रविवार, 31 जनवरी 2021

5 किलोमीटर की दौड़ या मैराथॉन के लिए कैसे करें तैयारी ?/How to prepare for a 5 kilometer run or marathon?




जी हां, मैराथन ही नहीं आपको छोटी दूरी की दौड़ के लिए भी अच्छी तैयारी करनी चाहिए। बहुत से लोगों को लगता है कि 5 किलोमीटर की दौड़ में भाग लेने के लिए कोई खास तैयारी की जरुरत नहीं होती है बस उठे और दौड़ लिए उसमें क्या है ? लेकिन ऐसा नहीं है यदि आप बिना किसी तैयारी के लंबे मैराथॉन या 5 किलोमीटर की दूरी की दौड़ लगते हैं तो आपको नुकसान हो सकता है। आपकी सेहत ख़राब हो सकती है, शरीर में खिंचाव आ सकता है, मांसपेशियों में दर्द हो सकती है जिससे आपको मुश्किल हो सकती है। 




यदि आप 5 किलोमीटर की दौड़ या मैराथॉन में हिस्सा लेना चाहते हैं तो ऐसे करें तैयारी।

सही जूते पहनें: 

दौड़ने के लिए सबसे जरुरी चीज है अच्छी किस्म के जूते। यदि आप लम्बे समय तक दौड़ना चाहते हैं तो सबसे पहली चीज़ जो है वह है अच्छी किस्म का और वजन में हल्का जूता। आप उचित ढंग से तब तक नहीं चल या दौड़ सकते, जब तक कि आप सही जूते नहीं पहनते। रनिंग शूज़ का प्रमुख काम है आर्च और स्ट्राइड को पर्याप्त सपोर्ट देना। हमेशा जूते खरीदते समय ध्यान रखना चाहिए कि जूते न तो बहुत टाइट हों नहीं ढ़ीले। सीमलेस मोज़े चुनें और सुनिश्चित करें कि ये नमी सोखने वाले हों। इस तरह वह आपके पैरों को सूखा रखेंगे। इसके अलावा आपके कपड़े भी आरामदायक होने चाहिए।

एक योजना बनाएं: 

मैराथॉन हो या छोटी दौड़ उसमें भाग लेने के लिए हमेशा अच्छी तैयारी करनी चाहिए, न की अचानक उठे और हो गए दौड़ने के लिए तैयार। दौड़ने के लिए एक प्लान बनाएं, किसी ट्रेनर या कोच से सलाह लें या किसी लोकल रनर्स ग्रुप में शामिल हो जाएं। एक अच्छा प्लान बनाकर धीमी शुरूआत करें और फिर धीरे-धीरे तेज दौड़ने का अभ्यास करें। शुरुवात में समय और दिन सीमित रखें। पहले हफ्ते में 3 दिन 20 मिनट तक दौड़ लगाना एक अच्छी शुरुआत हो सकती है। हर हफ्ते समय बढ़ाते जाएं ताकि शरीर अभ्यस्त हो सके। योजना ऐसा बनाएं कि पूरे सप्ताह के दिनों का इस्तेमाल किया जा सके और 2 ट्रेनिंग सेशन्स के बीच ज़्यादा अंतर ना हो।

दौड़ से पूर्व कुछ निर्धारित कार्यक्रम का पालन करें: 

दौड़ने से पहले नियमित रुप से वार्म अप जरुर करें। हर दिन दौड़ के अभ्यास की शुरुवात वार्म-अप के साथ शुरू होता है। इससे शरीर की स्ट्रेचिंग होती है और खून का बहाव तेज़ हो जाता है। कुछ स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़, वॉकिंग लंजेस और स्ट्रेट लेग किक्स करें। इससे मांसपेशियों की स्ट्रेचिंग होगी। आपका शरीर लचीला बनेगा और शरीर को नुकसान भी कम होगा। शरीर फुर्तीला बनता है और दौड़ने की गति तेज हो जाती है। 

धीमी शुरुआत करना:

धीरे-धीरे शुरूआत करें। आरामदायक गति से चलते रहें। थोड़ी देर तेज गति से दौड़ें फिर थोड़ी देर आराम से चलें। हमेशा सही गति से दौड़ें, सही गति का अर्थ है यदि आप दौड़ते हुए बिना सांस फूले आराम से बात कर  ले रहे हैं, तो वही सही गति है। कुछ लोग शुरुआत में बहुत तेज चलने की ग़लती करते हैं और फिर 10 मिनट के बाद उनके लिए चलना मुश्किल हो जाता है क्योंकि वे बहुत ज़्यादा थक जाते हैं। अगर चलना बहुत कठिन लगता है, तो बीच-बीच में थोड़ी-थोड़ी देर के लिए जॉग करते हुए ब्रिस्क वॉक करें। फिर थोड़ी ज़्यादा देर तक जॉगिंग करें और अंत में धीरे-धीरे चलें।

गति पर नहीं  समय पर फोकस करें: 

शुरुआत में गति या दूरी पर ध्यान केंद्रित न करें। इसके बजाय, समय पर फोकस करें। शरीर धीरे-धीरे उस दूरी तक चलने के लिए खुद ब खुद तैयार हो जाएगा और आप ज़्यादा मेहनत करने के लिए तैयार होंगे। इसलिए, धीरे-धीरे समय और डिंस्टेंस या दूरी में बढ़ोतरी करें। शुरु-शुरु में लोगों को अपनी स्पीड बढ़ाने की बजाय दूरी बढ़ाने पर ध्यान देना ज़रूरी है। फिनिश लाइन तक पहुंचने से पहले ढेर होने की बजाय, आराम से दौड़ कर फिनिश लाइन तक पहुंचना बेहतर होता है।

दौड़ने के बाद स्ट्रेचिंग करना ना भूलें: 

दौड़ने से मांसपेशियों में तनाव पैदा हो जाता है, और उन्हें चोट लगने की संभावना बढ़ जाती है। इससे बचने का एक ही तरीका है, दौड़ने के बाद सही तरीके से स्ट्रेचिंग करने के साथ उस तनाव को खत्म करना। दौड़ने के बाद 5 मिनट ब्रिस्क वॉक करें और उसके बाद स्ट्रेचिंग करें।

सही खाना खाएं:

 
चलने से शरीर की ऊर्जा ख़त्म होती है और शरीर में ग्लाइकोजेन लेवल कम हो जाता है। दौड़ने से पसीना निकलता है जिससे शरीर में पानी की मात्रा भी काम होने की संभावना बढ़ जाती है। इसीलिए लंबी दौड़ के बीच में थकावट होने पर या प्यास लगने पर बीच - बीच में ग्लूकोज पानी पीएं। इससे शरीर को कैलोरी मिलती है और आपका शरीर सही तरीके से काम कर पाता है। सही समय पर पौष्टिक और संतुलित भोजन खाना महत्वपूर्ण है। ट्रेनिंग के दौरान संतुलित और पौष्टिक भोजन खाएं। वॉक या मैराथॉन से एक सप्ताह पहले, आप को संतुलित और पौष्टिक  कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन खाना चाहिए, लेकिन चर्बी वाले खाद्य पदार्थ और, शराब तथा धूम्रपान से बचना चाहिए ।

शुक्रवार, 29 जनवरी 2021

आप 5 किमी की दौड़ कैसे जीत सकतें हैं ? जानें सब कुछ।

 

यदि आप दौड़ प्रतियोगिता में भाग लेते हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। प्रतियोगिता के दौरान किन-किन बातों का ध्यान रखना है, जानें यहाँ । .. 





  1. प्रतियोगिता शुरु होने से पहले मैदान पर पहुंच जायें : ध्यान रखें प्रतियोगिता शुरू होने से लगभग एक घंटे पहले मैदान पर पहुंच जाए, जिससे आपको मानसिक शांति और आराम मिलेगा।  तैयार होने के लिए पर्याप्त समय मिल जायेगा। प्रतियोगिता से संबंधित सूचनायें  और जानकारी आपको मिल जाती है। 
  2. वार्म अप और स्ट्रेचिंग करें :   प्रतियोगिता शुरू होने के 30 मिनट पहले वार्म अप और स्ट्रेचिंग ज़रूर करें ऐसा करने से आपकी मांसपेशियां सक्रीय हो जाती हैं और आप तेज दौड़ने में समर्थ हो जाते हैं।
  3. धैर्य बनाये रखें : यदि आप लम्बी दौड़ में भागीदारी कर रहें है तो एक बात का हमेशा ध्यान रखें, धैर्य के साथ प्रतियोगिता में भाग लें। घबरायें नहीं। प्रतियोगिता जीतने के लिए अपने दौड़ने की एक रुपरेखा बनायें और उसी के अनुसार दौड़ें। पहले से ही तय कर लें कि कब आपको तेज दौड़ना है और कब धीरे। अपनी योजना को अधिक  अधिक फॉलो करने का प्रयास करें
  4. अपनी क्षमता को ध्यान में रखें : अपनी कार्य योजना तैयार करते समय इस बात का ध्यान रखें कि  क्या आपकी क्षमता क्या है ? उसी के अनुसार अपनी कार्य योजना बनायें। आप चाहे तो अपनी दौड़ को छोटे - छोटे हिस्सों में बाँट सकतें है जिससे आप जल्दी थकेंगे नहीं और तेजी से भाग पायेंगे आगे बढ़ेंगे।
  5.  अपनी बॉडी को दें हीट: प्रतियोगिता की शुरुवात के पहले एक से दो किलोमीटर तक औसत गति से दौड़ें, इससे आपकी सांसों और कदमो का अच्छा तालमेल बना रहेगा। आप अपनी गति को बिना थके बढ़ा सकतें हैं और लंबे समय तक बिना रुके बिना थके दौड़ पायेंगे। प्रतियोगिता में  परिणाम पा सकेंगे। 
  6. टारगेट का रखे ध्यान: आप अपनी स्पीड को उतनी ही रखें जितने में आप लक्ष्य प्राप्त कर पाए. स्पीड को मेंटेन रखें और हमेशा टारगेट को ध्यान में रखें तभी आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। 
  7. आखिरी एक किमी को ऐसे तय करें: जब आपका आखिरी में एक किमी बचा हो तो अपनी साँसों को लम्बा-लम्बा लेते हुए अपनी स्पीड को बढ़ाये आखिरी समय में गर्दन ऊपर उठाकर अपने सीने को आगे की तरफ फुला लें। अपनी बॉडी का तालमेल रफ्तार के साथ बनाये रखें।
  8. दौड़ने में पंजों का करें प्रयोग: जब दौड़ में आखिरी समय रह गया हो तो अपने पंजो पर दौड़े और अपने हाथों को तेजी से चलाये ऐसा करने से आपकी बॉडी आगे की ओर तेजी से बढ़ेगी।

 



बुधवार, 27 जनवरी 2021

5 किलोमीटर दौड़ने में औसतन कितना समय लगना चाहिए? What Is the Average 5K Time? On an average how long should it take to run 5 kilometers?

