गुरुवार, 4 फ़रवरी 2021

क्या आप मैराथॉन में हिस्सा लेना चाहते हैं?/ क्या आप चुस्त शरीर और सहनशीलता (स्टैमिना) बढ़ाना चाहते हैं ? तो करें ये 4 प्रकार के योगासन। / Do you want to participate in a marathon? / Do you want to increase your body and stamina? So do these 4 types of yoga

 

हम यहाँ पर उन योगासनों के बारे में चर्चा करेंगे जो मैराथॉन रनर्स के लिए अनुकूल हैं। दरअसल, मैराथॉन में भाग लेने वाले लोगों के लिए कुछ खास तरीके के योगासन फायदेमंद होते हैं। इससे, बहुत देर तक दौड़ने के दौरान चोट लगने से बचाव होता है और पेट की मांसपेशियों को मज़बूती मिलती है।

योगासनों का अभ्यास संपूर्ण स्वास्थ्य को बनाये रखने के लिए मददगार होता है। इससे ना केवल मन को शांति मिलती है। बल्कि वजन घटाने के लिए और शारीरिक क्षमता बढ़ाने के लिए भी लाभप्रद होता है। इसी तरह व्यायाम के प्रभाव को भी बढ़ाने के लिए, योगासन मदद करते हैं। मैराथॉन में हिस्सा लेने वाले लोगों के लिए कुछ खास तरीके के योगासन फायदेमंद होते हैं।


मैराथॉन में भाग लेने वाले लोगों के लिए योगासन :


नौकासन  :

इस आसन में शरीर को नाव के आकार में रखना पड़ता है। इससे, शरीर के मध्य भाग और पेट पर असर पड़ता है। इस आसन का अभ्यास करते समय मुद्रा में 8-10 सेकेंड्स तक बने रहने की कोशिश करें। फिर, इसे 5-6 बार दोहराएं। 

कैसे करें नौकासन

इसके लिए स्वच्छ स्थान पर दरी अथवा मैट बिछा लें।इसके बाद पीठ के बल लेट जाएं और अपने दोनों पैर को साथ रखे और हाथों को अपने थाई पर रखें।अब गहरी सांस लें और फिर हाथों को पैरों की तरफ ले जाएं। कुछ पल इस मुद्रा में रहें। इसके बाद पुनः अपनी पहली अवस्था में आ जाएं। इस योग को रोजाना कम से कम 10 बार जरूर करें।नौकासन से होने वाले फायदे निम्न है।

पाचन तंत्र को मजबूत करता है। 

कमर दर्द से आराम मिलता है। 

रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है। 

शरीर की अतिरिक्त चर्बी कम होती है। 


पश्चिमोत्तानासन आसन :





    पश्चिमोत्तानासन दो शब्द मिल कर बना है -‘पश्चिम’ का अर्थ होता है पीछे और ‘उत्तांन’ का अर्थ होता है तानना। इस आसन के दौरान रीढ़ की हड्डी के साथ शरीर का पिछला भाग तन जाता है जिसके कारण इसका नाम पश्चिमोत्तानासन दिया गया है। यह स्वस्थ के लिए बहुत ही ज़्यदा लाभदायक आसन है। यह विभिन्य प्रकार की बिमारियों को दूर करने में मदद करता है।

    पश्चिमोत्तानासन योग देखने में थोड़ा कठिन लगता है। लेकिन धीर धीरे प्रैक्टिस करने पर इसको आप आसानी से कर सकते हैं। यहां पर इसको सरल रूप में कैसे किया जाये उसका विवरण दिया गया है।

    तरीका


    सबसे पहले आप जमीन पर बैठ जाएं। अब आप दोनों पैरों को सामने फैलाएं। पीठ की पेशियों को ढीला छोड़ दें। सांस लेते हुए अपने हाथों को ऊपर लेकर जाएं। फिर सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुके। आप कोशिश करते हैं अपने हाथ से उँगलियों को पकड़ने का और नाक को घुटने से सटाने का। धीरे धीरे सांस लें, फिर धीरे धीरे सांस छोड़े और अपने हिसाब से इस अभ्यास को धारण करें। धीरे धीरे इस की अवधि को बढ़ाते रहे। यह एक चक्र हुआ। इस तरह से आप 3 से 5 चक्र करें।

