बुधवार, 15 जुलाई 2020

मैं खुद को सकारात्मक कैसे रखता हूं ? How do I keep myself positive?

दोस्तों आज मैं आपके साथ एक बहुत ही महत्वपूर्ण और मजेदार बात साझा करना चाहता हूं। एक ऐसी बात जिसने मेरे सोचने के तरीके को सुधारने और सकारात्मक बनाने में बहुत मदद की है।


मुझे पूरी उम्मीद है कि यह आपके लिए भी उतना ही लाभदायक होगा, जितना कि मेरे लिए रहा है। यह बहुत ही आसान है और इसे हम आसानी से अपनी जिंदगी में उपयोग कर सकते हैं। अपने व्यवहार में लागू कर सकते हैं।

हमारे दिमाग में हर दिन लगभग 60 से 70 हजार विचार आते हैं अर्थात हर मिनट में 40 से 50 विचार आते हैं। हमारे दिमाग में हमेशा सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही दोनों ही तरह के विचार आते रहते हैं। हम जब कोई भी फ़ैसला लेते हैं, किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले हमारे दिमाग में सकारात्मक और नकारात्मक विचारों के बीच द्वंद्व चलता रहता है। हमारा नतीजा उसी से प्रभावित होता है।


दरअसल हमारे पास दो तरह के विचार रुपी बीज होते हैं, एक सकारात्मक विचार (Positive Thoughts) और दूसरा नकारात्मक विचार (Negative Thoughts), जो आगे चलकर हमारे नजरिये और व्यवहार रुपी पेड़ का निर्माण करते हैं।



हम जैसा सोचते हैं, बोलते हैं वैसा ही परिणाम हमारी जिंदगी में हमको मिलता है। अगर हम हमेशा सकारात्मक सोचेंगे, बोलेंगे तो हमेशा हमारी जिंदगी में सकारात्मक घटनाएं ही घटेंगी। सकारात्मक लोगों के साथ रहने से हमारे आस- पास सकारात्मक माहौल बना रहता है। हमारे विचारों पर हमारा स्वयं का नियंत्रण होता है इसलिए यह हमें ही तय करना होता है कि हमें सकारात्मक सोचना है या नकारात्मक।


यह पूरी तरह से हम पर निर्भर करता है कि हम अपने दिमाग रूपी जमीन में कौन- सा बीज बोना चाहते हैं। थोड़ी सी समझदारी से हम कांटेदार पेड़ को महकते फूलों के पेड़ में बदल सकते हैं। अगर आपको अपने जीवन में सफल होना है तो आपको आज से ही अपनी सोच सकारात्मक बनानी होगी।

सकारात्मक सोच रखना एक विकल्प है। हम ऐसे विचार सोच सकते हैं या मन में ला सकते हैं जो हमारे मूड को ठीक कर देता हो, जो कठिन परिस्थितियों से बाहर निकालने में हमारी मदद करे। जीवन के प्रति सकारात्मक सोच रखने से, आप अपने मन को नकारात्मक सोच के दायरे से बाहर लाने की शुरूआत कर सकते हैं और आप देखेंगे की हमारा जीवन परेशानी और बाधाओं की बजाय संभावना और तरकीबों से सुसज्जित हो जाएगा। अगर आप भी जानना चाहते हैं कि कैसे मैं खुद को ज्यादा सकारात्मक रखता हूं तो मेरे द्वारा जिंदगी में की जा रही क्रियाविधि को जानें और उसे अपनाकर अपने आपको सकारात्मक बांये रखें। नीचे दिए गए सलाह का अनुसरण करें।


विधि 1 - मैं हमेशा अपनी सोच या विचार का आकलन करता रहता हूं  - 

दोस्तों जैसा कि हमने ऊपर बताया है कि, हमारे दिमाग में हमेशा विचार चलते रहते हैं। अब हमारी पूरी जिम्मेदारी होती है कि हम किन विचारों को अपनी जिंदगी में महत्त्व दें। हम ही हैं जो नकारात्मक या सकारात्मक विचारों को चुनते हैं। इसलिए हमें अपने रवैये के प्रति पूरी तरह से जागरूक रहना चाहिए और पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। बार - बार अभ्यास करके आप सकारात्मक नजरिया अपनी जिंदगी में अपना सकते हैं। 