 जो लोग अभी दौड़ने के बारे में सोच रहे हैं, उनके लिए 5 किलोमीटर की दूरी तय करने का लक्ष्य रखना योग्य है। क्योंकि इस दूरी के लक्ष्य को आसानी से हासिल किया जा सकता है। 


हालाँकि अगर आप अभी तक कभी 5 किलोमीटर की दूरी नहीं दौड़े हैं, लेकिन फिर भी उचित प्रशिक्षण कार्यक्रम को समर्पण भाव से अपनाकर कुछ महीनों में इस लक्ष्य साध्य किया जा सकता है।

यदि आप 5 किलोमीटर दौड़ते हैं तो भले ही आपको कुछ परिणाम न मिले, लेकिन आप अपने आप में ख़ुशी महसूस करेंगे। लेकिन आपको स्वाभाविकरुप से यह जानना जरुरी है कि आप यह दूरी जितने समय में तय करते हैं वह औसत से अधिक है या कम।

उम्र, लिंग और फिटनेस स्तर जैसे कारक आपके 5 किलोमीटर की दूरी को तय करने में लगने वाले समय को प्रभावित कर सकते हैं। कई धावक 30 से 40 मिनट में 5 किलोमीटर की दूरी दौड़ कर पूरा करते हैं, और कई ऐसे धावक भी हैं जो यदि इस बेंचमार्क के आसपास भी पहुँच जाते हैं तो भी अपनी गति से संतुष्ट होते हैं। औसत धावक 45 से 60 मिनट में 5 किलोमीटर की दूरी दौड़ लेते हैं

उम्र और लिंग के अनुसार 5 किलोमीटर दूरी तय करने में लगने वाला औसत समय 

हालाँकि जब 5 किलोमीटर की दूरी तय करने में लगने वाले औसत समय को निर्धारित करने की बात आती है तो इसमें आयु एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आप नीचे दिए गए चार्ट में देख सकते हैं कि, कुछ आयु समूह के लोग अपने से छोटे उम्र के धावकों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करते हैं, उनका औसत बेहतर होता है। मोटे तौर पर आप 5 किलोमीटर की दूरी तय करने में लगने वाले औसत समय के दिशानिर्देश के लिए नीचे दी गयी सारिणी का उपयोग कर सकते हैं। इस सारिणी से आपको दौड़ शुरू करने के बारे में कुछ आधार मिल सकता है और आप अपना लक्ष्य निर्धारित कर सकते हैं।

Age groupMenWomen
0 to 1534:4337:55
16 to 1929:3937:39
20 to 2429:2736:22
25 to 2931:0936:16
30 to 3431:2738:41
35 to 3933:4437:21
40 to 4432:2638:26
45 to 4933:1339:19
50 to 5434:3041:20
55 to 5937:3345:18
60 to 6440:3345:49
65 to 9942:5950:13

दौड़ की शुरुवात करने वालों के लिए औसत

यदि आप हर 8 मिनट में एक मील दौड़ते हैं, तो आप अपने 5 किलोमीटर की दूरी को 25 मिनट से कम समय या उसके आस - पास में पूरी कर सकते हैं। हालांकि, कई लोगों के लिए यह करना आसान नहीं होता है, इसलिए शुरुआत करने वाले लोगों को लगभग 9 से 13 मिनट में एक मील दौड़ने का लक्ष्य रखना चाहिए।

कुछ हफ्तों या महीनों के लिए एक फिटनेस योजना तैयार करें। तैराकी, साइकलिंग और छोटी दूरी की दौड़ जैसे कम प्रभाव वाले व्यायाम के साथ अपनी दौड़ने की दिनचर्या को संतुलित करें।

औसत समय और गति

हर रोज दौड़ने वाले लोग लगभग 9 से 12 मिनट में एक मील पूरा करने का लक्ष्य रख सकते हैं। इसका मतलब है कि आप 5 किलोमीटर को लगभग 28 से 37 मिनट में पूरा कर लेंगे।

टहलने या चलने वाले लोग लगभग 15 से 20 मिनट में एक मील पूरा करने का लक्ष्य रख सकते हैं।इस गति से चलने वाले लोग एक घंटे के आसपास 5 किलोमीटर की दूरी का लक्ष्य हासिल करने में समर्थ हो पाते हैं।

तेज गति पाने के लिए कुछ उपाय 

फिट रहने और चलने की गति में सुधार करने के लिए, कुछ हफ्तों या महीनों में धीरे-धीरे आदत बनाने पर ध्यान दें। आप अपने दौड़ने के औसत समय को और बेहतर बनाने के लिए नीचे दिए गए कुछ सुझावों पर विचार कर सकते हैं :

  • स्वस्थ जीवनशैली अपनायें, जैसे कि स्वस्थ आहार खाएं और भरपूर नींद लें।
  • दौड़ना (रनिंग वर्कआउट) शुरू करने से पहले हमेशा कम से कम 10 से 15 मिनट तक हल्की गति से शुरुआत  (वार्मअप) करें, और शांति (कूलडाउन)के साथ खत्म करें।
  • अंतराल प्रशिक्षण करके अपनी सहनशीलता शक्ति और गति में सुधार करें, और एक ट्रेडमिल, असमान इलाके और पहाड़ियों पर चलने के लिए इसे परिवर्तित करें।
  • शक्ति प्रशिक्षण के साथ अपनी दौड़ने की दिनचर्या को संतुलित करें, और अपने शरीर को ढीला और लचीला बनाए रखने के लिए बहुत सारे स्ट्रेच अपने दिनचर्या में शामिल करें।
  • गति का निर्माण करने के लिए, अपनी सहनशीलता और मांसपेशियों को बढ़ाने के लिए काम करें। मध्यम और उच्च-तीव्रता वाले वर्कआउट के बीच अपने वर्कआउट्स को विभाजित करें, और सहनशक्ति क्षमता बढ़ाने वाले व्यायाम के अन्य रूपों को शामिल करें, जैसे कि बाइकिंग, वॉलीबॉल, या तैराकी।
  • अपने शरीर को विभिन्न तरीकों से घुमाने के लिए सप्ताह में कम से कम एक बार योग, ताई ची, या नृत्य का प्रयास करें।
  • हमेशा हफ्ते में कम से कम पूरा एक दिन अपने शरीर को पूर्ण आराम करने दें।
  • यदि आप दौड़ने के लिए एकदम नए हैं, तो 20- से 30 मिनट के सत्रों के साथ शुरू करें, और धीरे-धीरे अवधि बढ़ाएँ, जिससे आप अधिक फिट रह सकें।

मध्यांतर प्रशिक्षण

तीव्रता, दूरी और समय बदलकर अपने वर्कआउट में विभिन्नता लायें। हर दिन एक जैसी दौड़ न लगायें। एक निर्धारित समय के लिए अपने आप को जितना संभव हो उतना कठिन मेहनत करके अपनी मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए अंतराल प्रशिक्षण का उपयोग करें, और फिर एक दिन पूरा आराम करें जिससे मांसपेशियों को मजबूती तथा स्वास्थ्य लाभ होता है। 

एक उदाहरण जैसे 1 मिनट के कठिन अभ्यास के बाद 2 मिनट के लिए आसान अभ्यास करना और ऐसा 4 बार करना है, इस तरह कुल मिनट का अभ्यास होगा।  या आप 2 से 5 मिनट तक तेज गति से दौड़ें और उतने ही समय तक जॉगिंग करें, ऐसा 4 से 6 बार करें। 

यदि आप पहले से ही धावक हैं, तो 5 किलोमीटर दौड़ना अपने आप को चुनौती देने का एक शानदार तरीका है, या यदि आप पहली बार दौड़ना शुरू कर रहे हैं तो अपने लिए एक लक्ष्य निर्धारित करें।

अपने आप को गति देकर आप अपनी रफ़्तार, सहनशीलता और ताकत का निर्माण करते हैं, लेकिन साथ ही साथ अपने आप को चुनौती देना भी सुनिश्चित करें। इसके साथ आनंद उठायें, और अपनी प्रगति को अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ को पाने के लिए प्रेरणा के रूप में उपयोग करें।

सोमवार, 25 जनवरी 2021

बुनियादी भावनाओं के 6 प्रकार और मानव व्यवहार पर उनका प्रभाव /The 6 Types of Basic Emotions and Their Effect on Human Behavior.


कई अलग-अलग प्रकार की भावनाएं हैं जो हमारे रहन - सहन और व्यवहार तथा दूसरों के साथ बातचीत करने के तरीके को प्रभावित करते हैं। कभी - कभी ऐसा लगता है कि यही भावनायें हमारी जिंदगी को चला रही हैं। हम इन्हीं भावनाओं से प्रेरित होते हैं, प्रभावित होते हैं। हम जो विकल्प चुनते हैं, जो कार्य करते हैं, और जो धारणाएँ बनाते हैं, वे सभी उन भावनाओं से ही प्रभावित होती हैं जिन्हें हम उस समय अनुभव कर रहे होते हैं।


मनोवैज्ञानिकों ने उन विभिन्न प्रकार की भावनाओं की पहचान करने की कोशिश की है जो लोग अनुभव करते हैं।कुछ अलग सिद्धांत उन भावनाओं को वर्गीकृत करने और समझाने के लिए सामने आए हैं जो लोग महसूस करते हैं।



बुनियादी या मूलभूत भावनायें 


1970 के दशक के दौरान, मनोवैज्ञानिक पॉल एकमैन ने छह बुनियादी भावनाओं की पहचान की, उन्होंने यह सुझाव दिया कि सभी ये भावनायें सभी मानव संस्कृतियों में सार्वभौमिक रूप से अनुभव की गयी हैं। उन्होंने जिन भावनाओं की पहचान की, वे हैं खुशी, उदासी, घृणा, भय, आश्चर्य और क्रोध।बाद में उन्होंने गर्व, शर्म, शर्मिंदगी और उत्तेजना जैसी चीजों को शामिल करने के लिए बुनियादी भावनाओं की अपनी सूची का विस्तार किया।

