हम सभी के पास दोस्त होते हैं। हम समाज में रहते हैं, अपने सुख दुःख को लोगों के साथ बांटते हैं। अपने दोस्तों के साथ अपनी समस्या को साझा कर लेने से मन हल्का हो जाता है। दिल को सुकून मिलता है। मित्र शब्द का अधिकांश समय गलत अर्थ निकाला जाता है। हो सकता है कि वे लोग जिनके साथ आप पार्टी करते हैं, साथ - साथ घूमते हैं, खाते -पीते हैं, वास्तव में वो आपके दोस्त कहलाने के लायक भी नहीं हों। यहां तक कि फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों की लंबी मित्र सूची के सभी आभासी मित्रों को भी दोस्त नहीं कहा जा सकता। शायद हम सभी को लगता है कि हमारे आस - पास पास जो लोग हैं वे हमारे अच्छे दोस्त हैं। एक बार की बात है जब मैं कालेज में पढ़ रहा था तो एक दिन मेरे साथ कुछ घटना घटी तो मैंने अपने एक दोस्त से जिसके साथ मैं उन दिनों अपना अधिकांश समय बिता रहा था। उसको मैंने कहा कि “तुम मेरे अच्छे दोस्त हो इसलिए तुम्हें मेरा साथ देना चाहिए, तो उसने मुझे जवाब दिया कि, “नहीं, हम अच्छे तो क्या साधारण दोस्त भी नहीं हैं, हम केवल सहपाठी हैं।
“एक दोस्त जो जरुरत के समय काम आये, वास्तव में वही सच्चा दोस्त होता है।” अच्छे दोस्त हर चरण में हमें सहायता करते हैं, मार्गदर्शन करते हैं और समर्थन देते हैं। दोस्त हमें भावनात्मक समर्थन देते हैं। वे मुश्किल घड़ी में हमारी मदद करते हैं और हमें विशेष महसूस कराते हैं। वे लोग सौभग्यशाली हैं जिनके पास अच्छे और सच्चे दोस्त हैं। अच्छे दोस्त बुरे समय में आपकी मदद करते हैं। अच्छे दोस्त सर्वश्रेष्ठ आलोचक होते हैं।
आइए हम यह समझने की कोशिश करते हैं कि कौन अच्छे और सच्चे दोस्त होते हैं और जीवन में अच्छे दोस्त क्यों महत्वपूर्ण होते हैं ?
सच्चे दोस्त भावनात्मक समर्थन देते हैं
जीवन में कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि, जब हम भावनात्मक रूप से कमजोर होते हैं या किसी से अपने दिल की बात करना चाहते हैं, कई चीजें ऐसी हैं जिन्हें हम अपने माता-पिता और भाई-बहनों या परिवार के साथ साझा नहीं कर सकते क्योंकि हमें डर लगता है कि कहीं उन्हें धक्का ना लगे या उन्हें गुस्सा ना आ जाय, बुरा न मन जायें। ऐसी स्थिति में हम अपने दोस्तों के करीब जाना चाहते हैं।
अच्छे दोस्त हमेशा आपको सुनने के लिए तैयार रहते हैं। जब भी आप भावनात्मक रूप से परेशान होते हैं या किसी मुश्किल दौर से गुज़र रहे होते हैं तो वे आपका साथ देने के लिए आपके पास मौजूद रहते हैं। कभी-कभी हमें ऐसे लोगों की आवश्यकता महसूस होती है जो बिना किसी निर्णय पर पहुंचे और हमारे बारे में बिना कोई राय बनाए हमारी बातों को सुन सकें। दोस्तों के सुनाने से हमें भावनात्मक सुख की प्राप्ति होती है। सच्चे दोस्त एक-दूसरे के बेहद सहायक होते हैं। वे विभिन्न स्तरों पर एक दूसरे का समर्थन करते हैं। जब भी मैं भावनात्मक रूप से कमज़ोर महसूस करता हूं तो मैं अपने सबसे अच्छे दोस्त के पास जाता हूं। वह जानता है कि मुझे कैसे शांत करना है और उस समय मेरी सहायता करता है।
बचपन में दोस्तों का महत्व
