शुक्रवार, 30 अप्रैल 2021

खुद में निवेश करने का 29 तरीका । / 29 ways to invest in yourself.


1 - पौष्टिक और सेहतमंद खाना खाएं। 

२ - दूसरों की राय के बारे में चिंता मत करो। 

3 - जल्दी सोयें और जागें। 

4 - टाल - मटोल करना बन्द करें। 

5 - अपने समय का बेहतर प्रबंधन करना सीखें। 

6 - अपनी एक दिनचर्या बनायें और उसका नियमित ढंग से अनुशरण करें। 

7 - खुद को रोजाना चुनौती दें।

8 - नए अनुभव हासिल करने पर पैसा खर्च करें। 

9 - सफलता की कल्पना करें। 

10 - दूसरों की गलतियों को माफ़ करना सीखें। 

11 - लोगों का समर्थन हासिल करने के लिए प्रयास करना बंद करो। 

12 - सकारात्मक पॉडकास्ट सुनें। 

13 ज्ञानवर्धक शैक्षिणिक शो देखें। 

14 - अपने दोस्तों को समझदारी से चुनें। 

15 - ज्ञानवर्धक, प्रेरक और सकारात्मक सोच बढ़ाने वाली पुस्तक पढ़ें। 

16 - विषाक्त दोस्तों से छुटकारा पाएं। 

17 - परिवार के सदस्यों और दोस्तों के संपर्क में रहें। 

18 - कोई एक नई भाषा सीखें। 

19 - कोई अपना पसंदीदा व्यवसाय शुरू करें। 

20 - कोई मार्गदर्शक (मेंटर) खोजें। 

21 - अपने दिन और सप्ताह की योजना बनाएं

22 - अपना लक्ष्य निर्धारित करें। 

23 - ध्यान (मैडिटेशन) का अभ्यास करें। 

24 - हर दिन व्यायाम करें। 

25 - जीवन में काम आने वाले लोगों का आभार मानने का अभ्यास करें। 

26 - अपने जीवन की योजना बनायें। 

27 - अधिक नए कौशल सीखें। 

28 - कोई एक नया और लाभदायक शौक शुरू करें। 

29 - शराब का सेवन कम करें। 


सोमवार, 26 अप्रैल 2021

सफल और असफल लोगों के बीच अंतर

 दोस्तों आज मैं आपको बताऊंगा कि सफल लोगों और असफल लोगों के बीच में क्या फर्क होता है, जो उन दोनों को अलग बनाते हैं सफल लोग ऐसा क्या करते हैं जो असफल लोग कभी नहीं करते। इस दुनिया में सभी लोग अपने जीवन में सफल होना चाहते हैं। हालांकि सफल लोगों की संख्या काफी सीमित है। कहा जाता है कि लोगों को उनकी आदतें सफल बनाती हैं। अगर आपमें भी वैसी ही आदतें हैं, जो इंसान को सफल बनाती हैं तो आपके सफल होने संभावना काफी बढ़ जाती है। तो आइए जानते हैं कौन-कौन सी वे आदतें हैं, जो हमें सफल या असफल बनाती हैं?


 आज आप ये लेख पढ़कर खुद जान जाएंगे सफल और असफल लोगों में क्या अंतर होता है।

#1 - लक्ष्यों को लेकर स्पष्टता - 


सफल व्यक्ति – सफल व्यक्ति अपने लक्ष्यों को लेकर स्पष्ट होते हैं। लक्ष्यों तक पहुचने के लिए एक बेहतर और ठोस कार्य योजना बनाते हैं और उसके मुताबिक काम करते हैं।


असफल व्यक्ति – असफल व्यक्ति अपने लक्ष्यों को लेकर स्पष्ट नहीं होते हैं। लक्ष्य स्पष्ट नहीं होने की वजह से असफल व्यक्ति सिर्फ बेबुनियाद योजनाएं बनाते हैं। जिस पर बहुत समय तक टिक कर काम नहीं कर पाते हैं। आज कुछ तो कल कुछ और करते रहते हैं। हमेशा अपने लक्ष्यों को बदलते रहते हैं। 

#2 - सराहना करना -


सफल व्यक्ति – सफल व्यक्ति दूसरों के अच्छे कार्यों की सराहना करते हैं, और उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देते हैं।


असफल व्यक्ति – असफल लोग सिर्फ दूसरों की कमियां ढूढ़ते हैं और आलोचना करते हैं। लोगों की टांग खींचने का काम करते हैं। 

#3 - सकारात्मक सोच रखना -


सफल व्यक्ति – सफल व्यक्ति हमेशा सकारात्मक सोच रखता है। खुद को हमेशा बेहतर बनाने के लिए प्रयत्न करता रहता है।


असफल व्यक्ति – असफल व्यक्ति हमेशा नकारात्मक विचार ही रखता है और सोचता है कि मेरे साथ जो कुछ हो रहा है वह बुरा ही हो रहा है और निराश होकर प्रयास करना छोड़ देता है।

#4 - बोलना कम और सुनना ज्यादा-


सफल व्यक्ति – सफल व्यक्ति हमेशा दूसरों को सुनता है और उनसे कुछ सीखता है। सफल व्यक्ति पहले नहीं बोलते हैं। वह पहले लोगों की बात सुनते हैं, फिर यदि आवश्यक हुआ तो ही बोलते हैं। अनावश्यक प्रलाप से दूर रहते हैं।  


असफल व्यक्ति – असफल व्यक्ति की सोच यह रहती है कि मुझे सब पता है, मुझे किसी से कुछ सीखने की जरुरत नहीं है । इसलिए वह दूसरों की कम सुनता है। यही सोच उन्हें आगे नहीं बढ़ने देती।

#5 - श्रेय देना -


सफल व्यक्ति – सफल व्यक्ति अपनी सफलता का श्रेय उन सभी लोगों को भी देता है, जिन्होंने कभी ना कभी जाने - अनजाने में उसकी मदद की हो। उनके प्रति कृतज्ञ रहता है और उनको धन्यवाद देता है।  


असफल व्यक्ति – असफल व्यक्ति को अगर किसी कारण से सफलता मिल भी जाये तो वो इसका श्रेय किसी दूसरे को नहीं देता।

#6 - गलती स्वीकार करना -


सफल व्यक्ति – सफल व्यक्ति से अगर कोई गलती हो जाये तो वो उसे सहज स्वीकार करते हैं और उससे सीख लेकर आगे बढ़ते हैं।


असफल व्यक्ति – असफल व्यक्ति अपनी गलतियों के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराता है। कभी भी अपनी गलती को स्वीकार नहीं करता है, इसलिए कभी सीख नहीं पाता।  

#7 - चुनौती का सामना करना -


सफल व्यक्ति – सफल व्यक्ति लक्ष्य के रास्ते में आने वाली सभी कठिनाइयों साहस के साथ सामना करता है, सूझ - बूझ और संयम से काम लेता है। 


असफल व्यक्ति – असफल व्यक्ति कठिनाइयों का सामना करने की बजाय उससे बचने का बहाना ढूंढ़ता है और लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही उस काम को अधूरा छोड़ देते हैं।

#8 - मेहनत करना -


सफल व्यक्ति – सफल व्यक्ति हमेशा दूसरों से ज्यादा मेहनत करते हैं। मेहनत करने से कभी भी पीछे नहीं हटते।  सफल व्यक्ति अपनी मेहनत पर यकीन करते हैं और अपनी मेहनत की वजह से ही सफलता पाते हैं। 


असफल व्यक्ति – असफल व्यक्ति मेहनत करने से कतराते हैं और सिर्फ अपने भाग्य पर निर्भर रहते हैं और सफलता न मिलने पर बस अपनी किस्मत को ही दोष देते हैं।असफल व्यक्ति खुद मेहनत करने की बजाय दूसरों को असफल बनाने में लगे रहते हैं और ऐसे में वो खुद पीछे रह जाते हैं।

#9 - ना कहने की आदत


सफल व्यक्ति – सफल लोगों में ना कहने की एक अच्छी आदत होती है। जो काम या बातें उन्हें पसंद नहीं होती उसे ना कहने में जरा भी हिचकते नहीं हैं। जो काम करने के लिए वे इच्छुक नहीं हैं तो उसे ना कहने में हिचकते नहीं है। इससे वह अपना समय और ऊर्जा दोनों की बचत करते हैं।

  
असफल व्यक्ति – असफल व्यक्ति जल्दी से किसी को ना नहीं कह पाते हैं। उन्हें अगर कोई काम पसंद नहीं है तो भी वे उसी में लगे रहते हैं, और अपना समय और ऊर्जा दोनों ही बेकार में खर्च करते है।  

