मंगलवार, 12 जनवरी 2021

ज़िन्दगी एक सफ़र है, यह आपके हाथ में है आप इसे सरल बनायें या दूभर। Life is a journey, it is in your hands, make it easy or difficult.


''ज़िन्दगी एक सफ़र है सुहाना,
यहाँ कल क्या हो किसने जाना''
फ़िल्म अंदाज़ का यह गाना मेरा पसंदीदा है क्योंकि यह जिंदगी की वास्तविकता को उजागर करता है। ज़िंदगी के सही मायनों को बताता है।
जीवन समय की इकाई से बना है इसलिए एक लमहे में सौ लमहों को जी लेने वाला ही सबसे अच्छा जीवन का सदुपयोग कर पाता है। जहां आने वाला कल अनिश्चित हो वहां आज का, वर्तमान का मज़ा लेना चाहिए।

जो बात होनी तय है उसके लिए परेशान होना बेकार है, एक दिन मौत सबको आनी है। इसलिए मौत से घबराने का कोई मतलब नहीं है।

मनुष्य और पशु में कोई विशेष अन्तर नहीं है। परन्तु मनुष्य में कुछ विशेषतायें हैं जिसकी वजह से यह अन्य प्राणियों से भिन्न है। जैसे - उसके रहन-सहन की रुचि, उचित-अनुचित का भय, भाषा-भाव आदि कितनी ही विशेषतायें हैं जिसकी वजह से ही मनुष्य को इस सृष्टि का श्रेष्ठ प्राणी माना जाता है।

जीवन के लिए सबसे आवश्यक बात यह है कि उसे रुकना नहीं चाहिए। उन्नत होना और आगे बढ़ना जीवन का स्वाभाविक गुण है। जीवन एक अंतहीन यात्रा है, बीज बीज की तरह बढ़ता है, लेकिन इसे पानी और पोषण की जरुरत होती है। उसी तरह जीवन को प्रेरणा की जरुरत होती है। इसे हमेशा प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। जीवन को एक सबक के रूप में देखा जा सकता है, जीवन को एक परीक्षण के रूप में देखा जा सकता है, जीवन को एक आशीर्वाद समझा जा सकता है। इसलिए हमें हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहिए। जब हम अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं तो जो परिणाम मिलता है उसे देखकर हमारा जीवन आनंद से भर जाता है, दिल प्रफुल्लित हो जाता है।

आपके सामने एक लंबा-अंतहीन, मार्ग पड़ा है जिस पर आपको हमेशा चलते रहना है। आप यह जानते हुए कि आपकी यात्रा कब और कहाँ समाप्त होगी, लेकिन फिर भी आप हतोत्साहित हुए बिना दूने उत्साह के साथ अपनी जीवन यात्रा का आनंद उठाते हैं, चलते रहते हैं। चलने का अर्थ है अपनी शक्तियों का, सामर्थ्य का सदुपयोग करना, उन्नति के लिए निरन्तर प्रयास करते रहना, विकास की ओर उन्मुख होना और एक ऐसा सुव्यवस्थित जीवन बिताना जिसमें प्राण हों, शक्ति हो और सामञ्जस्य हो। हम जो भी दिशा चुनते हैं; हमेशा सबक के रूप में हमारी दैनिक चुनौतियां हमारे सामने होनी चाहिए।जीवन में सकारात्मक रुख अपनाने से जीवन में आनंद मिलता है। मानव-जीवन की महत्ता इस बात पर निर्भर करती है कि हम वर्तमान साधनों का उपयोग अपने अंतर्दर्शन या आत्म-ज्ञान को प्राप्त करने के लिए कैसे करते हैं। उद्देश्य का मार्ग हमेशा किसी विशिष्ट दिशा की ओर ही जाता है। प्रकृति जिस ओर ले जाना चाहे उधर ही चलते रहें तो इन प्राप्त शक्तियों की सार्थकता कहाँ रही? जैसा जीवन दूसरे प्राणी जीते हैं वैसा ही हम भी जियें तो विचारशीलता का महत्व क्या रहेगा? बुद्धि की सूक्ष्मता, आध्यात्मिक अनुभूतियाँ, विराट की कल्पना आदि, मनुष्य के जीवन में ठीक उसी तरह कार्य करती हैं जैसे जहाज का मार्ग-दर्शन करने के लिए दिशा सूचक यंत्र काम करता है। मनुष्य चाहे तो अपना उद्देश्य पूरा करने के लिए इनसे निर्देशन या मार्गदर्शन प्राप्त कर सकता है। उद्देश्य कभी श्रमहीन और मात्र सांसारिक नहीं हो सकते।

