शनिवार, 12 दिसंबर 2020

आप खुश क्यों नहीं हैं ? Why You’re Not Happy ?

 


व्यक्तिगत खुशहाली और संतुष्टि पाने के रास्ते में सामान्यतः छह अवरोधक होते हैं। यहाँ पर हम सीखेंगे कि वे अवरोध कौन से हैं और उन्हें कैसे दूर किया जाए।

खुशी का एक विरोधाभास यह है कि, जितना अधिक आप इसको पाने के करीब पहुंचते हैं, उतना ही यह आपके हाथों से फिसलने लगता है, आपकी पहुंच से दूर होती जाती है। यदि आप अपने आप से पूछें कि, ''क्या आप खुश हैं,'' और आप देखेंगे आप की खुशहाली समाप्त होने लगती हैं। 
2008 में सैन फ्रांसिस्को में ''खुशी और इसके कारण'' विषय पर हुए एक सम्मलेन में शामिल वैज्ञानिकों, डॉक्टरों और मनोवैज्ञानिकों से लेकर कलाकारों, दार्शनिकों और बौद्ध भिक्षुओं जैसे तमाम लोगों की एक विस्तृत श्रृंखला ने इस विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। वहां पर हुई चर्चा से निकले निष्कर्ष के आधार पर खुशी के रास्ते में आने वाली लिए छह आम बाधाएं और उन पर काबू पाने के लिए कुछ युक्तियाँ यहां दी गई हैं।


बाधा या अवरोध नं - 1: जटिलता (Complexity)


ख़ुशहाली के रास्ते की सबसे बड़ी रूकावट है जटिलता। हम अपने जीवन को जटिल बना देते हैं। हम दोहरी जिंदगी, दिखावटी जीवन  जीते हैं। इस अवरोध को हटाने का आसान उपाय है,जीवन को सुगम बनाना सरल बनाना आसान बनाना।  


बचपन से बौद्ध मठों में पढ़े,पीएचडी डिग्री धारक थुप्टेन जिनप्पा, जीवन की सादगी के लाभों के बारे में एक या दो बातें कहते हैं, जिन्हें हम यहाँ उद्धरित करते हैं। इनमें से पहला तो वे पूछते हैं कि, ''आपको क्या लगता है कि बौद्ध भिक्षु और भिक्षुणियां अपना सिर क्यों मुंडवाते हैं ? वे बताते हैं कि सिर मुड़वाना उनके जीवन को सरल बनाता है, आसान बनाता है।


हालांकि दलाई लामा के प्रमुख अंग्रेजी अनुवादक रहे जिनप्पा लंबे समय तक बौद्ध भिक्षु नहीं रहे। लेकिन उसके बावजूद भी वे अपनी जीवनशैली में कुछ संयमी मूल्यों को अपनाते रहे हैं। उनका कहना है कि, "मेरे परिवार की नीति एक कार की है, एक से अधिक कार रखने में उसकी लागत भी अधिक होती है। उसके रख - रखाव में अधिक खर्च होता है और उसका प्रबंधन करने में समय भी अधिक लगता है और कठिनाई भी होती है। उनका तर्क है कि, कई क्रेडिट कार्ड रखने से स्वतंत्रता या खुशी पैदा नहीं होती है। हालांकि, इन दिनों वे इस बारे में बात कम करते हैं।


वे कहते हैं कि आधुनिक जीवन ने व्यक्तिगत पसंद को उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है, लेकिन ये विकल्प बड़ी कीमत पर आते हैं। जिनप्पा कहते हैं कि, "हम अक्सर जीवन स्तर और जीवन की गुणवत्ता के बीच अंतर नहीं कर पाते हैं, उसके बारे में हम भ्रमित रहते हैं, कन्फ्यूज रहते हैं और हम देखते हैं कि एक बिंदु के बाद, जीवन स्तर और जीवन की गुणवत्ता के बीच संबंध समाप्त हो जाता है।"
यदि आप अपने जीवन को सरल बनाते हैं, तो आप अपने लिए अपने दिन में अधिक समय दे पाते हैं, अपने जीवन में अपने आपको स्थान दे पाते हैं जो आपके जीवन को अच्छी तरह से प्रतिबिंबित करने में सक्षम हो पाता है।

