आमतौर पर हम दफ्तरों में करीब 8-10 घंटे तक कम्प्यूटर के सामने बैठे रहते हैं या आजकल वर्क फ्रॉम होम और डिजिटलाइजेसन के कारण न चाहते हुए भी हमें घंटों एक ही जगह पर बैठना पड़ता है। कारण कोई भी हो लंबे समय तक बैठे रहना आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
बैठना नुकसानदेह क्यों है?
चलिए इसे समझते हैं कि आखिर बैठना इतना नुकसानदेह क्यों होता है?
जब हम कुछ खाते हैं, हमारा शरीर उसे ग्लूकोज या शक्कर शुगर में बदलता है, और फिर यह रक्त के जरिए पुरे शरीर की दूसरी कोशिकाओं में जाता है। ग्लूकोज ही शरीर के सारे अंगों को काम करने के लिए आवश्यक ऊर्जा देता है। लेकिन यदि शरीर में ग्लूकोज का स्तर लगातार ऊँचा बना रहता है तो यह हमारे शरीर में कई तरह की बीमारियां पैदा करता है। जैसे - डायबिटीज और दिल के रोग। हमारा शरीर ग्लूकोज के स्तर को सामान्य बनाये रखने के लिए आवश्यक हार्मोन बनाता है। हम शारीरिक रूप से जितना सक्रिय रहते हैं, उतना ही अधिक हमारा शरीर इस हार्मोन को बनाता है। हमारा शरीर शर्करा (शुगर) से एक खास तरीके से निपटता है। ज्यादा समय तक बैठना शरीर के उसी खास तरीके पर अपना असर डालता है।
प्रयोग और प्रतिक्रिया
1950 में एक अध्ययन किया गया जो बस कंडक्टर और ड्रायवर पर किया गया था। इस अध्ययन के नतीजे लांसेट पत्रिका में छपे थे। इसमें बताया गया था कि बस ड्राइवर को दिल की बीमारियों का खतरा बस कंडक्टर से लगभग दोगुना था। तभी से ज्यादा देर तक बैठे रहने की स्थिति को रक्त ग्लूकोज, नियंत्रण की समस्या से जोड़ कर देखा जाने लगा।
यूनिवर्सिटी ऑफ चेस्टर के डॉ जॉन बक्ले और उनकी टीम ने ऐसे 10 लोगों पर प्रयोग किया जो एस्टेट एजेंट थे। उन्होंने इन लोगों को एक हफ्ते तक रोज कम से कम तीन घंटे खड़े होकर काम करने को कहा। शोधकर्ताओं ने पाया कि जब वे खड़े थे तो कैलोरी ज्यादा खर्च हुई।
चेस्टर शोधकर्ताओं ने यह भी निष्कर्ष निकाला कि जो लोग खाना खाने के बाद खड़े रहते हैं, उनके रक्त में शर्करा की मात्रा घट कर सामान्य हो गई।
जॉन बकले कहते हैं कि, "खड़े रहने पर हमारा दिल प्रति मिनट औसतन 10 बार ज्यादा धड़कता है।'' खड़े रहने के दौरान करीब 0.7 कैलोरी प्रति मिनट अधिक खर्च होता है।
यदि आप पांच दिनों तक दिन में तीन घंटे भी खड़े होते हैं तो अंदाजन 750 कैलोरी खर्च होती है। इस तरह एक साल में आप 30,000 अतिरिक्त कैलोरी खर्च करते हैं।
डॉ. बकले कहते हैं, "इसे यदि आप किसी शारीरिक क्रिया के रूप में समझना चाहें तो साल भर काम पर तीन से चार घंटे खड़े रहना एक साल में 10 मैराथन दौड़ने के बराबर होगा."
वैसे हम काम करते वक्त ज्यादा समय तक खड़े नहीं रह सकते, खड़े होकर काम करना अटपटा लग सकता है। लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि हम अपनी स्थिति में थोड़ा बदलाव करते हैं तो इसका हमारी सेहत पर काफी असर पड़ता है। जैसे फोन पर बातें करते समय, सहयोगी से चर्चा करते समय हम खड़े रह सकें तो इससे हमारी सेहत पर काफी अच्छा प्रभाव पड़ेगा।
अनुमान लगाइए कि आप दिन भर में कितने घंटे बैठे-बैठे गुजारते हैं?
