जिसके चलते बाँहों और कंधों में दर्द पैदा होने की संभावना बढ़ती है।

भुजंगासन से होने वाले लाभ

कंधे और गर्दन को तनाव से मुक्त कराना।
पेट के स्नायुओं को मज़बूत बनाना।
संपूर्ण पीठ और कंधों को पुष्ट करना।
रीढ़ की हड्डी का उपरवाला और मंझला हिस्सा ज़्यादा लचीला बनाना।
थकान और तनाव से मुक्ति पाना।
अस्थमा तथा अन्य श्वास प्रश्वास संबंधी रोगों के लिए अति लाभदायक (जब अस्थमा का दौरा जारी हो तो इस आसन का प्रयोग ना करें)।

सेतुबंधासन :


संस्कृत भाषा में पुल को सेतु कहा जाता है। पुल किसी भी दुर्गम स्थान, नदी के किनारे को जोड़ने का काम करता है। यह आसन हमारे मन और शरीर के बीच तालमेल बनाने में भी मदद करता है।

जैसे एक पुल का काम यातायात और उस पर पड़ने वाले दबाव को सहन करना होता है, वैसे ही यह आसन हमारे शरीर से तनाव को भी दूर और कम करता है।



सेतुबंधासन कैसे करे 

  • सेतुबंधासन करने के लिये चटाई पर पीठ के बल लेट जाएं।
  • अपने घुटनों को मोड़ें।
  • घुटनों और पैरों को सीधी रेखा में रखते हुए दोनों पैरों को एक-दूसरे से थोड़ा गैप रखते हुए फैलाएं।
  • हाथों को शरीर से सटाकर रखें और हाथों की हथिलियो को जमीन पर सटा कर रखे।
  • धीरे-धीरे साँस लेते हुए, अपनी पीठ के निचले, मध्य और ऊपरी हिस्सों को धीरे से जमीन से ऊपर उठाएं।
  • धीरे-धीरे अपने कंधों को अंदर की ओर ले जाएं।
  • अपनी ठोड़ी को हिलाए बिना, अपनी ठोड़ी के साथ अपनी छाती लगाएं और अपने वजन के साथ अपने कंधों, हाथों और पैरों का समर्थन करें। इस दौरान शरीर के निचले भाग को स्थिर रखें और ध्यान रहे की इस दौरान दोनों जांघें एक साथ रहेंगी।
  • यदि आप चाहें तो इस समय के दौरान, आप अपने ऊपरी शरीर को जमीन पर हाथों से दबाकर उठा सकते हैं। आप अपने हाथों से अपनी कमर का सहारा भी ले सकते हैं।
  • साँस छोड़ते हुए आसन को 1-2 मिनट तक करें फिर आसन को समाप्त करे।

सेतुबंधासन के लिए कुछ युक्तियाँ :

यदि आप योग में शुरुआती हैं, तो आपके लिए अपने शरीर को लंबे समय तक इस मुद्रा में रखना आसान नहीं होता, इसलिए जितने समय तक आप आसानी से कर सकते हैं, उतने समय तक ही इस मुद्रा में रहें। 

आप अपने कंधों के नीचे एक मुड़ा हुआ कंबल या तकिया रख सकते हैं।

यदि आपको अपनी पीठ को उठाना मुश्किल लगता है, तो आप समर्थन के रूप में अपने हाथों को अपनी पीठ पर रख सकते हैं। यह आपको लंबे समय तक मुद्रा बनाए रखने में भी मदद कर सकता है।

यदि आप आसन करते समय फिसलते रहते हैं, तो अपने पैरों को एक दीवार के पास रखने की कोशिश करें। ऐसा करने से यह आपके घुटनों का समर्थन करेगा और आपको फिसलने से बचाएगा।

सेतुबंधासन के लाभ : 

सेतुबंधासन के अभ्यास से कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है, आइये जानतें है की सेतुबंधासन के लाभ क्या हैं ?

  • यह पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करता है।
  • यह छाती, गर्दन और रीढ़ को एक अच्छा खिंचाव देता है।
  • यह पेट और शरीर की चर्बी दोनों को हटाने में मदद करता है।
  • यह थायरॉयड ग्रंथि को विनियमित करने में मदद करता है।
  • यह तनाव और डिप्रेशन को कम करने में मदद करता है।
  • यह रक्त परिसंचरण में सुधार करता है।
  • इस योग के नियमित अभ्यास से पाचन में भी सुधार होता है।
  • इस योग के अभ्यास से महिलाओ में मासिक धर्म में लाभ मिलता है।
  • यह पाँव की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है।
  • यह योग मुद्रा गर्दन की मांसपेशियों से वसा को कम करती है।
  • यह फेफड़ों को मजबूत बनाता है जिससे अस्थमा को ठीक होने में मदद मिलती है।
  • यह आपके मस्तिष्क और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को शांत करता है जो तनाव और हल्के अवसाद को कम करने में लाभदायक होता है।