बाधा या अवरोध नं - 2: ख़तरनाक रफ़्तार या तेज गति से दौड़ना 


ख़ुशहाली के रास्ते की सबसे बड़ी रूकावट है खतरनाक रफ़्तार या तेज  से दौड़ना। मतलब हम अपनी जिंदगी में सब कुछ जल्दी हासिल कर लेने की चाहत रखते हैं और उसके लिए जिंदगी की अंधी दौड़ में शामिल हो जाते हैं। 


इस अवरोध से राहत पाना है तो आपको अपनी जिंदगी की दौड़ में थोड़ा विराम लेने की आवश्यकता है।  
जिनप्पा कहते हैं कि एक ही जैसी संस्कृति का लगातार अनुसरण करने से हम अक्सर अपने आपको जटिलता के जाल में उलझा सकते हैं। "इस तरह का तनाव आपकी आत्मा और आपके मानस पर भारी पड़ता है।" चाहे आप इसे ध्यान, मौन, प्रार्थना या व्यायाम कुछ भी कह सकते हैं, दिन में बस कुछ ही मिनटों का  "ठहराव" लेना आपकी बैटरी को "रिचार्ज" करने और आपको खुश महसूस करने में मदद कर सकता है। ऐसा करने का सबसे अच्छा समय सुबह का माना जाता है। इसके बिना, आपका जीवन नियंत्रण से बाहर हो सकता है।


एक बौद्ध नन और ''खुशी और इसके कारण'' सम्मेलन के आयोजकों में से एक आदरणीय रोबिना कोर्टिन की सलाह है कि, ठहराव के इन कुछ मिनटों में मननशील ध्यान करने की जरुरत है। वह कहती हैं, "दिन के दौरान, हम अपनी इंद्रियों द्वारा पूरी तरह से अवशोषित हो जाते हैं, इसलिए हम अपने दिमाग पर ध्यान नहीं देते हैं।" इसके निदान के लिए उनकी सलाह है कि ''एक शांत जगह पर बैठें और बस अपने दिमाग को अपनी सांसों केंद्रित करें। जब आपका मन इधर -उधर भटकने लगे तो इसे अपनी सांसों पर वापस लाएं। इस प्रक्रिया के माध्यम से, आप यह देखना सीखते हैं कि आपका मन क्या कह रहा है।


बाधा या अवरोध नं - 3: नकारात्मकता

हमारे जीवन में कई बार नकारात्मक विचार ही हमें मुश्किल में डाल देते हैं। हमारी जिंदगी में जब भी समस्याएं आती हैं तो जरुरी है कि उसके समाधान के लिए प्रयास किया जाय, रास्ते तलासे जायं। लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता है। हम नकारात्मक भावनाओं के वशीभूत होकर अपनी क्षमता और योग्यता पर शक करने लगते हैं। इस कारण अपने जीवन में दुःख महसूस करते हैं। इसका समाधान है नकारात्मक भावनाओं से मुक्ति, नकारात्मक भावनाओं त्यागना।  

लामा जोपा रिनपोछे जो एक बौद्ध उपदेशक हैं उन्होंने कैलिफोर्निया में कैदियों पर चलाए गए एक ''लिबरेशन जेल परियोजना'' में कैदियों के साथ काम करते हुए कहा कि, ''आप की कारावास या कैद का अस्तित्व, आम लोगों की आंतरिक या मानसिक कैद जैसे - आसक्ति, क्रोध, अवसाद या गर्व की कैद की तुलना में कुछ भी नहीं है। 