पश्चिमोत्तानासन के लाभ – 


पश्चिमोत्तानासन योग रीढ़ की हड्डी के लिए: यह आसन मेरुदंड को लचीला बनाता है और हमें बहुत रोगों से दूर करता हैं।
पश्चिमोत्तानासन योग मोटापा कम के लिए: अगर आपको अपनी पेट की चर्बी कम करनी हो तो इस आसन का नियमित अभ्यास करें। यह पेट को कम करने के साथ साथ कमर को पतला करने में भी मदद करता है।
वीर्य सम्बंधित परेशानियों में: यह आसन वीर्य (Semen) सम्बंधित परेशानियों को दूर करता है।
पेट की मांसपेशियों के लिए: इसका नियमित अभ्यास करने से पेट की पेशियां मजबूत होती है जो पाचन से सम्बंधित परेशानियां जैसे कब्ज, अपच को दूर करने में सहायक है।
पश्चिमोत्तानासन त्वचा रोगों की लिए: इस आसन के अभ्यास से त्वचा रोगों को दूर करने में सहायता मिलती है।
साइटिका : यह आसन साइटिका से सम्बंधित रोगों को दूर करता है।
तनाव कम करने के आसन: पश्चिमोत्तानासन का नियमित अभ्यास से तनाव में बहुत हद तक कण्ट्रोल पाया जा सकता है और साथ ही साथ क्रोध को दूर करते हुए मन को शांति एवम प्रसन्न रखता है। इस आसन को करने से गुस्सा नियंत्रित होता हैं|
पथरी के लिए: पश्चिमोत्तानासन के अभ्यास से आप गुर्दे की पथरी को रोक सकते हैं।
एजिंग को धीमा करने वाला योग: इसके अभ्यास से आप उम्र की गति को धीमा कर सकते हैं।
पश्चिमोत्तानासन बवासीर के लिए: यह बवासीर में लाभकारी है।
अनिद्रा रोग में सहायक : यह आसन अनिद्रा रोग में लाभदायक है।
बौनापन दूर करें योग से: पश्चिमोत्तानासन के नियमित अभ्यास से शरीर की हाइट बड़ाई जा सकती है और बौनापन से निजात मि सकती है।
चेहरे पर तेज लाता है : इस आसन के अभ्यास से पुरे शरीर में रक्त का प्रवाह बेहतर हो जाता है जो चेहरे पर तेज लाता है, कमजोरी को दूर करता है। आपको तरोताजा रखते हुए मन को खुश रखता है।
पेट के कीड़े मारने के लिए: पेट के कीड़े मारता है।
महिलाओ के लिए लाभकारी: यह आसन महिलाओ के कई रोगों में भी लाभकारी है और महिलाओ के मासिक धर्म से सम्बन्धित सभी विकार के हल निकालने में कारगर है।

भुजंगासन:

भुजंगासन - भुजंगासन योग की विधि, लाभ और सावधानियाँ,





अंग्रेजी में इसे Cobra Pose कहा जाता है। भुजंगासन फन उठाए हुएँ साँप की भाँति प्रतीत होता है, इसलिए इस आसन का नाम भुजंगासन है। भुजंगासन सूर्यनमस्कार और पद्मसाधना का एक महत्त्वपूर्ण आसान है जो हमारे शरीर के लिए अति लाभकारी है।
यह छाती और कमर की मासपेशियो को लचीला बनाता है और कमर में आये किसी भी तनाव को दूर करता है। मेरुदंड से सम्बंधित रोगियों को अवश्य ही भुजंगासन बहुत लाभकारी साबित होगा।
स्त्रियों में यह गर्भाशय में खून के दौरे को नियंत्रित करने में सहायता करता है। गुर्दे से संबंधित रोगी हो या पेट से संभंधित कोई भी परेशानी, ये आसान सा आसन सभी समस्याओं का हल है।

