शुक्रवार, 3 जुलाई 2020

क्या तनाव लेने से कमजोर हो जाती है आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी)? जानें विशेषज्ञों की राय और तनाव कम करने के तरीके


आजकल के जीवन में तनाव हम सबकी जिंदगी का एक हिस्‍सा बन गया है। समय की कमी, व्‍यक्तिगत समस्‍याओं और काम की चिंता और बोझ के कारण तनाव होना आम बात है। यही सब कारक हैं, जो तनाव या चिंता को पैदा करते हैं और लंबे समय तक बने रहने के बाद स्थिति को और भी बदतर कर देते हैं। आप में से बहुत से लोगों ने तनाव के कई कारणों के बारे में सुना होगा और तनाव का शरीर पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जानते होंगें। तनाव का हमारे मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के साथ-साथ शारीरिक स्‍वास्‍थ्‍य पर कई तरह के बुरे प्रभाव दिखाई देते हैं और यह प्रभाव व्‍यक्ति विशेष में अलग अलग हो सकता है ।


बहुत से लोग तनाव के दुष्परिणामों और प्रभावों के बारे में जागृत नहीं होते हैं, जिसके कारण उन्हें इसे नियंत्रित करने में देरी होती है। आपने तनाव के कुछ आम लक्षणों के बारे में सुना होगा, जिसमें वजन बढ़ना या घटना, लगातार सिरदर्द बने रहना, भूख में कमी या वृद्धि होना और हृदय रोगों के खतरे का बढ़ना आदि कई लक्षण हो सकते हैं। इसके अलावा तनाव के कारण आपकी त्‍वचा और बालों पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। लेकिन यहां पर हम तनाव के एक अन्‍य अनसुने प्रभाव के बारे में बात करेंगें। वह है तनाव का हमारे प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्‍युन सिस्‍टम) पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में - यहां हम जानेंगें कि तनाव कैसे हमारे प्रतिरक्षा प्रणाली ( इम्‍युन सिस्‍टम) को प्रभावित करता है।

तनाव हमारे शरीर और मन दोनों पर ही बुरा असर डालता है। तनाव का हमारे प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्‍युन सिस्‍टम) पर कैसे असर होता है, इस बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि,प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्‍युन सिस्‍टम) की वजह से ही हमारा शरीर बीमारियों से हमारी सुरक्षा करता है। लेकिन जब हम तनाव में होते हैं, तो इससे हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्‍युन सिस्‍टम) कमजोर होता है। यदि हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) मजबूत होती है , तो कोई भी वायरस, बैक्टीरिया या कोई अन्य विषाक्त जीवाणु हमारे शरीर पर हमला नहीं कर पाते हैं । लेकिन प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) कमजोर होगी, तो बीमारियां हमारे शरीर पर आसानी से हमला कर सकती हैं।

डाक्टरों के अनुसार, COVID-19 के इस प्रकोप के समय में लोगों के मन में डर के कारण तनाव की स्थिति पैदा हो रही है , जो प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्‍युनिटी सिस्टम ) को कमजोर कर रही है। इसके पीछे के दो कारण हैं, जिसमें डर और तनाव इसके प्रमुख कारण हैं। वायरस के खौफ के कारण जब हम स्‍ट्रेस में आते हैं, तो हमारी इम्‍युनिटी कमजोर हो जाती है। इसके अलावा, तनाव के कारण हम गलत आदतों को अपनाते हैं, जिसमें- स्‍मोकिंग, ड्रिंकिंग और गलत समय पर सोना या नींद में गड़बड़ी आदि शामिल है। यह सभी आपको तनाव में डालते हैं और धीरे-धीरे आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली पर भी प्रभाव डालते हैं। जिसके कारण हम जल्‍दी-जल्‍दी बीमार पड़ने लगते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है, हमारा मन और शरीर एक दूसरे से जुड़े हुए हैं, हमारा मन या माइंड जैसा निर्देश देता है वैसा ही हमारा शरीर काम करता है। जिस प्रकार से हमारे दिमाग में विचार आएंगे वैसा ही परिणाम हमको मिलता है। यदि हम ख़ुशहाल रहेंगे, तो हमारा शरीर स्‍वस्‍थ रहता है , लेकिन अगर हम हमेशा नकारात्‍मक विचारों को अपने मन में लाते रहेंगे, डर, चिंता या तनाव में बने रहेंगे, तो उसका शरीर पर भी वैसा ही प्रभाव पड़ेगा।


तनाव के कारण पड़ने वाले शारीरिक प्रभाव -


तनाव के शारीरिक प्रभाव मुख्तः न्यूरो-एंडोक्राइनो-इम्युनोलॉजिकल मार्ग से उत्पन्न होते हैं। तनाव होने के चाहे जो भी कारण हों पर उनके प्रति शरीर की प्रतिक्रिया सदैव एक समान रहती है। नीचे हमारे शरीर के ऊपर पड़ने वाले तनाव के शारीरिक प्रभाव दिए जा रहे हैं:

दिल की धड़कन अर्थात हृदय का स्पंदन बढ़ जाता है।सांस की रफ़्तार बढ़ जाती है, और इसकी लंबाई छोटी हो जाती है।थरथराहट होने लगती है।
जुकाम, अत्यधिक चिपचिपाहट / पसीना छूटना, गीली भौंहें
मांसपेशियों का कड़ापन, उदरीय मांसपेशियों का कड़ापन दिखना, तने हुए हाथ तथा पैर, दबे हुए जबड़े जहां दांत एक-दूसरे के साथ गुंथे हों।डिस्पेप्सिया /आंत में व्यवधान, बार-बार पेशाब के लिए जाना, बाल झड़ना, 

