मनुष्य इस संसार का प्रकृत द्वारा बनाई गयी सबसे बुद्धिमान प्राणी है, फिर भी मनुष्य ही संसार में सबसे अधिक दुःखी, चिंतित और परेशान प्राणी है।
क्या आप जानते हैं ऐसा क्यों है ?
ऐसा इसलिए है, क्योंकि मनुष्य हमेशा अपने भविष्य को सुरक्षित करने के बारे में सोचता रहता है।
क्या कभी आपने जानवरों को मनुष्यों की तरह परेशान, दुःखी और चिंतित होते देखा है। संसार में जितने भी प्राणी हैं सभी को भूख लगती है, प्यास लगती है, सर्दी और गर्मी लगती है। लेकिन केवल मनुष्य ही ऐसा प्राणी है जो इन सभी जरूरतों को भविष्य के लिए इकठ्ठा करने के बारे में चिंता करता है।
क्या आप जानते हैं, मनुष्य और जानवरों में क्या अंतर है ?
जानवर अपने वर्तमान काल में जीता है, उसे कल की, भविष्य की कोई चिंता नहीं होती है। लेकिन वहीं पर मनुष्य को अपने भविष्य काल में जीता है।
जानवरों को जब भूख लगती है तो जहां हैं जो कुछ भी मिला खा लेंगे। प्यास लगी पानी पी लेंगे, तेज धूप से बचने के लिए पेड़ की छाया में बैठ लेंगे। अगर कोई जंगली शिकारी जानवर हमला करता है तो भागकर अपनी जान बचाने की कोशिश करते हैं।
जानवर के जीवन में उसके द्वारा की गई हर एक गतिविधि का परिणाम उसको उसी समय मिल जाता है। कहने का मतलब यह है कि जानवर का जीवन “वर्तमान काल” में चलता है।
चलिए अब जरा मनुष्य के जीवन के बारे में विचार करते हैं :
मनुष्य के जीवन में उसके द्वारा किये गए ज्यादातर कार्यों का परिणाम उसको भविष्य में प्राप्त होता है इसलिए मनुष्य का ज्यादातर समय “भविष्यकाल” को सुरक्षित करने के लिए लगता है। जैसे - मनुष्य आज पढ़ाई करता है कि उसका भविष्य अच्छा होगा, अच्छी नौकरी मिलेगी। आज पैसा बचाता है कि कल उसे अच्छी सुख सुविधाएं हासिल हो सकें। नौकरी या व्यापार करता है तो उसका प्रतिफल महीने के अंत में या कुछ समय बाद मिलता है।
यही हमारे दुःखों, समस्याओं और चिंताओं का कारण है।
जानवर केवल वर्तमान समस्या के बारे में ही चिंता करता है जिसे वह तुरंत हरकत में आकर सुलझा लेता है। उदाहरण के लिए अगर कोई शिकारी जानवर उस पर हमला कर दे तो वह तुरंत दूर भागकर अपनी जान बचा लेगा और अपनी चिंता को दूर कर देगा| शोध में यह बात सामने आई है कि एक बार खतरा टल जाने पर जानवर तुरंत सामान्य स्थिति में आ जाता है और भविष्य की चिंता नहीं करता।
लेकिन मनुष्य के साथ ऐसा नहीं होता। हमारी ज्यादातर समस्याएँ “भविष्य” से जुड़ी होती है जिसे वर्तमान में पूरी तरह से सुलझाया नहीं जा सकता। हो सकता है कि हम भविष्य की समस्याओं के समाधान के लिए वर्तमान में कुछ कार्य कर लें, लेकिन उसका परिणाम अनिश्चित होता है जो “भविष्य” में ही निश्चित हो पाता है। इसलिए हम लगातार चिंतित रहते है। आज हम कठिन परिश्रम कर सकते हैं, लेकिन हम भविष्य के अनिश्चित परिणाम को आज निश्चित नहीं कर सकते।
हमारा जीवन कुछ इस तरह चलता है कि हमें भविष्य के लिए वर्तमान में कार्य करना पड़ता है और भविष्य “अनिश्चित” होता है। जैसे -
- अगर कोई विद्यार्थी ग्रेजुएशन कर रहा है, तो जरूरी नहीं है कि भविष्य में उसे अच्छी नौकरी मिल जाएगी।
- अगर आज कोई व्यक्ति व्यापार कर रहा है, तो जरूरी नहीं है कि वह व्यापार सफलता हासिल कर लेगा।
- आज अगर कोई व्यक्ति पैसा बचा रहा है, तो जरूरी नहीं है कि उसका भविष्य सुरक्षित होगा।
हमारी चिंताओं का कारण “अनिश्चितता” है। हम कल की समस्या के बारे में सोच-सोचकर अपना “वर्तमान” बर्बाद कर देते है और हमारा यही “वर्तमान” हमारा भविष्य बर्बाद कर देता है।
तो फिर क्या किया जाए
दरअसल हम “भविष्य में क्या करना है” उसके लिए ज्यादा चिंतित रहते और अगर उसकी जगह हम यह सुनिश्चित करें कि “भविष्य के लिए आज क्या करना है” तो हम अपनी चिंताओं को मिटा सकते है| उदाहरण के लिए
- भविष्य में स्वास्थ्य को बनाये रखने के लिए चिंता न करके, आज से ही पौष्टिक आहार और व्यायाम के विकल्प को अपनाएं।
- भविष्य की वितीय सुरक्षा के बारे में चिंता न करके, आज से ही बचत और निवेश के बारे में जागरुक हों और कृति करें|
- भविष्य के परिणाम की चिंता न करके, आज से ही मेहनत से पढ़ाई करें।
जब हम भविष्य की समस्याओं के समाधान के लिए कार्यवाई को अपनी दैनिक गतिविधि में शामिल कर देते हैं तो हम अनिश्चितताओं की चिंता को काफी हद तक कम कर सकते हैं , दूर कर सकते है।