हम सब कुछ हासिल करने के लिए कुछ न कुछ कर रहे हैं। कोई डिग्री ले रहा है, कोई दूसरी नौकरी पाने का प्रयास कर रहा है, कोई पदोन्नति पाना चाहत रखता है। कोई साहित्य लिख रहा है, कोई राजनीति कर रहा है लेकिन वांछित चीजों को प्राप्त करने से पहले क्या हम कभी सोचते हैं कि इस उपलब्धि का वास्तविक परिणाम क्या है ? इसका उत्तर है ''लालच"। हम सभी को वांछित चीजें पाने का लालच है हालाँकि कुछ समय के लिए हमारे दिल की इच्छा की संतुष्टि होती है, लेकिन मन हमेशा अधिक चाहता है। मन व दिल के बीच यह लड़ाई हमेशा जारी रहती है। हमारा जीवन धरती पर प्रकृति का एक बहुमूल्य उपहार है।




जब भी आप यात्रा करते हैं, तो आप अपने साथ कुछ सामान लेकर चलते हैं। सामान का आकार यात्रा के दिनों पर निर्भर करता है। यदि आपको यह भारी लगता है, तो आप एक कुली की सेवाएं लेते हैं और अपना भार साझा करते हैं। कल्पना कीजिये, अगर आपको अपने सामान (भार या बोझ) को पूरी यात्रा के दौरान बिना नीचे रखे खुद को उठा कर ले जाना हो , तो आप इसे कब तक कर सकते हैं, कुछ मिनटों, कुछ घंटों या एक दिन के लिए? ……. आप सही हैं … लंबी अवधि के लिए ऐसा संभव नहीं है। आपको इसका एहसास नहीं हो पाता है लेकिन आप अपने साथ कुछ बोझ लगातार कई दिनों तक ढोते रहते हैं और कभी-कभी तो पूरे जीवन काल तक ढोते रहते हैं। यह आपके अतीत का भावनात्मक बोझ है।

“कभी-कभी अतीत को छोड़ दिया जाना चाहिए, हां। जीवन एक यात्रा है और आप सब कुछ अपने साथ नहीं ले जा सकते हैं। केवल उपयोग करने योग्य सामान ही आप अपने साथ रख सकते हैं। ” 

भावनात्मक बोझ आपके पूरे विश्वास प्रणाली को आकार देता है, जो आप स्वयं को देखने के तरीके और संबंधों में आपके व्यवहार को प्रभावित करता है। यह बोझ जीवन के उतार चढ़ाव से मिले अनुभवों को इकठ्ठा करने से आता है। कुछ उदाहरण हैं – किसी समय पर आपके ऊपर शर्मनाक टिप्पणियां की गयीं, आपको यह दिखाया गया कि आप प्यार करने योग्य नहीं हैं, या बताया गया कि आप किसी काबिल नहीं हैं – किसी भी बात में अच्छे नहीं । प्रियजनों के कुछ पिछले व्यवहार अब तक आपको परेशान कर सकते हैं। आपका परिवार आपके कठिन समय में आपके साथ नहीं खड़ा था या आपको अनदेखा किया जा रहा था। यह अप्रिय जरुर है लेकिन यही जीवन की कड़वी सच्चाई है।

इनमें से कुछ बहूत पुराने आपके बचपन के दिनों के हो सकते हैं, जबकि कुछ नए भी हो सकते हैं। इनमें से कुछ के लिए आप जिम्मेदार नहीं होते हैं लेकिन वहीं कुछ ऐसे बोझ भी हैं जो आपकी गलतीयों के कारण हैं और आपके खराब निर्णयों के कारण होते हैं।


भले ही आपके पिछले भावनात्मक घाव और निशान कंही से भी आये हों, फिर भी इसकी जिम्मेदारी आपको लेनी चाहिए और उनको ठीक करने के बारे में कुछ सार्थक प्रयास करना चाहिए । आपके भविष्य की सफलता उस भावनात्मक बोझ को अपने से दूर करने की आपकी इच्छा पर निर्भर करती है। क्या आप अपने भावनात्मक बोझ को उतारकर नीचे रखने के लिए तैयार हैं? क्या आप उसे छोड़ने के लिए तैयार हैं ?