भावनाओं का मेल


मनोवैज्ञानिक रॉबर्ट प्लचिक ने "भावनाओं का पहिया" की संकल्पना सामने रखा, जो रंग पहिया की तरह काम करता है। जैसे मूल रंगों को एक साथ मिलकर कई अलग - अलग रंग बनाये जाते हैं ठीक उसी तरह भावनाओं को भी विभिन्न भावनाओं को बनाने के लिए जोड़ा जा सकता है। 

इस सिद्धांत के अनुसार, कई बुनियादी भावनाएं एक साथ मिलकर नयी भावनाओं का निर्माण करती हैं, जैसे कोई इमारत बनाने में कई ईंट आपस में मिलकर इमारत की दीवार बनाते हैं ठीक उसी तरह कई भावनायें मिलकर काम करती हैं। कभी-कभी अधिक मिश्रित भावनाएं, इन बुनियादी भावनाओं का जटिल मिश्रण बन जाती हैं।उदाहरण के लिए, खुशी और विश्वास जैसी बुनियादी भावनाओं के मिश्रण से पैदा होने वाली भावनाओं को 'प्यार' का नाम दिया जा सकता है।

2017 के एक अध्ययन से पता चलता है कि पहले की तुलना में कहीं अधिक बुनियादी भावनाएं हैं।1 प्रोसीडिंग्स ऑफ नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने भावनाओं की 27 विभिन्न श्रेणियों की पहचान की।

हालांकि, पूरी तरह से अलग होने के बजाय, शोधकर्ताओं ने पाया कि लोग एक ढलान के साथ इन भावनाओं का अनुभव करते हैं। आइए कुछ बुनियादी भावनाओं के बारे में चर्चा करते हैं और मानव व्यवहार पर पड़ने वाले उनके प्रभाव के बारे में जानें।

1 - खुशहाली (Happiness)



सभी अलग-अलग प्रकार की भावनाओं में, खुशहाली एक ऐसी भावना है जिसे पाने के लिए लोग सबसे अधिक प्रयास करते हैं। खुशहाली को अक्सर एक सुखद भावनात्मक स्थिति के रूप में परिभाषित किया जाता है जो संतोष, खुशी, संतुष्टि, तृप्ति और कल्याण की भावनाओं के रुप में वर्णित किया जाता है।

1960 के दशक से खुशी पर अर्थपूर्ण शोध में काफी वृद्धि हुई है। 1960 के दशक के बाद से, विभिन्न प्रकार के वैज्ञानिक विषयों में खुशी अनुसंधान को आयोजित किया गया है, जिसमें जीरोन्टोलॉजी, सामाजिक मनोविज्ञान और सकारात्मक मनोविज्ञान, नैदानिक और चिकित्सा अनुसंधान और खुशी अर्थशास्त्र शामिल हैं। ख़ुशी की भावना कभी-कभी इन माध्यमों द्वारा व्यक्त की जाती है:

चेहरे के भाव: जैसे मुस्कुराना
शरीर की भाषा: बॉडी लैंग्वेज: जैसे कि एक आराम की मुद्रा के रूप में
आवाज़ का लहज़ा: बोलने का एक उत्साहित और सुखद तरीका

हालाँकि खुशी को बुनियादी मानवीय भावनाओं में से एक माना जाता है, जिन चीजों के बारे में हमें लगता है कि वे खुशी पैदा करती हैं, वे मुख्य रूप से संस्कृति से बहुत अधिक प्रभावित होती हैं। उदाहरण के लिए, आधुनिक लोकप्रिय संस्कृति कुछ चीजों को प्राप्त करने पर जोर देती हैं। जैसे घर खरीदना या उच्च वेतन वाली नौकरी प्राप्त करने से खुशी मिलेगी। 

वास्तव में खुशी पाने में जो चीजें योगदान करती हैं उसकी वास्तविकताएं अक्सर बहुत अधिक जटिल और बहुत अधिक व्यक्तिगत होती हैं। लोग लंबे समय से मानते हैं कि खुशी और स्वास्थ्य आपस में जुड़े हुए हैं, और अनुसंधान ने भी इस विचार का समर्थन किया है कि खुशी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उदाहरण के लिए, तनाव, चिंता, अवसाद और अकेलेपन को रोग प्रतिरोधक शक्ति में कमी होने, सूजन में वृद्धि, और जीवन से निराश होने का कारण के रुप में माना जाता है।  

खुशियों को विभिन्न परिणामों से जोड़ा गया है, जिसमें स्वस्थ और लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन में संतुष्टि में वृद्धि को शामिल किया जाता है। यानी कि यदि हमारे वैवाहिक जीवन में संतुष्टि है शांति है या हम स्वस्थ और लम्बी जिंदगी जी रहे हैं तो हमें खुशहाली अधिक मिलती है। वहीँ इसके विपरीत, कई प्रकार के खराब स्वास्थ्य को नाख़ुशी या दुःख का कारण माना जाता है।

2 - दुःख, उदासी या अवसाद (Sadness)



दुःख एक अन्य प्रकार की भावना है जिसे अक्सर एक क्षणिक अस्थाई भावनात्मक स्थिति के रूप में परिभाषित किया जाता है, निराशा, दुःख, लाचारी, ना उम्मीदी, उदासीनता, बुझी हुई मनोदशा जैसी भावनाओं के रुप में जाना जाता है। 

अन्य भावनाओं की तरह, दुःख भी कुछ ऐसी भावना है जो सभी लोग समय-समय पर अनुभव करते हैं।कुछ मामलों में, लोग लंबे समय तक और गंभीर प्रकार के दुख का अनुभव कर सकते हैं जो अवसाद में बदल सकते हैं। उदासी को कई तरीकों से व्यक्त किया जा सकता है:

चीखते हुए रोना 
उतरा हुआ चेहरा 
आलसपना 
वैराग्य 
दूसरों से दूर भागना 

उदासी की गंभीरता और प्रकार उसके मूल कारणों के आधार पर भिन्न - भिन्न हो सकती है, और लोग इस तरह की भावनाओं का अलग - अलग तरीके मुकाबला कर सकते हैं।

दुःख अक्सर लोगों को बुरे समय के साथ संघर्ष करने के विभिन्न कौशल को विकसित करने में मदद करता है। जैसे अन्य लोगों से बचना, स्व-चिकित्सा, नकारात्मक विचारों पर सोचने की क्षमता।इस तरह के व्यवहार वास्तव में उदासी की भावनाओं को बढ़ा सकते हैं और भावना की अवधि को लम्बा खींच सकते हैं।

3 - भय, डर (Fear)



डर एक शक्तिशाली भावना है जो अस्तित्व को बनाये रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। जब आप किसी प्रकार के खतरे का सामना करते हैं और भय महसूस करते हैं, तो आप उसका सामना उस तरीके से करते हैं जो आप जानते हैं या तो उस पर उड़ती हुई प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं।

आपकी मांसपेशियों में तनाव पैदा हो जाता है, आपकी सांसे तेज चलने लगती हैं और आपके दिल की धड़कन बढ़ जाती है, और आपका मन अधिक सतर्क हो जाता है, आपका शरीर खतरे को देखकर या तो खतरे से भागता है या उससे मुकाबला करता है।

यह प्रतिक्रिया यह सुनिश्चित करने में मदद करती है कि आप अपने वातावरण में खतरों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए तैयार हैं।

डर से इस प्रकार की भावनायें व्यक्त हो सकती हैं:

चेहरे के भाव:जैसे कि आँखें चौड़ी करना और ठुड्डी को पीछे खींचना
शरीर की भाषा: छिपने या भागने का प्रयास करना 
शारीरिक प्रतिक्रियाएँ: जैसे कि तेजी से सांस लेना और दिल की धड़कन का बढ़ जाना 

बेशक, हर कोई एक ही तरह से डर का अनुभव नहीं करता है। कुछ लोग डर और कुछ स्थितियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं या इस भावना से अपेक्षाकृत अधिक प्रेरित हो सकते हैं।
 
डर एक तात्कालिक खतरे की भावनात्मक प्रतिक्रिया है।हम प्रत्याशित खतरों के लिए भी इसी तरह की प्रतिक्रिया विकसित कर सकते हैं या संभावित खतरों के बारे में भी हमारे विचार, आम तौर पर हम चिंता के रूप में सोचते हैं।सामाजिक चिंता, उदाहरण के लिए, सामाजिक स्थितियों का एक अपेक्षित भय होता है।

दूसरी ओर, कुछ लोग वास्तव में डराने वाली स्थितियों की तलाश करते रहते हैं। खतरनाक खेल और अन्य रोमांचकारी परिस्थितियां भय उत्पन्न कर सकती हैं,लेकिन कुछ लोगों को यह अच्छा लगता है और वे ऐसी भावनाओं का आनंद भी लेते हैं।

किसी भी भयानक वस्तु या परिस्थितियों के बार-बार संपर्क में आने से हम उससे परिचित हो जाते हैं और अभ्यस्त हो जाते हैं, जिससे भय और चिंता की भावनायें कम हो सकती हैं। 
 
एक्सपोज़र थेरेपी के पीछे यही विचार काम करता है, जिसमें लोग धीरे-धीरे नियंत्रित और सुरक्षित तरीके से उन चीजों के संपर्क में आते हैं जो उन्हें डराते हैं।

4 - घृणा (Disgust)




एकमैन द्वारा वर्णित मूल छह बुनियादी भावनाओं में से एक घृणा भी है।घृणा को कई तरीकों से प्रदर्शित किया जा सकता है:

शरीर की भाषा (Body language):घृणा की वस्तु से दूर होना
शारीरिक प्रतिक्रियाएँ (Physical reactions): जैसे कि उल्टी या दस्त होना, उबकाई आना, जी मिचलाना या मितली आना।    
चेहरे के भाव (Facial expressions): जैसे कि नाक सिकोड़ना और मुंह बनाना या ऊपरी होंठ को घुमाना। 

घृणा की यह भावना कई चीजों से उत्पन्न हो सकती है जैसे कोई अप्रिय स्वाद वाली वस्तु खाने से, किसी अप्रिय दृश्य को देखने और अप्रिय गंध। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह भावना उन खाद्य पदार्थों की प्रतिक्रिया के रूप में विकसित हुई जो हानिकारक या घातक हो सकते हैं।उदाहरण के लिए, जब लोग ऐसे खाद्य पदार्थों की गंध लेते हैं या स्वाद चखते हैं जो खराब हो गए हैं, तो घृणा एक विशिष्ट प्रतिक्रिया के रुप में प्रकट होती है।

