रविवार, 27 दिसंबर 2020

असफलता जीवन का हिस्सा है



असफ़लता को मुस्कराकर स्वीकार करिये, उसका स्वागत कीजिये।








सभी जानते हैं कि असफलता जीवन का हिस्सा है। जिस दिन से हमने पहली बार स्कूल जाना शुरू किया उसी दिन से हमें यह बताया गया है। यहाँ पर इस लेख में मैं असफ़लता या विफ़लता से निपटने के बारे में कोई तरीका नहीं बताने वाला हूँ। ऐसा नहीं है कि मैं अपनी विफलता से निपटने में असफल रहा हूँ इसलिए इसके उपाय के बारे में नहीं लिख सकता। 


बेशक असफलता का दूसरा पहलू सफलता है। कई लोगों पर असफलता का डर इतना हावी हो जाता है कि वे किसी भी महत्त्वपूर्ण काम की शुरुवात करने से हिचकिचाते हैं, उनकी जुबान पर बस यही वाक्य रहता है- 'बहुत मुश्किल है, मैं नहीं कर पाऊंगा इसे।' 


सफलता और असफलता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जब भी कोई व्यक्ति कुछ काम करता है तो उसका इन दो पहलुओं में से किसी एक से सामना होता ही है। महत्त्वपूर्ण बात यह है कि सफलता एवं असफलता का पता काम पूरा होने के बाद ही चल पाता है। अगर काम शुरू करने से पहले ही असफलता का डर दिल में पाल लिया जाए तो असफल होने की पूरी-पूरी संभावना बन जाती है।


हर व्यक्ति सपने देखता है और उन्हें पूरा करने की कोशिश करता है। लेकिन ज्यादातर लोग परिस्थितियों एंव असफलताओं के आगे घुटने टेक देते है और वे मान लेते है कि यही उनकी जिंदगी का सत्य है। हम भूल जाते है कि हम तब तक असफ़ल नहीं होते, जब तक कि हम प्रयास करना नहीं छोड़ देते।


हम इसे स्वीकार करें या नहीं, लेकिन हम सभी जानते हैं कि, हम लोग अपने जीवन में बहुत ज्यादा उलझ चुके हैं। मुझे पता है मेरे साथ भी कई बार ऐसा हुआ है। यहां तक ​​कि मेरे लिए दोपहिया वाहन चलाना सीखना भी कठिन परीक्षा थी। मैं कई बार असफल रहा, कायम सीखता रहा, असफल रहा, तब तक सीखता रहा जब तक कि मैंने चमत्कारिक परिणाम हासिल नहीं कर लिया, मैंने वास्तव में अपने आप को वाहन पर संतुलित करना सीख लिया और मैं वर्षों से सवारी कर रहा हूं। यह विफलता और सफलता का अच्छा उदाहरण है। 


मैंने अपनी विफलताओं को सफलता में बदलने की पूरी कोशिश की, लेकिन रूपांतरण की इस प्रक्रिया के बारे में मजेदार बात यह है कि यदि आपके पास रूपांतरण के लिए कोई प्रतिबद्धता या प्रेरणा नहीं है, तो आप इस प्रक्रिया को पूरा नहीं कर सकते। मुझे यह महसूस करने में, पहचानने में कई साल लगे कि मेरे अंदर शिक्षण कौशल की अपार संभावना है, जुनून है। मुझे सही कैरियर चुनने में बहुत समय लगा। शिक्षण पेशा अपनाने से पहले मैंने बहुत सारे काम किये थे लेकिन मुझे हर जगह विफलता ही मिली। मैंने सही करियर नहीं चुना था - एक ऐसा करियर जिसके लिए मुझे कुछ जुनून था।



समस्या यह थी कि मैं अपने कैरियर की निरंतरता के साथ विभिन्न बिंदुओं पर असफल हो रहा था। किसी एक बात के लिए, मैं पर्याप्त रूप से अनुशासित ढंग से काम नहीं कर पा रहा था, और मुझे मदद मांगने में बहुत शर्म आ रही थी। 

मैंने व्यावहारिकता और एक अच्छी जीविका के साधन के रुप में कैरियर का चुनाव करता रहा। मैंने कभी भी अपने आप से कठिन सवाल नहीं पूछा जैसे कि मैं वास्तव में अगले 50 या इतने सालों तक क्या करना चाहता हूँ ? मैं बस हमेशा एक नए कैरियर की तलाश में अपने वर्तमान व्यवसाय से इस्तीफा देता रहा। मैंने केवल अपनी असफलता को अपने और अपने करीबी परिवार में स्वीकार किया। वे कभी भी यह नहीं समझ पाए कि मैं नौकरी क्यों बदल रहा हूँ ? क्योंकि मैंने बस अपने आपसे सही सवाल पूछने के बजाय, फिर से गलत सवाल पूछना जारी रखा। जब तक मैं कुछ और बार विफल नहीं हुआ, तब तक सतह नहीं मिला। ऊपरी तौर पर ये विफलताएं सफलताओं के रूप में दिखाई देती हैं, लेकिन मैं खुश नहीं था, कहीं न कहीं कुछ गलत था। इसमें से कुछ क्रॉनिक डिप्रेशन था, लेकिन बहुत सारे फिर से असफल होने पर घृणा थी। मैं एक अच्छा-खासा दवा कंपनी में कार्यरत था, लेकिन मैंने ऐसा कभी नहीं सोचा था कि यहाँ से इस्तीफा दूंगा। परंतू जब मुझे सही सवाल का पता चला तो मैंने अपनी अच्छी खासी नौकरी छोड़ दी।  