इस आसन से कोर मसल्स पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है। सेतुबंधासन से आपके पैरों के पिछले हिस्से टोनअप होते हैं। जब भी सेतुबंधासन का अभ्यास करें, तो इसकी मुद्रा में रहते हुए आप 5-6 बार सांस ले। बेहतर संतुलन के लिए हिप्स को हवा में जितने ऊंचे ले जा सकते हैं, ले जायें।

मंगलवार, 2 फ़रवरी 2021

वजन कम करना चाहते हैं तो करें रनिंग। If you want to lose weight, then run





कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन के दौरान सभी को घरों में रहना पड़ रहा है। ऐसे में वजन बढ़ना स्वाभाविक है।आज की व्यस्त दिनचर्या और अनियमित खान - पान की वजह से भी लोगों का वजन तेजी से बढ़ रहा है। लोग अपने बढ़ते वजन से परेशान हैं और अपना वजन कम करना (Weight Loss) चाहते हैं, परन्तु वजन कम करना इतना आसान काम भी नहीं है। ऐसे में कसरत या जिम फायदेमंद हो सकता है। लेकिन यदि आपको जिम जाना पसंद नहीं हैं तो आपके लिए दौड़ना एक बहुत ही अच्छा व्यायाम हो सकता है। इस व्यायाम से आपकी सेहत तो अच्छी रहती ही है साथ में आपका वजन भी कम होता है। यह एक बहुत ही साधारण कार्डियो एक्सरसाइज (Cardio Exercise) है और यह बहुत प्रभावकारी है। यह आपके पेट की चर्बी को कम करने में भी बहुत सहायक है। वजन कम करने के लिए रनिंग सबसे अच्‍छी प्रक्रिया है। पर बहुत से लोगों को यह पता ही नही होता कि रनिंग का सही तरीका क्‍या है। जिसके चलते उन्‍हें कई तरह की समस्‍याओं का सामना करना पड़ता है। कई बार थोड़ी देर रनिंग करने के देर बाद ही थक जाते हैं और सांस फूलने लगती है। इसका कारण सही तरीके से रनिंग न करना है। दरअसल, रनिंग नॉर्मल प्रक्रिया है लेकिन इसके कुछ रूल्‍स होते हैं। अगर उन्हें फॉलो न किया जाए तो एनर्जी भी बर्बाद होती है और इसका खास फायदा भी नहीं होता।दौड़ने से आपकी मांसपेशियां मजबूत तो होती ही हैं साथ में आपको वजन कम करने में भी मदद मिलती है। लेकिन दौड़ने से पहले निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

1 - रनिंग की शुरुआत हो अच्‍छी- Start Running For Weight Loss

शुरुआत में बहुत तेज रनिंग से बचें लोग अक्सर यही गलती करते हैं कि वह पहले दिन ही बहुत तेज रनिंग करने लगते हैं। मगर रनिंग हमेशा धीरे-धीरे शुरू करनी चाहिए। इससे शरीर की एनर्जी भी लो नहीं होती और मसल्स में अकड़न भी नहीं आती। वजन कम करने से लेकर फिट रहने के लिए रनिंग एक अच्छी शुरुआत है। अगर आप पहली बार रनिंग शुरू कर रहे हैं तो आप हफ्ते में चार से पांच बार दौड़ सकते हैं। यह आपकी मांसपेशियों और दिल के लिए बेहतर होगा। व उनपर दबाव भी कम पड़ेगा। इसके अलावा अगर आपको चोट लगी है या कोई बीमारी है तो आप आराम कर सकते हैं। लेकिन आप अपनी रनिंग से आराम ले विराम नहीं।

2 - रनिंग से पहले स्ट्रेचिंग करना है जरूरी- Stretching Before Running




रनिंग शुरू करने से पहले स्ट्रेचिंग करना न भूलें। इससे आपको दौड़ते समय शरीर के किसी हिस्से में दर्द नहीं होता। इसलिए रोजाना स्‍ट्रेचिंग करके थोड़ा-थोड़ा दौड़ें अपने हिसाब से क्रम बढ़ाते जाएं। रनिंग से पहले आपको ध्यान रखना होगा कि आप स्ट्रेचिंग जरुर करें, क्योंकि स्ट्रेचिंग सबसे महत्वपूर्ण कदम है जो दौड़ने या व्यायाम से पहले करना चाहिए। स्ट्रेचिंग मांसपेशियों को गतिशील बनाती है व मांसपेशियों में कसाव लाती हैं। इसी कारण जिम में या कहीं और वर्कआउट करने से पहले वार्मअप का सुझाव देते हैं। बता दें रनिंग से पहले स्ट्रेचिंग से आप ज्यादा दौड़ सकेंगे।

