
असल में आपका दिमाग जिस अवस्था में इस समय है, उसके लिए आपने उसे वर्षों तक प्रशिक्षित किया है। हम सकारात्मक या नकारात्मक जैसे भी हैं, यह उसी प्रशिक्षण का परिणाम है। जिस तरह से आपने उसे प्रशिक्षित किया है, उसी तरह अब उसे नई दिशा में प्रशिक्षित करना होगा। थोड़े से प्रयास और नजरिये में बदलाव करके हम नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर बढ़ सकते हैं।
कई बार हमारे मन में नकारात्मक विचार कुछ इस तरह घर कर जाते हैं कि जीवन में सिर्फ निराशा ही दिखती है। हमारे मन में जितने अधिक नकारात्मक विचार होंगे हम उतने ही अधिक अवसादग्रस्त होंगे । ऐसे में इन्हें खुद से दूर रखने का हर संभव प्रयास हमारे लिए जरूरी है। हम अपने अंदर छोटे-छोटे बदलाव करके खुद को सकारात्मक दिशा में ले जा सकते हैं। नकारात्मक सोच हमको डिप्रेशन जैसी कई मानसिक बीमारियों का शिकार बना देती है। इसलिए इस तरह की सोच से खुद को दूर रखना बेहद ज़रूरी है।
अमेरिकी लेखक और मोटिवेशनल स्पीकर जिम रॉन ने कहा है कि, ''आप वास्तव में जो चाहते हैं, आपका मस्तिष्क स्वत: ही आपको उस दिशा में खींच ले जाता है।''
हम सब यह जानते हैं कि नकारात्मक सोच का परिणाम कितना घातक होता है।आपने यदि अपने नकारात्मक विचारों को सकारात्मकता में बदलने का संकल्प ले लिया है, तो आप इन बातों पर चलकर सफल हो सकते हैं :
जब भी आपको लगता हो कि आप विफल हो रहे हैं, तो खुद से उसी तरह बात करना शुरू कर दें, जैसे - ''मैं बहुत अच्छा हूँ, '' '' मैं यह कर सकता हूँ, '' '' मेरे साथ सब अच्छा ही होगा,'' या ''मैं अपने कर्मों के लिए खुद उत्तरदायी हूँ,'' आदि। इससे आप खुद को मानसिक रूप से ऊपर उठाना सीख जाएंगे और हर समय आपका मनोबल ऊंचा बना रहेगा। ज़्यादातर लोग आत्मविश्वास की कमी के कारण नकारात्मक सोच के शिकार होते हैं। हो सकता है कभी आपसे कुछ ग़लती हो गई हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप हमेशा ग़लत ही करेंगे। अपने गुणों को पहचानें और इसे सबके सामने आने दें। कुछ खामियां हों तो उसे सुधारने की कोशिश करें। अपने व्यक्तित्व को निखारने की कोशिश करें। बुरे से बुरे समय में भी अपनी ख़ूबियों को याद रखें। याद रखें कि कोई भी व्यक्ति परफ़ेक्ट नहीं होता, हर इंसान में अच्छाई और बुराई दोनों ही होती हैं। इसलिए अपने अंदर के आत्मविश्वास को कभी भी मरने न दें।
हम सब यह जानते हैं कि नकारात्मक सोच का परिणाम कितना घातक होता है।आपने यदि अपने नकारात्मक विचारों को सकारात्मकता में बदलने का संकल्प ले लिया है, तो आप इन बातों पर चलकर सफल हो सकते हैं :
१ -अपने व्यक्तित्व को निखारने की कोशिश करें.