#10 - जोखिम लेने की आदत

सफल व्यक्ति – सफल लोग जोखिम लेने से घबराते नहीं हैं लेकिन वह सोच समझकर जोखिम लेते हैं। जिससे उनके असफल होने की आशंका काफी कम हो जाती है। साथ ही सफल लोग ज्यादा भावुक नहीं होते हैं. यही वजह है कि वह अपनी ऊर्जा अपने काम को अच्छी तरह से लगा पाते हैं।  

असफल व्यक्ति – असफल लोग जोखिम लेने से घबराते हैं। वे कोई भी निर्णय भावुकता में लेते हैं। 

#11 - किताबें पढ़ना -

सफल व्यक्ति – अधिकतर सफल लोगों में किताबें पढ़ने की एक आदत सामान्य होती है। इससे उनकी कल्पनाशीलता और समस्याओं से निपटने की क्षमता बढ़ती है। बिल गेट्स, वारेन बफे या अन्य सफल लोगों में पढ़ने की आदत से हम सभी लोग अच्छी तरह से परिचित हैं। 

असफल व्यक्ति –  असफल लोगों में किताबें पढ़ने की आदत नहीं होती है। 

#12 - सही दोस्त चुनना -

सफल व्यक्ति – सफल लोग किसी को भी आसानी से दोस्त नहीं बनाते हैं, लेकिन जिससे दोस्ती करते हैं, उसे फिर अच्छी तरह से निभाते भी हैं। सफल लोगों में सही दोस्त चुनने की कला होती है। यही दोस्त सफल लोगों को मोटिवेट करने, उन्हें और बेहतर करने के लिए प्रेरित भी करते हैं।  

असफल व्यक्ति – असफल लोग किसी को भी आसानी से दोस्त बना लेते हैं।  उनके अंदर सही या गलत आदमी पहचानने की कला नहीं होती है। यही कारण है कि वे ऐसे दोस्तों का चुनाव करते हैं, जो उन्हें डिमोटिवेट करते हैं और कुछ भी नया करने से रोकते हैं। 

#13 - जीवनशैली -

सफल व्यक्ति – आम लोगों की तरह सफल लोग सामान्य जीवनशैली जीते हैं। अपने पहनावे और बाहरी दिखावे पर सफल लोग ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं। इससे उन्हें कपड़ों के बारे में ज्यादा सोचना नहीं पड़ता और उनका समय बचता है। जिसे वे उत्पादक कार्यों में खर्च करते हैं।  

असफल व्यक्ति –  असफल लोग दिखावे की जिंदगी जीते हैं। अपने पहनावे और बाहरी दिखावे पर असफल लोग ज्यादा ध्यान देते हैं, और अपना अधिक समय इस पर खर्च करते हैं

#14 -निर्णय लेने की क्षमता – 

सफल व्यक्ति – सफल व्यक्ति सही समय पर सही निर्णय लेते हैं। निर्णय लेने में कभी भी आगे - पीछे नहीं सोचते हैं। परिणाम चाहे जो भी हो एक बार जो निर्णय ले लिया उस पर काम करते हैं। 

असफल व्यक्ति –  असफल व्यक्ति समय पर सही निर्णय नहीं ले पाते हैं। निर्णय लेने में देर करते हैं परिणाम के बारे में पहले सोचते हैं। असफल व्यक्ति हमेशा यही सोचता रहता कि दूसरे लोग क्या सोचेंगे और जीवन में सही निर्णय नहीं ले पाते।

#14 - खुद में सुधार (सेल्फ इम्प्रूवमेंट) – 

सफल व्यक्ति –  हर इंसान में कुछ ना कुछ खामियाँ होती हैं। दुनियां शायद ही कोई ऐसा इंसान होगा जिसके अंदर कोई कमी ना हो। सफल व्यक्ति अपनी कमियों को ढूंढते हैं और लगातार उन्हें दूर करने की कोशिश करते हैं। अपने अंदर हमेशा सुधार करते रहते हैं। 

असफल व्यक्ति –  असफल व्यक्ति कभी भी अपनी कमियों पर ध्यान नहीं देते। बल्कि कमियों को छिपाते हैं, इसलिए अपने अंदर कोई सुधार नहीं कर पाते हैं।  

दोस्तों ये थे कुछ कारण जो सफल लोगों को असफल लोगों से अलग बनाते हैं और अब आप देखिये, आप कहाँ खड़े हैं। आपको अपनी किन आदतों में सुधार करने की जरुरत है।  

आशा करता हूं कि आपको यह लेख पसंद आया होगा और आप अपने विचार प्रकट करने के लिए कमेंट जरूर करें और अगर अच्छा लगा हो तो दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें।   

शनिवार, 24 अप्रैल 2021

समाज की सलाह बनाम सीईओ की सलाह / society advice. v/s CEO Advice.


 society advice

1- go to school

2 - get a job

3 - work to pay the debt

4 - trade time for the dollar

5 - two weeks of freedom

CEO Advice

1 - start a business

2 - build multiple income streams

3 - make dollar work for you

4 - the life of freedom

5 - travel the world

समाज की सलाह

1- स्कूल जाना

2 - नौकरी पाना 

3 - ऋण का भुगतान करने के लिए काम करना 

4 - धन कमाने के लिए समय का सौदा करना। 

5 - दो सप्ताह की स्वतंत्रता

सीईओ की सलाह

1 - एक व्यवसाय शुरू करें

2 - कई आय धाराओं का निर्माण

3 - धन का आपके लिए काम करना 

4 - स्वतंत्रता का जीवन जीना 

5 - दुनिया की सैर करना 


शुक्रवार, 23 अप्रैल 2021

कुछ लोग जरूरत से ज्यादा मोटे और कुछ लोग जरूरत से ज्यादा पतले क्यों होते हैं ?/Why are some people excessively obese and some people excessively thin?

आपने अक्सर देखा होगा कि कुछ लोग जरूरत से ज्यादा मोटे और कुछ लोग जरूरत से ज्यादा पतले या कमजोर होते हैं। आज कल बहुत सारे बच्चे छोटी उम्र में ही मोटापे का शिकार हो जाते हैं और कई बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं। जबकि वहीं पर कुछ बच्चे काफी कमजोर या पतले होने की वजह से बीमारियों से ग्रसित होते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है ? ऐसा नहीं है कि इस तरह के लोग या बच्चे खाते-पीते नहीं है या उन्हें खाने की वस्तुएं नहीं मिलती हैं। 

वास्तव में इस तरह के मोटापे या बीमारियों  का सबसे बड़ा कारण होता है, उन्हें संतुलित आहार नहीं मिलना। मतलब वे लोग जो कुछ भी खाते हैं उसमें शरीर के लिए आवश्यक प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन और खनिज-लवण जैसे पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा उपलब्ध नहीं होते हैं। संतुलित आहार नहीं लेने से न केवल शारीरिक और मानसिक विकास बाधित होता है बल्कि व्यक्ति की उत्पादकता भी काफी कम हो जाती है। अच्छी सेहत पाने के लिए संतुलित आहार का सेवन बेहद जरूरी होता है। अगर आप चाहते हैं कि आप जरुरत से ज्यादा मोटे या जरुरत से ज्यादा पतले न हों तो आपको संतुलित आहार लेने की जरुरत है।  संतुलित आहार लेने से आपका शारीरिक और मानसिक सेहत अच्छी रहती है और बीमारी होने की संभावना भी कम रहती है। संतुलित आहार लेने से वजन संतुलित होता है साथ ही लंबी उम्र भी मिलती है।      


आइए जानें क्‍या है संतुलित आहार और उसका हमारे जीवन में महत्‍व।

हमारे शरीर को पूरी तरह स्‍वस्‍थ रहने के लिए तमाम पोषक पदार्थों की जरूरत होती है। ये पोषक पदार्थ अलग-अलग तरह के भोजन से हमें मिलते हैं, जैसे - ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, फलियां, सूखे मेवे, डेयरी उत्‍पाद और मीट वगैरह से। संतुलित आहार वह आहार है जिसमें शरीर के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व जैसे प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन, खनिज-लवण और पानी उचित मात्रा में पाया जाता हो। इसके इस्तेमाल से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। संतुलित आहार के लिए जरूरी है कि अपने खाने में सभी खाद्य समूहों जैसे अनाज, दालें, सब्जियां, फल, घी, दूध, दही, अंडा, मांस, मछली का पर्याप्त मात्रा में समावेश किया जाय। मौसम के अनुसार उपलब्ध फलों और सब्जियों को पर्याप्त मात्रा में अपने खाने में शामिल किया जाए।


आदर्श संतुलित आहार में आमतौर पर 50 से 60 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट, 20 से 25 प्रतिशत प्रोटीन और 25 से 30 प्रतिशत वसा शामिल होना चाहिए। एक बात पर हमेशा ध्यान देना चाहिए कि अत्यधिक मात्रा में भोजन करना बिलकुल जरूरी नहीं है। अधिक भोजन हमेशा गंभीर बीमारियों और मोटापे का कारण होता है।

