शनिवार, 1 मई 2021

जानिए अच्छी सेहत के लिए अच्छी नींद क्यों है जरूरी



आज के भाग-दौड़ भरी जिंदगी के में लोगों की व्यस्तता ज़्यादा है। लोगों के पास समय का अभाव है है। इस आपाधापी में लोगों के पास न तो ठीक से खाने का समय है, न सोने का। एक-दूसरे की नकल करने में, दिखावा करने में, शान दिखाने में जीवन बर्बाद हो रहा है। एक तरफ महंगाई का तांडव है, तो दूसरी तरफ मांगों का तांता लगा हुआ है। लोग तनाव में जी रहे हैं और इसका दुष्परिणाम जीवन के हर क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। रिश्ते टूट रहे हैं, परिवार बिखर रहे हैं। समय का अभाव, धैर्य का अभाव, धन का अभाव, सेहत का अभाव सब मिलकर पूरे जीवन को तबाह कर रहा है।
अच्छी सेहत के लिए जैसे पौष्टिक आहार और व्यायाम की जरुरत होती है उसी तरह नींद की भी जरुरत होती है। अच्छी नींद लेने से हमारा मस्तिष्क अच्छी तरह से काम करता है, हमारा मूड अच्छा होता है, हमारी सेहत अच्छी बनी रहती है।
नियमित रूप से पर्याप्त नींद नहीं लेने से कई बीमारियों और विकारों का खतरा बढ़ जाता है। इनमें हृदय रोग और स्ट्रोक से लेकर मोटापा और मनोभ्रंश तक शामिल हैं। नींद पूरी होने से पूरा दिन आलस्य बना रहता है, हम उबासियां लेते रहते हैं। अच्छी नींद नहीं आने से हमारा फोकस घट जाता है, हमारी उत्पादकता (प्रोडक्टीविटी) कम हो जाती है।
हमें याद रखना चाहिए कि पर्याप्त अच्छी व गुणवत्तापूर्ण नींद हमारे स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य आवश्यकता है। एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत का हर तीसरा वयस्क अनिद्रा का शिकार है। इसलिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि हम ऐसा क्या करें कि हमारी नींद भी पूरी हो जाए और हम जीवन के सभी आवश्यक कार्यों के लिए भी पर्याप्त समय निकाल पायें।


क्या होती है पर्याप्त नींद ?


‘पर्याप्त नींद’ वह है जब आप अगले दिन तरोताजा और सर्तक अनुभव करते हैं। अधिकतर व्यस्कों के लिये यह मात्रा 6-8 घंटे होती है लेकिन बहुत से लोगों के लिये यह 9-10 घंटे होती है, कुछ के लिये यह मात्रा छह घंटे या उससे भी कम होती है। हालांकि अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि जो लोग नियमित रूप से 6-8 घंटे की नींद लेते हैं उनका स्वास्थ्य बेहतर रहता है।
पर्याप्त और गहरी नींद में अगर व्यक्ति पांच घंटे भी सो लेता है तो शरीर को आराम मिल जाता है, और दूसरे दिन सोकर उठने पर तरो ताजा महसूस करता है। दूसरी तरफ यदि हम कच्ची नींद सोते हैं तो भले ही आठ घंटे से ज्यादा भी सोयें तो भी शरीर को आराम नहीं मिलता और दिन भर थकान और सुस्ती बनी रहती है।



स्वस्थ्य और तरोताजा रहने के लिये गहरी नींद बहुत जरूरी है।
उम्र के साथ आपको कितने घंटे नींद की जरूरत होती है?
विशेषज्ञ स्कूली बच्चों को रात में कम से कम नौ घंटे और किशोरों को आठ से 10 घंटे के बीच नींद लेने की सलाह देते हैं। अधिकांश वयस्कों को हर रात कम से कम सात घंटे या अधिक नींद की जरुरत होती है।


नींद को लेकर कई गलतफहमियां हैं। एक सबसे बड़ी ग़लतफ़हमी तो यह है कि अधिक उम्र होने के बाद नींद कम आती है। जबकि यह सच नहीं है बड़े उम्र के लोगों को भी उसी के अनुसार नींद की जरुरत होती है।