जब भी आपको लगता हो कि आप विफल हो रहे हैं, तो खुद से उसी तरह बात करना शुरू कर दें, जैसे - ''मैं बहुत अच्छा हूँ, '' '' मैं यह कर सकता हूँ, '' '' मेरे साथ सब अच्छा ही होगा,'' या ''मैं अपने कर्मों के लिए खुद उत्तरदायी हूँ,'' आदि। इससे आप खुद को मानसिक रूप से ऊपर उठाना सीख जाएंगे और हर समय आपका मनोबल ऊंचा बना रहेगा। ज़्यादातर लोग आत्मविश्वास की कमी के कारण नकारात्मक सोच के शिकार होते हैं। हो सकता है कभी आपसे कुछ ग़लती हो गई हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप हमेशा ग़लत ही करेंगे। अपने गुणों को पहचानें और इसे सबके सामने आने दें। कुछ खामियां हों तो उसे सुधारने की कोशिश करें। अपने व्यक्तित्व को निखारने की कोशिश करें। बुरे से बुरे समय में भी अपनी ख़ूबियों को याद रखें। याद रखें कि कोई भी व्यक्ति परफ़ेक्ट नहीं होता, हर इंसान में अच्छाई और बुराई दोनों ही होती हैं। इसलिए अपने अंदर के आत्मविश्वास को कभी भी मरने न दें।
२ - अपने आप से करें वादा
खुद से वादा करें कि, आप अपने अंदर बदलाव लाने के लिए समर्पित रहेंगे। वादा करें कि वर्तमान में जीयेंगे, अपने आप से वादा करें कि आज मैं कल से बेहतर करूँगा। आज का पूरा आनंद उठाऊंगा। आज में ही इसका मतलब यह है कि आज, अभी जो क्षण है, वही आपका है और आपको उसका पूरा उपभोग करना होगा। अगला जो क्षण आएगा, वह भी ‘इस क्षण’ हो जाएगा। इस सोच से आपका विचार, दिमाग और जीवन सब परिष्कृत हो जाएगा। आप इस तरह से संकल्प ले सकते हैं, ‘जब भी मेरे दिमाग में कोई नकारात्मक विचार आएगा तो मैं उस पर विचार नहीं करूंगा और न ही उसका प्रतिरोध करूंगा। मैं सामान्य तरीके से उसे स्वीकार कर उसकी उपस्थिति को समझूंगा और अंतत: उससे बाहर निकल जाऊंगा। मैं खुद को नकारात्मक विचारों से हटाकर सकारात्मक विचार लाने का विशेषज्ञ बना दूंगा। मैं खुद से वादा करता हूं कि खुद को सबसे सुंदर, सकारात्मक और खुशहाल व्यक्ति बनाऊंगा।’
३ - परिणाम को दिमाग में रखें
आप अपने परिणाम की कल्पना कीजिये। जोश, शांति और आनंद की भावना का अनुभव करें। आप यह मानें कि आपके अंदर ये सब भावनाएं हैं। यदि आप कल्पना कर सकते हैं, तो आप उसे हासिल भी कर सकते हैं। आप यदि सपने देख सकते हैं, तो उसे पूरा भी कर सकते हैं। यह देखिए कि यदि आप अपने सोचने का तरीका बदल लें, तो आपके जीवन में कितना अंतर आ जाएगा। आप अपनी कल्पना शक्ति को मजबूत करें। कुछ भी शुरु करने से पहले उसके सकारात्मक परिणाम के बारे में सोचें। खुद को आदर्श तथा सकारात्मक अनुभव करें।
४ - जैसा होना चाहते हैं वैसा ही अभिनय करें हो जाएगा सच
यह सुनिश्चित करें कि आप सकारात्मक व्यक्ति की तरह व्यवहार करेंगे। कड़वे सच का सामना करें आपने यह देखा होगा कि हममें से बहुत से लोग जीवन भर प्रतिरोध, दमन, नकारात्मकता और दूषित विचारों का सामना करते हैं, इसलिए सकारात्मक विचारों की ओर जाना इतना आसान भी नहीं है। भले ही आप अभिनय करें, लेकिन इस तरह प्रदर्शित करें कि आप वर्तमान में हैं, आप खुश हैं, आप प्रिय और खुशहाल व्यक्ति हैं। वैसा ही अभिनय करें, जैसा कि आप होने की इच्छा रखते हैं। एक समय ऐसा आएगा, जब आपका मस्तिष्क इतना बदल जाएगा कि आप वास्तव में वैसे ही हो जाएंगे। अपनी भाव-भंगिमा को जांचें, अपने चेहरे के हाव-भाव, दूसरों से संवाद करने के तरीके, सब पर गौर करें। हमारे भीतर हर स्थिति की समझ और करुणा की जरूरत होती है। हम खुद को अच्छे विचार नहीं देंगे तो यह काम और कौन करेगा ? आपके अंदर जितने ज्यादा समय तक नकारात्मक विचार हावी रहे हैं, उससे बाहर निकलने में उतनी ही मुश्किल आती है। इसलिए हमेशा सकारात्मक विचारों को आत्मसात करें।