दरअसल हर व्यक्ति को उसकी शारीरिक आवश्यकताओं, आयु, लिंग के आधार पर संतुलित आहार की जरूरत होती है। जैसे ज्यादा शारीरिक कार्य करने वाले व्यक्ति को भोजन में ज्यादा मात्रा में कार्बोहाइड्रेट लेना चाहिए। बच्चों की शारीरिक वृद्धि के लिए प्रोटीन की आवश्यकता अधिक होती है। इसलिए बच्चों के भोजन में प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों की अधिक मात्रा होनी चाहिए। इसी तरह स्त्रियों के लिए लौह तत्व और कैल्शियम की जरूरत अधिक होती है। इसलिए स्त्रियों के भोजन में लौह तत्वों और कैल्सियम तथा विटमिन से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल किया जाना चाहिए। शरीर की जरूरत और उम्र के हिसाब से संतुलित आहार लेना चाहिए। 

एक संतुलित आहार में ये सब चीजें होनी चाहिए:

प्रोटीन : प्रोटीन हमारे शरीर में होने वाली टूट-फूट की मरम्‍मत और शरीर के विकास के लिए आवश्यक होता है। मांसपेशियों से लेकर हमारी कोशिकायें भी प्रोटीन पर निर्भर करती हैं। प्रोटीन की कमी से गठिया, हार्ट डि‍जीज, गंजापन जैसी तमाम बीमारियां होने की संभावना बढ़ जाती है। हमें प्रोटीन मांस, मछली, अंडों, सी फूड, दूध, दही, दालों, सूखे मेवों से मिलता है।


विटामिन और मिनरल: ताजे फलों और सब्जियों से हमें जरूरी विटामिन और मिनरल या खनिज पदार्थ मिलते हैं। ये हमारे रक्तचाप को नियंत्रित रखते हैं, विटामिन की कमी से होने वाले ढेरों रोगों को रोकते हैं और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं।

कैल्शियम: कैल्शियम हमारे शरीर की हड्डियों और दांतों के विकास और उनके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए जरूरी है। इसके अलावा यह हमारी मांसपेशियों को मजबूत करता है। यह दूध और दूसरे डेयरी उत्‍पादों में अधिकता से पाया जाता है।

कार्बोहाइड्रेट: शरीर को कार्बोहाइड्रेट से ऊर्जा मिलती है। हमें अपनी हर डाइट में इन्‍हें शमिल करना चाहिए। हमें ऐसे कार्बोहाइड्रेट खाने चाहिए जो धीरे-धीरे शुगर में टूटें। इनमें साबुत अनाज, ब्राउन राइस, दालें, फलियां शामिल हैं। इनमें एंटी ऑक्सिडेंट भी भरपूर मात्रा में होते हैं इसलिए ये कैंसर जैसे रोगों से भी हमारी रक्षा करते हैं।

शुगर और फैट: चीनी और फैट पूरी तरह से सेहत के लिए खराब नहीं होते, इनकी अधिकता खराब होती है। एक संतुलित आहार में इनकी भी भूमिका है। बहुत सारे विटमिन ऐसे हैं (ए,डी,ई और के) जो फैट के जरिए ही शरीर में अवशोषित होते हैं। फैट और शुगर शरीर की प्रतिरोधी क्षमता को भी मजबूत करते हैं। फैट को घी, तेल, मक्‍खन और शुगर को गुड़, शहद वगैरह से हासिल किया जा सकता है।

संतुलित आहार लेने के लाभ  |


संतुलित आहार लेने से अनेकों फायदे हैं। संतुलित आहार लेने से व्यक्ति के शरीर के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्वों की पूर्ति होती है। जिससे हम स्वस्थ और तंदुरुस्त रहते हैं। हमारा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है। संतुलित आहार अनेक रोगों और संक्रमण को रोकने में सहायता करता है। हमारी इम्युनिटी पावर बढ़ती है जिससे रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ जाती है। यह मनुष्य के मानसिक क्षमताओं और स्मरण शक्ति में भी वृद्धि करता है। संतुलित आहार आयु और लंबाई के अनुसार उचित शारीरिक वजन को बनाए रखने में भी काफी सहायक होता है। कम आहार ग्रहण करने से मनुष्य अल्पपोषण का शिकार हो जाता है जबकि अधिक आहार ग्रहण करने से मोटापा और अन्य बीमारियां घर बना लेती हैं। ऐसे में संतुलित आहार इन सब विकारों को दूर करने का काम करता है। स्वस्थ और संतुलित भोजन से मधुमेह, कैंसर, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों को रोकने में मदद मिलती है। 

संतुलित आहार से मुख्यतः आपके शरीर को ये लाभ होते हैंः-

  • शरीर को ऊर्जा मिलती है।
  • शारीरिक तन्तुओं का निर्माण होता है।
  • बीमारियों से बचाव होता है।
  • शारीरिक गतिविधियां सुचारू रूप से जारी रहती हैं।

 

महिलाओं और पुरुषों के संतुलित आहार में क्या फर्क है। 

दरअसल प्रत्येक व्यक्ति के शरीर की बनावट भिन्न होती है इसीलिए हर शरीर की पोषण आवश्यकताएं भी एक समान नहीं होती। इसलिए कोई एक आहार जो एक व्यक्ति के लिए संतुलित है वह दूसरे के लिए जरूरत से कम या अधिक पोषक तत्व प्रदान करने वाला साबित हो सकता है। ऐसे कई कारक हैं जो संतुलित आहार को प्रभावित करते हैं। इसलिए इस बात पर हमेशा ध्यान देने की जरूरत है कि किसी व्यक्ति की आयु, लिंग, शारीरिक क्षमता और जीवन शैली क्या है ? वह किस प्रकार की जलवायु में निवास करता है ? इन्हीं प्रश्नों के आधार पर संतुलित आहार का निर्धारण किया जा सकता है। जैसे बच्चे और बड़ों के संतुलित आहार में फर्क हो सकता है उसी तरह महिलाओं और पुरुषों के संतुलित आहार में भी फर्क होता है।

संतुलित आहार खाने वाले ‘स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली’ की नींव रखते हैं। इससे दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम कम होता है। साथ ही यह देश में मानव संसाधनों के विकास के लिए भी बेहद जरूरी है। हम सभी जानते हैं कि एक स्वस्थ समाज द्वारा ही एक स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरे समाज के आहार और पोषण पर विशेष ध्यान दिया जाए।

पुरुषों के लिए संतुलित आहार 


पुरुषों को संतुलित आहार के रूप में इन खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिएः-

  • कार्ब्स और प्रोटीनयुक्त भोजन करें।
  • सोने से लगभग एक घण्टा पहले भोजन करने की आदत डालें।
  • इसके साथ ही सुबह व्यायाम एवं टहलने की आदत डालनी चाहिए।
  • सुबह उठकर एक गिलास दूध, जिसमें मलाई ना हो ले सकते हैं। इसके साथ 3-4 बादाम खाएँ।
  • शाम को थोड़ी मात्रा में स्नैक्स जैसे- जूस, फल, ग्रीन टी, नट्स आदि लेने से ऊर्जा का स्तर बना रहता है।
  • नाश्ते में अंकुरित अनाज, मौसमी फल या उपमा ले सकते हैं। नाश्ते में कार्बोहाइड्रेट युक्त आहार का सेवन करना चाहिए।
  • दोपहर के भोजन में दाल, रोटी, सब्जी, चावल एवं सलाद ले सकते हैं। इसके साथ में एक कप दही या  छाछ भी लेना चाहिए।
  • रात में कम एवं हल्का भोजन करना चाहिए। रात के भोजन में चावल ना लें। केवल रोटी, सब्जी एवं सलाद ले सकते हैं।

महिलाओं के लिए संतुलित आहार 


  • महिलाओं के लिए पोषण संबंधी आवश्यकताएँ पुरुषों से भिन्न होती है। महिलाएँ को मासिक धर्म के कारण पुरुषों की तुलना में अधिक आयरन की आवश्यकता होती है। इसलिए महिलाओं को संतुलित आहार के रूप में इन खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिएः-
  • महिलाओं को नाश्ते में प्रोटीनयुक्त आहार लेना चाहिए।
  • ब्रेड या फिर दलिया के अंकुरित अनाज का सेवन करें।
  • मौसमी फलों का सेवन करें। दूध और नट्स भी नाश्ते में ले सकते हैं।
  • दिन का भोजन, कार्ब्स, प्रोटीन और वसा से युक्त करें।
  • भोजन में 2 रोटी, एक कटोरी चावल, दाल, सब्जी, सलाद एक दही का सेवन करें।
  • शाम के वक्त ग्रीन टी, जूस, फल या नट्स ले सकते हैं।
  • रात का भोजन दिन की तुलना में हल्का होना चाहिए। 2 रोटी, सब्जी, सलाद एवं कटोरी दाल लेनी चाहिए।
  • रात में सोने से पहले एक गिलास दूध पिएँ।


गुरुवार, 22 अप्रैल 2021

दुःखी या अप्रसन्न लोगों की 10 बुरी आदतें। / 10 Bad Habits of Unhappy People.