गंदगी, संक्रमण, खून, दुर्गंध और मृत्यु भी घृणा को पैदा कर सकती है। यह शरीर का उन चीजों से बचने का एक तरीका हो सकता है जो संक्रामक रोगों को बढ़ाने का कारण हो सकते हैं।
लोगों को नैतिक घृणा का अनुभव भी हो सकता है, जब वे किसी को अरुचिकर, अनैतिक, या बुरे व्यवहार में उलझे हुए देखते हैं।

5 - क्रोध या गुस्सा (Anger)




क्रोध विशेष रूप से एक शक्तिशाली भावना हो सकती है जो शत्रुता, आंदोलन, हताशा और विरोध की भावनाओं द्वारा पहचानी जाती हैं। डर की तरह क्रोध भी आपके शरीर को समस्या के साथ संघर्ष या मुकाबला के लिए तैयार कर सकता है या उड़ती हुई प्रतिक्रिया कर सकता है या समस्या से पीछे भाग सकता है। 

जब कोई खतरा क्रोध की भावनाओं को उत्पन्न करता है, तो आप खतरे से बचने और अपनी रक्षा करने के लिए इच्छुक हो जाते हैं। गुस्सा अक्सर इन माध्यमों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है:

चेहरे के भाव (Facial expressions): जैसे कि त्योरी चढ़ा हुआ या स्पष्ट रूप से कठोर दिखना या चहरे का तमतमाना।  
शरीर की भाषा (Body language): जैसे कि कड़ा रुख अपनाना या दूर करना
आवाज़ का लहज़ा (Tone of voice): जैसे कि कर्कश बोलना या चिल्लाना।
शारीरिक प्रतिक्रियाएँ (Physiological responses): जैसे पसीना आना या चहरे का लाल हो जाना
आक्रामक व्यवहार (Aggressive behaviors): जैसे मारना - पीटना , लात मारना या वस्तुओं को इधर - उधर फेंकना या तोड़ - फोड़ करना।  

हालाँकि क्रोध को हमेशा एक नकारात्मक भावना के रूप में देखा जाता है, कभी-कभी यह एक अच्छी बात भी हो सकती है। यह रिश्तों में अपनी जरूरतों को स्पष्ट करने में मदद करने के लिए एक रचनात्मक भूमिका निभा सकता है। 

हालांकि, गुस्सा तब एक समस्या बन सकता है, जब यह दूसरों के लिए अत्यधिक अस्वास्थ्यकर, खतरनाक या हानिकारक तरीकों से व्यक्त किया जाता है । अनियंत्रित क्रोध जल्दी ही आक्रामकता, दुर्व्यवहार या हिंसा में बदल सकता है।

इस प्रकार की भावना के मानसिक और शारीरिक दोनों परिणाम हो सकते हैं। अनियंत्रित क्रोध तर्कसंगत निर्णय लेने में कठिनाई पैदा कर सकता है और यहां तक कि आपके शारीरिक स्वास्थ्य पर भी प्रभाव डाल सकता है।

क्रोध को हृदय रोगों और मधुमेह जैसी बीमारी का कारण माना गया है। इसे ऐसे व्यवहारों से भी जोड़ा गया है जो स्वास्थ्य जोखिमों को बढ़ावा देते हैं, जैसे - आक्रामक ड्राइविंग, शराब का सेवन और धूम्रपान ।

6 - आश्चर्य (Surprise)




आश्चर्य एकमैन द्वारा वर्णित मूल रूप से मानव भावनाओं के छह बुनियादी प्रकारों में से एक है। आश्चर्य आमतौर पर काफी संक्षिप्त होता है और कुछ अप्रत्याशित घटना घटने के बाद एक शारीरिक चौंकाने वाली प्रतिक्रिया के रुप में जानी जाती है।

इस प्रकार की भावना सकारात्मक, नकारात्मक या तटस्थ हो सकती है। उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति को पेड़ से अचानक कूद कर डराना या  रात में किसी के द्वारा आपके सामने एकाएक आकर आपको डराना शामिल हो सकता है।

एक सुखद आश्चर्य का उदाहरण यह है कि जब आप घर पहुंचते हैं तो देखते हैं कि आपके करीबी दोस्त आपका जन्मदिन मनाने के लिए आपकी जानकारी के बिना आपके घर पर इकट्ठा हुए हैं। आश्चर्य को अक्सर इन माध्यमों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है:

चेहरे के भाव (Facial expressions): जैसे कि भौंहें उठाना, आँखें चौड़ी करना और मुँह खोलना
भौतिक प्रतिक्रियाएँ (Physical responses): जैसे कि पीछे कूदना या वापस हटना। 
मौखिक प्रतिक्रियाएं (Verbal reactions): जैसे कि चिल्लाना, चीखना या हांफना

आश्चर्य एक अन्य प्रकार की भावना है जो घटना या परिस्थितियों से मुकाबला करने या  उड़ती हुई प्रतिक्रिया व्यक्त करने या समस्या से पीछे भागने की प्रतिक्रिया को बढ़ावा दे सकती है। जब लोग चौंकते हैं तो उनके शरीर से एड्रेनालाईन ग्लैंड से एड्रेनालाईन रस का स्राव होता है जो शरीर को लड़ने या भागने के लिए तैयार करने में मदद करता है।

आश्चर्य का मानव व्यवहार पर महत्वपूर्ण प्रभाव हो सकता है। अनुसंधान से पता चला है कि लोग बेतरतीब ढंग से आश्चर्यजनक घटनाओं को नोटिस करते हैं।

यही कारण है कि समाचार में कोई आश्चर्यजनक और असामान्य घटनाएं दूसरों की तुलना में लम्बे समय तक यादगार बनी रहती है। शोध में यह भी पाया गया है कि लोग आश्चर्यजनक तर्कों से अधिक प्रभावित होते हैं और आश्चर्यजनक जानकारी से अधिक सीखते हैं।

अन्य प्रकार की भावनाएँ


एकमैन द्वारा बताई गई छह बुनियादी भावनाएं कई अलग-अलग प्रकार की भावनाओं का एक हिस्सा हैं जो लोग अनुभव करने में सक्षम हैं। एकमैन के सिद्धांत से पता चलता है कि ये मूल भावनाएं दुनिया भर में सभी संस्कृतियों में सार्वभौमिक हैं।

हालांकि, कई अन्य सिद्धांत और नए शोध कई अलग-अलग प्रकार की भावनाओं का पता लगाना और उन्हें वर्गीकृत करना जारी रखें हैं। एकमैन ने बाद में अपनी सूची में कई अन्य भावनाओं को जोड़ा, लेकिन साथ ही यह भी सुझाव दिया कि, जरुरी नहीं है कि उनकी मूल छह भावनाओं की तरह, इन सभी भावनाओं को चेहरे के भावों के माध्यम से समझा जा सके। बाद में उनकी सूची में पहचान की गई कुछ भावनाओं को शामिल किया गया जो निम्न प्रकार हैं। 

मनोरंजन
अवमानना
संतोष
शर्मिंदगी
उत्साह
अपराधबोध 
उपलब्धि पर गर्व
राहत
संतुष्टि
शर्म की बात

भावना के अन्य सिद्धांत


मनोविज्ञान में कई अवधारणायें हैं, सभी सिद्धांतकार भावनाओं को वर्गीकृत करने के किसी एक तरीके या  मूल भावनाएं वास्तव में क्या हैं ? इस पर सहमत नहीं हैं, एकमत नहीं हैं। जबकि एकमैन का सिद्धांत सबसे प्रसिद्ध सिद्धांतों में से एक है, अन्य सिद्धांतकारों ने अपने विचारों को इस बारे में प्रस्तावित किया है कि, भावनाएं मानव जीवन के मूल अनुभव  से बनती हैं।

उदाहरण के लिए, कुछ शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि केवल दो या तीन मूल भावनाएं हैं। कुछ दूसरों ने सुझाव दिया है कि कुछ भावनाएँ एक पदानुक्रम में मौजूद हैं। प्रेम, आनंद, आश्चर्य, क्रोध, और उदासी जैसी प्राथमिक भावनाएं कई बार द्वितीयक भावनाओं में टूट सकती हैं। उदाहरण के लिए, प्यार, कई भावनाओं से युक्त होता है, इसमें कई भावनाओं का समावेश होता है, जैसे स्नेह और लालसा।

ये द्वितीयक भावनाएँ जब और भी टूटती हैं, तो उन्हें तृतीयक भावनाओं के रूप में जाना जाता है। द्वितीयक भावना स्नेह में तृतीयक भावनाएं शामिल होती हैं, जैसे पसंद करना, देखभाल करना, करुणा और कोमलता।

हाल के ही एक अध्ययन से पता चला है कि कम से कम 27 तरह की अलग-अलग भावनाएं हैं, जिनमें से सभी परस्पर एक दूसरे से बहुत अधिक जुड़े हुए हैं। 2,000 से अधिक वीडियो क्लिप के द्वारा और 800 से अधिक पुरुषों की प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण करने के बाद, शोधकर्ताओं ने यह प्रदर्शित करने के लिए कि कैसे भावनायें एक दूसरे से  जुड़ी हुई हैं, एक इंटरेक्टिव मानचित्र बनाया।

ग्रेटर गुड साइंस सेंटर के संकाय निदेशक, वरिष्ठ शोधकर्ता डाचर केल्टनर का कहना है, "हमने सैकड़ों लोगों द्वारा दिए गए जबाब के प्रत्येक वीडियो के विश्लेषण से पाया कि बुनियादी भावनाओं के छह नहीं कुल 27 अलग-अलग आयाम हैं, जो लोगों के लिए आवश्यक थे।" 

दूसरे शब्दों में, भावनाओं को अलगाव की अवस्थाओं में नहीं पाया जा सकता। इसके बजाय, अध्ययन से पता चलता है कि भावनाओं के उतार चढ़ाव होते हैं और ये अलग-अलग भावनाएं आपस में गहराई से जुडी हुई होती हैं।

यूसी बर्कले में न्यूरोसाइंस में अध्ययन के प्रमुख लेखक और डॉक्टरेट छात्र एलन कोवेन यह सुझाव देता है कि हमारी भावनाओं की प्रकृति को बेहतर ढंग से स्पष्ट करने से वैज्ञानिकों, मनोवैज्ञानिकों और चिकित्सकों को मस्तिष्क की गतिविधि, व्यवहार और मनोदशा के बारे में और अधिक जानने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।इन अवस्थाओं की बेहतर समझ के निर्माण से, उन्हें उम्मीद है कि शोधकर्ता मनोरोग स्थितियों के लिए बेहतर उपचार विकसित कर सकते हैं।

अंतिम शब्द 


हम अपना जीवन कैसे जीते हैं, हम अपने दिन-प्रतिदिन के जीवन में दूसरों के साथ किस तरह से जुड़ते हैं, मिलते हैं,  किस तरह से हम अपने रोजमर्रा के निर्णय लेते हैं और कैसे उसे प्रभावित करते हैं, इसमें भावनाएँ एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कुछ अलग-अलग प्रकार की भावनाओं को समझकर, आप इन भावनाओं को कैसे व्यक्त करते हैं और आपके व्यवहार पर उनका क्या प्रभाव पड़ता है, इसकी गहरी समझ प्राप्त कर सकते हैं।

हालांकि, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि कोई भी भावना एक द्वीप नहीं है। इसके बजाय, आपके द्वारा अनुभव की जाने वाली बहुत सी भावनाएं अति सूक्ष्म और जटिल हैं, ये सभी भावनाएं एक साथ मिलकर हमारे भावनात्मक जीवन को समृद्ध बनाने में  योगदान करती हैं।


शनिवार, 23 जनवरी 2021

जीवन में अच्छे दोस्त क्यों महत्वपूर्ण हैं ?