कुछ लोग इस कथन को अतिशयोक्ति के रूप में देख सकते हैं। लेकिन जिनप्पा कहते हैं कि ''नकारात्मक, बाध्यकारी विचार उनके लिए एक स्थाई गुण बन जाता है, उनके साथ चिपक जाता है।'' आप चीजों को कैसे देखते हैं और किस तरह से आप दुनियां के बारे में अनुभव करते हैं वह दृढ़ता से जुड़ा हुआ है, इसलिए सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए इसे महत्वपूर्ण बनाना चाहिए। वे कहते हैं, "आप अपनी इंद्रियों और मन के माध्यम से दुनिया के साथ बातचीत करते हैं।" “यदि आप अपनी इंद्रियों को नियंत्रित करने की कला जान जाते हैं तो आप दुनिया को कैसे समझते हैं, अनुभव करते हैं, इसके बारे में आप स्पष्ट रूप से कह सकते हैं।''


कर्टिन कहते हैं  कि,  ''हम क्रोध, उदासी या निराशा को स्वाभाविक रूप से लेते हैं, यह हमारी संस्कृति में शामिल है।''  हमारी उदासी से हमें कोई आश्चर्य नहीं होता है। हम यह मानते हैं कि यह एक निराशाजनक दुनिया है। इसमें लोग कहते हैं कि आप इसके बारे में कुछ नहीं कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, "यदि आप मानते हैं कि आपके अपमानजनक बॉस, पिता, या साथी आपके दुख का मुख्य कारण है,  तो आपने अपने हाथों को बांध लेते हैं और इससे आपको विषाक्त विचारों से कैद होने का जोखिम होता है।


इसके विपरीत कर्टिन का कहना है,  बौद्ध मत के अनुसार खुशी तब मिलती है जब आप मन की विक्षिप्त अवस्था को छोड़ देते हैं, आप विक्षिप्त अवस्था से बाहर आ जाते हैं। वह कहती हैं, यह आपको सशक्त बनाता है, क्योंकि आप इसे बदल सकते हैं, यह आपको अंदर देखने, ध्यान देने और अपने विचारों की जिम्मेदारी लेने का साहस देता है। कर्टिन नकारात्मक विचारों को आंकने के बजाय, उन्हें करुणा से देखने की सलाह देती हैं। उनका कहना है आप अपने आप से पूछें, "मैं इस बारे में क्या कर सकता हूं?"
स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान विभाग में अनुसंधान सहयोगी फिलिप आर गोल्डिन कहते हैं, माइंडफुल मेडिटेशन जैसी तकनीकें इसमें मदद कर सकती हैं, लेकिन हर किसी के लिए लाभकारी नहीं हो सकता है, खासकर उन लोगों को जो गंभीर अवसाद का अनुभव कर रहे हैं


लेकिन एक अन्य सरल कदम है, जो आप नकारात्मकता का मुकाबला करने और अपनी खुशी बढ़ाने के लिए अपना सकते हैं। वह है कृतज्ञता। लोगों को खुशी के लिए एक निश्चित बिंदु दिखाई देता है, यह एक ऐसी श्रेणी है जो आनुवंशिकी से प्रभावित होती है। रॉबर्ट एममन्स, पीएचडी ने अपनी पुस्तक 'थैंक्स ! हाउ टू प्रैक्टिसिंग ग्रैटीट्यूड कैन मेक यू हैप्पीयर' में लिखा है, जो लोग नियमित रूप से कृतज्ञता का अभ्यास करते हैं वे इस निश्चित बिंदु को 25% तक बढ़ा सकते हैं। अपने शोध के माध्यम से, एम्मन्स ने पाया कि जो लोग आभार पत्र रखते थे, वे अपने जीवन के बारे में बेहतर महसूस करते थे, अधिक व्यायाम करते थे, और बहुत अधिक आशावादी थे।


बाधा या अवरोध नं - 4: निराशा या मायूसी 


यह सच है कि हमारी जिंदगी में कभी-कभी निराशा की भावना कुछ वक्‍त के लिए हमें आ घेरती है और थोड़े समय बाद चली भी जाती है। लेकिन अगर निराशा हमारे ऊपर लंबे समय तक हावी रहती है तो ऐसे में किसी की मदद लेना या विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है। 