3 - भोजन में पोषक तत्‍वों को शमिल करें



रनिंग शुरू करने से पहले अपनी डाइट में भी बदलाव करें क्योंकि रनिंग का पूरा फायदा तभी मिलता है जब आपकी डाइट ठीक हो। रनिंग करते समय शरीर को अधिक एनर्जी की जरूरत होती है। इसलिए अपनी डाइट में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और फाइबर युक्त चीजें खाएं। कैल्शियम के लिए दूध के साथ बादाम लें और चावल का सेवन करने से बचें।

4 - सही पॉश्चर का रखें ध्यान

रनिंग के दौरान आपको अपने पॉश्चर का भी ध्यान रखना चाहिए, नहीं तो इसका फायदे की बजाए आपको नुकसान हो जाएगा। रनिंग करते समय बॉडी सीधी और नजर सामने की ओर होनी चाहिए। इस बात का भी ध्‍यान रखें कि आप अपने पैरों को जमीन पर जोर से पटकते हुए रनिंग न करें। क्‍योंकि इससे आपके जोड़ों में दर्द की समस्या हो सकती है।

5. रनिंग शूज का विशेष ध्‍यान रखें- Running Shoes Tips For Beginners



रनिंग में सबसे ज्यादा जरूरी हमारे जूते होते हैं। क्योंकि जूते एकमात्र ऐसा विकल्प है जिसकी मदद से आप खुद को सहज महसूस करवा सकते हैं। इसके लिए आपको सही प्रकार के जूतों से पहरेज नहीं करना चाहिए। आप पैसों की जगह आराम को चुनें। रनिंग शूज़ पैर को किसी भी प्रकार की चोट से बचाते हैं।
अगर आप रनिंग का प्लान कर चुके हैं और आप पहली बार रनिंग करने वाले हैं, तो हमारे द्वारा बताई गयी टिप्स को ध्यान में रखें और इसे अपनाएं। क्योंकि रनिंग जितनी जरूरी है, उतनी ही जरूरी उससे जुड़ी बेसिक बातों की जानकारी। जिसे हम नजरंदाज कर देते हैं।
कुछ लोग रनिंग के लिए जूतों का भी चुनाव ठीक से नहीं कर पाते। इससे पैरों में सही पकड़ नहीं बन पाती है और गिरने का खतरा बना रहता है। इतना ही नहीं, खराब जूतों के कारण आप तेज दौड़ भी नहीं पाते।

6 - पहनें कम्फर्टेबल कपड़े

रनिंग करते समय टाइट और फिटिंग वाले कपड़ें न पहनें। इसकी बजाए रनिंग करते समय हल्‍के और आरामदायक कपड़े पहनें। इससे हवा आपकी बॉडी तक पहुंचती रहेगी और आप जल्दी नहीं थकेंगे।

7 - रनिंग के दौरान पानी जरूर पीएं- How To Drink While Running

शरीर में पानी की मात्रा नियंत्रित रखने के लिए जरूरी है कि आप सारे दिन में कम से कम 2 लीटर पानी पिएं। लेकिन ध्यान रखें दौड़ने से फौरन पहले यह दौड़ने के फौरन बाद पानी न पिएं। इस वजह से आप असहज महसूस कर सकते हैं। दौड़ने के लिए आपको भरपूर ऊर्जा की जरूरत होती है। दरअसल दौड़ते समय पसीना आने से शरीर में पानी का संतुलन बिगड़ जाता है। आप भरपूर मात्रा में पानी पीते रहें। यदि आप काफी समय से रनिंग कर रहे हैं तो हर 15 या 20 मिनट बाद एक घूंट पानी जरूर पिएं।आपको फिट रहने के लिए कैफीनयुक्त पेय से बचना चाहिए क्योंकि ये दिल को नुक्सान पहुंचाते हैं और ऊर्जा को कम करते हैं।

8 - रनिंग से पहले भोजन न करें- Foods To Avoid Before A Running

रनिंग से पहले भारी और अच्छी मात्रा में खाना खाकर अपना पेट ना भरें। हम जब भी दौड़ना शुरू करते हैं तब हमारा रक्त प्रवाह मांसपेशियों की ओर निर्देशित होता है। जो दौड़ने में मदद करता है। इसका असर पाचनतंत्र पर भी पड़ता है। जिस कारण पाचन कमजोर होता है। कमजोर पाचन की वजह से खाना पूरी तरह से नहीं पता और पेट संबंधी परेशानियां शुरू हो जाती हैं। अगर आप सुबह-सुबह दौड़ रहे हैं, तो आप खाली पेट एक घंटे दौड़ सकते हैं। वहीं अगर आप शाम के समय रनिंग कर रहे हैं तो खाने से दो घंटे बाद ही दौड़ें।

दौड़ने से आपके पेट पर जमी चर्बी कैसे कम हो सकती है?