हम सभी के पास दोस्त होते हैं। हम समाज में रहते हैं, अपने सुख दुःख को लोगों के साथ बांटते हैं। अपने दोस्तों के साथ अपनी समस्या को साझा कर लेने से मन हल्का हो जाता है।  दिल को सुकून मिलता है। मित्र शब्द का अधिकांश समय गलत अर्थ निकाला जाता है। हो सकता है कि वे लोग जिनके साथ आप पार्टी करते हैं, साथ - साथ घूमते हैं, खाते -पीते हैं, वास्तव में वो आपके दोस्त कहलाने के लायक भी नहीं हों। यहां तक ​​कि फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों की लंबी मित्र सूची के सभी आभासी मित्रों को भी दोस्त नहीं कहा जा सकता। शायद हम सभी को लगता है कि हमारे आस - पास पास जो लोग हैं वे हमारे अच्छे दोस्त हैं। एक बार की बात है जब मैं कालेज में पढ़ रहा था तो एक दिन मेरे साथ कुछ घटना घटी तो मैंने अपने एक दोस्त से जिसके साथ मैं उन दिनों अपना अधिकांश समय बिता रहा था। उसको मैंने कहा कि “तुम मेरे अच्छे दोस्त हो इसलिए तुम्हें मेरा साथ देना चाहिए, तो उसने मुझे जवाब दिया कि, “नहीं, हम अच्छे तो क्या साधारण दोस्त भी नहीं हैं, हम केवल सहपाठी हैं। 


 “एक दोस्त जो जरुरत के समय काम आये, वास्तव में वही सच्चा दोस्त होता है।” अच्छे दोस्त हर चरण में हमें सहायता करते हैं, मार्गदर्शन करते हैं और समर्थन देते हैं। दोस्त हमें भावनात्मक समर्थन देते हैं। वे मुश्किल घड़ी में हमारी मदद करते हैं और हमें विशेष महसूस कराते हैं। वे लोग सौभग्यशाली हैं जिनके पास अच्छे और सच्चे दोस्त हैं। अच्छे दोस्त बुरे समय में आपकी मदद करते हैं। अच्छे दोस्त सर्वश्रेष्ठ आलोचक होते हैं। 

आइए हम यह समझने की कोशिश करते हैं कि कौन अच्छे और सच्चे दोस्त होते हैं और जीवन में अच्छे दोस्त क्यों महत्वपूर्ण होते हैं ?

मित्र हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अगर हमारे पास अच्छे दोस्त हैं तो जीवन अधिक मनोरंजक और आनंददायक बन जाता है। यहां तक ​​कि एक सच्चा दोस्त हमारे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। यही कारण है कि जीवन में सच्चे और अच्छे मित्र होना महत्वपूर्ण हैं। 

“मेरा सबसे अच्छा दोस्त वह है जो मेरे अंदर का सबसे अच्छा व्यक्तित्व बहार लाने में मेरी मदद करता है।” – हेनरी फोर्ड


सच्चे दोस्त भावनात्मक समर्थन देते हैं

जीवन में कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि, जब हम भावनात्मक रूप से कमजोर होते हैं या किसी से अपने दिल की बात करना चाहते हैं, कई चीजें ऐसी हैं जिन्हें हम अपने माता-पिता और भाई-बहनों या परिवार के साथ साझा नहीं कर सकते क्योंकि हमें डर लगता है कि कहीं उन्हें धक्का ना लगे या उन्हें गुस्सा ना आ जाय, बुरा न मन जायें। ऐसी स्थिति में हम अपने दोस्तों के करीब जाना चाहते हैं।

अच्छे दोस्त हमेशा आपको सुनने के लिए तैयार रहते हैं। जब भी आप भावनात्मक रूप से परेशान होते हैं या किसी मुश्किल दौर से गुज़र रहे होते हैं तो वे आपका साथ देने के लिए आपके पास मौजूद रहते हैं। कभी-कभी हमें ऐसे लोगों की आवश्यकता महसूस होती है जो बिना किसी निर्णय पर पहुंचे और हमारे बारे में बिना कोई राय बनाए हमारी बातों को सुन सकें।  दोस्तों के सुनाने से हमें भावनात्मक सुख की प्राप्ति होती है। सच्चे दोस्त एक-दूसरे के बेहद सहायक होते हैं। वे विभिन्न स्तरों पर एक दूसरे का समर्थन करते हैं। जब भी मैं भावनात्मक रूप से कमज़ोर महसूस करता हूं तो मैं अपने सबसे अच्छे दोस्त के पास जाता हूं। वह जानता है कि मुझे कैसे शांत करना है और उस समय मेरी सहायता करता है।

बचपन में दोस्तों का महत्व

कई अनुसंधानों से पता चलता है कि जब किसी घर में एक ही आयु वर्ग के दो या अधिक बच्चे होते हैं तो उन परिवारों की तुलना में जिनमें अकेले एक ही बच्चा होता है,  विभिन्न स्तरों पर अधिक विकसित होते हैं। इसका कारण है कि वे समान रुचियां साझा करते हैं, समान गतिविधियों में शामिल होते हैं, एक-दूसरे के साथ खेलते हैं, आनंद लेते हैं और बहुत कुछ साथ - साथ सीखते हैं। दुर्भाग्य से आज के समय में अधिकांश परिवारों में बच्चे अकेले होते हैं। अधिकांश बच्चे अकेले नौकरानियों के भरोसे या अपनी मां के भरोसे छोड़ दिए जाते हैं जिन पर पहले से ही कई अन्य जिम्मेदारियां होती हैं और वे बच्चों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाते हैं। इसके कारण उन बच्चों का शारीरिक और साथ ही मानसिक विकास  अवरुद्ध होता है। आज एकल परिवार प्रणाली समय की आवश्यकता बन गई है, बदलते समय में हमारी मज़बूरी बन गयी है।  ऐसे में हम बच्चों के साथ दोस्ती बनाकर उनकी शारीरिक और मानसिक सेहत में उचित वृद्धि को सुनिश्चित कर सकते हैं। माता-पिता को अपने बच्चों को पार्क में ले जाना चाहिए जहां वे उसी उम्र के बच्चों से मिल सकते हैं। अपनी उम्र के बच्चों के आस-पास होना उनके लिए एक रमणीय अनुभव होता है। जब वे दोस्तों के साथ घिरे होते हैं तो वे खेलते हैं, सीखते हैं तो वे अधिक खुशहाल होते हैं और उनका सही तरह से विकास होता है।

आजकल इतने सारे स्कूलों की स्थापना के पीछे भी यही मुख्य कारण है। बच्चे जो प्ले स्कूल जाते हैं वे देखभाल करना और बेहतर तरीके से बढ़ना सीखते हैं। वे नियमित रूप से स्कूल जाने के लिए बेहतर तरीके से तैयार रहते हैं बजाए उनके जो प्ले स्कूलों में भाग नहीं लेते हैं।

बुढ़ापे में दोस्तों का महत्व

पहले संयुक्त परिवार प्रणाली थी। लोग अपने विस्तारित परिवारों के साथ रहते थे और उनके साथ हर अवसर का आनंद उठाते थे। उनके हर सुख - दुःख के साझीदार होते थे। वे लोग विभिन्न कार्यों में एक दूसरे की मदद और सहायता करते थे। मित्र भी महत्वपूर्ण थे और उनकी उपस्थिति हर अवसर की समग्र मनोदशा में शामिल होती थी। इसके अलावा ऐसी कई चीजें हैं जो एक व्यक्ति अपने परिवार के सदस्यों के साथ साझा नहीं कर सकता हैं लेकिन दोस्तों के साथ आसानी से साझा कर सकता है।

हालांकि बढ़ती एकल परिवार प्रणाली ने लोगों को अपने दोस्तों के महत्व को महसूस कराया है। विशेषकर इस महामारी ने दोस्तों और परिवार की महत्ता को लोगो को सिखाया है।  न सिर्फ युवा जोड़े और बच्चे, बल्कि वृद्ध पुरुष और महिलाएं भी अच्छी दोस्त मंडली की आवश्यकता को महसूस करते हैं। बूढ़े लोग इन दिनों अकेले रह गए हैं क्योंकि उनके बच्चे पेशेवर और व्यक्तिगत कारणों से बाहर देश चले जाते हैं। जिनके पास एक अच्छी मित्र मंडली है वे अपने बच्चों को उनके जीवन में व्यस्त हो जाने के बाद भी अच्छी तरह से जीवित रह सकते हैं पर जिनके पास दोस्त नहीं हैं वे अक्सर अकेला महसूस करते हैं और अवसाद से घिर जाते हैं तथा तमाम सारी गंभीर बीमारियों का सामना करते हैं।

इसलिए पुरानी पीढ़ी के लोगों को इन दिनों गंभीरता से कुछ अच्छे दोस्तों की जरूरत है। वृद्ध और बूढ़े लोगों को एक दूसरे के साथ जुड़ने में मदद करने के लिए कई क्लबों और सामाजिक समूहों का गठन किया गया है।

