शुक्रवार, 10 जुलाई 2020

सफलता कैसे पाएं ? अपनाएं ये चार नियम।


अगर आपको अक्सर ऐसा लगता है कि सफलता आपके हाथ नहीं आ रही है, तो आपको अब अपनी कोशिशों में कुछ बदलाव करने की जरूरत है। यहां पर इस लेख में हम कुछ ऐसे सुझाव दे रहे हैं, जिन्हें अपनाकर आप जीवन के हर क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकते हैं।


सफलता और असफलता में  बहुत मामूली सा ही फर्क है। इसको हम एक कहानी के माध्यम से समझने का प्रयास करते हैं।  एक गांव में तीन दोस्त रहते थे। एक दिन तीनो दोस्त नदी किनारे टहलने जाते हैं।  नदी किनारे जाने पर उन्होंने देखा कुछ लोग पानी में कलाबाजी दिखाते हुए तैर रहे थे। उनको तैरते देखकर तीनों मित्रों का भी दिल तैरने के लिए मचल रहा था।  लेकिन समस्या यह थी कि तीनों को ही तैरना नहीं आता था। उनमें से एक मित्र अति उतावलेपन में नदी में तैरने के लिए कूद पड़ा और गहराई में डूबने लगा। उसे डूबते देखकर नदी में पहले तैर रहे लोगों ने उसे बचाकर बाहर निकाला। अब इन महाशय ने कसम खा ली कि अब जिंदगी में कभी भी पानी में कदम नहीं रखेगें। तैरना मेरे बस का काम नहीं है। वहीं अपने दोस्त की यह दशा देखकर दूसरे मित्र ने पहले ही सोच लिया कि तैरना उनके बस का नहीं है और उन्होंने जीवन में कभी पानी में दोबारा उतरने का ख्याल ही दिल से निकाल दिया। वहीं पर तीसरे मित्र ने नदी के किनारे जहां पानी थोड़ा कम गहरा था उस हिस्से में तैरने कोशिश शुरू की। धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास बढ़ा तो वह नदी के गहराई में तैरने का प्रयास किया और अभ्यास किया।  अभ्यास और आत्मविश्वास कुछ और बढ़ा तो वह गहरे पानी में तरह-तरह के स्टाइल सीख कर तैरने में पारंगत हो गया। 


इस कहानी से यह सीख मिलती है कि, पहले मित्र ने काम के लिए आवश्यक कौशल के बिना ही जल्दबाजी में काम करना आरंभ कर दिया, असफल हुए और फिर सोच लिया कि यह काम जीवन में कभी दोबारा नहीं करना है। जबकि दूसरे मि़त्र ने कुछ भी प्रयास किये बिना ही हार मान ली। काम के लिए आवश्यक काबलियत के बिना जल्दबाजी में काम करना तथा प्रयास किये बिना ही हार मान लेना, दोनों ही असफलता का कारण बनते हैं, जबकि धैर्यपूर्वक काम सीखकर काम करना सफलता की गारंटी देती है। यहां पर मैं आपको सफलता के चार सूत्र बताता हूं। पहला है अपने काम में श्रेष्ठ बनने की भावना का होना। दूसरा - समस्याओं से डरे नहीं बल्कि साहसिक कदम उठायें। तीसरा - धैर्यशाली और संवेदनशील बने रहें  तथा चौथा है - उत्पादक बनें। 


अपने काम में श्रेष्ठ होने की भावना 


नौकरी करने वाले अधिकांश लोगों की भावना होती है कि, उनका काम में प्रमोशन हो ,उनकी वेतन बढ़ोत्तरी होती रहे। हम ज्यादा पैसे कमाने लगें। वहीं अपना खुद का व्यवसाय धंधा करने वालों की सोच होती है कि, हमारा व्यवसाय ज्यादा से ज्यादा फायदेमंद हो। हमारी आमदनी बढे। हमारे लिए  सफलता का मतलब ही यही है कि हम अमीर हो जाएं और हमारे पास ज्यादा पैसे हों। पैसा ही नहीं आया तो सफलता बेमानी हो जाती है। यह एक जाल है। यहीं हम फंस जाते हैं, और उसी में अटके पड़े रहते हैं। जबकि यदि काम हम इस भावना से करें कि हमारा काम सर्वोत्कृष्ट हो तो जो हम चाहते हैं वह अपने आप होता चला जायेगा। इसका परिणाम यह होता है कि, देर सबेर हमारे अधिकारी या ग्राहक हमारे काम को नोटिस करते हैं और उनके मन में हमारी साख अच्छी बन जाती है। जब हम खुद को ज्यादा काबिल बनाने के रास्ते पर चलते हैं तो हम बेहतर काम कर पाते हैं।लेकिन यदि हमारे पास अपेक्षित योग्यता न हो और हम पैसा कमाने या प्रमोशन पाने की लालच में काम करने लग जाएं तो हमारे हाथ अक्सर निराशा ही लगती है।