नींद के बारे में एक और मिथक है कि आप अपने सप्ताहांत में अन्य दिनों की अपेक्षा लम्बे समय तक सो सकते सकते हैं। जबकि शोधकर्ताओं की राय इससे भिन्न है। शोधकर्ताओं के अनुसार हरदिन एक जैसी ही सोने की क्रिया होनी चाहिए।


राइट कहते हैं, यदि आपकी रात की नींद खराब होती है और आप अगली रात को ज्यादा देर तक सोते हैं, तो इससे आपको फायदा हो सकता है। लेकिन अगर आपके पास एक सप्ताह में बहुत कम नींद लेते हैं, तो सप्ताहांत में आपका जमकर सोना पर्याप्त नहीं है। यह एक स्वस्थ व्यवहार नहीं है।
हाल के ही एक अध्ययन में राइट और उनकी टीम ने लगातार कम नींद वाले लोगों का निरीक्षण किया। उन्होंने उनकी तुलना नींद से वंचित उन लोगों के साथ की जो सप्ताहांत में अधिक सोते थे।
उन्होंने पाया कि दोनों ही समूहों में नींद की कमी के कारण वजन बढ़ गया। उनके शरीर की रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने की क्षमता भी खराब हो गई। सप्ताहांत में नींद लेने से उन्हें मदद नहीं मिली।
ब्राउन कहती हैं, फ्लिप की तरफ, अधिक नींद हमेशा बेहतर नहीं होती है। वह बताती हैं कि वयस्कों के लिए, “यदि आप रात में नौ घंटे से अधिक सो रहे हैं और आप अभी भी तरोताजा महसूस नहीं कर रहे हैं, तो आपको कुछ अंतर्निहित चिकित्सा समस्या हो सकती है।

क्यों जरूरी है नींद

नींद के कई चरण होते हैं। नींद का प्रत्येक चरण यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि मन और शरीर पूरी तरह से विश्राम कर रहे हैं या नहीं।
नींद के कुछ चरण आपको आराम और ऊर्जावान महसूस करने के लिए जरूरी होते हैं, जबकि अन्य चरण आपको जानकारी करने, सीखने और यादें बनाये रखने में सहायता करते हैं।
अपर्याप्त नींद, अल्प अवधि में, सीखने और प्रसंस्करण की जानकारी के साथ समस्याएं बढ़ाती है, और यह स्वास्थ्य और मन-मस्तिष्क पर दीर्घकालिक हानिकारक प्रभाव डाल सकती है।

भरपूर सोएं स्वस्थ रहें

अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि नींद से शरीर के सभी तंत्रों को लाभ पहुंचता है।
शरीर का भार औसत बना रहता है ओर मोटापे से बचाव होता है।
इम्यून तंत्र शक्तिशाली हो जाता है जिससे बीमारियों की चपेट में आने की आशंका कम हो जाती है।
दर्द में आराम, अनुसंधानों में यह बात सामने आई है कि नींद दर्द में दवा का काम करती है इसीलिये कईं दर्द निवारक दवाईयों में थोड़ी मात्रा में अच्छी नींद आने की दवा भी होती है।
पर्याप्त नींद लेने पर मूड बेहतर रहता है। नींद की कमी से भावनात्मक संतुलन प्रभावित होता है।
पर्याप्त नींद लेने वालों की ध्यान-केंद्रन और निर्णय लेने की क्षमता और तर्क-शक्ति बेहतर होती है।
जो लोग पूरी नींद लेते हैं वो उन लोगों की तुलना में अधिक आकर्षक और स्वस्थ दिखते हैं जो पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं।
नींद का समय हमारे शरीर की रिपेयर का समय है। जब हम सो जाते हैं तो हमारा शरीर दिन भर की भागदौड़ के कारण हुए नुकसान की भरपाई करता है, पर यदि इसी समय उसे भोजन पचाने का काम करना पड़े तो शरीर की रिपेयर या तो हो ही नहीं पाती या फिर अधूरी रह जाती है। नियम यह है कि रात का भोजन बहुत हल्का होना चाहिए और रात्रि के विश्राम के समय से कम से कम तीन घंटे पूर्व खा लेना चाहिए। इसका अर्थ यह है कि यदि हम रात को दस बजे सो जाने के आदी हैं तो हमारा रात्रि भोजन शाम 7 बजे तक निपट जाना चाहिए। इसीलिए जैन धर्म में सूर्यास्त से पूर्व डिनर का प्रावधान है। इसके विपरीत सवेरे का नाश्ता भारी हो सकता है क्योंकि उसे पचाने के लिए हमारे पास सारा दिन होता है। हम दिन भर कार्यशील रहते हैं, इधर-उधर आते-जाते रहते हैं उससे खाना पचाने में आसानी होती है। सोते समय हमें यह सुविधा नहीं होती इसलिए रात के खाने का हल्का होना और उसे जल्दी खा लेना अच्छी सेहत के लिए आवश्यक है।