हमें सकारात्मक सोच से होने वाले लाभों के बारे में जानकारी रखनी चाहिए। इससे हमें अपने जीवन को नियंत्रित करने में मदद के साथ - साथ रोजमर्रा के अनुभवों को भी हम सुखद बना सकते हैं। किसी भी बदलाव के लिए हम हमेशा प्रतिबद्ध रहते हैं। 

सकारात्मक सोच रखने से हमारे जिंदगी में आने वाली परेशानियों में कमी आती है। हमारी शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य अच्छी होती है। तनाव में कमी आती है, जिसके कारण हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोत्तरी हो जाती है। लोगों के साथ हमारे रिश्ते में सुधार होता है।  



विधि -2 - मैं हमेशा अपनी नकारात्मक सोच का विरोध करता हूं  -


दोस्तों हम इंसान हैं, हमारे मन में तमाम कोशिशों के वावजूद भी नकारात्मक सोच आना स्वाभाविक सी बात है। जब भी मेरे मन में कोई नकारात्मक बात आती है तो मैं उसे सकारात्मक विचारों से प्रतिस्थापित करता हूं। इसके लिए हमें अपने मन में आने वाली नकारात्मक सोच को पहचानना होगा। उसके प्रति जागरुक होना होगा। जब भी हमारे मन में कोई नकारात्मक विचार आते हैं तो वे हमें चुनौती  लेने से पीछे की ओर खींचने लगते हैं। हमें कुछ भी नया करने से रोकते हैं। 

हालांकि नकारात्मक सोच एक दिन में हमारे मन में नहीं आते हैं। वर्षों से हमारे दोस्तों परिवार के सदस्यों व सामाजिक परिवेश में घटी घटनाओं से हमारे मन में नकारात्मकता बैठ जाती है। लोग हमारे बारे में जो बार - बार विचार व्यक्त करते हैं, वह कहीं न कहीं हमारे अंतर्मन में बैठ जाती हैं और हमारे जिंदगी को प्रभावित करती है।  जैसे - मां - बाप या शिक्षक द्वारा बार- बार किसी बच्चे को यह बोलै जाय कि, ''तुमको कुछ नहीं आता तुम फेल हो जाओगे, तुम जिंदगी में कुछ नहीं कर सकते।'' इससे उस बच्चे के मन में आत्मविश्वास की कमी हो जाती है और अपने प्रति यह बात बैठा लेता है कि मुझे कुछ नहीं आता , मैं जिंदगी में कुछ नहीं कर सकता। यह भावना उसकी जिंदगी की प्रगति को अवरुद्ध करती है। ऐसे नकारात्मक विचारों को चुनौती देकर हमें सार्थक दिशा में प्रयास करना चाहिए। 

अपने नकारात्मक सोच को सकारात्मक सोच से बदलने का प्रयास करें। ऐसा कभी भी नहीं होता कि हमेशा हमारे जीवन में सब कुछ सकारात्मक ही हो। लेकिन हमें नकारात्मक चीजों को सकारात्मकता में बदलने का कौशल सीखना चाहिए। बार - बार के प्रयास से हम यह कौशल सीख पाते हैं। जब हम अपनी नकारात्मक सोच को पहचान कर उसे सकारात्मकता में बदलना सीख जाते हैं तो ही हम सकारात्मक जिंदगी जी पाते हैं। इसलिए हमें नकारात्मक सोच को पहचानकर उसका विरोध करना चाहिए।   


उदाहरण के लिए, अगर आपके मन में यह विचार आता है कि, “मैं शायद परीक्षा में फेल हो जाऊंगा,” तो खुद को इस तरह के नकारात्मक विचारों से रोकें। इन विचारों की सत्यता को मापें। इस नकारात्मक विचार को सकारात्मक विचार से बदलने की कोशिश करें। सकारात्मक होना मतलब आँख मूंद कर आशावादी होना नहीं है, जैसे ऐसा सोचना कि, “बिना पढ़े, मुझे इस परीक्षा में 100 में से 100 अंक मिलेंगे।'' परंतु आप इसे ऐसा सोच सकते हैं कि, “मैं परीक्षा के लिए तैयारी करने में समय दूंगा और मन लगाकर पढ़ाई करूंगा, ताकि मैं परीक्षा में अच्छे से अच्छा अंक प्राप्त कर सकूं।''

