निश्चित रूप से अपने आप को नहीं, जैसा कि परिपूर्ण होना एक हास्यास्पद मानक है जिसे कोई भी कभी भी नहीं प्राप्त कर सकता है।तो कौन? हम में से बहुत से लोगों के लिए, परफेक्ट या परिपूर्ण हमारे अभिभावक / माता - पिता हो सकते हैं।
"मुझे पूर्ण / सर्वश्रेष्ठ होना चाहिए अन्यथा माँ / पिताजी ने मुझे प्यार नहीं करेंगें," की यह धारणा,"मैं पर्याप्त नहीं हूँ" की नकारात्मक विश्वास प्रणाली से उपजा है। “यह धारणा हमें लोगों की बार- बार की टिप्पणियों के माध्यम से प्राप्त होती हैं। कुछ इस प्रकार की टिप्पणियाँ जिसे हम लोग पसंद करते हैं और कहते और सुनते हैं , "ओह, क्या ये ग्रेड आपके हैं? क्या आप इससे अच्छा अंक नहीं पा सकते हैं, "या" क्या आप Top10 तक नहीं पहुंच सकते ? कक्षा में आप जैसे कुछ ही हैं, "या" अपने चचेरे भाई को देखो, पडोसी बच्चे को देखो, सम्मान प्राप्त छात्र को देखो , आपको भी वैसा होना चाहिए। "वैसे देखने सुनने में ये कथन हानिरहित लग सकते हैं, लेकिन वास्तव में दीर्घकालिक नुकसान का कारण हो सकता है जिसके परिणामस्वरूप बच्चे को या तो खुद के प्रति आक्रोश विकसित होता है जो खुद को नुकसान पहुँचाने तक जा सकता है या बहुत अधिक अपराध बोध और शर्म की भावना को जन्म दे सकता है कि वे लगातार अपने माता-पिता को निराश कर रहे हैं यह सोच उन्हें चिन्ता से व्याकुल कर देता है। जब उन्हें इसके लिए बिना ध्यान दिए छोड़ दिया जाता है तो उनके व्यवहार में बदलाव आ जाता है और यह बदलाव उनके कार्यस्थल व अन्य रिश्तों को भी प्रभावित करता है।
"मुझे पूर्ण / सर्वश्रेष्ठ होना चाहिए अन्यथा माँ / पिताजी ने मुझे प्यार नहीं करेंगें," की यह धारणा,"मैं पर्याप्त नहीं हूँ" की नकारात्मक विश्वास प्रणाली से उपजा है। “यह धारणा हमें लोगों की बार- बार की टिप्पणियों के माध्यम से प्राप्त होती हैं। कुछ इस प्रकार की टिप्पणियाँ जिसे हम लोग पसंद करते हैं और कहते और सुनते हैं , "ओह, क्या ये ग्रेड आपके हैं? क्या आप इससे अच्छा अंक नहीं पा सकते हैं, "या" क्या आप Top10 तक नहीं पहुंच सकते ? कक्षा में आप जैसे कुछ ही हैं, "या" अपने चचेरे भाई को देखो, पडोसी बच्चे को देखो, सम्मान प्राप्त छात्र को देखो , आपको भी वैसा होना चाहिए। "वैसे देखने सुनने में ये कथन हानिरहित लग सकते हैं, लेकिन वास्तव में दीर्घकालिक नुकसान का कारण हो सकता है जिसके परिणामस्वरूप बच्चे को या तो खुद के प्रति आक्रोश विकसित होता है जो खुद को नुकसान पहुँचाने तक जा सकता है या बहुत अधिक अपराध बोध और शर्म की भावना को जन्म दे सकता है कि वे लगातार अपने माता-पिता को निराश कर रहे हैं यह सोच उन्हें चिन्ता से व्याकुल कर देता है। जब उन्हें इसके लिए बिना ध्यान दिए छोड़ दिया जाता है तो उनके व्यवहार में बदलाव आ जाता है और यह बदलाव उनके कार्यस्थल व अन्य रिश्तों को भी प्रभावित करता है।
प्रिय छात्रों, आप जानते हुए कि शिक्षा महत्वपूर्ण है न कि ग्रेड। ग्रेड सब कुछ नहीं है। जब तक आपको लगता है कि आप कल की तुलना में बेहतर कर रहे हैं, तो आपको कोई चिंता करने की जरुरत नहीं है यह पूरी तरह से ठीक है। हाँ यदि आपको लगता है कि आपका प्रदर्शन कल की अपेक्षा कम हो रहा है या निचे जा रहा है तो उसे सुधारने की जरूरत है।अपने प्रति दयालु बनें।
प्रिय माता-पिता, अपने बच्चों की तुलना औरों से करना बंद करें और उनके साथ उनकी उपलब्धि का जश्न मनाएं। वे जितने प्रसन्न होंगे, वे उतने ही अधिक केंद्रित होंगे, उनकी ग्रेड उतनी ही बेहतर होगी। यह सब घर से ही शुरू होता है। कोच की तरह, आपका काम उन्हें सिखाना नहीं है, बल्कि उन्हें प्यार करना है। आपका प्यार ही उन्हें सिखाएगा,उनके अंदर आत्मविश्वास पैदा करेगा और सफल बनाएगा। उनकी जिंदगी में खुशहाली (Happiness)लायेगा।