इससे उबरने की बेहतर तरकीब है कि आप हमेशा आशावान बने रहें, उम्मीदें पाले रखें, सपने देखते रहें।  


डेविड बी फेल्डमैन, पीएचडी, कैलिफोर्निया में सांता क्लारा विश्वविद्यालय में परामर्श मनोविज्ञान के सहायक प्रोफेसर कहते हैं, क्या कभी आपने किसी माता-पिता को अपने बच्चे को यह कहकर सुरक्षित करने की कोशिश करते हुए देखा है कि, ''ज़्यादा उम्मीदें मत पालो।'' बल्कि इसके बजाय, इस बात का कहीं कोई सबूत नहीं मिलता है कि किसी को उम्मीद पालने से कोई आघात पहुँचा हो, नुक़सान हुआ हो, चोट लगी है। इसके बजाय आशा या उम्मीद लोगों में खुशी के स्तर को बहुत बढ़ा सकती है।


फेल्डमैन कहते हैं, असली उम्मीद या आशा मुस्कराहट भरे चमकते चेहरे या धर्मशाला में किसी प्रियजन के बिस्तर पर मृत्यु से इनकार की नहीं है। फेल्डमैन ने अपने ''अनुसंधान और नैदानिक कार्य'' को संबोधित करते हुए एक प्रश्न उपस्थित करते हैं : “कैसे लोग आशा या उम्मीद बनाए रखते हैं और प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करते हैं?


फेल्डमैन कहते हैं, किसी भी आशा या उम्मीद के पनपने या फलने - फूलने के लिए लक्ष्य, योजना और प्रेरणा ये तीन घटक आवश्यक होते हैं। वे कहते हैं, "जो लोग सफल होते हैं वे लोग किसी भी आतंरिक या बाहरी शक्तियों को दोष देने के खेल को नजरअंदाज करते हैं।" वे लोग हमेशा पूछते हैं, सोचते हैं, ''अब आगे क्या ?'' 


फेल्डमैन कहते हैं, लक्ष्य तक पहुंचने के अलावा, ये लोग खेल और स्कूल में बेहतर प्रदर्शन करते हैं। इनके अंदर दुःख - दर्द को सहने की क्षमता बहुत अधिक होती है। ये लोग स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरुक होते हैं और इनका व्यवहार हमेशा स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में प्रेरित करता है। उन्हें अवसाद, चिंता और हृदय रोग जैसी बीमारी होने के खतरे भी कम होते हैं।


फेल्डमैन व्यक्तिगत रूप से सार्थक लक्ष्यों को निर्धारित करने और यह देखने के लिए जाँच करने की सलाह देते हैं कि आपकी आशा या उम्मीद कहाँ लड़खड़ाती है, कहाँ कमजोर पड़ती है। क्या आपने अपनी आशा या उम्मीद तक पहुँचने के लिए कोई योजना बनाई है और अपनी उम्मीद या आशा तक पहुँचने के लिए प्रेरित हैं ? वे कहते हैं, ''अपने आप को दिवास्वप्न देखने की अनुमति दें। यह आशा या उम्मीद तक पहुँचने का और खुशहाली पाने का एक अद्भुत स्रोत है।''


बाधा या अवरोध नं - 5:  दुःख को दबाना या छिपाना 


लगभग हर कोई समय-समय पर अपनी भावनाओं को छुपाता है। उदासी या दुःख को दबाकर, आप अन्य सकारात्मक भावनाओं को अधिक दबाते हैं। जो हमारे दुःखी होने का कारण बनता है। इसका समाधान है जो भी असली है उसको महसूस करें। आपको अगर दुःख महसूस हो रहा है तो उसे महसूस करें और अभिव्यक्त करें, छिपायें नहीं।  