सही सवाल था, ''मेरा जुनून क्या है ?''  जब तक मैं इस सवाल का जबाब नहीं ढूंढ पाया तब तक मैं कुछ और बार विफल हुआ। हां, पूर्णतावादी मानक मेरे अनुभव की सफलता के लिए बाधाएं थे, लेकिन फिर भी, मैंने कभी ऐसा रवैया विकसित नहीं कर पाया। मुझे अंततः यह ज्ञात हुआ कि मैं सीखना चाहता था, सिखाना चाहता था, लिखना चाहता था। इसलिए मैं शिक्षक बन गया और अब मैं एक स्वतंत्र लेखक बन गया और खुद को और अधिक विफलता के लिए खोल दिया। मैंने अभी भी दूसरों को गलत करियर चुनने के लिए कोई रहस्य नहीं दिखाया है। मैं बस आगे बढ़ता रहा और अपनी असफलता को सफलता में बदलने की उम्मीद करता रहा।

कम से कम, मैंने खुद से कहा, मैंने अपनी सबसे कठिन बाधाओं में से एक को साफ कर दिया है। मैं एक लेखन कैरियर में हूँ, एक ऐसा कैरियर जो जुनून को उकसाता है जिसे मैंने लंबे समय अपने से दूर धकेल दिया था क्योंकि यह व्यावहारिक नहीं था। दुर्भाग्य से, जब तक आप दृढ़ नहीं रहते हैं तब तक लेखन विफलता के लिए एक चुंबक का काम करता है। इसलिए दृढ़ता मेरी रूपांतरण तकनीक बन गई, और आखिरकार मुझे कुछ सफलता मिली।

क्या मैंने असफलता से बेहतर तरीके से सामना करना सीखा है? इसका जबाब मेरे पास 'हाँ' है। क्या मैं इसे एक मुस्कान के साथ स्वीकार करता हूं, जैसा कि ऊपर मेरा उपशीर्षक इंगित करता है? तो इसका जबाब है, कभी-कभी मैं करता हूं, कभी-कभी नहीं।

यदि मैंने अपने वर्षों के अनुभव से विफलता के बारे में कुछ भी सीखा है, तो मैंने सीखा है कि धारणा रूपांतरण सूत्र की कुंजी है। यदि आप हमेशा ग्लास को आधा खाली देखते हैं, तो आप हमेशा अपनी आँखों में असफल रहेंगे। आत्मविश्वास और साहस बोध की दो कुंजी हैं। यदि आप मानते हैं कि जब तक आपके पास धक्का देने की ताकत है, तब तक ग्लास भरना जारी रहेगा, तो आप एक सफल व्यक्ति हैं।

इसलिए जब मैं आत्मविश्वास महसूस करता हूं तो मैं असफलता पर अधिक मुस्कुराने लगता हूं। क्या हुआ अगर मैं अपनी उस किताब को नहीं बेच पाता। मैंने अपना श्रेष्ठ प्रयास किया। मेरे अंदर जुनून अभी भी है। मेरा जुनून और उसके लिए मेरी प्रतिबद्धता हमेशा मेरे लिए मेरे इंजन को आगे बढ़ाने के लिए ईंधन पैदा करते हैं। 


हम यह समझते है कि हमारे सफल न होने का कारण लोग, समस्याएँ या परिस्थितियां है| लेकिन दरअसल ऐसा कहकर हम स्वंय को धोखा दे रहे होते है|

असफल कौन नहीं होता, समस्याएँ किनके सामने नहीं आती, आदर्श जीवन में कौन पैदा होता है ??

हर किसी के जीवन में समस्याएँ आती है|

हर व्यक्ति असफल होता है, समस्याएँ हर व्यक्ति के जीवन में होती है| लेकिन फर्क सिर्फ इतना है कि कुछ लोग सकारात्मक नजरिये की वजह से परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानते वे परिस्थितियों और लोगों द्वारा फेंके गई ईटों से एक मजबूत नीवं बना लेते है और प्रयास जारी रखते है|

यह केवल नजरिये का ही फर्क है कि कुछ लोग असफलताओं को उनके सपनों तक पहुँचने की पहली सीढ़ी मानते है और कुछ लोग असफलताओं को उनके सपने टूटने का कारण मानते है|

इस दुनिया में कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं होगा जो कि बिना किसी कठिनाइयों और असफलताओं के सफल हुआ हो|

असफलताओं और कठिनाइओं का उद्देश्य हमारे सपनों को पूरा करना होता है। हम बार-बार यह भूल जाते है कि हमारे भीतर असीम शक्ति है जिसके लिए नामुनकिन कुछ भी नहीं|

अगर जीवन में कठिनाइयाँ और समस्याएँ आ रही हैं तो इसका भी कुछ न कुछ उद्देश्य होता है जिसे हमें आत्मचिंतन द्वारा समझना चाहिए। हमें अपने भीतर झांकना चाहिए और अपनी शक्तियों को जागृत करना चाहिए। 


हमारी समस्या यह नहीं कि हम कठिनाइयों का सामना नहीं कर सकते बल्कि समस्या यह है कि हम अपनी असीमित शक्तियों को नहीं पहचान पाते हैं।