भुजंगासन करनें की विधि

ज़मीन पर पेट के बल लेट जाएँ, पादांगुली और मस्तक ज़मीन पे सीधा रखें।
पैर एकदम सीधे रखें, पाँव और एड़ियों को भी एकसाथ रखें।
दोनों हाथ, दोनों कंधो के बराबर नीचें रखे तथा दोनों कोहनियों को शरीर के समीप और समानान्तर रखें।
दीर्घ श्वास लेते हुए, धीरे से मस्तक, फिर छाती और बाद में पेट को उठाएँ। नाभि को ज़मीन पे ही रखें।
अब शरीर को ऊपर उठाते हुए, दोनों हाथों का सहारा लेकर, कमर के पीछे की ओर खीचें।
गौर फरमाएँ: दोनों बाजुओं पे एक समान भार बनाए रखें।
सजगता से श्वास लेते हुए, रीड़ के जोड़ को धीरे धीरे और भी अधिक मोड़ते हुए दोनों हाथों को सीधा करें; गर्दन उठाते हुए ऊपर की ओर देखें।
गौर फरमाएँ: क्या आपके हाथ कानों से दूर हैं? अपने कंधों को शिथिल रखेंl आवश्यकता हो तो कोहनियों को मोड़ भी सकते हैं। यथा अवकाश आप अभ्यास ज़ारी रखते हुए, कोहनियों को सीधा रखकर पीठ को और ज़्यादा वक्रता देना सीख सकते हैं।
ध्यान रखें कि आप के पैर अभी तक सीधे ही हैं। हल्की मुस्कान बनाये रखें, दीर्घ श्वास लेते रहें मुस्कुराते भुजंग।
अपनी क्षमतानुसार ही शरीर को तानें, बहुत ज़्यादा मोड़ना हानि प्रद हो सकता हैं।
श्वास छोड़ते हुए प्रथमत: पेट, फिर छाती और बाद में सिर को धीरे से वापस ज़मीन ले आयें।
भुजंगासन में सावधानियाँ
सबसे महत्वपूर्ण बात भुजंगासन या फिर योग का कोई और अन्य आसन भी तो उसे अपनी क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए।
यदि इस आसन को करते वक्त आपको पेट दर्द या शरीर के किसी अन्य शरीर में अधिक दर्द हो तो इस आसन को ना करे।
जिस व्यक्ति को पेट के घाव या आंत की बीमारी है वो इस आसन को करने से पहले चिकित्सक से सलाह ले।
इस आसन का अभ्यास करते वक्त पीछे की तरफ ज्यादा ना झुकें। इससे माँस-‍पेशियों में खिंचाव आ सकता है जिसके चलते बाँहों और कंधों में दर्द पैदा होने की संभावना बढ़ती है।

भुजंगासन से होने वाले लाभ

कंधे और गर्दन को तनाव से मुक्त कराना।
पेट के स्नायुओं को मज़बूत बनाना।
संपूर्ण पीठ और कंधों को पुष्ट करना।
रीढ़ की हड्डी का उपरवाला और मंझला हिस्सा ज़्यादा लचीला बनाना।
थकान और तनाव से मुक्ति पाना।
अस्थमा तथा अन्य श्वास प्रश्वास संबंधी रोगों के लिए अति लाभदायक (जब अस्थमा का दौरा जारी हो तो इस आसन का प्रयोग ना करें)।

सेतुबंधासन :


संस्कृत भाषा में पुल को सेतु कहा जाता है। पुल किसी भी दुर्गम स्थान, नदी के किनारे को जोड़ने का काम करता है। यह आसन हमारे मन और शरीर के बीच तालमेल बनाने में भी मदद करता है।

जैसे एक पुल का काम यातायात और उस पर पड़ने वाले दबाव को सहन करना होता है, वैसे ही यह आसन हमारे शरीर से तनाव को भी दूर और कम करता है।