कई अनुसंधानों से पता चलता है कि जब किसी घर में एक ही आयु वर्ग के दो या अधिक बच्चे होते हैं तो उन परिवारों की तुलना में जिनमें अकेले एक ही बच्चा होता है, विभिन्न स्तरों पर अधिक विकसित होते हैं। इसका कारण है कि वे समान रुचियां साझा करते हैं, समान गतिविधियों में शामिल होते हैं, एक-दूसरे के साथ खेलते हैं, आनंद लेते हैं और बहुत कुछ साथ - साथ सीखते हैं। दुर्भाग्य से आज के समय में अधिकांश परिवारों में बच्चे अकेले होते हैं। अधिकांश बच्चे अकेले नौकरानियों के भरोसे या अपनी मां के भरोसे छोड़ दिए जाते हैं जिन पर पहले से ही कई अन्य जिम्मेदारियां होती हैं और वे बच्चों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाते हैं। इसके कारण उन बच्चों का शारीरिक और साथ ही मानसिक विकास अवरुद्ध होता है। आज एकल परिवार प्रणाली समय की आवश्यकता बन गई है, बदलते समय में हमारी मज़बूरी बन गयी है। ऐसे में हम बच्चों के साथ दोस्ती बनाकर उनकी शारीरिक और मानसिक सेहत में उचित वृद्धि को सुनिश्चित कर सकते हैं। माता-पिता को अपने बच्चों को पार्क में ले जाना चाहिए जहां वे उसी उम्र के बच्चों से मिल सकते हैं। अपनी उम्र के बच्चों के आस-पास होना उनके लिए एक रमणीय अनुभव होता है। जब वे दोस्तों के साथ घिरे होते हैं तो वे खेलते हैं, सीखते हैं तो वे अधिक खुशहाल होते हैं और उनका सही तरह से विकास होता है।
आजकल इतने सारे स्कूलों की स्थापना के पीछे भी यही मुख्य कारण है। बच्चे जो प्ले स्कूल जाते हैं वे देखभाल करना और बेहतर तरीके से बढ़ना सीखते हैं। वे नियमित रूप से स्कूल जाने के लिए बेहतर तरीके से तैयार रहते हैं बजाए उनके जो प्ले स्कूलों में भाग नहीं लेते हैं।
बुढ़ापे में दोस्तों का महत्व
पहले संयुक्त परिवार प्रणाली थी। लोग अपने विस्तारित परिवारों के साथ रहते थे और उनके साथ हर अवसर का आनंद उठाते थे। उनके हर सुख - दुःख के साझीदार होते थे। वे लोग विभिन्न कार्यों में एक दूसरे की मदद और सहायता करते थे। मित्र भी महत्वपूर्ण थे और उनकी उपस्थिति हर अवसर की समग्र मनोदशा में शामिल होती थी। इसके अलावा ऐसी कई चीजें हैं जो एक व्यक्ति अपने परिवार के सदस्यों के साथ साझा नहीं कर सकता हैं लेकिन दोस्तों के साथ आसानी से साझा कर सकता है।
हालांकि बढ़ती एकल परिवार प्रणाली ने लोगों को अपने दोस्तों के महत्व को महसूस कराया है। विशेषकर इस महामारी ने दोस्तों और परिवार की महत्ता को लोगो को सिखाया है। न सिर्फ युवा जोड़े और बच्चे, बल्कि वृद्ध पुरुष और महिलाएं भी अच्छी दोस्त मंडली की आवश्यकता को महसूस करते हैं। बूढ़े लोग इन दिनों अकेले रह गए हैं क्योंकि उनके बच्चे पेशेवर और व्यक्तिगत कारणों से बाहर देश चले जाते हैं। जिनके पास एक अच्छी मित्र मंडली है वे अपने बच्चों को उनके जीवन में व्यस्त हो जाने के बाद भी अच्छी तरह से जीवित रह सकते हैं पर जिनके पास दोस्त नहीं हैं वे अक्सर अकेला महसूस करते हैं और अवसाद से घिर जाते हैं तथा तमाम सारी गंभीर बीमारियों का सामना करते हैं।
इसलिए पुरानी पीढ़ी के लोगों को इन दिनों गंभीरता से कुछ अच्छे दोस्तों की जरूरत है। वृद्ध और बूढ़े लोगों को एक दूसरे के साथ जुड़ने में मदद करने के लिए कई क्लबों और सामाजिक समूहों का गठन किया गया है।
ऑफिस में दोस्त होने का महत्व