हाल में किए गए एक सर्वे से पता चला है कि लोग कंप्यूटर पर काम करते हुए, ऑफिस या घर से काम करते हुए या टीवी देखते हुए करीब 12 घंटे बैठे बिता देते हैं। यदि इसमें हम सोने के घंटों को भी शामिल कर लें, तो हम पुरे दिन में लगभग 18 से 19 घंटे निष्क्रियता में बिता देते हैं।
कुछ अध्ययनों के अनुसार ज्यादा घंटे बैठने वाले लोग ज्यादा सक्रिय लोगों से दो साल कम जीते हैं, भले ही वे रोज कसरत ही क्यों न करते हों।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हर हफ्ते कम से कम 150 मिनट शारीरिक गतिविधि करने की सलाह दी है।
आइए जानते हैं, लंबी अवधि तक बैठे रहने के कारण हमारे शरीर में कौन -कौन सी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
1. पैर और ग्लूट्स कमजोर हो जाते हैं -
पूरे दिन बैठे रहने से, शरीर के निचले हिस्से की मांसपेशियां कमज़ोर हो जाती हैं। लगातार बैठे रहने से आपके ग्लूट्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है और पैरों की हड्डियां कमज़ोर हो जाती हैं। अगर आपके ग्लूट्स कमज़ोर हो जाएं, तो चोट लगने का खतरा काफी बढ़ जाता है। शारीरिक तकलीफ बढ़ जाती है।
2. वज़न बढ़ जाता है -
लगातार कई घंटों तक बैठे रहने से मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है। हमेशा बैठे रहने से हमारी ऊर्जा काम खर्च होती है हम कम कैलोरी बर्न करते हैं। सिर्फ बैठकर काम करने से हमारे खाने से मिली कैलोरी चर्बी (फैट) में बदल जाती है। जिससे वजन बढ़ने लगता है। खाने से मिली कैलोरी का खर्च होना बहुत जरूरी है। इसके लिए हमारा चलना-फिरना या वर्कआउट करना बहुत जरूरी है। चलने से शरीर में लिपोप्रोटीन लाइपेस का स्राव होता है, जो वसा और शर्करा को पचाने में मदद करता है। जब हम अपना अधिकांश समय बैठकर बिताते हैं, तो इसका निकलना कम हो जाता है, जिससे शरीर में चर्बी बढ़ने लगती है। लगातार बैठे रहने से मेटाबोलिक सिंड्रोम से ग्रसित होने का भी खतरा बढ़ जाता है।
3.कूल्हे और पीठ जकड़ जाते हैं -
आपके पैर और ग्लूट मांसपेशियों के साथ, आपके कूल्हे और पीठ पर भी लगातार बैठने का ख़राब असर पड़ता है। बैठने से आपके कूल्हे फ्लेक्सर्स छोटे हो जाते हैं और आपकी बैठने की स्थिति भी आपकी पीठ को चोट पहुंचा सकती है। खासकर जब आप कुर्सी का उपयोग नहीं करते और बिस्तर पर बैठकर काम करते हैं।
इसके अलावा, बैठते समय खराब मुद्रा के कारण आपकी रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है जिससे रीढ़ की हड्डियों में दर्द बढ़ सकता है।
4. चिंता और अवसाद बढ़ जाता है -
ज्यादा समय तक बैठने वाले लोगों में अवसाद और चिंता दोनों ही बढ़ने का खतरा अधिक रहता है।अवसाद की अवस्था में व्यक्ति स्वयं को लाचार और निराश महसूस करता है। उस व्यक्ति-विशेष के लिए सुख, शांति, सफलता, खुशी यहाँ तक कि संबंध तक बेमानी हो जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि स्वस्थ शरीर में ही, स्वस्थ मस्तिष्क का विकास होता है। बैठे रहने से हमारी शारीरिक और मानसिक सेहत अच्छी नहीं होती है। व्यायाम करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सकता है।
5. हृदय रोग का खतरा बढ़ता है -
