जी हां, मैराथन ही नहीं आपको छोटी दूरी की दौड़ के लिए भी अच्छी तैयारी करनी चाहिए। बहुत से लोगों को लगता है कि 5 किलोमीटर की दौड़ में भाग लेने के लिए कोई खास तैयारी की जरुरत नहीं होती है बस उठे और दौड़ लिए उसमें क्या है ? लेकिन ऐसा नहीं है यदि आप बिना किसी तैयारी के लंबे मैराथॉन या 5 किलोमीटर की दूरी की दौड़ लगते हैं तो आपको नुकसान हो सकता है। आपकी सेहत ख़राब हो सकती है, शरीर में खिंचाव आ सकता है, मांसपेशियों में दर्द हो सकती है जिससे आपको मुश्किल हो सकती है।
यदि आप 5 किलोमीटर की दौड़ या मैराथॉन में हिस्सा लेना चाहते हैं तो ऐसे करें तैयारी।
दौड़ने के लिए सबसे जरुरी चीज है अच्छी किस्म के जूते। यदि आप लम्बे समय तक दौड़ना चाहते हैं तो सबसे पहली चीज़ जो है वह है अच्छी किस्म का और वजन में हल्का जूता। आप उचित ढंग से तब तक नहीं चल या दौड़ सकते, जब तक कि आप सही जूते नहीं पहनते। रनिंग शूज़ का प्रमुख काम है आर्च और स्ट्राइड को पर्याप्त सपोर्ट देना। हमेशा जूते खरीदते समय ध्यान रखना चाहिए कि जूते न तो बहुत टाइट हों नहीं ढ़ीले। सीमलेस मोज़े चुनें और सुनिश्चित करें कि ये नमी सोखने वाले हों। इस तरह वह आपके पैरों को सूखा रखेंगे। इसके अलावा आपके कपड़े भी आरामदायक होने चाहिए।
मैराथॉन हो या छोटी दौड़ उसमें भाग लेने के लिए हमेशा अच्छी तैयारी करनी चाहिए, न की अचानक उठे और हो गए दौड़ने के लिए तैयार। दौड़ने के लिए एक प्लान बनाएं, किसी ट्रेनर या कोच से सलाह लें या किसी लोकल रनर्स ग्रुप में शामिल हो जाएं। एक अच्छा प्लान बनाकर धीमी शुरूआत करें और फिर धीरे-धीरे तेज दौड़ने का अभ्यास करें। शुरुवात में समय और दिन सीमित रखें। पहले हफ्ते में 3 दिन 20 मिनट तक दौड़ लगाना एक अच्छी शुरुआत हो सकती है। हर हफ्ते समय बढ़ाते जाएं ताकि शरीर अभ्यस्त हो सके। योजना ऐसा बनाएं कि पूरे सप्ताह के दिनों का इस्तेमाल किया जा सके और 2 ट्रेनिंग सेशन्स के बीच ज़्यादा अंतर ना हो।
दौड़ने से पहले नियमित रुप से वार्म अप जरुर करें। हर दिन दौड़ के अभ्यास की शुरुवात वार्म-अप के साथ शुरू होता है। इससे शरीर की स्ट्रेचिंग होती है और खून का बहाव तेज़ हो जाता है। कुछ स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़, वॉकिंग लंजेस और स्ट्रेट लेग किक्स करें। इससे मांसपेशियों की स्ट्रेचिंग होगी। आपका शरीर लचीला बनेगा और शरीर को नुकसान भी कम होगा। शरीर फुर्तीला बनता है और दौड़ने की गति तेज हो जाती है।
धीरे-धीरे शुरूआत करें। आरामदायक गति से चलते रहें। थोड़ी देर तेज गति से दौड़ें फिर थोड़ी देर आराम से चलें। हमेशा सही गति से दौड़ें, सही गति का अर्थ है यदि आप दौड़ते हुए बिना सांस फूले आराम से बात कर ले रहे हैं, तो वही सही गति है। कुछ लोग शुरुआत में बहुत तेज चलने की ग़लती करते हैं और फिर 10 मिनट के बाद उनके लिए चलना मुश्किल हो जाता है क्योंकि वे बहुत ज़्यादा थक जाते हैं। अगर चलना बहुत कठिन लगता है, तो बीच-बीच में थोड़ी-थोड़ी देर के लिए जॉग करते हुए ब्रिस्क वॉक करें। फिर थोड़ी ज़्यादा देर तक जॉगिंग करें और अंत में धीरे-धीरे चलें।
शुरुआत में गति या दूरी पर ध्यान केंद्रित न करें। इसके बजाय, समय पर फोकस करें। शरीर धीरे-धीरे उस दूरी तक चलने के लिए खुद ब खुद तैयार हो जाएगा और आप ज़्यादा मेहनत करने के लिए तैयार होंगे। इसलिए, धीरे-धीरे समय और डिंस्टेंस या दूरी में बढ़ोतरी करें। शुरु-शुरु में लोगों को अपनी स्पीड बढ़ाने की बजाय दूरी बढ़ाने पर ध्यान देना ज़रूरी है। फिनिश लाइन तक पहुंचने से पहले ढेर होने की बजाय, आराम से दौड़ कर फिनिश लाइन तक पहुंचना बेहतर होता है।
दौड़ने से मांसपेशियों में तनाव पैदा हो जाता है, और उन्हें चोट लगने की संभावना बढ़ जाती है। इससे बचने का एक ही तरीका है, दौड़ने के बाद सही तरीके से स्ट्रेचिंग करने के साथ उस तनाव को खत्म करना। दौड़ने के बाद 5 मिनट ब्रिस्क वॉक करें और उसके बाद स्ट्रेचिंग करें।
चलने से शरीर की ऊर्जा ख़त्म होती है और शरीर में ग्लाइकोजेन लेवल कम हो जाता है। दौड़ने से पसीना निकलता है जिससे शरीर में पानी की मात्रा भी काम होने की संभावना बढ़ जाती है। इसीलिए लंबी दौड़ के बीच में थकावट होने पर या प्यास लगने पर बीच - बीच में ग्लूकोज पानी पीएं। इससे शरीर को कैलोरी मिलती है और आपका शरीर सही तरीके से काम कर पाता है। सही समय पर पौष्टिक और संतुलित भोजन खाना महत्वपूर्ण है। ट्रेनिंग के दौरान संतुलित और पौष्टिक भोजन खाएं। वॉक या मैराथॉन से एक सप्ताह पहले, आप को संतुलित और पौष्टिक कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन खाना चाहिए, लेकिन चर्बी वाले खाद्य पदार्थ और, शराब तथा धूम्रपान से बचना चाहिए ।