स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर कम्पैशन एंड अल्ट्रिज्म रिसर्च एंड एजुकेशन के निदेशक जेम्स आर डोटी, (एमडी) का कहना है कि, ''एक सकारात्मक दृष्टिकोण रखने का यह मतलब कतई नहीं है कि आप अपनी जिंदगी में कभी भी दुःख या उदासी महसूस नहीं करेंगे। कुछ माता-पिता अपने बच्चों की उम्मीदों को धराशायी होने से बचाने की या किसी प्रकार के दुःख से बचाने की जो कोशिश करते हैं, वह वास्तव में इरादा से विपरीत प्रभाव पैदा कर सकता है। वे कहते हैं, कुछ कष्ट,पीड़ा, दुःख, तकलीफ़ आपको एक संपूर्ण व्यक्ति बनाता है और विषम परिस्थितियों को झेलने के अनुकूल बनाते हैं तथा आपको अपने जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। उनका कहना है कि मैं इसका एक जीता - जागता उदाहरण हूं और वह अपनी जिंदगी के कुछ अनुभवों को, अपने साथ घटी घटनाओं के बारे में बताते हैं और कहते हैं कि, ''मेरे पिता शराबी थे और माँ सौतेली थी। मेरा बचपन और जवानी का अधिकतर समय सार्वजनिक सहायता पर बीता था। 

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन में सेंटर फॉर इंटीग्रेटिव मेडिसिन के चिकित्सा निदेशक डेविड स्पीगल, (एमडी) कहते हैं कि, "दुःख की अनुपस्थिति में सुख का कोई मतलब नहीं है।" यह कोई मनोविज्ञान का अनोखा मंत्र नहीं है, जो कहता है "हमेशा उत्साहित रहें," चाहे भले ही जितना तकलीफ हो हमेशा मुस्कराते रहें। "झूठी ख़ुशी कोई अच्छी चीज नहीं है।" उदासी या दुःख को दबाकर, आप अन्य सकारात्मक भावनाओं को अधिक दबाते हैं, साथ ही, वह कहते हैं, इसलिए जो लोग भावनाओं को दबाने की कोशिश करते हैं वे वास्तव में अधिक चिंतित और उदास हो जाते हैं।
स्पीगल कहते हैं, उदासी और हताशा को बाहर निकालने का तरीका खोजकर, आप नियंत्रण के कुछ उपाय प्राप्त करने में सफल हो सकते हैं। दूसरों के साथ अपने दुःख, उदासी या हताशा को बांटें। दूसरों का उपयोग अपने विषाक्त विचारों के डंपिंग ग्राउंड के रूप में कभी नहीं करना चाहिए, बल्कि उनके साथ अपनी असल समस्या को साझा करें। चिंता और अवसाद को लक्षित भावनाओं में सामान्यीकृत करने से आप विशिष्ट समाधान पाने में सफल हो सकते हैं ।

बाधा या अवरोध नं - 6: अपने बारे में अत्यधिक सोचना

  

जो लोग आत्म-केंद्रित होते हैं, वो शायद ही किसी और के बारे में परवाह करते हैं।

Self-centred person: आपने ऐसे लोगों के बारे में सुना ही होगा जो सिर्फ स्वयं के बारे में सोचते हैं और खुद पर केंद्रित होते हैं। वो लोग अपने अलावा और किसी के लिए परेशान नहीं होते हैं। इस तरह के लोग हर जगह बहुत ही नकारात्मक प्रभाव छोड़ते हैं। ये अहंकारी और आत्मनिर्भर होते हैं। ऐसे लोग घंटों तक अपने बारे में बात कर सकते हैं। ये जब तक कोई काम नहीं करते हैं तब तक कि उस काम में इनका कोई व्यक्तिगत लाभ ना हो। इतना ही नहीं, इन लोगों को दूसरों का अटेंशन पाने की चाह भी होती है। अगर इन्हें कोई अटेंशन ना दें तो इनसे सहन नहीं होता। इसलिए, यदि आप उनमें से एक हैं, तो आपकी खुशहाली प्रभावित हो सकती है। इस आदत को सुधारने के लिए जरुरी है दूसरों के साथ जुड़ना । 