लम्बे समय तक बैठने से शरीर के विभिन्न अंगों को नुकसान हो सकता है। लंबे समय तक बैठे रहने से उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) की समस्या हो सकती है और कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है। लंबे समय तक बैठे रहने से ह्रदय रोग का खतरा बढ़ जाता है। अमेरिकन कॉलेज ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन के एक अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों ने प्रति सप्ताह 23 घंटे से अधिक समय तक बैठकर टीवी देखा, उनमें हृदय रोग से मृत्यु का खतरा उनकी अपेक्षा जो 11 घंटे या उससे कम समय तक बैठकर टेलीविजन देखते थे, 64% अधिक था।
विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग लंबे समय तक बैठे रहते हैं, उन्हें दिल का दौरा या स्ट्रोक पड़ने का खतरा 147% अधिक होता है।
6. मधुमेह का खतरा बढ़ता है -
जो लोग अपना अधिक समय बैठकर बिताते हैं, उनमें मधुमेह का खतरा 112% अधिक होता है। व्यायाम करने से ब्लड में शुगर का स्तर सामान्य बना रहता है। लगातार बैठे रहने से रक्त से बहुत कम ग्लूकोज का उपयोग हो पाता है, जिससे टाइप 2 मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है। ऑफिस वर्क में लगातार काफी समय तक बैठना होता है, जिसकी वजह से मांसपेशियों लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बनी रहती हैं। मांसपेशियों का लंबे समय तक एक ही अवस्था में बने रहने के कारण मांसपेशियों को आराम नहीं मिल पाता है। जिसकी वजह से मांसपेशियों में दर्द बना रहता है।
7. वैरिकोज वेन्स (Varicose Veins) का खतरा -
हमारी स्किन के नीचे दिखने वाली नीली नसों पर आपने भी कभी गौर किया है? शायद आपने कभी सोचा ही नहीं होगा कि ये नसें तकलीफदेह भी हो सकती हैं। दरअसल हमारी त्वचा की सतह के नीचे मौजूद नसें जब बढ़ने लगती हैं तो ये बढ़ी हुई नसें वैरिकोज वेन्स (अपस्फीत शिरा) कहलाती है। कोई भी शिरा या वेन वेरीकोज वेन हो सकती है। अगर लगातार एक ही स्थिति में बैठे या खड़े रहा जाए तो नसों में खिंचाव बढ़ सकता है और ब्लड फ्लो सही तरीके से नहीं होने के कारण वैरिकोज वेन्स की समस्या हो सकती है। वैरिकोज वेन होने से त्वचा में एग्जि़मा या घाव होने की भी संभावना बढ़ जाती है।लंबे समय तक बैठे रहने से पैरों में खून जम सकता है और पैरों में खून के थक्के भी जम सकते हैं।
8. कंधे और गर्दन में जकड़न पैदा होना
कई अध्ययनों से पता चला है कि लंबे समय तक खाली बैठे रहने से या बैठकर काम करने से कोलोन कैंसर जैसी बीमारी बढ़ने की संभावना अधिक होती है। इतना ही नहीं, स्तन और अन्तर्गर्भाशयकला(एन्डोमेट्रीअल) कैंसर होने का भी खतरा बना रहता है। चार्ल्स की अगुवाई में हुए नए शोध में दावा किया गया है कई घंटों तक बैठने से स्तन और कोलोन कैंसर के अलावा नौ अन्य तरह के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इसमें फेफड़े, सिर और गर्दन का कैंसर शामिल है।
10 - मांसपेशियों में कमजोरी हो जाती है -