सेतुबंधासन कैसे करे 

  • सेतुबंधासन करने के लिये चटाई पर पीठ के बल लेट जाएं।
  • अपने घुटनों को मोड़ें।
  • घुटनों और पैरों को सीधी रेखा में रखते हुए दोनों पैरों को एक-दूसरे से थोड़ा गैप रखते हुए फैलाएं।
  • हाथों को शरीर से सटाकर रखें और हाथों की हथिलियो को जमीन पर सटा कर रखे।
  • धीरे-धीरे साँस लेते हुए, अपनी पीठ के निचले, मध्य और ऊपरी हिस्सों को धीरे से जमीन से ऊपर उठाएं।
  • धीरे-धीरे अपने कंधों को अंदर की ओर ले जाएं।
  • अपनी ठोड़ी को हिलाए बिना, अपनी ठोड़ी के साथ अपनी छाती लगाएं और अपने वजन के साथ अपने कंधों, हाथों और पैरों का समर्थन करें। इस दौरान शरीर के निचले भाग को स्थिर रखें और ध्यान रहे की इस दौरान दोनों जांघें एक साथ रहेंगी।
  • यदि आप चाहें तो इस समय के दौरान, आप अपने ऊपरी शरीर को जमीन पर हाथों से दबाकर उठा सकते हैं। आप अपने हाथों से अपनी कमर का सहारा भी ले सकते हैं।
  • साँस छोड़ते हुए आसन को 1-2 मिनट तक करें फिर आसन को समाप्त करे।

सेतुबंधासन के लिए कुछ युक्तियाँ :

यदि आप योग में शुरुआती हैं, तो आपके लिए अपने शरीर को लंबे समय तक इस मुद्रा में रखना आसान नहीं होता, इसलिए जितने समय तक आप आसानी से कर सकते हैं, उतने समय तक ही इस मुद्रा में रहें। 

आप अपने कंधों के नीचे एक मुड़ा हुआ कंबल या तकिया रख सकते हैं।

यदि आपको अपनी पीठ को उठाना मुश्किल लगता है, तो आप समर्थन के रूप में अपने हाथों को अपनी पीठ पर रख सकते हैं। यह आपको लंबे समय तक मुद्रा बनाए रखने में भी मदद कर सकता है।

यदि आप आसन करते समय फिसलते रहते हैं, तो अपने पैरों को एक दीवार के पास रखने की कोशिश करें। ऐसा करने से यह आपके घुटनों का समर्थन करेगा और आपको फिसलने से बचाएगा।

सेतुबंधासन के लाभ : 

सेतुबंधासन के अभ्यास से कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है, आइये जानतें है की सेतुबंधासन के लाभ क्या हैं ?

  • यह पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करता है।
  • यह छाती, गर्दन और रीढ़ को एक अच्छा खिंचाव देता है।
  • यह पेट और शरीर की चर्बी दोनों को हटाने में मदद करता है।
  • यह थायरॉयड ग्रंथि को विनियमित करने में मदद करता है।
  • यह तनाव और डिप्रेशन को कम करने में मदद करता है।
  • यह रक्त परिसंचरण में सुधार करता है।
  • इस योग के नियमित अभ्यास से पाचन में भी सुधार होता है।
  • इस योग के अभ्यास से महिलाओ में मासिक धर्म में लाभ मिलता है।
  • यह पाँव की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है।
  • यह योग मुद्रा गर्दन की मांसपेशियों से वसा को कम करती है।
  • यह फेफड़ों को मजबूत बनाता है जिससे अस्थमा को ठीक होने में मदद मिलती है।
  • यह आपके मस्तिष्क और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को शांत करता है जो तनाव और हल्के अवसाद को कम करने में लाभदायक होता है।

इस आसन से कोर मसल्स पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है। सेतुबंधासन से आपके पैरों के पिछले हिस्से टोनअप होते हैं। जब भी सेतुबंधासन का अभ्यास करें, तो इसकी मुद्रा में रहते हुए आप 5-6 बार सांस ले। बेहतर संतुलन के लिए हिप्स को हवा में जितने ऊंचे ले जा सकते हैं, ले जायें।