प्रश्नों की ताकत का प्रयोग करें। जब आप कुछ सवाल करते है, तो आपका दिमाग आपके सवाल का जवाब ढूंढने में लग जाता है। अगर आप यह प्रश्न करते हैं कि, “जीवन इतना भयानक क्यों है?” तो आपका दिमाग इस सवाल का जवाब ढूढ़ने की कोशिश करेगा। वहीं अगर आप यह प्रश्न करते हैं कि, “मैं बहुत भाग्यशाली कैसे हो सकता हूँ?” तो आपका दिमाग इस सवाल का जवाब ढूढ़ने की कोशिश करेगा। इसलिए अपने आप से हमेशा ऐसे सवाल करें जो आपको सकारात्मक सोच की तरफ ले जाता हो।


नकारत्मकता को बढ़ाने वाले बाहरी प्रभावों को कम करें। ऐसे लोगों से दूर रहें जो नकारात्मक हों। सकारात्मक सोच पर आधारित किताबें पढ़ने से आपको एक खुशनुमा इंसान बनने में मदद मिल सकती है। परिस्थिति के ”एक पहलू के बारे में सोचना” टालें: आप यह तब करेंगे जब आप केवल किसी परिस्थिति के नकारात्मक पक्ष को सुनने के लिए चुनते हैं। हर परिस्थिति के दो पहलु होते हैं, जो या तो अच्छे होते हैं या बुरे, और यह दोनों परिस्थिति को पहचानने में मदद करते हैं। अगर आप इस तरह सोचेंगे, तो आप किसी भी परिस्थिति के बारे में सकारात्मक नहीं सोच पाएंगे। उदाहरण को लिए, अगर आपने कोई परीक्षा दी है, और उसमें आपको C ग्रेड मिला है, और उसके साथ आपको अपने शिक्षक से फीडबैक मिला है कि पिछले परीक्षा के मुकाबले इस बार आपने अत्यंत प्रगति की है। तो इस परिस्थिति में अगर आप सिर्फ एक ही पहलू के बारे में सोच रहे हैं कि आपको परीक्षा में C ग्रेड मिला है, तो आप सिर्फ नकारात्मक सोच रहे हैं और इस हकीकत को अनदेखा कर रहे हैं कि पिछले बार के मुकाबले आपने इस बार प्रगति और उन्नति की है। 

विनाशकारी सोच से बचें।  यह सोच तब आती है, जब आप मान लेते है कि किसी भी बात का सबसे खराब नतीजा निकलने वाला है। विनाशकारी सोच हमेशा आपके खराब प्रदर्शन की चिंता से संबंधित है। उदाहरण के लिए, शायद आप सोच सकते हैं कि जिस परीक्षा के लिए आप तैयारी कर रहे हैं उसमें आप फेल हो जाएंगे। विनाशकारी सोच से असुरक्षित भावना इतनी बढ़ जाएगी कि आप मानने लगेंगे कि आप फेल हो जाएंगे और फिर कॉलेज में ड्राप आउट हो जाएंगे, फिर आपको कहीं नौकरी नहीं मिलेगी और आपका कभी कल्याण नहीं हो सकता है। अगर आप नकारात्मक सोच को वास्तविकता से सोचते हैं, तो आप महसूस करेंगे कि एक मात्र परीक्षा में फेल होने से यह जरूरी नहीं है कि आप पूरी जिंदगी में फेल हो जायेंगे। 


विधि 3 मैं जीवन में हमेशा आशावादी रहता हूं  -


सकारात्मक बने रहने का मतलब वास्तव में अपने कौशल में सुधार लाना है। किसी भी कौशल में निपुण होने में समय लगता है, और इसके लिए समर्पित अभ्यास की आवश्यकता होती है। शारीरिक तौर पर  अपनी आदतों में बदलाव लायें। अगर आप अपने शारीरिक आदतों को बदलते हैं, जैसे  - अच्छा हाव-भाव का दिखाएं, किसी के सामने सीधा खड़ा रहें और अपने कंधों को नीचे और पीछे की तरफ रखें। इससे आपका मन भी बदल जाएगा। चेहरे पर मुस्कराहट रखें। आपकी मुस्कुराहट से दूसरे लोग तो प्रभावित होते ही हैं साथ ही आप का शरीर भी खुशहाल हो जाता है। 