सभी लोगों की ज़िंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। कभी हम बहुत खुश रहते हैं तो कभी दुःखी भी होते हैं।  दुनियां में बहुत से लोग ऐसे हैं जिनके पास हर तरह की सुविधाएँ हैं, साधन संपन्न हैं, लेकिन फिर भी वे अपनी ज़िंदगी से खुश नहीं हैं, संतुष्ट नहीं हैं। वहीं पर कुछ लोग ऐसे भी हैं जो गरीबी में रहने के बावजूद हमेशा खुशहाल रहते हैं। उनके चेहरे पर हमेशा मुस्कराहट बनी रहती है। कुछ लोग अपनी कुछ बुरी आदतों की वजह से हमेशा दुःखी रहते हैं। अगर आपके अंदर भी ये बुरी आदतें होंगी तो आप अपनी जिंदगी में बहुत ज्यादा दुःखी होंगे। इसलिए यह लेख आपके लिए ही है, इससे आपको काफी कुछ सीखने को मिलेगा। इसे आखिर तक जरूर पढ़ें।


यहाँ पर हम खुश नहीं रहने वाले लोगों की कुछ बुरी आदतों के बारे में बात करेंगे :

1 -हमेशा शिकायत करने की आदत :


हमारे आसपास कई ऐसे लोग मौजूद होते हैं, जो अपने जीवन से हमेशा असंतुष्ट रहते हैं। अच्छी से अच्छी बातों में भी ये परेशानी का कोई न कोई सबब ढूंढ ही लेते हैं, क्योंकि हमेशा शिकायत करना इनकी आदत होती है। उनके चेहरे पर कभी भी मुस्कराहट नहीं दिखती है। खुशहाल और सफल लोग ज्यादा शिकायतें नहीं करते हैं। अगर आपके अंदर भी यह बुराई है तो इससे जितना जल्दी हो सके दूरी बना लें। 

अगर आप हमेशा खुश रहना चाहते हैं तो आपको अपने अंदर से हमेशा शिकायत करने वाली आदत को बाहर निकाल फेंकना होगा। अगर आप कोई काम सफलतापूर्वक नहीं कर पा रहे हैं तो इसमें कहीं न कहीं आपकी ही कमी है। जरुरत है आपको अपनी कमी को पहचान कर उसे दूर करने की। अगर आप अपने दोष को स्वीकार करने की बजाय दूसरों के ऊपर दोष मढ़ेंगे तो आप जिंदगी में कभी भी खुश नहीं रह सकते। हम इंसान हैं, इंसान से गलती होना स्वाभाविक है। अगर हमसे कोई गलती होती है तो उन्हें स्वीकार करके हमें उन गलतियों को सुधारते हुए आगे बढ़ना चाहिए। बार - बार गलतियों को दुहराना नहीं चाहिए। खुश रहने वाले लोगों का सबसे बड़ा राज़ है कि वे अपनी गलतियों को स्वीकार करते हैं और उससे सीख लेकर आगे बढ़ते हैं। दुःखी लोगों की सबसे बुरी बात यह है कि वे लोग अनचाही स्थिति से बाहर निकलने के लिए कोई सार्थक प्रयास नहीं करते हैं, बल्कि वे हमेशा बस शिकायत ही करते रहते हैं।

2. दूसरों में कमी निकालने की आदत :


कुछ लोगों में बात-बात पर लोगों में कमी निकालने की आदत होती है। अपने सहकर्मियों की ही नहीं घर वालों की भी कमी ढूंढ़ते रहते हैं और उनके हर काम में मीन-मेख निकालते रहते हैं। घर में खाना बनेगा तो उसमे नुक्स निकालेंगे। ऑफिस में भी सहकर्मी के अच्छे से अच्छे काम में कमी निकालेंगे। ऐसे लोग खुद को सबसे परफेक्ट समझते हैं और दूसरे सभी को बेकार। लेकिन असल में यह एक बहुत बड़ी खामी है, जिससे आपकी छवि ख़राब बनती है और आप दुःखी रहते हैं। अपने आप की कीमत को पहचानना खुश रहने के लिए बेहद जरूरी है।

3. हमेशा शॉर्टकट की खोज करते रहने की आदत :


कुछ लोग किसी काम को करने के लिए हमेशा शॉर्टकट रास्ते खोजते रहते हैं।  ऐसे लोग किसी भी काम को मेहनत और लगन से नहीं करते हैं। याद रखें कि किसी काम को सफलतापूर्वक अंजाम तक पहुँचाने के लिए कोई शॉर्टकट तरीका नही होता है। मेहनत ही सफलता की सबसे बड़ी कुँजी है।

सफल और खुशहाल लोग लोग टेढ़े रास्ते पर चलने की बजाय हमेशा सीधे रास्ते को ही चुनते हैं, फिर चाहे कितना ही दूर ही क्यों न हो। अगर आप शॉर्टकट तरीके से किसी काम को कर भी लेते हैं तो आपको वह संतुष्टि और ख़ुशी नहीं मिलती है, जो मेहनत और ईमानदारी करने से मिलती है।  

4. नकारात्मक लत:


हमारे जीवन में कुछ चीजों का उपयोग करना अपरिहार्य है, जैसे - भोजन, ड्रिंक या मनोरंजन। जब तक हम इन चीजों का उपयोग संयमित तरीके से करते हैं तब तक तो ठीक है, लेकिन जब हम इनका उपयोग जरुरत से ज्यादा करने लगते हैं तो यह हमारे जीवन में समस्या पैदा करती हैं। अगर हमने जरुरत से ज्यादा खाना खाया तो मोटापा बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है जो हमारी सेहत को नुकसान पहुंचाती और हम दुखी हो जाते हैं। दुर्भाग्यवश, कई अच्छे लोग अल्कोहल या ड्रग्स के नशे की आदतों के कारण अपना जीवन बर्बाद कर लेते हैं। हर चीज उचित मात्रा में लेने से ही फायदा करता है। असंयमित तरीके से अधिक मात्रा में किसी भी चीज को लेना हमारे लिए बर्बादी का कारण बन सकती है। किसी भी ख़राब आदत को जैसे तम्बाकू, बीडी, सिगरेट, जंक फूड का सेवन हो या बात - बात पर गुस्सा करना, किसी की बुराई करना या ईर्ष्या करना हो, इन सभी बुरी आदतों को त्याग देना चाहिए।


5. भूतकाल का पछतावा करने की आदत :


आपने कई सारे लोगों को देखा होगा कि वो बीते हुए बातों व घटनाओं के बारे में हमेशा सोचते रहते हैं, बात करते रहते हैं। अतीत की बातों या घटनाओं को सोचकर पछतावा करना न सिर्फ बेकार है बल्कि हमारे लिए बहुत हानिकारक भी है। विज्ञान भी मानता है कि हमेशा अतीत की घटनाओं या बातों के बारे में सोचते रहने से नकारात्मक विचार पैदा होते हैं। नकारात्मक विचार से तनाव पैदा होता है और इसका दिमागी संतुलन पर भी बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। अगर आप अतीत को ही याद करते रहेंगे तो वर्तमान में जीना कठिन हो जायेगा और आपका भविष्य अनिश्चित होगा लगेगा। 


6. भविष्य के बारे में चिंता करने की आदत :



दुखी लोगों की सबसे बुरी आदत होती है कि वे लोग हमेशा भविष्य के बारे में सोचकर चिंतित रहते हैं। जैसे - 
मेरा काम सफल होगा या नही, क्या मैं यह काम कर पाऊंगा या नही, मेरा रिजल्ट अच्छा आएगा या नही, इसी तरह की कई चीजों की चिंता से ग्रसित होते हैं।

जो लोग आने वाले कल को लेकर बहुत ज्यादा चिंतित रहते हैं, वे लोग अपने वर्तमान का आनंद नहीं उठा पाते हैं। इसलिए वे दुखी होते हैं और उनके चेहरे पर हमेशा उदासी छाई रहती है। भविष्य की चिंता करना किसी समस्या का हल नहीं है, बल्कि हमें आज पर फोकस करना चाहिए और पूरी लगन तथा मेहनत के साथ अपना 100 प्रतिशत देना चाहिए। 
 

7 - चीजों को बदलने प्रयास किए बिना शिकायत करने की आदत :