तनाव के कारण होने वाले मानसिक प्रभाव


यदि पहचान न की जाए और सही तरीके से सुधारा न जाए तो तनाव के मानसिक प्रभाव कई रूप में दिखाई पड़ते हैं। यह बात अच्छी तरह से ध्यान रखिये कि, यदि भावनात्मक तनाव को शीघ्र दूर नहीं किया गया तो इससे कई प्रकार की मानसिक बीमारियां उत्पन्न हो सकती हैं और उससे शारीरिक परेशानी भी उत्पन्न हो सकती है। तनाव के कारण होने वाले कुछ  सामान्य मानसिक प्रभाव कुछ इस प्रकार होते हैं: जैसे - ध्यान एकाग्र करने में परेशानी होना। निर्णय न ले पाना। आत्मविश्वास की कमी। चिड़चिड़ापन होना या बार-बार गुस्सा आना। अत्यधिक लोभ वाली लालसा का पैदा होना। बेवजह चिंता करना, असहजता तथा चिंता। बेवजह भय सताना। अनजान चीजें घटने का भय होना। घबड़ाहट का दौरा। गहरे भावनात्मक तथा मूड विचलन।




तनाव के कारण व्यवहार पर पड़ने वाले वाले प्रभाव



नीचे तनाव के कुछ व्यवहारगत प्रभाव दिए जा रहे हैं: जैसे -

अत्यधिक धुम्रपान करना , नर्वस होने के लक्षण, शराब या ड्रग्स का अत्यधिक सेवन। नाखून चबाने तथा बाल खींचने जैसी आदत। अत्यधिक तथा काफी कम खाना। मन का कहीं और खो जाना। जब-तब दुर्घटना का शिकार होना।जरा-जरा सी बात पर आक्रामक होना।

यह देखा गया है कि व्यवहारगत तनाव के काफी खतरनाक परिणाम होते हैं और इससे अभिव्यक्ति तथा सामाजिक संबंध प्रभावित होते हैं। कुछ प्रकार के क्रॉनिक तथा अधिक आंतरिक तनाव अकेलेपन, गरीबी, वियोग, भेदभाव के कारण पैदा होने वाले अवसाद व हताशा से उपजते हैं, जिससे विषाणु के आक्रमण से लड़ने की शरीर की क्षमता कम हो जाती है और जुकाम, हर्पीस से लेकर एड्स व कैंसर जैसी बीमारियां पैदा हो जाती हैं।

तनाव अन्य हॉर्मोनों, मस्तिष्क न्युरो-ट्रासमिटरों, अन्य हिस्सों में थोड़े अतिरिक्त रसायनिक संदेशों, प्रोस्टैग्लैंडिंस और साथ ही अहम एंजाइम सिस्टम व चयापचय क्रियाओं पर अपने प्रभाव छोड़ सकता है, जिनके बारे में अभी पूरी जानकारी नहीं उपलब्ध है। 


तनाव से बचने के लिए क्‍या करें 


तनाव से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि आप अपने खानपान पर ध्‍यान दें, और नियमित व्‍यायाम करें। आप हरी सब्जियां, फलों और सात्‍विक भोजन करें। इसके अलावा, आप मेडिटेशन यानि ध्‍यान करके तनाव को दूर कर सकते हैं। आप हमेशा नकारात्‍मक विचारों से बचने के लिए पॉजिटिव सोचें, सुबह की धूप लें और खुश रहने की कोशिश करें।अपनी सीमा को जानें और हमेशा उसका ध्यान रखें। व्यक्तिगत हो या व्यावसायिक जीवन हो, आप क्षमता से अधिक जिम्मेदारी लेने से बचें। क्षमता से अधिक जिम्मेदारी उठाने से आप तनाव के शिकार हो सकते हैं।अपनी भावनाओं को दबाने की बजाएं उसे व्यक्त करें। यदि कोई व्यक्ति या कोई चीज़ आपको परेशान करती है तो उसके बारे में आप उस व्यक्ति से खुलकर पर सम्मानपूर्ण तरीके से बात करें। यदि आप अपनी भावनाओं का इज़हार नहीं करेंगे तो आपके मन में असंतोष पैदा होगा और स्थिति जस की तस बनी रह सकती है।

सैर पर जाएं। प्रकृति के साथ वक्त बिताएं। किसी अच्छे दोस्त को कॉल करें। अपने बगीचे में बागवानी करें। अच्छी पुस्तक पढ़ें। संगीत का आनंद लें। कॉमेडी फिल्म का मज़ा उठाएं।विश्राम करने का वक्त निकालें। अपने दैनिक कार्यक्रम में विरान तथा आराम करना शामिल करें। उस समय में दूसरा का न करें। यह ऐसा वक्त होगा जब आप हर चीज से मुक्त होकर अपने आप में नई ऊर्जा भरेंगे।

दूसरों के साथ जुड़िए। सकारात्मक विचारों वाले व्यक्तियों के साथ वक्त गुजारिए, जिससे आपको जीवन में नई ऊर्जा मिलेगी और तनाव के नकारात्मक प्रभावों से मुकाबला करने की क्षमता में वृद्धि आएगी। हर दिन आनंद देने वाला कोई काम करें। हर दिन ऐसे क्रियाकलापों के लिए समय निकालें जिससे आपको आनंद मिलता है, जैसे तारों को देखना, पियानो बजाना अपनी बाइक चलाना।अपने हास्यबोध को बनाए रखें। इसमें अपने आप पर हंसना भी शामिल करें। हंसने से तनाव से मुक्ति मिलती है।