कुछ लक्ष्य निर्धारित करें, और उसे प्राप्त करने के लिए खुद को व्यस्त रखें। अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपने द्वारा किये गए प्रयत्नों और अपनी सामर्थ्य पर विश्वास रखें। यदि आप पहले लक्ष्य को हासिल कर लेते हैं, तो अपने जीवन में नए लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित हो जाते हैं।  लक्ष्य प्राप्ति चाहे जितना भी छोटा क्यों न हो, इससे आपके आत्मविश्वास में वृद्धि हो जाएगी। आपका स्वाभिमान बढ़ जाता है। जो आपके जीवन में सकारात्मकता भर देता है। अपने मनपसंद कार्य को करें जिसको करने से आपको आनंद मिलता है। अपने दैनिक गतिविधियों के लिए मानसिक रूप से पूर्ण होने से, आप अपने जीवन और अपनी खुशी को बेहतर नियंत्रित कर सकते हैं।

अगर अभी तक आपको अपने रचनात्मक कौशल का पता नहीं है, तो उसे खोजें। अपने कौशल के लिए समय निकालें और अपने हाथों से काम करें या अपने मूल विचार का पता लगाएं जो आपकी प्रतिभा चमका दे, निखार दे। 

कुछ ऐसा सीखें जो आपने पहले कभी नहीं किया हो, कुछ लिखें, नयी किताब पढ़ें, नयी कोई रचना करें। कोई नया शिल्प सीखें। जो भी आपको अच्छा लगता हो उसे करें।   


ज्यादा सकारात्मक सोच वाले लोगों को ढूंढें और उनके साथ ज्यादा समय बिताएं। अगर आपके आसपास परिवार का कोई करीबी सदस्य या आपका जीवनसाथी लगातार नकारात्मक सोच रखते हैं, तो उसे अपने साथ सकारात्मक सोच रखने की राह पर साथ चलने के लिए प्रोत्साहित करें।

ऐसे लोगों से दूर रहें, जो आपकी शक्ति और प्रेरणा को खत्म करते हैं। अगर आप ऐसे लोगों को नजरंदाज करना चाहते हैं या उनको दूर भी नहीं कर पाते हैं, तो कैसे इनकी नीचे दिखानी वाली कोशिश से बचें और इनसे कम से कम संबंध बनायें रखें यह सीखें।




सलाह


"सकारात्मकता, सकारात्मकता को आकर्षित करता है" और “नकारात्मकता, नकारात्मकता को । अगर आप उदार और लोगों की मदद करने वाले व्यक्ति हैं, तो आप दूसरे लोगों से भी यही पायेंगे। वहीं दूसरी तरफ, अगर आप लोगों के साथ असभ्य, अशिष्ट और निर्दयी व्यवहार करते हैं, तो लोग आपका सम्मान नहीं करेंगे और आपके अनादरपूर्ण  व्यवहार के कारण लोग आपसे दूर भागेंगे।

हम अपने जीवन के सभी घटनाओं को नियंत्रित नहीं कर सकते हैं, परंतु अपने विकल्प को चुनना और महसूस करना हमारे हाथ में है। चुने हुए विकल्प का सकारात्मक या विपरीत दृष्टिकोण अपनाना हमारे हाथ में है। यह निर्णय हमी लेते हैं।



शारीरिक रूप से तंदुरुस्त रहें और पौष्टिक और संतुलित आहार का सेवन करें। सकारात्मक दृष्टिकोण रखने के लिए यह महत्वपूर्ण नींव है, क्योंकि अस्वस्थ रहने पर सकारात्मक रहना बड़ा ही मुश्किल काम होता है। हमेशा ख़ुशहाल रहें। सकारात्मक भावनाएं आपके उत्साह को बनाएं रखती हैं। अगर आप को लगता है कि आपका दिन अच्छा नहीं गुजरा, तो उस दिन में आपके साथ होने वाली अच्छी घटनाओं,  क्षणों को याद करें, और सोचें कि जो बुरी घटनाएं आपके साथ घटी थी वह और कितनी भयानक हो सकती थी। इस दृष्टिकोण को अपनाने से आपको आश्चर्य होगा कि आपका दिन कितना अच्छा बीता है। अपने जीवन पर नियंत्रण पाना सकारात्मक दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण पहलू है। सकारात्मक सोचना कितना आसान है जानने की कोशिश करें।


धन्यवाद । आशा है कि यह आपके काम आएगा।