अपने भावनात्मक बोझ से छुटकारा पाना मुश्किल काम हो सकता है, लेकिन असंभव नहीं। इसके लिए अपने अंदर बहुत सारे बदलाव करने और स्वयं की आंतरिक खोज करने की आवश्यकता होती है। यहां हम आपको अपने भावनात्मक बोझ से छुटकारा पाने के लिए कुछ सुझाव दे रहे हैं।

बोझ को नीचे उतारें


जीवन एक यात्रा है और जब आप जीवन में आगे बढ़ते हैं, तो रास्ते में अपने भावनात्मक बोझ को उतारते चलें। यदि आप ऐसा नहीं करेंगे, तो यह भारी और भारी होता चला जाएगा और आपके लिए जीवन में आगे बढ़ना मुश्किल हो जाएगा। इतना ही नहीं, दिन-प्रतिदिन आपकी इस बोझ को उठाकर ले जाने की क्षमता भी कम हो होती चली जाएगी। आपको इसे छोटे छोटे टुकड़ों में बांटकर और एक-एक करके छुटकारा पाने की आवश्यकता है। सभी पिछली घटनाओं, परिस्थितियों, व्यवहार, हानि, भय, क्रोध और पिछले संबंधों की एक सूची बनाएं, जो आपको बार बार परेशान करती हैं। योजना बनाएं कि आप इसे छोटे-2 टुकड़ों में एक-एक करके कैसे इससे निजात पायेंगें। एक बार जब आप ऐसा करना शुरू कर देते हैं, तो आपके आगे के जीवन की यात्रा और अधिक सुलभ और आरामदायक हो जाती है। आपकी जिंदगी खुशहाल हो जाती है। 

धैर्य रखें


जब आप अपने भावनात्मक बोझ को उतारने के लिए अपने विचारों और विश्वास प्रणाली में परिवर्तन लाना शुरू करते हैं, तो अपने आप को बहुत अधिक दबाव में न लायें । परिवर्तन आने में समय लगता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है की आप प्रयास कर रहे है। यदि आप महसूस करते हैं कि परिवर्तन लाना बहुत मुश्किल है, तो भी अपने साहस को न खोएं और बस आगे बढ़ते रहें। कोशिश ज़ारी रखें। आप देखेंगे कि कड़ी मेहनत, दृढ़ता और इच्छा शक्ति के कारण आपको अच्छे परिणाम मिलेंगे ।

जीवन के नकारात्मक हिस्सों के लिए आभारी रहें


आपको जीवन के नकारात्मक हिस्सों का आभारी होना चाहिए। आज आप जो कुछ भी हैं वह उन नकारात्मक घटनाओं, परिस्थितियों या जीवन के उन कठिन क्षणों से सीखने के कारण हैं। यदि वे आपके जीवन का हिस्सा नहीं होती, तो आप अपने में परिवर्तन नहीं ला पाते और अपने व्यक्तित्व में सुधार नहीं कर पाते और आज आप जिस मुकाम तक पहुंचे हैं वहां तक कभी भी नहीं पहुंच पाते । अपनी जिंदगी में आयी विषम परिस्थितियों से पैदा हुई तकलीफों से अपना ध्यान हटाएँ और उन नकारात्मक हिस्सों को विभिन्न दृष्टिकोणों से देखें। ध्यान दें कि उन नकारात्मक घटनाओं ने आपके जीवन में क्या प्रभाव डाला है, आपने उससे क्या हासिल किया है और इसके लिए आप उनके लिए आभारी रहें।