कुछ लोगों की सबसे बुरी आदत होती है कि वे 
चीजों को बदलने की कोशिश किए बिना लगातार शिकायत करते रहते हैं। ऐसी स्थिति हमें बहुत दुखी करता है क्योंकि हम वास्तव में इसका सामना करने और इसे बदलने पर विचार ही नहीं करते हैं। परिवर्तन बहुत डरावने होते हैं और हर कोई उनका सामना करने के लिए तैयार नहीं होता है, लेकिन उन चीजों या परिस्थितियों को नहीं बदलना जो हमें दुखी करते हैं या कम से कम बदलने की कोशिश नहीं करने से हालत और भी बदतर हो सकते हैं। ख़ुद को ऐसी स्थिति में रखना जो ख़ुशी को हमसे दूर ले जाए, वास्तव में हानिकारक होता है। यह हमारी आत्माओं और इच्छाशक्ति को बंद कर देता है। इस कारण से, हमें अपने आप को साहस के साथ परिस्थितियों का सामना करना चाहिए और कोई भी बदलाव करना कुछ भी नहीं करने से बेहतर होता है।


8 - जो पसंद नहीं हैं वही करने की आदत :



दुखी लोगों की एक आदत है कि उन्हें जो काम पसंद नहीं है उसे ही करते रहते हैं। हमें उन कार्यों को पूरा करना चाहिए जिन्हें हम पसंद करते हैं। हालाँकि आपको जीवित रहने के लिए काम करना पड़ता है, लेकिन हमें हमेशा एक ऐसी नौकरी या काम खोजने का प्रयास करना चाहिए जो हमें पसंद है। कुछ ऐसा करने में हमें अपने समय का निवेश करना चाहिए जिसके लिए हम भावुक हों। दुखी लोग हमेशा उसी काम से चिपके रहते हैं, 
जिसे वे पसंद नहीं करते हैं। अपने आप में कोई सुधार करने के लिए वह तैयार नहीं होते हैं। अगर आपको खुशहाल रहना है तो आपको इस आदत को बदलना पड़ेगा, जो पसंद नहीं है उससे दूर होना पड़ेगा और अपनी पसंद की हर चीज पर ध्यान देना पड़ेगा।


9 - जीवन के प्रति निराशावादी होने की आदत :


निराशावाद मन की एक अवस्था को सूचित करता है, जिसमें व्यक्ति जीवन को नकारात्मक दृष्टि से देखता है। मूल्य निर्णय के संदर्भ में व्यक्तियों के बीच नाटकीय अंतर हो सकता है, यहां तक कि तब भी, जब तथ्यों के निर्णय निर्विवाद हों. "गिलास आधा खाली है या आधा भरा हुआ है?" की परिस्थिति इस अवधारणा का सबसे आम उदाहरण है। निराशावादी लोग हमेशा गिलास को आधा खाली देखते हैं। निराशावादी आमतौर पर नकारात्मक परिणामों की उम्मीद करते हैं और हमेशा संदेह करते हैं, जबकि चीजें अच्छी तरह से होने की संभावना रहती है। अधिक निराशावादी दृष्टिकोण रखने वाले लोग सामाजिक कम होते हैं। इनके अंदर तनाव से निपटने की क्षमता कम होती है और ये लोग अवसाद और चिंता जैसे विकारों से ज्यादा ग्रसित होते हैं।  इसलिए हमें अधिक सकारात्मक बनना सीखना चाहिए।

10 - दूसरों से अनुमोदन मांगने या चाहने की आदत : 



मानव प्रकृति हमें एक सामाजिक समूह से संबंधित इच्छा को पूरा करने के लिए प्रेरित करती है। चाहे यह हमारा परिवार हो, दोस्तों का समूह हो, हम चीजें करते हैं यह महसूस करने के लिए कि हम एक समूह के हैं और इस तरह हम अपने आपको सुरक्षित महसूस करते हैं। इस जीवन में हमें 
हमेशा दूसरों से अनुमोदन लेने और अनुमति लेने से बचना चाहिए। यह एक ऐसा दृष्टिकोण है जो हमें केवल अप्रसन्नता देता है। जब भी हम किसी से अनुमोदन प्राप्त करते हैं, तो  हम इस धारणा से अनभिज्ञ रहते हैं कि वहीं पर कुछ अन्य लोग हमारी आलोचना भी कर रहे होते हैं। हम लगातार अनुमोदन की तलाश करते हैं। यह दुष्चक्र चिंता पैदा करता है। हम खुद को लगातार तनाव में पाते हैं जब तक हमें लगता है कि हमने कभी दूसरों को संतुष्ट नहीं किया है और कोशिश करने से दूर, हम सामाजिक स्वीकृति मांगने के बारे में और चिंता करते हैं, और दुखी रहते हैं । 

ये कुछ सामान्य प्रचलित कारण हैं जिसकी वजह से आदमी दुखी रहता है। हमारी ज़िंदगी मे अच्छे और बुरे दोनों समय आते हैं। अगर अभी आपका बुरा समय चल रहा हो तो इससे मत घबराइए जल्द ही बुरा समय जायेगा और अच्छा समय आयेगा। हमेशा दुःखी रहने से सबसे ज्यादा प्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। यह ज़िंदगी बहुत छोटी है, इसलिए आनंद के साथ जियें, हमेशा खुशहाल रहें। खुश रहने से सेहत अच्छी रहती है।

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गुरुवार, 15 अप्रैल 2021

9 बुरी आदतें, जो आपके लिए अच्छी साबित हो सकती हैं। 9 Bad Habits, which can prove to be good for you.

 

बचपन से सुनते आ रहे हैं, हमें बताया जाता है, यह करो, यह मत करो, यह आदत अच्छी है, यह आदत ख़राब है, इन ख़राब आदतों के जाल में फंसोगे तो जिंदगी ख़राब हो जाएगी आदि इस तरह की बातें सुनते हुए हम बड़े हुए हैं। लेकिन अगर मैं यह कहूँ कि, जिन्हें आज तक आप बुरी आदतें मानते आये हैं, जिंदगी को नर्क बनाने वाली मानते आये हैं, वह कुछ बुरी आदतें आपके लिए अच्छी साबित हो सकती हैं तो क्या आप विश्वास करेंगे? शायद आप विश्वास नहीं करेंगे। लेकिन मैं आज यहाँ आपको ऐसी ही कुछ आदतों के बारे में बताने वाला हूँ। तो आइए जानते है कि कौन सी बुरी आदतें हैं जो वास्तव में हमारे लिए अच्छी साबित हो सकती हैं।


बुरी आदत नं 1 - टीवी देखने में हमेशा व्यस्त रहना :

 



अक्सर घरों में हम बच्चों को ये सीख देते रहते हैं कि ज्यादा टीवी नहीं देखना चाहिए। ज्यादा समय तक टीवी देखने से बच्चे बिगड़ जाते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि वास्तव में टीवी देखना नुकसानदायक नही, बल्कि काफी फायदेमंद होता है। टीवी देखने से आप देश दुनियां में होने वाली घटनाओं से अपडेट रहते हैं। अपडेट रहने के साथ-साथ आपके दिमाग की एक्सरसाइज भी होती है। यह आपके तनाव को कम करता है और मनोरंजन भी करता है। हां लेकिन यह आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप क्या देखना पसंद करते हैं। यह फैसला आपको करना है, कि आप इस पर दिन भर पकाऊ और भावनात्मक प्रोग्राम्स देखें या ज्ञानवर्धक प्रोगाम।

 

बुरी आदत नं 2 - फैटी फूड खाना :

 


 

सेहत और मोटापे के हिसाब से फैटी फूड को बेहद हानिकारक माना जाता है। मैं आपको बताना चाहूंगा, कि यही फैटी फूड काफी देर तक पेट भी भरा रखेंगे और एनर्जी भी देंगे। 
आपको ऐसे फूड्स खाना चाहिए जिनमें काफी मात्रा में हेल्दी फैट हो। फैट भूख को कम करने में मदद करता है। इसलिए ऐसे फूड्स खाएं जिसमें अनसेचुरेटेड फैट (Unsaturated Fat) अधिक मात्रा में पाया जाता है। 

 

बुरी आदत नं 3 - देर तक सोना :

 



ज्यादा देर तक सोने को लोग बुरी आदत मानते हैं। बहुत से लोग सोचते हैं कि जो लोग देर तक सोते हैं, सूरज उगने तक सोते रहते हैं वे आलसी होते हैं। वे प्रेरित या अनुशासित नहीं होते हैं। लेकिन हम आपको बता दें कि, वास्तविकता में, कई लोग अपने व्यस्त कार्यक्रम के कारण सप्ताह के दौरान लगातार जरूरत से कम सो पाते हैं। इसलिये उनके लिए सप्ताहांत में कुछ अतिरिक्त घंटे तक सोना वास्तव में एक अच्छी बात हो सकती है।सुबह अलार्म बंद करके जब आप कुछ देर की नींद और लेते हैं, तो यह कुछ देर की नींद आपके मेमोरी पावर, कार्यक्षमता और सीखने की क्षमता को बेहतर बनाती है। यह आपके चयापचय को उच्च रखने में मदद कर सकता है। ध्यान देने की जरुरत है कि यदि आप सप्ताहांत में दिन में बारह घंटे तक लगातार सो रहे हैं, तो आपको अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।  

