कई बार आपने कुछ लोगों को बड़बड़ाते हुए देखा होगा। आमतौर पर जब हम किसी को ऐसा करते देखते हैं, तो हम उन्हें सनकी या पागल कहते हैं। हमें लगता है कि उनकी दिमागी हालत ठीक नहीं होती है इसीलिए वे अपने आप से बातें करते रहते हैं।
छोटे बच्चे अक्सर यह काम करते हैं। अध्ययन से पता चलता है कि बच्चों के विकास में, अपने आपसे बात करने की यह आदत बहुत कारगर साबित होती है।
2008 में छपी एक शोध की रिपोर्ट के मुताबिक़, पांच साल की उम्र वाले जो बच्चे अपने आप से ज़्यादा बातें करते हैं, वे उन बच्चों की अपेक्षाकृत ज्यादा होशियार होते हैं , जो उस उम्र में ज्यादातर ख़ामोश रहते हैं।
अगर आप भी अपनी याददाश्त को तेज़ करना चाहते हैं, काम पर ज़्यादा ध्यान देना चाहते हैं, तो ख़ुद अपने आपके दोस्त बनिए और अपने आपसे बाते कीजिए।
दरअसल, ऐसे लोग जो अपने आपसे बातें करते हैं और जिसे हम दिमागी दशा ख़राब होना समझ कर नजरअंदाज करते हैं, अपने आप से बातें करने की यही आदत आपके लिए बड़े काम की साबित हो सकती है।
दुनिया में आज बहुत से विशेषज्ञ यह सलाह देते हैं कि आप ख़ुद से बातें करें। उनके मुताबिक़ इससे याददास्त तेज़ होती है,आत्मविश्वास भी बढ़ता है और आप किसी भी काम पर अपना ज़्यादा ध्यान केंद्रित कर पाते हैं।
ब्रिटिश मनोवैज्ञानिक और लेखिका एनी विल्सन का कहना है कि, वे अपने सभी ग्राहकों को अपने आपसे से बातें करने की सलाह देती हैं।
एनी विल्सन का कहना है कि, इंसान हमेशा चाहता है कि हमारे आसपास वही लोग रहें जो हमसे ज़्यादा ज्ञानी हों, जिनसे हमें कुछ सीखने को मिल सके। सबसे महत्वपूर्ण यह कि जो हमें समझ सकें। जो ख़ासियतें हम दूसरों में तलाशते हैं, वही हम अपने अंदर भी हासिल कर सकते हैं। आख़िर में इंसान ख़ुद को सबसे अच्छी तरह से जानता है, पहचानता है। जब हम ख़ुद से बाते करने लगते हैं तो बहुत हद तक हम अपने अंदर ही उन्हें तलाश लेते हैं। ऐसे में हम ख़ुद अपने आप को ही सबसे ज़्यादा दिलचस्प शख़्सियत पाते हैं और हमारी ख़ुद से दोस्ती हो जाती है।
एनी विल्सन कहती हैं- अगर उनके किसी मरीज़ को बहुत गुस्सा आता है, तो वो उसे भी अपने आपसे बात करने की सलाह देती हैं, क्योंकि ऐसा करने से समस्या का हल निकल आता है और गुस्सा ग़ायब हो जाता है।
अमरीका की विस्कॉन्सिन यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर गेरी लुपयन कहते हैं कि तेज़ आवाज़ में ख़ुद से बात करना हमें भले ही अजीब लग सकता है, लेकिन है यह सफलता का एक नुस्खा है। वो अपनी शोध के आधार पर कहते हैं कि ऐसा करने से हमको बहुत फ़ायदा हो सकता है।
ब्रिटिश मनोवैज्ञानिक और लेखिका एनी विल्सन का कहना है कि, वे अपने सभी ग्राहकों को अपने आपसे से बातें करने की सलाह देती हैं।
एनी विल्सन का कहना है कि, इंसान हमेशा चाहता है कि हमारे आसपास वही लोग रहें जो हमसे ज़्यादा ज्ञानी हों, जिनसे हमें कुछ सीखने को मिल सके। सबसे महत्वपूर्ण यह कि जो हमें समझ सकें। जो ख़ासियतें हम दूसरों में तलाशते हैं, वही हम अपने अंदर भी हासिल कर सकते हैं। आख़िर में इंसान ख़ुद को सबसे अच्छी तरह से जानता है, पहचानता है। जब हम ख़ुद से बाते करने लगते हैं तो बहुत हद तक हम अपने अंदर ही उन्हें तलाश लेते हैं। ऐसे में हम ख़ुद अपने आप को ही सबसे ज़्यादा दिलचस्प शख़्सियत पाते हैं और हमारी ख़ुद से दोस्ती हो जाती है।
एनी विल्सन कहती हैं- अगर उनके किसी मरीज़ को बहुत गुस्सा आता है, तो वो उसे भी अपने आपसे बात करने की सलाह देती हैं, क्योंकि ऐसा करने से समस्या का हल निकल आता है और गुस्सा ग़ायब हो जाता है।
अमरीका की विस्कॉन्सिन यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर गेरी लुपयन कहते हैं कि तेज़ आवाज़ में ख़ुद से बात करना हमें भले ही अजीब लग सकता है, लेकिन है यह सफलता का एक नुस्खा है। वो अपनी शोध के आधार पर कहते हैं कि ऐसा करने से हमको बहुत फ़ायदा हो सकता है।
प्रोफ़ेसर गैरी लुपयन ने एक प्रयोग किया था, जिसमें कुछ लोगों को कंप्यूटर की स्क्रीन पर कुछ चीज़ें सिर्फ़ देखने को कहा और कुछ को तेज़ आवाज़ में उन चीजों का नाम पुकारने को कहा। उन्होंने देखा कि, जिन लोगों ने तेज़ आवाज़ में उन चीज़ों का नाम लिया, वे स्क्रीन पर उन चीज़ों को जल्दी और आसानी से पहचान पाए और जो लोग सिर्फ़ स्क्रीन को देख रहे थे, उन्हें वही चीज़ें पहचानने में थोड़ा समय लगा।