अपने आत्म-सम्मान में सुधार पर काम करें


जिस तरह से आप अपने बारे में सोचते हैं, महसूस करते हैं, वह आपकी मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। यदि आप बीते दिनों की घटनाओं को हमेशा याद करते हैं और उनमें अपनी खामियाँ ढूंढते रहते हैं तो आपके आत्मसम्मान को ठेष पहुंचती है। आपका आत्मविश्वास कमजोर होता है। यदि आप हमेशा उन नकारात्मक टिप्पणियों को याद करते हैं, संबंधों में कमियां निकालते हैं, झूठे दोषों के बारे में सोचते हैं और अपनी योग्यता पर संदेह करते हैं, तो आप धीरे -धीरे उन पर विश्वास करना शुरू कर देते हैं और यह आपके आत्म-सम्मान को प्रभावित करता है। इसलिए जो बीत गया उसके बारे में सोचने की बजाय अपने आत्म-सम्मान में सुधार करने पर काम करें। इससे न केवल आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि इससे आपको भावनात्मक बोझ से छुटकारा पाने में भी मदद मिलेगी।


अच्छे लोगों की संगति


अच्छे लोगों के साथ अपना समय व्यतीत करना शुरू करें। अच्छे लोगों का मतलब ऐसे लोग जो आत्म-सम्मान, उच्च मूल्यों और सकारात्मक संबंधों के साथ अपना जीवन जी रहे हैं और जीवन में खुश हैं । आप जैसे लोगों के साथ रहते हैं वैसा ही प्रभाव आपके जीवन पर पड़ता है। वैसी ही जिंदगी का आप प्रतिनिधित्व करते हैं। यदि आप अपने आप को ऐसे लोगों की संगति में रखते हैं – जिनके पास कोई काम नहीं है , या फालतू इधर - उधर घूमकर समय बिता रहे हैं, या नशे के शिकार हैं, या किसी भी प्रकार की आत्म विनाशकारी प्रवृत्तियों से घिरे हुए हैं, तो अपने आप को उन परिस्थियों से बाहर निकालना आप के लिए बहुत मुश्किल होगा। आपको अपने भावनात्मक बोझ से छुटकारा पाने के लिए उच्च आत्म-सम्मान वाले तथा अच्छे निर्णय करने वाले लोगों के व्यवहारों को अपनाना होगा। सकारात्मक लोगों के साथ अपना ज्यादा से ज्यादा समय बिताना होगा। यह आसानी से नहीं होता है। लेकिन आपको नकारात्मक, बुरे लोगों और बुरे दोस्तों के साथ दुरी बनानी होगी और ऐसे लोगों से सावधानी के साथ धीरे - धीरे दूरी बनानी होगी।

क्षमा महत्वपूर्ण है -


यदि पुराने संबंधों के टूटने, किसी रिश्तेदार के द्वारा नुकसान पहुंचाने या किसी व्यक्ति के प्रति कड़वाहट के कारण आपका भावनात्मक बोझ बढ़ गया हो, दिल दुःखा हो तो इन सब को याद रखना छोड़िये अपनी शिकायत करने की आदत से छुटकारा पाने की कोशिश करिये। उन सभी लोगों को जिन्होंने आपके साथ बुरा बर्ताव किया है क्षमा करना सीखें और अपने जीवन में आगे बढ़ें। मुझे पता है कि यह करना आसान नहीं है, कठिन है, लेकिन एक बार ऐसा करने के बाद आप इसके महत्व को समझ पायेंगें। किसी की गलती को माफ़ करना बहुत महत्वपूर्ण है। क्षमा की कला में माहिर होना आपके जीवन की खुशी और गुणवत्ता को बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसे सीखकर आप उस व्यक्ति को माफ नहीं करते जिसने कुछ गलत किया बल्कि आप खुद को माफ करते हैं। 

ज़िंदग़ी में अवसरों का लाभ लेना एक सर्वमान्य नियम है लेकिन ये जीवन खुद में भी एक अवसर ही है जो हर किसी को सिर्फ एक बार ही मिलता है, इसलिए ज़रूरी है कि इसका हंसते-मुस्कुराते हुए भरपूर लाभ उठाया जाए। हर लम्हा, हर क्षण बहुत बेशकीमती है क्योंकि एक बार समय के ग़ुज़र जाने के बाद वह वापस नहीं आता। कहते हैं कि जब जीना ही है तो क्यों न हँसते हुए जिंदगी जियें?




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