ऑफिस में दोस्त होने का महत्व 

आजकल कॉर्पोरेट ऑफिस में बहुत प्रतिस्पर्धा है। लोगों को लंबे समय तक काम करना पड़ता है। सप्ताहांत पर काम करने के लिए और आधिकारिक काम के लिए नियमित रूप से बाहर जाने की ज़रूरत होती है। ऐसी स्थिति में काम का बहुत दबाव होता है और जीवन बेहद तनावपूर्ण हो जाता है। जब काम की जगह पर अच्छे दोस्त होते हैं तो दबाव काम हो जाता है। जब आप अपने सहयोगियों में मित्र खोज लेते हैं उनके साथ दोस्ताना संबंध बना लेते हैं तो आपके लिए दफ़्तर एक दिलचस्प जगह बन जाती है और आप अपने कार्यालय में जाने के लिए तत्पर रहते हैं और अच्छा परिणाम दे पाते हैं। आप जानते हैं कि ऐसे कई लोग हैं जो काम के दबाव और तनाव से गुजर रहे होते हैं। उनके साथ बातचीत, काम के माहौल के बारे में अपनी भावनाओं को उजागर करना और उन्हें काम के दबाव को कैसे संभालना है, पर सुझाव देने से आपको बेहतर महसूस हो सकता है।

जब आपके अधिकारी किसी कारण से आप पर चिल्लाते हैं या आप को छुट्टी देने में आनाकानी करते हैं या आपके लिए अवास्तविक लक्ष्य निर्धारित करते हैं तो आपको भावनात्मक समर्थन की आवश्यकता होती है। ऐसे में कार्यालय में दोस्त होने की वजह से ऐसे कारणों से तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है क्योंकि वे आपकी स्थिति को सबसे अच्छी तरह से समझते हैं। कार्यालय बस अपने काम में व्यस्त रहने या अपने मालिक से निर्देश पाने की जगह मात्र नहीं है। दोस्तों की उपस्थिति में यह जीवंत स्थल बन जाता है। यह भी देखा गया है कि जिनके पास कार्यालय में दोस्त हैं वे लंबे समय तक दफ़्तर में टिके रहते हैं और छुट्टियाँ कम लेते हैं।

हालांकि कॉरपोरेट दुनिया में लोग अक्सर स्वार्थी प्रकृति के साथ दोस्त बनाते हैं। इसलिए किसी भी महत्वपूर्ण जानकारी को साझा करने या अपने सहकर्मियों के साथ भावनात्मक रूप से संलग्न होने से पहले आप मित्र बनाए तो आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि वे आपकी दोस्ती में वास्तव में दिलचस्पी रखते हैं और आपका दोस्त सिर्फ़ इसलिए नहीं बनना चाहते कि उन्हें आपकी दोस्ती से किसी तरह का लाभ मिले।

मित्र हमारे व्यक्तित्व को उभारने में मदद करता हैं

आप किस तरह के व्यक्ति बनना चाहते हैं। यदि आप अपनी जिंदगी मकसद केवल स्कूल या ऑफिस जाना और वापस घर आने तक ही रखना चाहते हों और बाहर की दुनिया के साथ कम से कम संबंध बनाना चाहते हैं तो आपका जीवन बेहद नीरस और उबाऊ हो जाएगा। बहुत से लोग जैसे-जैसे वृद्ध हो जाते हैं वैसे-वैसे इन दिनों वे ऐसा ही जीवन जीते हैं। ऐसा विशेषकर गृहिणियों के साथ होता है जो  अधिकांश समय तक अपने घरों में सीमित रहती हैं और बाहर किसी से दोस्ती नहीं कर पाती हैं।

इस तरह से वे अपना आत्मविश्वास खो देती हैं। कई लोग अवसाद में आ जाते हैं। मित्र होने से जीवन को पूर्ण रूप से जीने का मौका मिलता है। वे हमारे व्यक्तित्व को सुधारने में भी मदद करते हैं। जो लोग दोस्तों से घिरे रहते हैं वे भावनात्मक रूप से मजबूत होते हैं। वे उन लोगों की तुलना में भी अधिक आत्मविश्वास से भरे रहते हैं जिनके पास दोस्त नहीं है। इसका कारण यह है कि उनके पास लोगों से मुद्दों पर चर्चा करने, अपनी भावनाओं को उजागर करने, सलाह लेने और बाहर जाने का विकल्प रहता है।


जहाँ बच्चों को उनकी बढ़ती उम्र में और बूढ़ी पीढ़ी के लोगों के लिए दोस्तों का साथ बेहद महत्वपूर्ण हैं वहीँ अन्य आयु वर्ग के लोगों को भी दोस्ती के उपहार की जरूरत होती है। दोस्त हमें जीवन में बहुत कुछ सिखाते हैं और हमें मजबूत बनाते हैं। वे हमारे परिवार के समान महत्वपूर्ण हैं।

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इसे पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृपया अपनी मूल्यवान टिप्पणियां जोड़ें, उनकी बहुत सराहना की जाती है। जितना आप मुझसे सीखते हैं उतना ही मैं भी आपसे सीखता हूँ। 

सोमवार, 18 जनवरी 2021

वर्ष 2021 को अपना सर्वश्रेष्ठ वर्ष बनाने और खुश रहने के लिए अपनायें ये 10 टिप्स। /Follow these 10 tips to make the year 2021 your best year and be happy.




यदि आप ज्यादातर लोगों की तरह हैं,तो शायद आप 2020 की दर्दनाक घटनाओं को फिर से देखना पसंद नहीं करेंगे। समझा जा सकता है। महामारी ने हमारे जीवन के हर पहलू पर एक अमिट छाप छोड़ी है। हमने अपने प्रियजनों, दोस्तों और सहकर्मियों को कोरोनोवायरस के कारण खो दिया है। और इसने सब कुछ बदल दिया है, हमारी जीवन शैली , हमारे मनोरंजन का तरीका, हमारे खरीदारी का तरीका और साथ ही काम करने के तरीके में भी बदलाव कर दिया है। हम अब तक के इतिहास में सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। खाद्य भण्डारण, अपने आपको अलग कमरे में बंद रखना, चेहरे को ढँक कर रखना और फ्रंट लाइन कार्यकर्ताओं के ऊपर हमले जैसी घटनायें हमारे जीवन का एक सामान्य हिस्सा बन गए हैं। रिमोट वर्किंग अर्थात घर से बैठ कर काम करना और जूम पर मीटिंग करना हमारी दैनिक कामकाजी जीवन की भाषा बन गयी बन गई है। खतरनाक दर से महामारी फैलने के कारण, इसने राष्ट्रव्यापी स्तर पर अविश्वसनीय रुप से मानसिक स्वास्थ्य का संकट पैदा कर दिया है।



ली हेच हैरिसन (LHH) द्वारा हाल ही में नवंबर के महीने में कराए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया है कि सर्वेक्षण में प्रतिभागी 92% लोगों ने अपने आप को दुःखी पाया, और हाल ही में गैलप द्वारा किये गए सर्वेक्षण पोल में पाया गया कि, लोगों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक स्वास्थ्य की स्थिति 2001 के बाद सबसे निचले स्तर तक पहुंच गया है। LHH के मुख्य शोध अधिकारी मैरी-क्लेयर रेस के अनुसार, ''अब निकट भविष्य में अधिकांश कंपनियां, प्रबंधकों और वरिष्ठ नेतृत्व को पूरी तरह से वर्चुअल कार्यालयों के साथ, मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की नई चुनौती के साथ काम सौंपने वाली हैं। अब कार्यालय पूरी तरह से वर्चुअल तरीके से काम करने वाले हैं।''
अब स्थिति पत्थर पर दूब (घास)उगने जैसी है

तो चलिए 2020 को पीछे छोड़ते हैं और 2021 के क्षितिज पर सकारात्मकता को देखते हैं। सबसे पहले, हमारे पास सभी को टीकाकरण करने के लिए दो नए टीके हैं। इसलिए उम्मीद है कि आने वाले वर्ष में हमें महामारी और इससे होने वाले दुख से अधिक सुरक्षा मिलेगी। निश्चित रूप से, सभी कठिनाइयों और मानसिक तकलीफ का समाधान नए साल की पूर्व संध्या पर स्वचालित रूप से एक झटके में गायब नहीं होने वाली हैं। एक क्रूर तथ्य यह है कि महामारी अभी भी यहाँ रहेगी, और हमें इसके साथ कठिन संघर्ष करने की जरूरत महसूस हो सकती है। रास्ते में हर कदम पर बाधाएं आयेंगी, लेकिन अच्छी खबर यह भी है कि, ''पत्थर पर भी दूब (घास ) उगती है। जितना हम महसूस करते हैं उससे कहीं अधिक शक्तिशाली होते हैं। यदि हम सकारात्मक दृष्टिकोण और भावनात्मक सहनशक्ति के साथ 2021 में महामारी का सामना करते हैं, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि बाधाएं चाहे जितनी भी कठिन क्यों न हों और चाहे कितनी ही बार हमारे रास्ते में क्यों न आएं हम उनसे मुकाबला करते हुए लगातार आगे बढ़ते रह सकते हैं।
आपने यह पुरानी बातें जरुर सुनी होंगी, जिसे कुछ लोग घिसे-पिटे शब्द भी कह सकते हैं, कुछ लोग इसे कहावतें कहते हैं, जैसे - जब जिंदगी आपको नीबू देती है तो आप उससे नीबू का शर्बत बनाइये अर्थात "जब भी जीवन में मुश्किलें आएं तो उनका भी लाभ उठाएं," या "गिलास को आधा खाली के बजाय आधा भरा हुआ देखें," "हर बादल में आशा की एक किरण होती है।" यदि ये कहावतें आपको बुरी लगती हैं, तो इसका कारण यह है कि इनका उपयोग किसी एक कारण के लिए कई बार किया गया है: लेकिन ये काम करती हैं। इन कहावतों ने लोगों को अतीत में कठिन परिस्थितियों से उबारा है, क्योंकि वे वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित हैं। इसे कई बार जाँचा - परखा गया है।