 

बुरी आदत नं 4  - तेज आवाज में म्यूजिक सुनना : 

 

दुनियाभर के एक अरब से ज्यादा युवाओं को स्मार्टफोन पर तेज गाना सुनने में मजा आता है। वे इसके लिए इयरफोन या हेडफोन का इस्तेमाल करते हैं। तेज आवाज में म्यूजिक सुनना कई बार आपको डांट खाने पर मजबूर करता है, लेकिन यह आपको खुश रखने में खास भूमिका निभाता है। करीब 90 डेसीबल तक की तीव्रता में म्यूजिक सुनने से  आपके दिमाग से एक विशेष प्रकार के हार्मोन का स्राव होता है, जो आपको शांतचित्त और प्रसन्न रखने में मददगार साबित होता है।

 

बुरी आदत नं 5 - आपा खोना या गुस्सा होना :

 



कुछ लोगों को बात - बात पर गुस्सा करने की आदत होती है। यूं तो गुस्सा करना अच्छी आदत नहीं माना जाता है, लेकिन कभी-कभी गुस्सा करना आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। किसी भी बात से अगर आपका मन अशांत हैं और आप अंदर ही अंदर परेशान हो रहे हैं, तो ऐसे में अचानक आने वाला गुस्सा आपकी चिड़चिड़ाहट, डर या हिचक को कम कर सकता है। साथ ही आप हल्का महसूस करते हैं। हर कोई जानता है कि अपना आपा कभी नहीं खोना चाहिए, और हमेशा दिमाग को शांत और एक स्तर पर बनाये रखना चाहिए, चाहे आप किसी भी स्थिति में क्यों न हों? लगातार छोटी-छोटी समस्याओं के लिए सभी पर आक्रामक होना और रोष जताना सही नहीं है। कोई भी उस व्यक्ति के साथ समय नहीं बिताना चाहता है जो इस तरह का व्यवहार करता है। 

 

एक स्वीडिश अध्ययन में पाया गया कि जिन पुरुषों को काम में गलत तरीके से व्यवहार किया गया और फिर एक उचित समय पर उन्हें अपना गुस्सा बाहर निकालने के बजाय गुस्से को दबाना पड़ा, वास्तव में उनको दिल का दौरा पड़ने का जोखिम दोगुना हो गया। इसलिए कभी-कभी, आपके मन के गुबार को बाहर निकाल देना लाभदायक होता है।  

 

बुरी आदत नं 6 - वाइन का सेवन :


हालांकि कुछ लोग शराब के सेवन को एक बुरी आदत के रूप में देखते हैं, चाहे  वह कोई भी शराब क्यों न हों। 
लेकिन हम बता दें कि रेड वाइन का थोड़ी मात्रा में सेवन आपके हृदय की सेहत को सुधारने और बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकता है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि बीयर का सेवन सबसे ज्यादा किया जाता है। बीयर पीने वालों को अक्सर हमारी संस्कृति में शराबी के रुप में नहीं परिभाषित किया जाता है। वहीं पर और किसी प्रकार की शराब पीने वालों को शराबी कहकर बुरे व्यक्ति के रुप में जाना जाता है।हालांकि, बीयर वास्तव में एक छोटी खुराक में आपके सेहत के लिए अच्छा होता है। इसमें वही एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो रेड वाइन में मिलते हैं, और, बीयर में विटामिन बी 6 और सिलिका भी होता है, जो आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। बेशक, इसमें अधिक कैलोरी होती है, इसलिए आप इसका सेवन संयमित तरीके से करें। संयमित तरीके से शराब का सेवन वास्तव में बुरी आदत नहीं है। बेहिसाब शराब का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। 

 

बुरी आदत नं 7 - चाय या कॉफी का सेवन अधिक करना :

 



काफी का अत्यधिक सेवन स्वास्थ्य की दृष्टि से हानिकारक माना जाता है, क्योंकि इसमें कैफीन होता है । लेकिन यदि यही कैफीन थोड़ी मात्रा में लिया जाए तो यह कभी भी नुकसान नहीं करता है। एक रिसर्च से यह साबित हुआ है कि कॉफी पीने से डाइबिटीज का रिस्क कम होता है और साथ ही यह आपको तनाव से बचाने में भी कारगर साबित होता है। वास्तव में कॉफी में एंटीऑक्सिडेंट भरपूर मात्रा में पायी जाती है। कुछ अध्ययनों से पता चला है कि आपके कैफीनयुक्त काढ़े में पाए जाने वाले कुछ रसायन पार्किंसंस, अल्जाइमर, यकृत कैंसर से लड़ने में मदद करते हैं और यहां तक ​​कि इससे स्मृति में सुधार भी हो सकता है। इसके अतिरिक्त, कुछ अध्ययनों से साबित होता है कि जो महिलाएं दिन में दो या तीन कप पीती हैं, उनके अवसादग्रस्त होने की संभावना 15% कम होती है। कॉफी का अधिक सेवन, स्वास्थ्य की दृष्ट‍ि से कई बार गलत होता है। यह हृदय संबंधी समस्याओं का कारण बनता है, यह आपकी वृद्धि को प्रभावित करता है। इससे आपकी नींद की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। 

 

बुरी आदत नं 8 - हमेशा जल्दबाजी में रहना :

व्याकुलता या हमेशा जल्दबाजी में होना, बुरी आदत मानी जाती है। लोग शांति और धैर्य रखने की सलाह देते हैं। लेकिन हम आपको बता दें कि किसी भी काम या बात की जल्दबाजी या व्याकुलता आपको फुर्तीला तो बनाती ही है, साथ ही उम्र को लंबा भी करती है। इतना ही नहीं आपके फिट रहने में भी इस आदत का बहुत बड़ा हाथ होता है।

 

बुरी आदत नं  9 - गपशप में मशगूल रहना :

 



आमतौर पर लोग गपशप करना या चुगली करने को बुरी आदत मानते हैं, और ऐसे लोगों से बच कर रहने की सलाह देते हैं। वैसे  तो आपका गप करना भले ही दूसरों को परेशान कर सकता है। लेकिन आपके लिए ये कई मायने में फायदेमंद भी साबित हो सकती है। गपशप करने से हमारे अंदर दूसरों की बात को ध्यान से सुनने की क्षमता बढ़ती है। साथ ही गप करते समय अक्सर लोग खिलखिला कर हंसते हैं, प्रसन्न रहते हैं, जो हमारी सेहत के लिए फायदेमंद साबित होता है। इसके अलावा चुगली करने के लिए हम चतुराई से दूसरे की बातों को जानने की कोशिश करते हैं, इससे मानसिक बुद्धि तेजी से बढ़ती है। चुगली करने में जिन लोगों को आनंद मिलता है, उनके लिए यह चिंता मुक्त होने का जरिया भी है। 

 


सोमवार, 12 अप्रैल 2021

12 बुरी आदतें जो आपकी लाइफ बर्बाद कर सकती हैं।/12 Bad Habits That Can Ruin Your Life.



आदत (habit) किसी प्राणी के उस व्यवहार को कहते हैं जो बिना अधिक सोच के बार-बार दोहराया जाये। आदत या स्वभाव मनुष्य की अर्जित प्रवृत्ति है।

साधारणतः आदतें दो प्रकार की होती हैं –



अच्छी आदतें

बुरी आदतें

बुरी आदतों पर विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया जाता है। चूंकि लोग उनसे सबसे अधिक समस्याओं का अनुभव करते हैं। बुरी आदतें एक व्यक्ति को कई तरीकों से सीमित कर सकती हैं।

आदतें हमें दुनिया की हमारी आंतरिक तस्वीर का विस्तार करने से रोकती हैं, क्योंकि उनकी वजह से हम उन चीज़ों को महत्व नहीं देते हैं जो हमारी पहले से गठित आंतरिक छवियों के साथ मेल नहीं खाती हैं और इस तरह से हम एक बड़ी मात्रा में मूल्यवान जानकारी खो देते हैं जिसका उपयोग हम अपनी भलाई के लिए कर सकते हैं।

बुरी आदतें – क्या आप अपने जीवन में सफलता के लिए संघर्ष कर रहे हैं? हो सकता है जाने अनजाने में आप कुछ बुरी आदतों का शिकार हो गए हैं जो आपको जीवन में आगे बढ़ने से रोक रही हैं। आज ही इन बुरी आदतों को छोड़ें।

यहां मैं किसी की भी जिंदगी को बर्बाद करने वाली 10 बुरी आदतों के बारे में बता रहा हूं। जो इंसान को आगे नहीं बढ़ने देती हैं। इन आदतों में सुधार करके आप अपने जीवन में सफलता हासिल कर सकते हैं।