५ - वर्तमान के बारे में सोचें
अगर आप खुशहाल और सकारात्मक बने रहना चाहते हैं तो हमेशा वर्तमान में रहने का प्रयास करें। अपना दिमाग आज या अभी जो कुछ भी हो रहा है, उस पर ही केंद्रित करें। अतीत और भविष्य के बारे में सोचना बंद करें। अगर आप अपना खेल अभी खेलेंगे, तभी अच्छे परिणाम दे पाएंगे। क्योंकि वर्तमान पर ध्यान रखने पर कोई तनाव नहीं होता है। तनाव तब होता है, जब हम भविष्य के बारे में चिंता करते हैं और अतीत की विफलताओं को याद करते हैं। ज़्यादातर लोग पुरानी बातों और ग़लतियों के कारण नकारात्मक सोच का शिकार होते हैं। लेकिन अगर आप आज के बारे में सोचेंगे तो आप ख़ुश रहेंगे। क्योंकि जो सही या गलत अतीत में हो गया है उसे अब बदला नहीं जा सकता। भविष्य में होने वाली घटनाओं पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता है, तो फिर क्यों अतीत और भविष्य के बारे में सोचना। बस जो आज है उसको जियो, उसका आनंद लो।

६ - चिंता छोड़ें, बेफिक्र रहें
आदमी अमीर हो या गरीब बच्चा हो या फिर बूढ़ा सबको किसी न किसी बात की चिंता लगी रहती है। लेकिन चीजों को लेकर अगर हम ज्यादा चिंतित होते हैं तो हम जीवन का सही आनंद नहीं ले पाते हैं, जैसा जीवन हम जीना चाहते हैं वैसा जीवन नहीं जी पाते हैं। अपने जीवन को सौहार्दपूर्ण और प्रिय तरीके से जीना सीखें। अपनी सभी चिंताओं और तनाव को दूर भगाएं और खुशहाल रहें। अगर आप चिंता से दूर रहना चाहते हैं तो जब भी आपको चिंता महसूस कर रहे हों या हर दिन कम से कम एक बार अपनी जीवन की सबसे अच्छी उपलब्धियों को याद करिये और उसके लिए उपरवाले को धन्यवाद दीजिये। यदि आपने इसे आदत बना लिया तो आप सफल और खुशहाल जिंदगी जी पाएंगे। ७ - खुद निर्णय लेना सीखें -
अगर जीवन में आगे बढ़ना है, सफलता की नई मंज़िलों को छूना है, तो हमें खुद से ही अपना निर्णय लेने की क्षमता का विकास करना सीखना होगा। क्योंकि हमारे द्वारा लिए गए निर्णयों पर ही हमारा वर्तमान और भविष्य दोनों निर्भर होते हैं। हाँ यह बात सच है कि, एकदम सटीक और सौ प्रतिशत सफलता की हामी देनेवाला निर्णय चुटकी बजाकरनहीं लिया जा सकता। जब हम कुछ बातें लगातार करते रहते हैं तब सही निर्णय लेने की हमारी क्षमता खुद बा खुद बढ़ जाती है। नकारात्मक सोच की स्थिति में मज़बूत से मज़बूत व्यक्ति भी निर्णय लेने में सक्षम नहीं हो पाता है। ऐसे में छोटे-छोटे निर्णय लेना चाहिए और अमल करना चाहिए। बिना इस बात की चिंता किये कि परिणाम क्या होगा, हमें निर्णय लेना चाहिए। बस इस बात का ध्यान रखें कि एक बार जब आपने कोई फैसला ले लिया तो फिर चाहे वो गलत हो या सही उस पर अमल करें। अगर परिणाम अच्छा नहीं मिला तो कम से कम आपको एक अनुभव तो मिलेगा।
८ - अपनों के साथ समय बिताएं
अपने हर दिन की व्यस्तता में से कुछ समय निकालकर घर-परिवार में अपनों के साथ समय बिताएं, कुछ उनकी सुनें, कुछ अपनी सुनाएं। उनके साथ भोजन करें, खेलें और मनोरंजन करें। अपनी पुरानी यादों को समेटें-संजोएं।आपके परिवार को हमेशा आपकी ज़रूरत होती है, उन्हें आपके बारे में चिंता भी बनी रहती है। इसलिए अपने व्यस्ततम समय में से थोड़ा सा समय मां - बाप, बीबी बच्चों तथा दोस्तों और रिश्तेदारों के लिए निकालें। इससे आपके मन में पनपने वाले नकारात्मक विचार दूर होंगे और आप सकारात्मकता से लबरेज होंगे ,आपका उत्साह बढ़ेगा। ऊर्जा बढ़ेगी। आप आनंदित होंगे।