न्यूरोसाइंटिस्ट्स ने पता लगाया है कि हमारी मूल प्रकृति ने हमें अस्तित्व के लिए नकारात्मकता के पूर्वाग्रह से ग्रस्त कर दिया है। हम मनुष्यों में सकारात्मक या तटस्थ अनुभवों की तुलना में नकारात्मक अनुभवों को अधिक महत्व देने की प्रवृत्ति है। इसे नकारात्मकता पूर्वाग्रह कहा जाता है। हम नकारात्मक अनुभवों के महत्वहीन या असंगत होने पर भी नकारात्मकता पर ही ज्यादा ध्यान केंद्रित करते हैं। नकारात्मक अनुभव सकारात्मकता की तुलना में लोगों को अधिक प्रभावित करते हैं। 2010 में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित एक लेख में बर्कले ने मनोवैज्ञानिक रिक हैनसन के हवाले से कहा कि, "नकारात्मक अनुभवों के लिए दिमाग वेल्क्रो की तरह है और सकारात्मक के लिए टेफ्लॉन।" यह एक तथ्य है। क्योंकि हम नकारात्मक पूर्वाग्रह में सकारात्मकता की तुलना में अधिक लंबा जीवन बिताते हैं, हम खतरे को कम करने और उन्हें दूर करने की हमारी क्षमता को कम आंकते हैं। जब महामारी जैसी नकारात्मकता से मुकाबला होता है, तो हम अपनी क्षमता ऐसे विकसित होती है ताकि हम उसका जवाब दे सकें। हालाँकि यह आसान नहीं है। यह बहूत मुश्किल है, लेकिन ये 10 टिप्स आपको 2021 में महामारी के खतरों से लड़ने में और महामारी के बाद होने वाले प्रभावों से बचने में आपको मदद कर सकते हैं और आपको मजबूत बना सकते हैं।

सकारात्मकता को मजबूत बनाने के लिए 10 युक्तियाँ -

1 - नकारात्मक स्थिति के उल्टा पर ध्यान दें - 

जब तबाही की बहूत सारी घटनाएं होती हैं तो मन डर बैठने और अप्रसन्नता कारण महामारी के नकारात्मक पक्ष पर ध्यान देना स्वाभाविक है।लेकिन हम इसे संतुलित कर सकते हैं। लोगों को एक साथ लाकर, स्वेच्छा से एक दूसरे की मदद करके और सामूहिक निस्वार्थता के विचार को मजबूत करके हम नकारात्मक परिस्थितियों से अपने ध्यान को हटा सकते हैं। आप इसको क्या नाम देना चाहेंगे।?

2 - कठिनाई में अवसर की पहचान करें - 

अपने आप से पूछे कि,“मैं अपने लाभ के लिए इस स्थिति को कैसे काम में ला सकता हूं? क्या मुझे इसमें कुछ सकारात्मक मिल सकता है? इस घटना से मैं क्या प्रबंधित कर सकता हूँ या हासिल कर सकता हूं? " उदाहरण के लिए, महामारी के दौरान, अपने को अलग रखने के समय का उपयोग हम अपने आप को पहचानने (आत्म-प्रतिबिंब) के लिए कर सकते हैं और उस दिशा के बारे में सोच सकते हैं जिस पर हम नए साल में जाना चाहते हैं, जो पाना चाहते हैं। आप इसमें क्या अवसर देखते हैं?
2020 की घटनाओं को सबक सीखने के रूप में लें, दुख सहने के लिए नहीं - अपने आप से पूछें कि आपने 2020 की कठिनाइयों, घटनाओं से क्या सीखा और उन्हें बाधाएं समझने की बजाय उनका उपयोग सफलता की सीढ़ियों के रुप में कर सकते हैं। यदि आप इस परिप्रेक्ष्य पर कम विचार करते हैं कि, 2020 ने आपको क्या सिखाया है जिसका उपयोग आप 2021 में कर सकते हैं? ऐसा सोचें कि 2020 की घटनाएं या प्रतिकूलतायें आपको तकलीफ देने की बजाय आपके लाभ के लिए हो रही हैं। 

If you’re like most people, you might not want to revisit the painful events of 2020 as we close out the year. Understandable. The pandemic has left an indelible mark on every aspect of our lives. We have lost loved ones, friends and colleagues to the coronavirus. And it has altered how we live, entertain ourselves, shop and work. We have faced the worst economic crisis in history. Food banks, self-quarantines, face coverings and threats to front line workers have become part of the new normal. Remote working and Zoom fatigue have become part of our vernacular. As the pandemic spikes at alarming rates, it has created a mental health crisis of unbelievable proportions nationwide.

यदि आप ज्यादातर लोगों को पसंद करते हैं, तो शायद आप 2020 की दर्दनाक घटनाओं को फिर से देखना न चाहें, क्योंकि हम साल को बंद कर देते हैं। समझने योग्य। महामारी ने हमारे जीवन के हर पहलू पर एक अमिट छाप छोड़ी है। हमने अपने प्रियजनों, दोस्तों और सहकर्मियों को कोरोनोवायरस में खो दिया है। और यह बदल गया है कि हम कैसे रहते हैं, अपना मनोरंजन करते हैं, खरीदारी करते हैं और काम करते हैं। हमने इतिहास में सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना किया है। फूड बैंक, स्वयं-संगरोध, फेस कवरिंग और फ्रंट लाइन श्रमिकों के लिए खतरे नए सामान्य का हिस्सा बन गए हैं। रिमोट वर्किंग और जूम थकान हमारी वर्नाक्यूलर का हिस्सा बन गई है। खतरनाक दर पर महामारी फैलने के रूप में, इसने राष्ट्रव्यापी अविश्वसनीय अनुपात का मानसिक स्वास्थ्य संकट पैदा कर दिया है।


LHH द्वारा हाल ही में कराए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि नवंबर के महीने में 92% उत्तरदाताओं को जला हुआ महसूस हुआ, और हाल ही में हुए गैलप पोल ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक कल्याण ने नाक की डुबकी लगाई है, जो 2001 के बाद से सबसे कम है। LHH के मुख्य नवप्रवर्तन अधिकारी मैरी-क्लेयर रेस के अनुसार, "कार्यालय अब भविष्य के भविष्य के लिए पूरी तरह से आभासी हैं, अधिकांश कंपनियों, प्रबंधकों और वरिष्ठ नेतृत्व को मानसिक रूप से स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की नई चुनौती के साथ काम सौंपा गया है।"

recent poll conducted by LHH found that 92% of respondents felt burned out in the month of November, and a recent Gallup poll reported that mental health and emotional well-being have taken a nose dive, dropping to their lowest since 2001. According to Mary-Clare Race, chief innovation officer at LHH, “With offices now fully virtual for the foreseeable future, most companies, managers and senior leadership are tasked with the new challenge of prioritizing mental health remotely.

Grass Grows Through Concrete

तो चलिए 2020 को पीछे छोड़ते हैं और 2021 के क्षितिज पर सकारात्मकता को देखते हैं। सबसे पहले, हमारे पास सभी के रास्ते में टीकाकरण के साथ दो नए टीके हैं। इसलिए उम्मीद है कि आने वाले वर्ष में हमें महामारी और इससे होने वाले दुख से अधिक सुरक्षा मिलेगी। निश्चित रूप से, सभी कठिनाइयों और दिल का दर्द नए साल की पूर्व संध्या पर आधी रात के स्ट्रोक पर स्वचालित रूप से गायब नहीं होगा। एक क्रूर तथ्य यह है कि महामारी अभी भी यहाँ होगी, और यह एक कठिन लड़ाई की तरह महसूस कर सकता है। रास्ते में हर कदम पर बाधाएँ डाली जाएंगी, लेकिन अच्छी खबर यह भी है: कंक्रीट से घास उगती है। हम जितना महसूस करते हैं उससे कहीं अधिक शक्तिशाली हैं। हम जितना महसूस करते हैं उससे कहीं अधिक शक्तिशाली हैं। यदि हम एक सकारात्मक दृष्टिकोण और भावनात्मक सहनशक्ति के साथ 2021 में महामारी विरोध का सामना करते हैं, तो हम बाधाओं को चाहे कितनी भी बार और कठिन क्यों न हो, जारी रख सकते हैं।

So let’s leave 2020 behind and look at the positives on the horizon of 2021. First of all, we have two new vaccines with vaccinations on the way to everyone. So hopefully in the coming year we will have more protection against the pandemic and the misery it brings. Of course, all the hardships and heartache won’t automatically disappear at the stroke of midnight on New Years Eve. One cruel fact is the pandemic will still be here, and that can feel like an uphill battle. Obstacles will be thrown at us every step of the way, but there’s good news, too: grass grows through concrete. We are more powerful than we realize. If we face pandemic opposition in 2021 with a positive attitude and emotional stamina, we can keep going no matter how frequent and difficult the obstacles.

आपने पुराना सुना है - कुछ लोग यह भी कह सकते हैं - "जब जीवन आपको नींबू देता है, तो नींबू पानी बनाते हैं", या "ग्लास को आधा खाली करने के बजाय आधा भरा हुआ देखें" या "हर बादल में एक चांदी की परत होती है। ” यदि ये कहावतें आपको बुरी लगती हैं, तो इसका कारण यह है कि इनका अत्यधिक उपयोग किया गया है: वे काम करते हैं। इन कहावतों ने लोगों को अतीत में कठिन परिस्थितियों से गुजारा क्योंकि वे वैज्ञानिक आधारों द्वारा समर्थित हैं।

You’ve heard the old—some might even say trite—adages of “When life gives you lemons, make lemonade,” or “Look at the glass as half full instead of half empty,” or “Every cloud has a silver lining.” If these sayings seem worn-out to you, it’s because they’ve been overused for a reason: they work. These proverbs carried people through rough times in the past because they are backed by scientific underpinnings.

10 Tips To Stack Your 2021 Positivity Deck

10 युक्तियाँ आपका 2021 पॉजिटिविटी डेक को ढेर करने के लिए

न्यूरोसाइंटिस्ट्स ने पता लगाया है कि माँ प्रकृति ने हमें अस्तित्व के लिए नकारात्मकता के पूर्वाग्रह से ग्रस्त कर दिया। जैसा कि मनोवैज्ञानिक रिक हैनसन ने कहा, "मस्तिष्क नकारात्मक अनुभवों के लिए वेल्क्रो की तरह है लेकिन सकारात्मक लोगों के लिए टेफ्लॉन।" और क्योंकि हमारी नकारात्मकता पूर्वाग्रह में सकारात्मकता की तुलना में एक लंबा शैल्फ जीवन है, हम उन खतरों को दूर करने और उन्हें दूर करने की हमारी क्षमता को कम आंकते हैं। जब महामारी जैसी नकारात्मकता टकराती है, तो हमारी शक्ति उस तरीके से आती है जैसे हम उसका जवाब देते हैं। यह आसान नहीं है. यह कठिन है, लेकिन ये 10 युक्तियां आपके पक्ष में 2021 को ढेर कर सकती हैं और आपको महामारी के खतरों और परिणाम से वापस उछालने में मदद कर सकती हैं।

 

Neuroscientists have discovered that Mother Nature hardwired us with a negativity bias for survival. It’s a fact. As psychologist Rick Hanson said, “The brain is like Velcro for negative experiences but Teflon for positive ones.” And because our negativity bias has a longer shelf life than positivity, we tend to overestimate threats and underestimate our ability to overcome them. When negativity like the pandemic strikes, our power comes in the way we respond to it. This isn’t easy. It’s hard, but these 10 tips can stack 2021 in your favor and help you bounce back from pandemic threats and aftereffects.