1 - अपनी तारीफ खुद करना:

कोई भी व्यक्ति अपनी बुराई सुनना पसंद नहीं करता है पर बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो हमेशा अपनी तारीफ खुद ही करते रहते है, जो उनकी आदत में शामिल होता है। मैं बहुत अच्छा हूं कहने और दिखाने वाले लोग अक्सर ही नेगेटिविटी को अपने अंदर दबाए रहते हैं। ये उस समय तो सही लगता है क्योंकि लोग आपको अच्छा कह रहे होते हैं लेकिन यही बुरी आदत कुछ समय के बाद आपके मन पर गलत असर करने लगती है। इसके चलते निगेटिविटी आपके मन पर इतनी हावी हो जाती है कि आपको अवसाद, एंग्जाइटी जैसी मानसिक दिक्कतें घेरने लगती हैं। लेकिन हां, हम ये भी नहीं कह रहे कि आप बुरे बन जाएं। लेकिन बहुत ज्यादा और हमेशा अच्छे बने रहने के चक्कर में कई बार खुद की भावनाओं को दबाना पड़ जाता है। फिर एक समय के बाद यही भावनाएं मन पर हावी होकर आपको मानसिक तौर पर बीमार करने लगती हैं। इसके लिए आप एक नियम अपना सकते हैं कि हमेशा न्याय करने की कोशिश करें। बात प्रोफेशनल मामले की हो तो खुद को बिल्कुल स्पष्ट रखने की कोशिश करें।

2 -कम्फर्ट जोन में रहना :

अगर आप वहां नहीं है, जहां आप अपनी जिंदगी में पहुंचना चाहते हैं तो इसका सबसे बड़ा कारण आपका कंफर्ट जोन से बाहर नहीं निकलना है। कंफर्ट जोन एक ऐसी स्थिति जहां से आप बाहर नहीं आना चाहते हैं, जहां पर रहना आपको आरामदायक लगता है। आप सुकून महसूस करते हैं और कोई रिस्क नहीं लेना चाहते हैं। एक ही जगह रहकर एक जैसा काम करके जिंदगी तो काटी जा सकती है, लेकिन जिंदगी में तरक्की नहीं की जा सकती। कम्फर्ट जोन में रहने के कारण लोगों में आत्मविश्वास की कमी हो जाती है। आप लोगों से मिलने में कतराने लगते हैं। आपकी कम्युनिकेशन स्किल भी खराब हो जाती है। दृढ फैसले लेने की क्षमता बहुत कम हो जाती है। क्या आप अभी ऐसी स्थिति में हैं? अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलें और नए विकल्पों की तलाश करें जो आपको ज्यादा मूल्यवान बना दें। जहां आपके लिए ज्यादा प्रतिस्पर्धी का माहौल हो। इसी से आपकी स्किल बढ़ेंगी। आपका विकास होगा। दरअसल कुछ कमाल करने के लिए आपको अपने कंफर्ट जोन से बाहर आना ही होगा। इस बात को समझने के लिए उस दोस्त के बारे में सोचिए, जो बहुत मोटा था लेकिन उसने अब अपना वजन कम कर लिया है। सोचिये अगर वह अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलकर मेहनत नहीं करता तो क्या वह कभी अपना वजन कम कर पाता। इसलिए यदि जीवन में सफल होना है तो अपनी इस आदत से जल्द से जल्द छुटकारा पाइये। अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलिए।


3 - विषाक्त दोस्ती (Toxic Friendships):


दोस्तों से हमें प्यार और समर्थन हासिल होता है। यदि आप जिस व्यक्ति को अपना मित्र कहते हैं, वह आपके लिए यह सब कुछ नहीं कर रहा है, तो वह वास्तव में आपके लिए जहर के अलावा कुछ नहीं हैं। ऐसे विषाक्त दोस्तों को अपने जीवन से बाहर निकालना ही आपके बेहतर जीवन के लिए आवश्यक है। आपके बचपन के दोस्त जो आज भी आपके दोस्त हैं। इन दोस्तों में कई आज सफल हैं लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो असफल हो चुके हैं और आपको भाते भी नहीं हैं, लेकिन आप उनके साथ दोस्ती बनाये हुए हैं आप उनसे पीछा नहीं छुड़ा पा रहे हैं।ऐसे दोस्त जो आपकी किसी भी योजना में मीन - मेख निकालकर आपको आगे बढ़ने से रोकते हों उनसे दूरी बना लेना ही आपके जीवन को बेहतर बना सकता है। यदि जीवन में सुखी रहना चाहते है तो बुरे लोगों की संगत में रहने की आदत में सुधार कर लें।

4 - आलसीपन :

आलस्य को आमतौर पर इंसान का सबसे बड़ा शत्रु कहा जाता है, क्योंकि शरीर में आलस्य आने से कई काम बनते-बनते बिगड़ जाते हैं। आलस्य के कई कारण हो सकते हैं। लोग अक्सर आलस्य के कारण आज के काम को कल के लिए टाल देते हैं। लेकिन यह आदत धीरे-धीरे एक लत बन जाती है।आलस्य में यूंहीं एक जगह पड़े रहना किसे अच्छा नहीं लगता है,लेकिन यही आलस्य जब आपकी हमेशा की आदत बन जाती है तो मामला गड़बड़ हो जाता है। यदि हमने सावधानी नहीं बरती तो आलस्य हमारे जीवन की गति को धीमा और विफल बनाने का कारण बन सकता है। आलसी होने का हमारी हेल्थ और हमारे जीवन पर बहुत गंभीर असर पड़ता है। आलस्य का हमारे जीवन पर नेगेटिव प्रभाव पड़ता है। अगर आप इससे बचना चाहते हैं तो आज के काम को कल पर टालना छोड़ दें। वैसे सफलता उन्हें ही मिलती है, जो आलस्य छोड़कर मेहनत करते हैं।

हम यह भी जानते हैं कि आलस्य से हमारा बहुत नुकसान होता है किन्तु फिर भी आलस्य से पीछा नहीं छुटता कहीं न कहीं हमारे जीवन में यह आ ही जाता है।

आलस्य में हम अपने कार्यों और परेशानियों आदि को भूल जाते हैं और जब टाइम निकल जाता है तो फिर हम टाइम का रोना रोते हैं, अपने आपको दोष देते हैं और पछतावा करते है। आलस्य में हम अपना वर्तमान और भविष्य दोनों को ही लगभग नष्ट कर देते हैं। जीवन में सफलता पाने के लिए हमें आलस्य को त्यागना चाहिए।

5- अपनी गलती को स्वीकार न करना :

दरअसल ज्यादातर लोग अपनी गलती जानते हुए भी उसे स्वीकार नहीं करना चाहते। गलती करने के बाद ज्यादातर लोग इसकी जिम्मेदारी किसी और पर थोपने की कोशिश करते हैं। यह एक निगेटिव एप्रोच है। इससे आपकी छवि खराब हो सकती है। गलती किसी से भी हो सकती है।लेकिन कामयाब वे लोग होते हैं जो अपनी गलतियों को स्वीकार करते हैं और उसमें सुधार करते हैं। जो लोग अपनी गलतीयों को स्वीकार कर के उसे सुधारते नहीं हैं, वे जिंदगी में कभी भी कामयाब नहीं होते। जो व्यक्ति खुद की गलती को नहीं स्वीकारते उनमें धीरे धीरे नकारत्मक गुण आने लगते है। अपनी गलती को छिपाने के लिए वह झूठ बोलने लगता है और फिर झूठ उसके जीवन का अंग बन जाता है। जो लोग अपनी गलती को स्वीकारने का साहस नहीं जुटा पाते वे लोग नफरत ईर्ष्या और अनजाने डर से जूझते रहते हैं। उनके अंदर हमेशा एक खालीपन रहता है, हीनभावना रहती है। दरअसल इंसान गलतियां करता है लेकिन गलतियों से कुछ सबक भी लेता है। इंसान अपनी बुद्धि और विवेक के आधार पर ही अपनी पिछली गलतियों से कुछ सीखता है और भविष्य में ऐसी गलतियां न करने के प्रति सचेत रहता है। छोटी छोटी गलतियों से सीखकर ही इंसान बड़ा बनता है। जो सहजता से अपनी गलती मान लेता है वह सकरात्मक सोच और उन्नति की तरफ कदम बढ़ाता है।

याद रखिए मित्रों गलती होने पर उसे स्वीकार कर लेना आपको आगे ले जाने वाले गुणों में से एक है।
सुधार तभी होते हैं, जब गलती की जाए और मानी भी जाए। अगर गलती मानेंगे नहीं तो गलती करते भी रहेंगे और कभी कुछ नया सीखने की नौबत आएगी ही नहीं। इसलिए अभी गलती न मानने की बुरी आदत को छोड़ दीजिए।