इसी तरह का प्रयोग उन्होंने एक दुकान पर भी किया, जिन लोगों ने सब्ज़ियों की तस्वीर देखकर उनका नाम तेज़ आवाज़ में पुकारा था, उन्हें दुकान में वही सब्ज़ी तलाशने में आसानी हुई।
प्रोफेसर गैरी का कहना है कि जब हम किसी चीज़ का नाम अपनी ज़ुबान से तेज़ आवाज़ में लेते हैं तो उसकी तस्वीर हमारे ज़हन में बन जाती है। हमारा दिमाग़ ख़ुद-ब-ख़ुद ज़रूरत पड़ने पर उसे हमारे ज़हन में ज़िंदा कर देता है।
2014 में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़, जब हम किसी को तुम या वह कहकर बातें करते हैं, तो हम अपने जज़्बात पर जल्दी काबू कर लेते हैं. क्योंकि ऐसे में हम खुद एक दूसरी शख़्सियत बनकर अपने को ही समझाते हैं।
सच तो ये है कि हम सब खुद से बाते करते हैं। जब हम सार्वजनिक तौर पर खुद से ज़ोर-ज़ोर से बाते करने लगते हैं तब अजीब लग सकता है, लेकिन हम मन ही मन अपने आप से बाते करते रहते हैं। अब उदाहरण के लिए ही ले लीजिए - जब आप रोज़ सुबह घर से निकलते हैं तो क्या खुद से नहीं पूछते कि आपने सारे ज़रूरी सामान जैसे चाबी, रुमाल, पेन, बैग, लंच आदि रख लिया है या नहीं।
सच तो ये है कि हम सब खुद से बाते करते हैं। जब हम सार्वजनिक तौर पर खुद से ज़ोर-ज़ोर से बाते करने लगते हैं तब अजीब लग सकता है, लेकिन हम मन ही मन अपने आप से बाते करते रहते हैं। अब उदाहरण के लिए ही ले लीजिए - जब आप रोज़ सुबह घर से निकलते हैं तो क्या खुद से नहीं पूछते कि आपने सारे ज़रूरी सामान जैसे चाबी, रुमाल, पेन, बैग, लंच आदि रख लिया है या नहीं।
ख़ुद से बातें करने के फ़ायदे
- खुद से बात करने की आदत अच्छी होने के साथ ही साथ हमारी सफ़लता में मददगार होती हैं। अपने बुरे वक्त में हम सबसे ज़्यादा खुद से बाते करते हैं। खुद को प्रोत्साहित करते हैं।
- खुद से बातें करने से हमें रोज़ की समस्याओं से निपटने के लिए मदद मिलती है।
- खुद से बात कर के हम खुद को डर और नर्वसनेस निकालने में कामयाबी पा सकते हैं।
- खुद से बातें करने से तनाव कम होता है।
-खुद से बातें करने से आप में आत्मविश्वास पैदा होगा, जिससे आप जीवन में कुछ अच्छा कर पाएंगें।
-खुद से बातें करने से आप अपने काम पर फोकस करके जीवन में सफलता प्राप्त कर सकेंगे.
क्या खुद से बाते करने में खतरे की भी कोई गुंजाइश है?
गुंजाइश तो हो सकती है। कुछ मामलों में लोग पागल तक हो जाते हैं। लेकिन ऐसा कम ही होता है कि लोग खुद से बातें कर के खुद को ही हानि पहुंचाते हैं।
हम सभी के लिए हर समय ख़ुद से बात करना ना तो संभव है और ना ही हम कर पाते हैं।
इसकी बड़ी वजह ये है कि समाज में ख़ुद से बातें करने वाले को पागल करार दिया जाता है। इसीलिए कई लोग चाहकर भी ख़ुद से बातें नहीं कर पाते। उन्हें सनकी कहकर ख़ारिज किए जाने का डर रहता है। शुरूआत में यह थोड़ा अजीब लगेगा. लेकिन, जब इसके फ़ायदे आपके सामने आएंगे, तो यक़ीन जानिए आप ख़ुद हैरान रह जाएंगे।
क्या बोलें
- सुबह उठकर खुद से बोलें, मैं खूबसूरत हूँ, मैं अच्छी सेहत और खुशियां पाने के लायक हूँ या फिर मैं आज कुछ बेहतरीन काम करूंगी/ करूंगा. रोजाना सुबह उठकर तेज आवाज में खुद से ऐसा बोलने से आप में आत्मविश्वास पैदा होगा। जिससे आप जीवन में कुछ अच्छा कर पाएंगें। मन में नकारात्मक विचार आने पर तेज आवाज में खुद से बोलें कि, 'मैं जीवन में सफल बनूंगा\बनूंगी। ऐसा करने से आप अपने कार्य के प्रति ज्यादा पॉजिटिव और उत्साह महसूस करेंगे और अपने काम को अच्छी तरह से कर पाएंगे।
English Translation
- Get up in the morning and say to yourself, I am beautiful, I am capable of getting good health and happiness, or I will do some good work today. Waking up daily in the morning and speaking to yourself in a loud voice will instill confidence in you. With which you will be able to do something good in life.
When you have negative thoughts in your mind, say to yourself in a loud voice, "I will become successful in life". By doing this you will feel more positive and enthusiastic about your work and will be able to do your work well.