  1. Focus on the upside of a downside situation. When there are so many incidences of devastation, fear and heartbreak, it’s natural to focus on the downside of the pandemic. But we can balance that out with how it’s brought people together, volunteering and helping one another and strengthening the whole idea of collective selflessness. What upsides can you name? एक नकारात्मक स्थिति के उल्टा पर ध्यान दें।- जब तबाही, भय और दिल टूटने की बहुत सारी घटनाएं होती हैं, तो महामारी के नकारात्मक पक्ष पर ध्यान केंद्रित करना स्वाभाविक है। लेकिन हम इसे संतुलित कर सकते हैं कि कैसे यह लोगों को एक साथ लाए, एक-दूसरे की मदद कर सके और सामूहिक रूप से निःस्वार्थता के पूरे विचार को मजबूत कर सके। आप क्या नाम रख सकते हैं?
  2. Pinpoint the opportunity in the difficulty. Ask, “How can I make this situation work to my advantage? Can I find something positive in it? What can I manage or overcome in this instance?” During the pandemic, for example, we can use times of self-isolation for self-reflection and think about the direction we want to take in the new year. What opportunities do you see? कठिनाई में अवसर को इंगित करें। -  पूछें, “मैं अपने लाभ के लिए इस स्थिति को कैसे काम कर सकता हूं? क्या मुझे इसमें कुछ सकारात्मक मिल सकता है? मैं इस उदाहरण में क्या प्रबंधित या दूर कर सकता हूं? " उदाहरण के लिए, महामारी के दौरान, हम आत्म-प्रतिबिंब के लिए आत्म-अलगाव के समय का उपयोग कर सकते हैं और उस दिशा के बारे में सोच सकते हैं जिसे हम नए साल में लेना चाहते हैं। आप क्या अवसर देखते हैं?
  3. Frame 2020 as a lesson to learnnot misery to endure. Ask what you can learn from the difficulties of 2020 and use them as stepping-stones, instead of roadblocks. Think of the adversities of 2020 as happening for you instead of to you. If you consider this perspective less taken, what has 2020 taught you that you can take into 2021? एक सबक के रूप में फ़्रेम 2020, सीखने के लिए सहन करने के लिए दुख नहीं।- पूछें कि आप 2020 की कठिनाइयों से क्या सीख सकते हैं और बाधाओं के बजाय उन्हें कदम-पत्थरों के रूप में उपयोग कर सकते हैं। 2020 की प्रतिकूलताओं को आप के बजाय आपके लिए हो रहा है। यदि आप इस परिप्रेक्ष्य पर कम विचार करते हैं, तो 2020 ने आपको क्या सिखाया है जो आप 2021 में ले सकते हैं?
  4. Practice gratitude. Look beyond the fear, loss and disappointment at the big picture. Take an inventory of your life and include all the things the pandemic prevented you from doing that you once took for granted. And consider all the people and things in your life that you’re grateful for, letting gratitude steer you beyond the gloom and doom. What are you grateful for?आभार का अभ्यास करें।- बड़ी तस्वीर में डर, नुकसान और निराशा से परे देखें। अपने जीवन की एक सूची ले लो और उन सभी चीजों को शामिल करें जो महामारी ने आपको ऐसा करने से रोका था जो आपने एक बार दी थी। और अपने जीवन में उन सभी लोगों और चीजों पर विचार करें जिनके लिए आप आभारी हैं, जिससे आप निराशा और कयामत से परे हैं। आप किस बात के लिए कृतज्ञ हैं?
  5. Be chancy. Take small risks in new situations instead of predicting negative outcomes before giving them a try. “If I ask for a shot at the promotion, my boss might laugh in my face” becomes “If I ask for a shot at the promotion, my boss might think I have guts and ambition.” How can you stick your neck out at work in the new year? परिवर्तनशील बनो।- कोशिश करने से पहले नकारात्मक परिणामों की भविष्यवाणी करने के बजाय नई स्थितियों में छोटे जोखिम उठाएं। "अगर मैं प्रचार में एक शॉट के लिए कहता हूं, तो मेरे बॉस मेरे चेहरे पर हंसी ला सकते हैं" बन जाता है "अगर मैं पदोन्नति पर शॉट मांगता हूं, तो मेरे बॉस सोच सकते हैं कि मेरे पास हिम्मत और महत्वाकांक्षा है।" आप नए साल में काम पर अपनी गर्दन कैसे चिपका सकते हैं?
  6. Avoid blowing a situation out of proportion. Don’t let one negative experience rule your whole outlook: “I was supposed to get a promotion until the pandemic; now that everything’s on hold, I’ll never advance in my career” becomes “Things are on hold for a while, but nothing lasts forever and there will be other pathways to success.” What limiting situations can you minimize and overcome in 2021? अनुपात से बाहर की स्थिति को उड़ाने से बचें।- एक नकारात्मक अनुभव को अपने पूरे दृष्टिकोण पर हावी न होने दें: “मुझे महामारी तक प्रचार मिलना चाहिए था; अब जब सब कुछ होल्ड पर है, तो मैं अपने करियर में कभी आगे नहीं बढ़ पाऊंगा "हो जाता है" चीजें कुछ समय के लिए रुक जाती हैं, लेकिन कुछ भी हमेशा के लिए नहीं रहता है और सफलता के अन्य रास्ते भी होंगे। " 2021 में किन सीमित स्थितियों को आप कम और दूर कर सकते हैं?
  7. Focus on the solution, not the problem. You’ll feel more empowered to cope with pandemic curve balls when you step back from the problem and brainstorm a wide range of possibilities. Your negativity bias will direct you to zoom in and focus on the problem. But when you broaden your perspective, your wide-angle lens will help you see potential in the big picture. What possibilities do you see for 2021? समाधान पर ध्यान दें, समस्या पर नहीं।- जब आप समस्या से पीछे हटते हैं और संभावनाओं की एक विस्तृत श्रृंखला पर विचार करते हैं तो आप महामारी वक्र गेंदों का सामना करने में अधिक सशक्त महसूस करेंगे।आपकी नकारात्मकता पूर्वाग्रह आपको ज़ूम इन करने और समस्या पर ध्यान केंद्रित करने के लिए निर्देशित करेगी। लेकिन जब आप अपने दृष्टिकोण को व्यापक करते हैं, तो आपके चौड़े-कोण लेंस आपको बड़ी तस्वीर में क्षमता देखने में मदद करेंगे। 2021 के लिए आप क्या संभावनाएं देखते हैं?
  8. Practice positive self-talk. During tough times, be as kind to yourself as you would your best friend. Underscore your triumphs. Replace bludgeoning yourself and using put-downs and criticisms with the practice of self-compassion. Affirm positive feedback instead of letting it roll over your head. Give yourself “atta-boys” or “atta-girls.” Throw modesty out the window, and remind yourself of all your personal resources. What are your strengths? सकारात्मक आत्म-चर्चा का अभ्यास करें। - कठिन समय के दौरान, अपने लिए उतना ही दयावान बनें जितना कि आप अपने सबसे अच्छे दोस्त होंगे। अपनी जीत को रेखांकित करें। स्व-करुणा के अभ्यास के साथ अपने आप को ब्लीडिंग को बदलें और पुट-डाउन और आलोचनाओं का उपयोग करें। सकारात्मक प्रतिक्रिया देने के बजाय इसे अपने सिर पर रोल करने दें। अपने आप को "एटा-बॉयज़" या "एटा-गर्ल्स" दें। खिड़की से बाहर विनय फेंक दो, और अपने सभी व्यक्तिगत संसाधनों की याद दिलाओ। आपकी शक्तियां क्या है?
  9. Practice Solitude. Solitude is good for the soul. It takes you out of the rat race for a while, gives you a bird’s-eye view of your daily life and replaces chaos with serenity. Spend a minimum of five minutes a day alone. Meditate, pray, practice yoga or contemplate nature and connect with something larger than yourself for inspiration and peace of mind. What type of solitude can you practice? एकांत का अभ्यास करें।- आत्मा के लिए एकांत अच्छा है। यह आपको कुछ समय के लिए चूहे की दौड़ से बाहर ले जाता है, आपको अपने दैनिक जीवन का एक विहंगम दृश्य प्रदान करता है और अराजकता की जगह लेता है। अकेले एक दिन में न्यूनतम पांच मिनट बिताएं। ध्यान, प्रार्थना, योग का अभ्यास करें या प्रकृति का चिंतन करें और प्रेरणा और मन की शांति के लिए अपने आप से कुछ बड़ा करें। आप किस प्रकार के एकांत का अभ्यास कर सकते हैं?
  10. See a fresh start contained in loss. Every loss contains a gain but you have to look for it. Every time you get up just one more time than you fall, you increase the likelihood of scaling hard times. Baseball great Babe Ruth said, “It’s hard to beat a person who never gives up. Every strike brings me closer to the next home run.” What endings in 2020 contain new beginnings in 2021? नुकसान में निहित एक नई शुरुआत देखें। प्रत्येक हानि में एक लाभ होता है लेकिन आपको इसके लिए देखना होगा। हर बार जब आप गिरते हैं, तो आप मुश्किल समय को बढ़ाने की संभावना को बढ़ा देते हैं। बेसबॉल के महान बेब रूथ ने कहा, "ऐसे व्यक्ति को हराना मुश्किल है जो कभी हार नहीं मानता। हर स्ट्राइक मुझे अगले होम रन के करीब लाता है। ” २०२० में २०२१ की नई शुरुआत में क्या अंत हुआ?

A Final Word एक अंतिम शब्द

Choosing a positive attitude is one of the most powerful things we can take into 2021. Don’t forget that grass grows through concrete. Think of yourself as an elastic band that bends and stretches to a certain point before you spring back higher than you fall. And you will have the physical and mental stamina to come back with a vengence in 2021.

सकारात्मक दृष्टिकोण चुनना सबसे शक्तिशाली चीजों में से एक है जिसे हम 2021 में ले सकते हैं। यह मत भूलो कि घास कंक्रीट के माध्यम से बढ़ती है। अपने आप को एक लोचदार बैंड के रूप में सोचें जो गिरने से पहले एक निश्चित बिंदु तक झुकता है और फैलता है। और आपके पास 2021 में प्रतिशोध के साथ वापस आने के लिए शारीरिक और मानसिक सहनशक्ति होगी।