जब आप खड़े होते हैं या किसी भी गतिविधि में सक्रिय होते हैं तो मांसपेशियां अधिक सक्रिय रहती हैं, लेकिन जब आप केवल बैठे रहते हैं तो पीठ और पेट की मांसपेशियां ढीली पड़ने लगती हैं। इसी स्थिति के चलते आपके कूल्हे और पैरों की मांशपेशियां कमजोर पड़ने लगती हैं। लंबे समय तक एक स्थिति में बैठने का परिणाम यह भी हो सकता है कि आपकी रीढ़ की हड्डी भी पूरी तरह से सीधी न रह सके। इसी के परिणाम स्वरूप कूल्हे और पैरों की सक्रियता भी प्रभावित होती है और ये अंग सख्त होते जाते हैं और इनकी स्वाभाविक नमनीयता खत्म होने लगती है।
11 - ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या -
लंबे समय तक बैठे रहने से लोगों का वजन भी बढ़ता है और इसके परिणामस्वरूप कूल्हे और इसके नीचे के अंगों की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। शारीरिक सक्रियता की कमी के कारण ही ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियां आम होती जा रही हैं। दिनभर बैठे रहने से और मूव ना करने से आपकी हड्डियों और जोड़ों पर बुरा असर होता है। लंबे समय से बैठे रहने से बोन डेंसिटी कम होती है और फ्रेक्चर होने की आशंका बढ़ जाती है। साथ ही हड्डियों की वृद्धि में रुकावट पैदा हो जाती है जिससे ऑस्टियोपोरोसिस जैसी गंभीर समस्याएं होने का खतरा बढ़ जाता है।
12 - दिमाग पर असर पड़ता है -
लंबे समय तक बैठे रहने से मस्तिष्क भी प्रभावित होता है और इसकी कार्यप्रणाली भी अस्पष्ट तथा धीमी हो जाती है। मांसपेशियों की सक्रियता से मस्तिष्क में ताजा खून और ऑक्सीजन की मात्रा पहुंचती है, जिसके ऐसे रसायन उत्पन्न होते हैं जो कि दिमाग को सक्रिय बनाए रखते हैं लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है तो मस्तिष्क की क्षमता पर भी विपरीत असर पढ़ता है। पीएलओस नामक एक जर्नल में प्रकाशित शोध रिपोर्ट में बताया गया है कि मिडिल एज के लोगों में ज्यादा देर तक बैठे रहने की वजह से डिमेंशिया नामक बीमारी होने का खतरा अधिक होता है। डिमेंशिया के कारण लोग बातों या कार्यों को भूलने लगते हैं।
इसलिए, सही मुद्रा में बैठें और बीच - बीच में चलते रहें। साथ ही, हर रोज़ व्यायाम के लिए कुछ समय ज़रूर निकालें।
सही अवस्था में बैठने के लिए यह उपाय करने चाहिए।
- बैठे रहने की स्थिति में आगे की ओर झुककर ना बैठें।
- कंधों को जहां तक हो सके रिलेक्स्ड स्थिति में रखें।
- अपने हाथों को साइड में रखें।
- बैठकर काम करते समय आपकी कोहनियों को समकोण की स्थिति में होना चाहिए।
- पीठ के निचले हिस्से को सहारा दें।
- अपने पैरों को धरातल पर समतल हालत में रखें।
- इन अप्रिय स्थितियों से बचने के लिए हम हल्का व्यायाम करके बहुत हद होने वाले नुकसान को रोक सकते हैं।
- एक्सरसाइज बॉल या बैकलेस स्टूल पर बैठें। जिससे सभी महत्वपूर्ण मांसपेशियां सक्रिय हो जाती हैं।
- आप दिन में एक बार अपने हिप फ्लेक्सर्स को तीन-तीन मिनट के लिए दोनों ओर रखकर बैठें।
- अगर आप टीवी देख रहे हों या अन्य कोई काम कर रहे हों तो थोड़ी देर के लिए बीच में उठकर चलना शुरू कर दें। इससे आपकी मांसपेशियां सक्रिय हो जाती हैं।
- आप बार-बार खड़े होने और बैठने का अभ्यास करें।
- आप योग मुद्राओं का अभ्यास कर सकते हैं या फिर अपने शरीर को गाय, बिल्ली जैसी मुद्रा में रखें।