6 - दूसरों की बुराई करना:

दूसरों की निंदा करना। सदैव दूसरों में दोष ढूंढते रहना मानवीय स्वभाव का एक बड़ा अवगुण है। दूसरों में दोष निकालना और खुद को श्रेष्ठ बताना कुछ लोगों का स्वभाव होता है। इस तरह के लोग हमें कहीं भी आसानी से मिल जाएंगे। इंसान का स्वभाव है कि वह अपने से श्रेष्ठ किसी व्यक्ति को नहीं समझता है। अगर उसे कोई चीज पसंद नहीं है तो, वह उसकी बुराई करने लगता है । यह आदत इंसान को हैवान बनाती है । इंसान अपना आपा खो देता है, उसका चित्त स्थिर नहीं रहता। ऐसे लोग ऑफिस हो या घर या समाज हर जगह पाये जाते हैं। दूसरा चाहे वास्तव में कैसा भी क्यों न हो पर हमें उसकी बुराई करने का कोई हक़ नहीं है। दूसरों की बुराई करना सबसे ख़राब आदत है। इसलिए इस आदत को जल्द से जल्द बदल लें।

7 - नकारात्मक सोच रखना:

नकारात्मक विचार हमारे मन के अंदर की भावना होती हैं, जो हमारे साथ - साथ दूसरों को भी नुकसान पहुंचाती हैं। मस्तिष्क में भय मनुष्य को बहुत छोटा बना देता है एवं वह स्वयं को असुरक्षित महसूस कराता है। किसी एक घटना, व्यक्ति या स्थिति को आधार मानकर हम उसी आधार पर पूर्वाग्रह बना लेते हैं। ऐसे वाक्यों के साथ 'हमेशा मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है?' 'मैं कभी सही काम नहीं कर सकता', 'मैं अकेला हूँ ', 'कोई मेरा साथ नहीं देता' , शुरु होता है। नकारात्मक विचार और भाव दिमाग को गलत तरह के निर्णय लेने के लिए उकसाते हैं। ये विचार मन पर कब्जा करके दूसरे अच्छे विचारों को आने से रोक देते हैं। हम खुद को सुरक्षित रखते हुए फैसला लेने लगते हैं। इंसान का जीवन सोच पर निर्भर है जैसी आपकी सोच होगी वैसे ही आप बन जाते है अगर आप नकारात्मक सोच के शिकार है तो ये आदत आपकी लाइफ को बर्बाद कर सकती है। इसलिए किसी भी तरह से हमेशा अपनी सोच को सकारात्मक बनाने की कोशिश करें।

8 - गलती माफ ना करना:

जीवन में गलतियाँ होना स्वभाविक है। जिंदगी में लोग जाने-अंजाने गलतियाँ करते रहते है। भूल होना कोई गलत बात नही है लेकिन भूल को स्वीकार ना करना या क्षमा ना माँगना यह गलत है। आज के दौर में सबसे बड़ी विडंबना यह है कि लोग दूसरों में गलतियां ढूढ़ते रहते हैं और उनकी छोटी से छोटी गलती तूल देते हैं और वहीँ पर अपनी गलती को गलती मानने के लिए तैयार नहीं होते हैं। बहुत से लोग किसी की छोटी सी गलती को माफ नहीं करते हैं और उससे उस गलती का बदला लेने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। यदि आप भी उनमें से है तो समझ लीजिये आप अपनी प्रगति के रास्ते में ख़ुद रोड़ा अटकाने का काम करते हैं। बदला लेने की भावना एक ऐसी बीमारी है जिसका शारीरिक और मानसिक ख़ामियाजा सबसे ज़्यादा हमें ही भुगतना पड़ता है। दूसरों को माफ करने से हम उनकी ज़िन्दगी में एक अलग जगह बना लेते है। दूसरों को माफ करने वाला आदमी हमेशा बड़ा होता है और माफ़ करने के लिए बहूत साहस की जरुरत होती है। दूसरों को माफ करने से हमारे मन में एक पॉज़िटिव एनर्जी पैदा होती है जो हमें आंतरिक शुकून देती है। हमारी सोच सकारात्मक बन जाती है। सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है हमें खुशी प्राप्त होती है। एक बार किसी को दिल से माफ करके देखिए आपको आंतरिक खुशी की अनुभूति अवश्य होगी।

9 - दूसरों से अपनी तुलना करना:

अक्सर हमारे अंदर एक सबसे खतरनाक आदत दूसरों से अपनी तुलना करने की होती है। हम अपनी गाड़ियाँ, घर, नौकरियां, पैसा, सामाजिक प्रतिष्ठा और ऐसी कई चीजों की दूसरों से तुलना करते हैं, और फिर अंत में हम अपने अंदर सारी नकारात्मक ऊर्जा और नकारात्मक भावनाएं भर लेते हैं, जिनका बहुत बुरा असर हमारी जिंदगी पर पड़ने लगता है। अक्सर हम अपनी तुलना दूसरों से करने की वजह से दुखी रहते हैं। बहुत से लोगों की दूसरों से तुलना करने की आदत मरते दम तक खत्म नहीं होती है। अपने आपको दूसरों से तुलना करने की वजाय अपनी तुलना खुद से करने की आदत डालें। दूसरों से अपनी तुलना करना छोड़ दें और जो आपके पास है उसी में खुश रहना सीखें।

10 - हमेशा अतीत को याद करते रहना :

लोगों की एक आदत यह है कि वे हमेशा अपनी अतीत की यादों में खोये रहते हैं। अगर आप भी अपने अतीत की यादों में खोये रहते हैं तो आपको सावधान रहने की जरुरत है। यदि आप अपने अतीत की अच्छी बातें याद करके उससे प्रोत्साहित हो रहे हैं तो यह अच्छी बात है, लेकिन अगर आप अपने अतीत की बुरी घटनाओं या ख़राब परिणामों को याद करके अपने आप को कोस रहे हैं तो आपकी जिंदगी नीरस हो जायेगी। आप जीवन का आनंद नहीं उठा पायेंगे, जिंदगी में कभी भी आगे नहीं बढ़ पायेंगे। इसलिए हमेशा वर्तमान में रहें, वर्तमान में जियें, वर्तमान का आनंद उठायें। भविष्य के लिए प्लान जरुर बनायें और उस पर काम करें, परिणाम की चिंता छोड़ें। यदि आपने अपने प्लान को अपना 100 प्रतिशत दिया तो आपको सफल होने से कोई रोक नहीं सकता।

11 - सेहत पर ध्यान नहीं देना:

आज कल लोगों की व्यस्त दिनचर्या के कारण लोग अपनी सेहत पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। बहुत से लोग काम -धंधे के चक्कर में खान-पान पर ध्यान नहीं दे पाते हैं, जिससे उनकी सेहत बिगड़ जाती है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि अच्छी सेहत के बिना हम अपनी जिंदगी में कुछ भी नहीं कर सकते। कहावत है कि "काया ही माया है" यानि शरीर अच्छा है तो आप जितनी चाहे उतनी माया जोड़ सकते हैं। इसलिए काम काज कि व्यस्तता के बावजूद अपने खान-पान और अन्य स्वस्थ्य दिनचर्या पर विशेष ध्यान देने की जरुरत है।

12 - धुम्रपान करना:

हम सभी जानते हैं कि धुम्रपान सेहत के लिए हानिकारक और जीवन के लिए खतरनाक हो सकता है। आपकी जिंदगी बर्बाद हो सकती है, लेकिन फिर भी लोग धूम्रपान करने से बाज़ नहीं एते हैं। अगर आप अच्छी सेहत चाहते हैं और अपनी जिंदगी में ख़ुशहाली पाना चाहते हैं तो आप अपनी इस आदत से जितना जल्दी हो सके छुटकारा पाने की कोशिश करें।

ये बुरी आदतें किसी की भी लाइफ को बर्बाद कर सकती है अगर आपमें इनमें से कोई आदत है तो आपके लिए बेहतर होगा की उस आदत को अपने अंदर से खत्म कर दें तभी आप अपनी जिंदगी में आगे बढ़ सकते हैं, उन्नति कर सकते हैं।
निष्कर्ष

अब आपको पता चला गया होगा की बुरी आदतें कौन-कौनसी है जो किसी की भी जिंदगी को बर्बाद कर सकती हैं अगर आप जीवन में कामयाब होना चाहते है तो इन आदतों को आज से ही छोड़ दीजिये।

अगर आपको लगे की इन बुरी आदतों के अलावा भी कोई और भी आदतें हैं जो किसी की जिंदगी को बर्बाद कर सकती है तो उसके बारें में कमेंट में जरुर लिखें। जितना आप मुझसे सीखते हैं उतना ही मैं आपसे सीखता हूँ।