९ - जरूरतमंदों की मदद करिये -
हमेशा यह देखा गया है कि जो लोग दूसरों की, जरूरतमंदों की मदद करते हैं, उन्हें तनाव कम रहता है, मानसिक शांति और आनंद का अनुभव होता है। वे अपने को अपनी आत्मा से ज़्यादा जुड़े हुए महसूस करते हैं, और उनका जीवन संतोषपूर्ण होता है। जबकि स्पर्धा से खुद को और दूसरों को तनाव रहता है। कभी किसी ज़रूरतमंद की मदद करके देखिये सारी परेशानियां गायब नज़र आएंगी। बहुत से लोग गरीब और लाचार तथा मजबूर लोगों को देखकर मुंह बिगाड़ते हैं या उन्हें डांटकर भगा देते हैं। लेकिन ज़रा सोचिये अगर आप उनकी मदद करेंगे, तो उसको ख़ुशी मिलेगी और उसकी ख़ुशी देखकर आप को भी अदंर से जो सुकून, जो शान्ति मिलेगी वह बड़ी अनमोल होगी। उससे बड़ी कोई चीज़ हो ही नहीं सकती। इससे आपकी सोच में सकारात्मकता बढ़ेगी। इसलिए हर दिन किसी न किसी जरुरतमंद की मदद करना अपनी आदत में शामिल कर लें।
१० - अपना पसंदीदा या कोई नया काम सीखें
प्रत्येक व्यक्ति का अपना कुछ न कुछ शौक होता है। शौक हमें आनंद देते हैं। शौक रखने से हमें ऊबन नहीं होती। दुनियां में प्रत्येक व्यक्ति की अपनी मनोवृत्ति और प्रवृत्ति होती है, उसकी रुचि और कामना भी अलग-अलग प्रकार की होती है। जिससे व्यक्ति खुले दिमाग से किसी कार्य को कर पाता है ,आनंद उठा पाता है। यह हमें कई तरह की मानसिक बीमारियों से बचाता है। शौक किसी भी व्यक्ति में उसकी अन्य आदतों में से एक विशेष रुचि को प्रदर्शित करता है जो उसकी सारी आदतों से अलग होता है। अपने पसंदीदा काम या अपनी किसी हॉबी, जो समयाभाव के कारण अधूरा रह गया है उसे सीखें, पूरा करें। जैसे की खाना बनाना, पेंटिंग करना, लिखना, पढ़ना, पढ़ाना, लोगों से बात करना, अपनी रुचि का खेल खेलने की शुरुआत करें। इससे अपने आपको व्यस्त रख पाएंगे और आपकी नई चीजें के बारे में सोचने और और उन्हें खोजने की आदत बनेगी। साथ ही आपकी रचनात्मकता भी निखरेगी।
११ - रोज़ाना किताब पढ़ने की आदत डालें
किताबों को पढ़ने से व्यक्ति खुशहाल रहता है और व्यस्त रहता है। यह आनंद, ज्ञान, प्रोत्साहन और सूचना का अच्छा स्रोत है। यह हमें अनुशासन, न्यायप्रिय,विश्वसनीय, समय का पाबंद और इससे भी अधिक महत्वपूर्ण एक सफल व्यक्ति बनाता है। रोज़ाना किताब पढ़ना आपके दिमाग़ और विचारों को खोलने में मदद करेगा। इससे आप ख़ुद के विकास के लिए समय दे पाते हैं। कुछ नया सोचने की क्षमता विकसित होती है। एक दिन में अपनी पसंद की किताब के 15-20 पन्नो को पढ़ना आपकी चीज़ों को देखने की धारणा और सोच को बदल देगा। इसकी शुरुआत अच्छी, सकारात्मक और प्रेरक किताबों से करें।
१२ - जीवन में सिर्फ बुराई ही नहीं
जीवन में बुराई अवश्य हो सकती है मगर जीवन बुरा कदापि नहीं हो सकता। जीवन एक अवसर है श्रेष्ठ बनने का, श्रेष्ठ करने का, श्रेष्ठ पाने का। जीवन की दुर्लभता जिस दिन किसी की समझ में आ जाएगी उस दिन कोई भी व्यक्ति जीवन का दुरुपयोग नहीं कर सकता। जीवन वो फूल है जिसमें कांटे तो बहुत हैं मगर सौंदर्य की भी कोई कमी नहीं। ये और बात है कुछ लोग कांटों को कोसते रहते हैं और कुछ सौंदर्य का आनन्द लेते हैं। जीवन को बुरा सिर्फ उन लोगों के द्वारा कहा जाता है जिनकी नजर फूलों के बजाय कांटों पर ही लगी रहती है।
सोच बदलने का फेर है। किसी बुरे दौर से गुजरने वाले हर व्यक्ति को पता होना चाहिए की जीवन में जहां बुराई है, वहीं अच्छाई भी है। हर दौर को अगर अपने जीवन का एक अनुभव मानकर चलें तो नकारात्मक भावों का मन पर प्रभाव कम पड़ता है।