नव वर्ष की सभी को बधाई !!!
हर साल की तरह इस साल भी हम सभी लोग नए वर्ष के लिए कुछ न कुछ नयी शुरुवात करने के बारे में जरुर सोचेंगे और संकल्प करेंगे। ऐसा बहुत ही कम होता है कि लोग नए वर्ष के लिए कोई संकल्प नहीं लेते हों। लगभग सभी लोग नए साल में कुछ नया करने के लिए संकल्प लेते हैं ।
नव वर्ष के संकल्प लेना बहुत ही आसान है, लेकिन उसे आखिरी स्टेज तक पहुँचाना उतना ही मुश्किल काम है । अंतिम पड़ाव तक पहुँचते पहुँचते अधिकतर लोग अपने संकल्पों को छोड़ देते हैं। अक्सर लोग शुरुवात में बड़े जोर शोर से अपने संकल्पों को पूरा करने की कोशिश करते हैं , लेकिन फिर धीरे धीरे उस से दूर होते जाते हैं । तो अब ऐसा सवाल उठता है कि क्या कोई ऐसा तरीका है जिससे हम अपने संकल्पों को, लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें? मेरा जबाब है कि ''हाँ'' हम ऐसा कर सकते हैं। इसके लिए हमें अपने अपने अंदर कुछ बदलाव करते हुए मानसिक रूप से तैयार होने की जरुरत है। नीचे कुछ सुझाव दिए गए हैं जिसे अपनाकर हम सफलता के नए सोपान प्राप्त कर सकते हैं और अपने संकल्पों को प्राप्त कर सकते हैं।
संकल्प का ख्याल हमारे मन में आता कैसे है?
जब हमारे सामने कोई समस्या या चुनौती आती है तो उसके समाधान के बारे में हम सोचते हैं और कोई रास्ता ढूढते हैं और उस रास्ते पर चलने के लिए संकल्प लेते हैं। या तो हमें किसी विषय के प्रति चिंता होने लगती है, जैसे हमारे ख़राब स्वास्थय के बारे में या हमारी खस्ताहाल आर्थिक स्थिति के बारे में। जब हम अपनी ख़राब सेहत या खस्ताहाल आर्थिक स्थिति को सुधारने के बारे में निर्णय लेते हैं तो यही संकल्प होता है। जिस चीज के बारे में हम सोचते हैं तो फिर वह सोच हमारे मस्तिष्क में घर कर जाती है ,जैसे कि इस वर्ष मैं अपना वजन कम करूँगा या इस वर्ष मैं नयी नौकरी करूँगा जहाँ से मुझे प्रति माह अच्छी कमाई होगी या मैं किसी से भी बुरा बर्ताव नहीं करूँगा । इस तरह अंततः हम साल की शुरुवात में चिंता को कम करने के लिए या किसी को दिखाने के लिए ऐसे संकल्प तो ले लेते हैं, लेकिन कुछ ही महीने में हमारे संकल्प का अंत हो जाता है।
तो फिर क्या करें ?
ज़रा सोचें कि क्या आपने कभी ये संकल्प लिया है, कि रात होते ही मैं सो जाऊंगा ? या फिर कभी ये संकल्प लिया है, कि हर दिन मैं खाना खाऊंगा ? शायद कोई भी दुनियां में ऐसा संकल्प नहीं लेता होगा। सोचें कि ऐसा क्यों नहीं होता ? ऐसा इसलिए नहीं होता है क्योंकि ये हमारी जरूरते हैं। इसलिए जब कभी भी हम अपने संकल्प को ''चाहत'' नहीं जरुरत बना लेते हैं तो उसको पूरा करने में हमें कोई अतिरिक्त मेहनत करने की जरुरत नहीं पड़ती है।
संकल्प को दिनचर्या का हिस्सा बनायें
बिना किसी भय या दबाव के अपने संकल्पों को अपनी ज़रुरत बनायें। जैसे - अगर आपको वजन कम करना है या अच्छी सेहत बनाना है तो आपको प्रतिदिन पौष्टिक आहार लेने और उचित व्यायाम करने को अपने दिनचर्या में शामिल करना होगा, रोज़ साइकिल चलाने, जिम जाने या दौड़ने को अपनी आदत में शामिल करना होगा। मृदुभाषी बनना हो तो इसे अपनी दिन चर्या में शामिल करिये। डर, चिंता और दबाव में लिए हुए फैसले अक्सर ज्यादा दिन नहीं चलते ।
छोटे - छोटे लक्ष्य बनायें
अपने संकल्पों को प्राप्त करने के लिए आपने जो लक्ष्य बनाये हैं , उन्हें छोटे छोटे टुकड़ों में बाँटें। हर छोटे लक्ष्य प्राप्ति के लिए एक समय सीमा निर्धारित करें । जैसे यदि आपने एक साल में 12 किलो वजन कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया है तो आप इसे छोटे - छोटे भाग में अर्थात एक महीने में एक किलो तक वजन कम करने के रूप में निर्धारित करें। एक किलो वजन कम करने के लिए आपको लगभग 9000 कैलोरी खर्च करने की जरुरत होगी। हर दिन 300 कैलोरी, यानि प्रतिदिन आपको एक घंटे से अधिक या लगभग 8 से 10 किलोमीटर दौड़ने की जरुरत होगी। इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाइये और रोज़ यह चेक करें कि आज कितना दौड़े । आपके मासिक 1 किलो वजन घटाने का लक्ष्य अपने आप प्राप्त होगा ।
परिवर्तन है ज़रूरी
कई बार हम परिवर्तन को स्वीकार किये बिना ही नव वर्ष का संकल्प ले लेते हैं । संकल्पों को हासिल करने के लिए परिवर्तन के लिए तत्पर रहना पहली शर्त है। संकल्पों को सोच के आसमान से वर्तमान के धरातल पर लाने में सबसे बड़ी बाधा परिवर्तन के लिए तैयार न होना है । यदि आप परिवर्तन के लिए तैयार नहीं हैं तो अच्छा है कि आप कोई संकल्प ही न लें । जैसा चल रहा है वैसा ही चलने दीजिये। लेकिन यदि आपको अपने लिए कुछ करना है, कुछ हासिल करना है, कुछ पाना है तो अपने अंदर परिवर्तन लाना बहुत ज़रूरी है। जीवन में परिवर्तन लाना हमेशा से ही एक कठिन कार्य रहा है । मानव स्वाभाव वश अपने कम्फर्ट जोन से बाहर नहीं आ पाता है। हमें अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलकर परिवर्तन को स्वीकार करते हुए आगे बढ़ना होता है ।
नव वर्ष ही क्यों ?
अक्सर ऐसा देखा गया है कि जब आप अपने संकल्पों को पूरा करने की राह से भटक जाते हैं तो फिर अगले वर्ष का इंतज़ार करते हैं । यह सोचते हैं कि इस वर्ष में तो अपने संकल्पों को पूरा नहीं कर पाया , अगले नव वर्ष से मैं दुबारा से नयी शुरुआत करूँगा । नववर्ष का इंतज़ार मत कीजिये । हर घडी शुभ है । सूरज की वो पहली किरण ही रोज़ हमारा नववर्ष है ।
कोई कार्य असंभव नहीं , बस हमारी सोच उसे असंभव और संभव बनाती है ।
आशा करता हूँ कि इन बातों से आपको मदद मिलेगी और आप निश्चित ही अपने नव वर्ष के संकल्पों और लक्ष्यों को पाने में सफल होंगे ! अपने विचार कमेंट के माध्यम से हमें भेजे।
