जब मैं छोटा था तो मैं कभी भी अपना खुद का सबसे अच्छा दोस्त नहीं बन पाया, मैं अपने आपको कभी भी संभाल नहीं पाता था। खासतौर पर तब जब मैं कभी नाकामयाब हुआ या मुझसे कोई गलती हुई हो।जब मुझसे कोई गलती होती थी या नाकामयाबी मिलती थी तब मैं हप्ते भर या या उससे अधिक समय तक खुद को कोसता रहता था, तकलीफ़ देता था। जब मेरी विश्वविद्यालय की पढ़ाई के समय जैसा मैं चाहता था वैसा परिणाम नहीं प्राप्त हुआ तो मुझे बहुत ख़राब महसूस हुआ और लंबे समय तक असहज़ रहा। बहुत समय तक मुझे ग्लानी महसूस होती रही और पछतावा होता रहा।
या जब जीवन में हम जो कुछ भी योजना बनाते हैं और योजना के अनुसार घटित नहीं होता है तो हम निराशावाद के जाल में फंस जाते हैं ।
अब, बहुत सालों के बाद, मैंने अपने आपको खुद के प्रति दयालु होने और गलतियों तथा असफलताओं दोनों को अच्छी तरह से संभालने के लिए सीखा है।
एक ऐसा तरीका जो समय और ऊर्जा दोनों को बर्बाद होने से बचाता है और साथ ही भविष्य की सफलता को बढ़ावा देता है।
और इस लेख में मैं अपने 3 पसंदीदा चरणों को साझा करना चाहता हूं।
1. याद रखें : जो कोई भी जीवन में मूल्यवान चीजें करना चाहता है वह ठोकर खाएगा।
हम अक्सर ज्यादातर लोगों की सफलताओं के बारे में सुनते हैं। लेकिन हम यह नहीं देखते हैं, सोचते हैं कि उन्हें इस उपलब्धि को हासिल करने के रास्ते में कई असफलताओं का, चुनौतिओं का सामना करना पड़ा होगा।
किसी की सफलता की कहानी जो मीडिया हमें बताती है या हमारे मन में जो उनके बारे जो सोच बनती है, भावना बनती है, वह उसके केवल उज्जवल पक्ष को ही दर्शाता है जो लुभावना हो सकता है, और तेज-तर्रार लग सकता है।
लेकिन वास्तविकता कुछ और ही होती है, उसने असफलताओं से निपटने के लिए कई उपयोगी तरीके अपनाये होगें। कई बार पराजित हुआ होगा, कई बार प्रयास किया होगा। -
इसको ब्लैक कैट के नाम से मशहूर खिलाड़ी माइकल जॉर्डन के इस उद्धरण से बेहतर तरीके से समझा जा सकता है:
“मैंने अपने करियर में 9000 से अधिक शॉट्स व्यर्थ गंवाए हैं। मैं लगभग 300 गेम हारा हूँ। 26 बार, मैंने गेम जीतने वाले शॉट को लेने पर भरोसा किया और चूक गया। मैं अपने जीवन में कई बार असफल रहा। और इसलिए मैं सफल हुआ।"
2. अपने आप से ऐसे बात करें जैसे आपका कोई करीबी व्यक्ति आपसे बात करता है।
गलती के लिए खुद को दोष देने की बजाय, अपने आप से सवाल पूछें कि कैसे मेरे दोस्त / माता-पिता मेरा समर्थन करेंगे और इस स्थिति में कैसे वे मेरी मदद कर सकते हैं? फिर अपने आपसे वैसे ही बातें करो और वैसा ही कार्य करो जैसा वे लोग आपके साथ करते।
यह क्रिया आपको निराशा के गर्त में गिरने से बचाता है और किसी भी गलती या असफलता से होने वाले शुरुआती दर्द के फैलने के बाद आपको अधिक रचनात्मक होने में मदद करता है।
3. खुद से रचनात्मक सवाल पूछें।
कोई असफलता या गलती बहुत कम ही स्थायी होती है। कभी-कभी ऐसा महसूस हो सकता है कि यह स्थाई है, लेकिन ऐसा होता नहीं है। यह सबसे अधिक अस्थायी होता है और आप इसके बारे में बहूत कुछ कर सकते हैं।
इसलिए अपने आपको कार्रवाई करने और आशावादी होने पर ध्यान केंद्रित करें और मूल्यवान प्रतिक्रिया के रूप में स्थिति को देखने के लिए , समझने के लिए अपने आप से ये तीन प्रश्न पूछें:
1 - इससे मैं क्या सीख सकता हूं?
2 - अगली बार मैं इसमें क्या अलग कर सकता हूं?
3 - इस स्थिति में सुधार करने के लिए मैं अभी कौन सा छोटा कदम उठा सकता हूं?
आशा है कि यह सुझाव आपको मदद करेगा और आपका दिन शुभ हो !
सबसे बड़े मुद्दों में से एक जो मैं सोचता था कि, ''असफल होने या गलती करने पर अन्य लोग मेरे बारे में क्या सोचेंगे या कहेंगे।'' यह डर मुझे अक्सर निष्क्रिय बना देता था, कुछ करने में सबसे बड़ी अड़चन बनता था। लेकिन मुझे उस डर का हल मिल गया।