आपकी खुशी के लिए सामाजिक नेटवर्क कितना महत्वपूर्ण हैं? शायद आपको इसका अंदाजा नहीं है। आप जीतना सोच सकते हैं उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है आपका सामाजिक संबंध या लोगों से मेल - जोल। हाल ही में 4,000 से अधिक लोगों के ऊपर 20 साल के अध्ययन से पता चला कि खुशी न केवल आपके तत्कालिक मित्रों और परिवार के सदस्यों से प्रभावित होती है, बल्कि यह एक दोस्त के दोस्त की खुशी या जिससे आप कभी मिले भी नहीं, वह भी आपकी खुशी को प्रभावित कर सकता है। इस शोध से यह पता चला है कि खुशी एक वायरस की तरह सामाजिक नेटवर्क के माध्यम से फैल सकती है।


दुर्भाग्य से, बहुत से लोग खुद की नाभि में टकटकी लगाकर या कह सकते हैं अपने बारे में अत्यधिक सोचने में, इतना समय व्यतीत करते हैं कि वे इस सकारात्मक "संसर्ग" से लाभ नहीं उठा पाते हैं।


आप जितने अधिक आत्म-अवशोषित होते हैं, अपने बारे में ही सोचते रहते हैं उतनी ही आपकी दुनिया कुंद हो जाती है, छोटी हो जाती है और  आप उतना ही कम यथार्थवादी हो जाते हैं, यह सब एक दुष्चक्र जैसा बन जाता है। "आप दूसरों की जरूरतों से बेखबर हो जाते हैं, और आपकी दुनिया और अधिक सिकुड़ती चली जाती है, जिससे आप अपने आप से बाहर देखने में कम सक्षम होते हैं।"  जिनप्पा कहते हैं,अगर आप से पूछा जाए कि, ''आपकी समस्याएं इतनी खास क्यों हैं? ” तो आपका जवाब होगा, "क्योंकि वे मेरे हैं!"


जिंनप्पा कहते हैं, "यदि आपको बहुत बड़ा अहंकार है, आप अपने आप के लिए एक विशाल लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं, जो आसानी से प्राप्त हो सकता है।" लेकिन विस्तृत दृष्टिकोण का उपयोग करने से, अपनाने से  आपको उन कनेक्शनों को, संबंधों को देखने में मदद मिलती है जिन्हें आप बहुतायतः नहीं देख पाते हैं, जैसे कि पीड़ा की सार्वभौमिकता। हम सभी को, हमारे किसी प्रियजन को एक गंभीर बीमारी का पता चलने पर  यह महसूस हो सकता है कि दुनियां में ऐसे और कितने लोग ऐसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं। दूसरों के दुःख के साथ जुड़ने से मन को,  दिल को कुछ आराम मिलता है और खुशी महसूस होती है।


ऐसे संबंध बनाने का सीधा रास्ता है करुणा और दूसरों की देखभाल करना।


केन्या के राष्ट्रीय संग्रहालय में इंस्टीट्यूट ऑफ प्राइमेट रिसर्च के साथ अनुसंधान सहयोगी और ''जेब्रा को अल्सर क्यों नहीं होता है'' पुस्तक के लेखक रॉबर्ट एम सपोलस्की का कहना है कि, प्राइमेट्स भी इसे समझते हैं कि, एक तनावपूर्ण घटना के बाद एक दूसरे को संभालने से रक्तचाप को कम करने में मदद मिलती है। ख़ुद को दूल्हों की तरह संवारने की बजाय दूसरों को सजाने सवांरने से अधिक लाभ मिलता है, ख़ुशी मिलती है। 


डोटी का कहना है कि, करुणा हमें दूसरों के साथ जोड़ती है, एकांत को दूर करती है, लचीलापन बनाती है और गहरी तृप्ति की ओर ले जाती है। "करुणा के बिना, खुशी केवल अल्पकालिक सुख है।"


तेनजिन ग्यात्सो, 14 वें दलाई लामा ने इसे सबसे अच्छे तरीके से समझाया है, "अगर आप दूसरों को प्रसन्न रखना चाहते हैं, तो दूसरों के साथ दया भाव, करुणा दिखाए; यदि आप ख़ुद खुश रहना चाहते हैं तो करूणा को अपनाएं।"