आजकल कॉर्पोरेट ऑफिस में बहुत प्रतिस्पर्धा है। लोगों को लंबे समय तक काम करना पड़ता है। सप्ताहांत पर काम करने के लिए और आधिकारिक काम के लिए नियमित रूप से बाहर जाने की ज़रूरत होती है। ऐसी स्थिति में काम का बहुत दबाव होता है और जीवन बेहद तनावपूर्ण हो जाता है। जब काम की जगह पर अच्छे दोस्त होते हैं तो दबाव काम हो जाता है। जब आप अपने सहयोगियों में मित्र खोज लेते हैं उनके साथ दोस्ताना संबंध बना लेते हैं तो आपके लिए दफ़्तर एक दिलचस्प जगह बन जाती है और आप अपने कार्यालय में जाने के लिए तत्पर रहते हैं और अच्छा परिणाम दे पाते हैं। आप जानते हैं कि ऐसे कई लोग हैं जो काम के दबाव और तनाव से गुजर रहे होते हैं। उनके साथ बातचीत, काम के माहौल के बारे में अपनी भावनाओं को उजागर करना और उन्हें काम के दबाव को कैसे संभालना है, पर सुझाव देने से आपको बेहतर महसूस हो सकता है।
जब आपके अधिकारी किसी कारण से आप पर चिल्लाते हैं या आप को छुट्टी देने में आनाकानी करते हैं या आपके लिए अवास्तविक लक्ष्य निर्धारित करते हैं तो आपको भावनात्मक समर्थन की आवश्यकता होती है। ऐसे में कार्यालय में दोस्त होने की वजह से ऐसे कारणों से तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है क्योंकि वे आपकी स्थिति को सबसे अच्छी तरह से समझते हैं। कार्यालय बस अपने काम में व्यस्त रहने या अपने मालिक से निर्देश पाने की जगह मात्र नहीं है। दोस्तों की उपस्थिति में यह जीवंत स्थल बन जाता है। यह भी देखा गया है कि जिनके पास कार्यालय में दोस्त हैं वे लंबे समय तक दफ़्तर में टिके रहते हैं और छुट्टियाँ कम लेते हैं।
हालांकि कॉरपोरेट दुनिया में लोग अक्सर स्वार्थी प्रकृति के साथ दोस्त बनाते हैं। इसलिए किसी भी महत्वपूर्ण जानकारी को साझा करने या अपने सहकर्मियों के साथ भावनात्मक रूप से संलग्न होने से पहले आप मित्र बनाए तो आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि वे आपकी दोस्ती में वास्तव में दिलचस्पी रखते हैं और आपका दोस्त सिर्फ़ इसलिए नहीं बनना चाहते कि उन्हें आपकी दोस्ती से किसी तरह का लाभ मिले।
मित्र हमारे व्यक्तित्व को उभारने में मदद करता हैं
आप किस तरह के व्यक्ति बनना चाहते हैं। यदि आप अपनी जिंदगी मकसद केवल स्कूल या ऑफिस जाना और वापस घर आने तक ही रखना चाहते हों और बाहर की दुनिया के साथ कम से कम संबंध बनाना चाहते हैं तो आपका जीवन बेहद नीरस और उबाऊ हो जाएगा। बहुत से लोग जैसे-जैसे वृद्ध हो जाते हैं वैसे-वैसे इन दिनों वे ऐसा ही जीवन जीते हैं। ऐसा विशेषकर गृहिणियों के साथ होता है जो अधिकांश समय तक अपने घरों में सीमित रहती हैं और बाहर किसी से दोस्ती नहीं कर पाती हैं।
इस तरह से वे अपना आत्मविश्वास खो देती हैं। कई लोग अवसाद में आ जाते हैं। मित्र होने से जीवन को पूर्ण रूप से जीने का मौका मिलता है। वे हमारे व्यक्तित्व को सुधारने में भी मदद करते हैं। जो लोग दोस्तों से घिरे रहते हैं वे भावनात्मक रूप से मजबूत होते हैं। वे उन लोगों की तुलना में भी अधिक आत्मविश्वास से भरे रहते हैं जिनके पास दोस्त नहीं है। इसका कारण यह है कि उनके पास लोगों से मुद्दों पर चर्चा करने, अपनी भावनाओं को उजागर करने, सलाह लेने और बाहर जाने का विकल्प रहता है।
जहाँ बच्चों को उनकी बढ़ती उम्र में और बूढ़ी पीढ़ी के लोगों के लिए दोस्तों का साथ बेहद महत्वपूर्ण हैं वहीँ अन्य आयु वर्ग के लोगों को भी दोस्ती के उपहार की जरूरत होती है। दोस्त हमें जीवन में बहुत कुछ सिखाते हैं और हमें मजबूत बनाते हैं। वे हमारे परिवार के समान महत्वपूर्ण हैं।
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