समस्यायों से डरे नहीं बल्कि साहसिक कदम उठायें 


प्रत्येक कार्य में एक रोमांच निहित होता है हालांकि, यह लोगों की सोच के अनुसार थोड़ा अलग होता है। साहसिक लोग रोमांचकारी या जोखिमपूर्ण कार्यों को आगे बढ़ने का नया मौका या अवसर की तरह लेते हैं और सफलता पाने या असफल होने पर अनुभव प्राप्त करते हैं, हालांकि, कायर लोग इसे खतरनाक कार्य की तरह लेते हैं और इन्हें करने का कभी भी प्रयास नहीं करते हैं, और असफल होते हैं।

हर नया काम शुरू करने से पहले कठिन लगता है। उसमें जोखिम दिखाई देता है। असफल होने का डर लगता है। लेकिन जब वही काम हम कर लेते हैं तो यह काम  बहुत आसान लगने लगता है और साहसिक काम हो जाता है। 

काम में असफल होना एक बात है और बिना काम की शुरुवात किये हार मान लेना एकदम अलग बात है। वैज्ञानिक आविष्कार पहली बार में ही सफल नहीं हो जाते, जीवन के ज्यादातर काम भी लगातार प्रयास करने और प्रयास करते रहने पर ही संभव हो पाते हैं। असफलता तो सफलता की सीढ़ी है, बशर्ते कि हम अपनी असफलता से सबक लें, गलती को फिर से न दोहराएं और असफल होने के बाद काम को छोड़ने की बजाय फिर नए सिरे से दोबारा शुरू कर दें। किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए आवश्यक तैयारी करना बहुत जरुरी होता है। 


धैर्यशाली और संवेदनशील बने रहें 


याद रखें, केवल धैर्य ही आपको अपनी पूरी मानसिक क्षमता का उपयोग करने में सक्षम बनाता है और जिसके कारण आप कठिन से कठिन चुनौतियों का सफलता पूर्वक सामना करने के योग्य बन जाते हैं। इसलिए धैर्य को बनाए रखने की प्रवृति का विकास करें। धैर्य रखने का सीधा मतलब अपने स्वभाव के शांत होने से है। जब आप शांत होकर स्थिरता के साथ चुनौतियों का सामना करते हैं और अपने आपको उत्तेजित नहीं होने देते तो आप इतना मजबूत हो जाते हैं कि किसी भी कठिनाई का समाना आप आसानी से कर सकते हैं। 

धैर्य और संवेदनशीलता का मतलब है कि लोग हमारे साथ काम करना पसंद करें। इसके लिए आवश्यक है कि हम हमारे साथ काम करने वाले लोगों की बातों पर ध्यान दें। उनकी सलाह को ध्यान देकर सुनें और उन्हें महत्व दें। हमारे साथ काम करने वाले लोग यदि अच्छा काम करते हैं तो उन्हें श्रेय दें। उनकी समस्याओं को समझने की कोशिश करें और उनकी समस्यायों के समाधान करने में उनकी मदद करें। इससे आपकी लोकप्रियता बढ़ेगी और लोग आपके साथ काम करने में आनंदित महसूस करेंगे। 


उत्पादक बनें 


उत्पादक होने के लिए दो मूलभूत गुणों की आवश्यकता होती है। पहला है योग्यता और दूसरा अनुशासन। 

हमें कोई भी काम योग्य तरीके से करने के लिए आवश्यक है कि वह काम करने की योग्यता हमारे अंदर होनी चाहिये, उस काम को करने का तकनीकी ज्ञान हो या और कुछ उसे हमें सीखना चाहिए और उसमें विशिष्टता हासिल करनी चाहिए, तभी हम सही मायने में उत्पादक हो सकते हैं। 

दूसरा है अनुशासन, हमें किसी भी काम को अच्छी तरह से करने के लिए आवश्यक है कि पहले हम एक कार्य - योजना बनाएं और उस कार्य -योजना का अनुशासित ढंग से अनुसरण करें। दिन भर के कार्यों की सूची बनायें। महत्वपूर्ण कार्यों को छांट लेना चाहिए।  एक एक करके सभी कार्यों को सिलसिलेवार निपटाना चाहिए। जो काम पूरा हो जाय उसे सूची से निकाल दें। इससे समय की बचत होगी और हमारी उत्पादकता बढ़ेगी। 


नोट : - इस लेख में लेखक के विचार पूरी तरह से निजी हैं।  कृपया नीचे टिप्पणी में अपने विचार साझा करें । 



जितना आप मुझसे सीखते हैं उतना ही मैं आपसे सीखता हूं।