बेहतर नींद लेने के लिए हमें क्या करना चाहिए -

यदि आपको सोने में परेशानी हो रही है, तो कुछ साधारण चीजें अपने दिनचर्या में शामिल करके आप अपनी रात की नींद को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण बना सकते हैं।

1 - सोने का समय - सारिणी बनायें -

अच्छी और गुणवत्तापूर्ण नींद के लिए जरुरी है कि आप अपनी एक समय सारिणी बनायें और उसको फॉलो करें। हर दिन एक ही समय पर बिस्तर पर जाएं और निश्चित समय पर ही जागें। कुछ लोगों की आदत होती है कि हप्ते भर काम करने के बाद सप्ताहांत पर ज्यादा समय तक सोते हैं, लेकिन यह आदत अच्छी नहीं है। हर दिन अपनी दिनचर्या को नियमित रखें।

2 - व्यायाम करें -

हर दिन कुछ न कुछ व्यायाम अवश्य करें। लेकिन ध्यान रखें सोने के समय व्यायाम नहीं करें।

3 - घर से बाहर निकलें

हर दिन कम से कम 30 मिनट के लिए प्राकृतिक धूप लेने की कोशिश करें। इसलिए घर से बाहर निकलें।

4 - निकोटीन और कैफीन का सेवन करने से बचें

निकोटीन और कैफीन दोनों ही उत्तेजक होते हैं जो आपकी नींद को प्रभावित करते हैं। कैफीन का नशा पूरी तरह से उतरने में 6-8 घंटे लग सकते हैं। इसलिए अच्छी नींद के लिए इसके सेवन से परहेज करें।

5 - दोपहर में सोने से परहेज करें

दोपहर में सोने से रात में नींद आने में समस्या पैदा होती है। रात में नींद न आने की वजह से आपकी सेहत ख़राब हो सकती है।

6 - सोने से पहले अधिक भोजन और शराब का सेवन न करें

शुरूआत में तो शराब के सेवन से तुरंत और गहरी नींद आ जाती है लेकिन नियमित रूप से अधिक मात्रा में शराब के सेवन से नींद का पैटर्न गड़बड़ा जाता है। सोने से पहले शराब न पियें और नहीं अधिक मात्रा में भोजन करें। शराब और अधिक भोजन दोनों से ही आपकी गहरी और आराम दायक नींद प्रभावित हो सकती है।

7 इलेक्ट्रानिक गैजेट्स का उपयोग न करें

अच्छी और पूरी नींद के लिए सबसे पहले अपने बेडरूम से टीवी, लैपटॉप, कम्प्यूटर या अन्य मीडिया प्रौद्योगिकी हटाएं। बिस्तर पर जाने से पहले इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स के उपयोग को सीमित करें। उसके बदले में कोई किताब पढ़ें, या आनंददायक संगीत सुनें। इससे आपको अच्छी और गहरी नींद आएगी।

8 -सोने का अच्छा माहौल बनाएं

सोने से पहले यदि संभव हो सके तो बेडरुम का तापमान सामान्य रखने की कोशिश करें। ध्यान रखें सोते समय बेडरुम में किसी प्रकार की आवाज और प्रकाश न हो। अंधेरा कर दें। अपने सेल फोन को साइलेंस करें या बंद रखें ।

9 - फालतू में बिस्तर पर पड़े न रहें

यदि लेटने के बाद 15 - 20 मिनट में आपको नींद नहीं आ रही है तो फालतू में बिस्तर में लेटे न रहें। उठे और कोई आरामदायक गतिविधि करें, जब तक कि आपको फिर से नींद न आए।

यदि कुछ भी उपाय करके नींद की समस्या को हल नहीं कर पा रहे हैं तो अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से सलाह लें।