दौड़ते समय यदि आप इसमें थोड़ा सा तरकीब अपनाते हैं तो आप बड़ी आसानी से अपना वजन कम करने में सफलता हासिल कर सकते हैं। यह तरकीब अपनाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, लेकिन असंभव नहीं। अगर आप प्रभावी ढंग से दौड़कर अपना वजन कम करना चाहते हैं तो कुछ ऐसी तरकीब हैं जिसे दौड़ते समय उपयोग में ला सकते हैं, जैसे आप दौड़ते समय अपने हाथों को ऊपर करके दौड़ सकते हैं। इसके लिए आपको बहुत अधिक स्टैमिना व मजबूती की आवश्यकता होती है। ऐसा करना शुरु में तो आपको मुश्किल लग सकता है परन्तु धीरे धीरे इस प्रकार भागने से आपका स्टैमिना भी मजबूत होता है और आपकी मांसपेशियां भी। यह न केवल आपके पेट की चर्बी को कम करता है बल्कि आपकी बांहों को भी टोन करता है, मजबूत बनाता है ।




यदि आप अपने हाथों को ऊपर करके दौड़ते (Running) हैं तो इससे आप अधिक कैलोरीज खर्च करते हैं। हाथ ऊपर करके दौड़ते समय आपके शरीर को अधिक ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है। जिसके कारण अधिक कैलोरीज खर्च होती है और अधिक कैलोरी खर्च होने के कारण आपका वजन कम होने लगता है।

यदि आप बहुत तेज रनिंग करते हैं तो उससे आपके शरीर में चोट लगने का रिस्क रहता है परन्तु जब आप अपने हाथों को ऊपर उठा कर भागते हैं तो इससे आपकी गति धीमी हो जाती है जिस कारण आपके शरीर में चोट लगने की संभावना बहुत कम हो जाती हैं।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इस अवस्था में आपके शरीर में एयरोडायमिक्स की कमी होती है जो आपकी गति बढ़ाने में लाभदायक माना जाता है। इसलिए यह एक्सरसाइज एक हाई इंपैक्ट एक्सरसाइज से एक लो इंपैक्ट एक्सरसाइज बन जाती है।
यह आपकी मांसपेशियों को चोट लगने से बचाती है। इस प्रकार की एक्सरसाइज आपको वजन कम करने के दौरान अवश्य ही करनी चाहिए। इनसे आपका वजन तो कम होता ही है साथ में आपको चोट भी नहीं लगती है।

दौड़ने और जॉगिंग से होते हैं ये कमाल के फायदे

- दौड़ने और जॉगिंग करने से नेचुरल तरीके से वजन घटाया जा सकता है.
- दौड़ने जॉगिंग पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करता है और इससे पाचन तंत्र सक्रिय हो सकता है.
- हर रोज दौड़ने और जॉगिंग से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है जिससे दिनभर आप तरोताजा रह सकते हैं.
- दौड़ने और जागिंग से शरीर का पूरा व्यायाम हो जाता है और अच्छी नींद आती है, जो कि बेहतर स्वास्‍थ्‍य के लिए जरूरी है.
- दौड़ने और जॉगिंग से शरीर की मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत हो सकती है.
- दौड़ने और जॉगिंग से शरीर का ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है जिससे दिल मजबूत हो सकता है.

दौड़ने और जॉगिंग करने के दौरान बरतें ये सावधानियां

- अगर आपको कोई बीमारी है तो दौड़ने और जागिंग से पहले डॉक्टर की सलाह लें.
- दौड़ने और जॉगिंग के दौरान हल्के और ढीले कपडे़ पहनिए.
- दौड़ने और जॉगिंग के वक्त साधारण पानी की जगह ग्लूकोज पानी की बॉटल को अपने साथ रखें.
- दौड़ने और जॉगिंग करने का समय धीरे-धीरे ही बढ़ाएं.
- ऐसी जगह पर दौड़ने और जॉगिंग से बचिए जहां पर ट्रैफिक हो, इससे जागिंग के दौरान आपको परेशानी होगी और प्रदूषण से आपके स्वास्‍थ्‍य को नुकसान पहुंचेगा

ऐसे करेंगे दौड़ और जॉगिंग तो आएगा मजा -

- दौड़ने और जॉगिंग किसी भी वक्त किया जा सकता है, लेकिन सुबह का वक्त ज्यादा अच्छा हो सकता है.
- दौड़ने और जॉगिंग का मजा तभी है जब यह मनोरंजन के साथ करें.
- दौड़ने और जॉगिंग एक ही रास्ते पर मत कीजिए, बल्कि हर रोज अपना रास्ता बदलते रहिए, नए रास्ते पर जॉगिंग से आपको अच्छा महसूस होगा.